होम पर वापस जाएं
बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 725 बार

कलयुग का कमीना बाप-6

राकेश सिंह 1999

09 Jul 2020 को प्रकाशित

कलयुग का कमीना बाप-6
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

मेरा मन जाने को नहीं कर रहा था। मैं जैसे ही मुड़ने को हुई पापा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी छाती से चिपका लिया। मैं उनकी छाती में किसी गुड़िया की तरह सिमटती चली गई।

पापा मुझे अपने छाती से चिपकाये हुए मेरी ओर देखने लगे। फिर अचानक अपना चेहरे झुकाकर मेरे होंठों को चूसने लगे।मुझे उनके होंठों का स्पर्श अंदर तक गुदगुदाता चला गया। वो एक हाथ से मेरे बूब्स भी मसलते रहे, फिर मुझसे अलग हुए और जाने को कहा।

जब मैं जाने लगी तो उन्हें मेरी गांड में अपना हाथ घुमाया और मुस्कुराकर मुझे देखने लगे।मैं भी जवाब में मुस्कुरा दी।

लगभग एक घंटे बाद मैं अपने स्कूल पहुंची।

आज मैं बहुत खुश थी… शायद अपने पूरे लाइफ में इतनी खुश कभी न थी जितनी कि आज थी। आज मुझे बरसों पहले खोया हुआ पापा का प्यार मिल गया था। आज मैं पूरे स्कूल में उछलती कूदती रही। मुझे हर पल ऐसा महसूस होता रहा जैसे मैं आकाश में उड़ रही हूँ। मैं आज जब भी किसी से मिलती, पूरे कॉन्फिडेंस से बात करती। मेरे साथ पढ़ने वाली लड़कियाँ मेरे इस बदले हुए रूप से हैरान थी लेकिन मुझे उनकी परवाह नहीं थी।

मैं खुश थी कि अब रोज मुझे पापा का मेरे अच्छे पापा का प्यार मिलेगा। मेरा आज पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगा। बार बार घड़ी देखती रही और घण्टी बजने का इंतज़ार करती रही। आखिरकार वो समय आया, घंटी बजते ही मैं स्कूल से बाहर निकली, मेरा ड्राइवर गाड़ी लेकर आ चुका था, मैं गाड़ी में बैठ कर घर के लिए चल पड़ी, रास्ते भर पापा के ही बारे में सोचती रही।

मैं जब घर पहुंची तो 4 बज रहे थे। मैं जानती थी कि पापा 8 बजे से पहले नहीं आते हैं… फिर भी घर में घुसते ही मेरी नज़रें पापा को ढूँढने लगी। मैं सबसे पहले अपने रूम में गयी, फिर बारी बारी से घर का हर कोना घूमी… लेकिन जब पापा थे ही नहीं तो मिलेंगे कैसे।मैं निराश होकर अपने रूम में जाकर बैठ गयी और पापा का इंतज़ार करने लगी।

लगभग 8 बजे पापा आए। वो जब आये मैं हॉल ही में बैठी थी। पापा को देखते ही उछल कर उनके पास चली गयी और उनसे लिपट गयी। मेरी हरकत पर पापा थोड़ा घबरा भी गये, फिर खुद को सम्भालते हुए मेरे माथे पर एक किस किया और मुझे लेकर सोफ़े पर बैठ गये।

“तुम्हारी मम्मी कहाँ है?” उन्होंने पूछा।“अपने रूम में…” मैंने चहकते हुए जवाब प्रिया।“चिंकी अभी तुम अपने कमरे में जाओ, मैं थोड़ी देर बाद फ्रेश होकर आता हूं।”“ओके…” मैं बोल कर तुरंत अपने रूम में चली गयी।

लगभग एक घंटे बाद पापा आये और मेरे पास बैठ गये, उन्होंने पहले मुझे प्यार से चूमा और फिर बुक निकालने को कहा।मैं पढ़ाई के मूड में बिल्कुल नहीं थी पर मैं पापा को नाराज़ नहीं करना चाहती थी।

कुछ देर पढ़ाने के बाद पापा ने मुझे खींच कर अपने गोद में बिठा लिया और मेरे होंठों को चूसने लगे। उनके होंठों के छुअन से मैं मस्ती में भर गयी। पापा मेरे होंठों को चूसते हुए अपने दोनों हाथों से मेरी गांड सहलाने लगे। वो अपने हाथों से स्कर्ट के ऊपर से ही गांड को दबाने और सहलाने लगे।

मुझे बहुत मजा आ रहा था, “पापा आप बहुत अच्छे हैं.” मैं बड़बड़ायी।“तुम्हें अच्छा लग रहा है?” वो मेरी गांड को दबाते हुए बोले।“हाँ पापा, बहुत अच्छा लग रहा है.”

