नौकर-नौकरानी

चुदक्कड़ परिवार-1

लेखक: root दिनांक: 06-07-2012 पठन समय: 6 मिनट

प्रेषक : जैक डॉबिन्स

इस कहानी को मैं कई भागों में लिखूंगा और आपका मनोरंजन करूंगा। आपसे अनुरोध है कि अपने विचार जरूर दीजिएगा।

विजय अग्रवाल सुबह का अखबार पढ़ रहे थे, सामने मेज़ पर गर्म चाय की प्याली रखी हुई थी, वो चाय की चुस्की के साथ साथ अखबार भी पढ़ रहे थे।

तभी उनके कानों में आवाज आई- सर, आपका फोन !

उन्होंने अखबार से नजर उठाई, सामने सफेद शर्ट, काली पैन्ट में उनका नौकर खड़ा था।

“किसका फोन है कपिल?”

कपिल- सर, सुरेश सर का फोन है।

विजय- इस वक्त? इतनी सुबह?

… हैलो, हाँ सुरेश ! बोलो, इतनी सुबह-सुबह? क्या हो गया भई?

विजय बात करते हुए- अच्छा अच्छा ! हम्म ! यह कब की बात है? … फिर तुमने क्या किया? … चलो अभी कुछ भी करने की जरुरत नहीं है, मैं आता हूँ थोड़ी देर में और जब तक मैं न पहुँचु, तुम लोग कुछ मत करना ! समझे न?

यह कह कर विजय ने फोन रख प्रिया और वहीं मेज़ पर अखबार रखते हुए उठ खड़ा हुआ और कपिल से पूछा- मेमसाब कहाँ हैं?

कपिल ने जवाब