अब पापा अपना हाथ मेरे टीशर्ट के अंदर डाल के मेरे बूब्स सहलाने लगे, मैंने अपनी आँखें बंद कर ली मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैं भी उनका सहयोग करने लगी। वो मेरे होंठों को चूसते हुए अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल कर घुमाने लगे, मैं भी अपनी जीभ उनके मुंह के अन्दर डालने लगी, पापा मेरी जीभ अपने होंठों में दबा के चूसने लगे।

हम दोनों की गर्म सांसें एक दूसरे के चेहरे से टकराने लगी, कभी मैं उनका जीभ चूसने लगती तो कभी वो मेरा जीभ चूसने लगते।

कुछ देर के बाद पापा अलग हुए और खड़े हो गये तो मैं हैरानी से उन्हें देखने लगी- क्या हुआ पापा?“चिंकी… अभी के लिए इतना बहुत है। अभी तुम्हारी मम्मी जाग रही है… उसके सोने के बाद मैं रात में आउंगा, फिर तुम्हें प्यार करुँगा।”“कुछ देर और रुको न पापा… मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।” मैं मचलती हुई बोली।

मैं पापा से हरदम चिपकी रहना चाहती थी लेकिन पापा मुझे रात में मिलने का वादा करके चले गये।मैं दुखी मन से उठी और दरवाज़ा बंद करके बैठ गयी।

कुछ देर बाद नौकरानी डिनर लगाने के बाद मुझे बुलाने आयी। मैं डिनर करते समय भी पापा को ही देखती रही। डिनर के बाद मैं अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी और पापा के बारे में सोचने लगी कि पापा कितने अच्छे हैं… मुझे कितना प्यार करते है… फिर मम्मी क्यों उनसे लड़ती रहती हैं… जरूर मम्मी ही गलत होगी। वो मुझसे भी ठीक से बात नहीं करती।

मैं यूँ ही मम्मी पापा के बारे में सोचते सोचते सो गई, कितनी देर सोयी रही मुझे याद नहीं।

अचानक किसी के छूने से मेरी आँख खुली तो मैं ख़ुशी से उछल पड़ी… मेरे पापा मेरे बिस्तर पर सिर्फ अंडरवियर पहने लेटे हुए थे और मुझे ही देख रहे थे। मैं उनसे लिपट गयी। पापा मुझे अपने सीने से लगा कर मेरे होंठों को चूमने लगे, मैं भी उनके होंठों को चूमने लगी।

पापा एक हाथ से मेरे स्तन को दबाने लगे और दूसरे हाथ से मेरी गांड सहलाने लगे। मैं नहीं जान पा रही थी कि क्या हो रहा है लेकिन जो भी हो रहा था मुझे बहुत मजा दे रहा था.

मुझे पापा ने अपने ऊपर खींच लिया, मैं उनके ऊपर लेट गई और उनके मुंह के अंदर होंठ डाल के उनका जीभ चूसने लगी। पापा एक से हाथ अभी भी मेरी गांड मसल रहे थे और दूसरे हाथ से मेरे छोटे छोटे बूब्स को दबा रहे थे।

यह भी पढ़ें (Recommended)

Jiju ki kanjusi-16 (Anu ki Zubani)

अचानक उन्होंने दो उँगलियों से मेरी एक निप्पल को दबा प्रिया, मेरे मुंह से आह निकल गयी मेरा पूरा बदन मस्ती से भर गया मेरी कमर के नीचे कुछ पिघलता सा लगा, मेरे पूरे बदन में एक अज़ीब सी मस्ती भर गयी, मेरी कमर खुद ब खुद पापा की कमर से रगड़ खाने लगी। मैं उनसे और ज्यादा चिपकने लगी और अपने बदन को उनके बदन से रगड़ने लगी।

पापा अपना हाथ मेरे गांड से हटा कर मेरी टीशर्ट उठाने लगे, मैंने उनका सहयोग किया और अपना टीशर्ट उतार कर रख प्रिया, अब मैं ऊपर से बिल्कुल नंगी थी क्यूंकि मैंने ब्रा नहीं पहनी थी। मैं फिर से उनके ऊपर लेट गयी और अपने छोटे बूब्स पापा की छाती से रगड़ने लगी और उनके होंठों को चूसने लगी, पापा के दोनों हाथ मेरे कन्धों पर थे वो मेरे कन्धों और पीठ को सहलाते हुए मेरे होंठों को चूस रहे थे।

पापा के दोनों हाथ मेरी पीठ को सहलाते हुए धीरे धीरे नीचे की ओर जा रहे थे मुझे उनके हाथों का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था, मैं भी उनके होंठों को चूसने लगी, पापा ने अपने दोनों हाथों से मेरी स्कर्ट हटा कर और पेंटी को सरका कर जांघों तक कर प्रिया। फिर मेरे दोनों नितम्बो को दबाने और मसलने लगे।

मैं पूरी तरह से खुद को उनके हवाले कर चुकी थी, मुझे कुछ भी होश नहीं था, मैं एक नए सुख के सागर में डुबती जा रही थी।

अचानक पापा ने अपनी एक उंगली मेरी गांड के छेद में घुसाने लगे, एक हाथ से उन्होंने मेरे गांड के छेद को फ़ैलाया और दूसरे हाथ की उंगली उसमें डालने लगे, अभी आधी उंगली ही मेरी गांड के अंदर गयी थी और मेरे मुंह से आह निकल गयी।“दर्द हुआ क्या बेटी?” पापा अपनी उंगली को रोकते हुए बोले।“नहीं पापा… अच्छा लग रहा है, पूरी उंगली घुसाइये ना!” मेरे कहने के साथ ही पापा उठ कर बैठ गये।

फिर उन्होंने मेरी स्कर्ट और पेंटी मेरे शरीर से उतार कर अपनी जवान बेटी को पूरी नंगी कर प्रिया। मुझे नंगी करने के बाद पापा अपने कपड़े भी उतारने लगे, थोड़ी ही देर में वो भी नंगे हो गये।

उन्होंने फिर से मुझे अपने ऊपर खींच कर लिटा लिया और फिर से मेरी गांड में उंगली घुसाने लगे. इस बार उनकी पूरी उंगली मेरी गांड में घुस चुकी थी मेरी गांड एकदम टाइट हो गयी थी। पापा धीरे धीरे अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगे, उनकी उंगली के अंदर बाहर होने से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरे मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी।

पापा दूसरा हाथ मेरी चूत पे ले गए और सहलाने लगे, पापा का लंड खड़ा होकर मेरी जांघों से रगड़ खाने लगा। पापा बड़े आराम आराम से मेरी गांड में उंगली करते रहे और मेरी चूत सहलाते रहे. कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी चूत से कुछ बह रहा है, मैं बुरी तरह से तड़पने लगी, मैंने अपनी कमर से पापा का हाथ हटा प्रिया और पापा का लंड अपने चूत के नीचे रख कर अपनी चूत उनके लंड से रगड़ने लगी।

मैं पूरी तरह से जल रही थी मुझे पहले कभी ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ था.

कुछ देर बाद पापा उठकर बैठ गये, मैं भी उठ कर बैठ गयी, उन्होंने मुझे बिस्तर पर खड़ा कर प्रिया और मेरे क़रीब आकर मुझे कमर से थाम लिया, उनके हाथ मेरे दोनों नितम्बों पर थे और उनका चेहरा मेरी चूत के पास… अचानक पापा अपनी जीभ निकल कर मेरी चूत को चाटने लगे, मेरी चूत में अभी तक झांटें नहीं आई थी, वो अपनी जीभ को नीचे से लेकर ऊपर तक घुमाने लगे.उनके ऐसा करने से मेरी चूत की खुजली और बढ़ गयी, मैंने अपनी टांगें और चौड़ी कर दी और पापा का सर अपनी चूत पर दबाने लगी। पापा की जीभ मेरी चूत के छेद पर घूम रही थी। मेरे मुंह से आहें निकलनी शुरू हो गयी।

अचानक पापा ने अपना चेहरा हटा लिए और मुझे बेड पर बिठा दिए फिर अपना लंड मेरे चेहरे के पास ले आए- इसे हाथ में पकड़ के सहलाओ चिंकी… अच्छा लगेगा!मैंने दोनों हाथों से पापा का लंड पकड़ लिया। उनका लंड इतना बड़ा था कि मेरे दोनों हाथों में नहीं समा रहा था.

पापा ने कहा- चिंकी, इसे मुंह में लो!मैंने बिना देर किये अपना चेहरा झुका कर अपने होंठों को लंड के सुपारे से सटा प्रिया। मैं धीरे धीरे अपने होंठों को सुपारे से रगड़ने लगी, दो मिनट बाद मैंने अपना मुंह खोला और उनका लंड अंदर ले लिया। लंड मोटा होने की वजह से सिर्फ सुपारा ही अंदर जा पाया था। मैं उनके सुपारे को मुंह में भर कर चूसने लगी. पापा ने अपना हाथ धीरे से मेरे सर पर रख प्रिया और मेरे बालों को सहलाने लगे और दूसरे हाथ से मेरी चूचियों को मसलने लगे।

मुझे उनके लंड का स्वाद बड़ा ही अज़ीब लग रहा था पर मुंह में लेकर चूसने में अच्छा भी लग रहा था।

पापा धीरे धीरे मेरा सर अपने लंड पर दबाने लगे, अब उनका आधा लंड मेरे मुंह के अंदर था, उनका लंड मेरे गले तक पहुँच गया था।

मैं कुछ देर शांत पड़ी रही तो पापा ने कहा- चिंकी, अपना मुंह लंड के ऊपर नीचे करो!मैं अपना मुंह ऊपर नीचे करके पापा का लंड चूसने लगी। दो मिनट बाद पापा के मुंह से आह आह आवाज़ निकलनी शुरू हो गयी, मैंने अपना मुंह बाहर खींच लिया।“क्या हुआ? आपको दर्द हुआ क्या?” मैं डरती हुई बोली।वो बोले- नहीं तुम चूसती रहो, मुझे अच्छा लग रहा है!

मैंने फिर से अपना मुंह खोला और पापा का लंड अंदर ले लिया और चूसने लगी।

लगभग 15 मिनट के बाद पापा ज़ोर ज़ोर से आहें भरने लगे और फिर अचानक उनके लंड से एक जोर की पिचकारी निकली और मेरा पूरा मुंह उनके वीर्य से भर गया। मैं झट से अपना मुंह बाहर खींच लेना चाहती थी लेकिन पापा ने ज़ोर से मेरा सर अपने लंड पर दबा प्रिया और पूरा वीर्य निकालने के बाद ही अपना हाथ हटाया।

मेरा पूरा मुंह गीला हो गया था आधा वीर्य तो मेरे पेट के अंदर चला गया था। मैंने अपना चेहरा उठा कर पापा से कहा- यह क्या पापा… आपने मेरा मुंह गन्दा कर प्रिया?पापा ने कहा- चिंकी इसे पी जाओ, यह सेहत के लिए अच्छा होता है!मैं पापा का सारा वीर्य पी गयी और फिर से चेहरा झुका कर पापा के लंड को चाटने लगी। उनका लंड पूरा साफ़ करने के बाद मैंने अपना चेहरा ऊपर उठाया और पापा को देखा, उनके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे।

मैं उनके करीब जाकर उनके होठों को किस करने लगी, उन्होंने मुझे अपनी जांघों पे बिठाया और मुझे किस करने लगे और अपना एक हाथ अपनी बेटी चूत पर रख कर चूत सहलाने लगे।

कहानी जारी रहेगी।मेरी यह सेक्स कहानी आपको कैसी लग रही है?आप मुझे मेल करके अवश्य बतायें.मेरा ईमेल है support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Jiju ki kanjusi-16 (Anu ki Zubani)
बाप बेटी की चुदाई

Jiju ki kanjusi-16 (Anu ki Zubani)

Hello readers, pichli story mein aapne padha ki main apne papa ke sath fully mood mein thi, aur hum chudai ki kagaar pe the. Papa ko mere muh mein apna lund dekar mujhko mouth fuck karna tha, jiske liye wo khade ho gaye mere aage. Fir main apne gh...

14 मिनट 566
Mai bani apne baap ki rakhail-17
बाप बेटी की चुदाई

Mai bani apne baap ki rakhail-17

Hi doston, papa se raat ko chudai ke baad ki subha maano mera poora badan toot raha tha. Dopahar ke 1 baj chuke the, magar mujhse bed mein se utha nahi jaa raha tha. Mere face par thappad ke daag the, aur face sooj bhi gaya tha. Meri gaand bhi bil...

10 मिनट 1,048
Beti Ki Chadhti Jawani Aur Kuvari Chut
बाप बेटी की चुदाई

Beti Ki Chadhti Jawani Aur Kuvari Chut

Hi dosto, aaj main aap sabko meri pariwarik chudai ke bare main batunga. Meri family me hum 3 log hai.

8 मिनट 449

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।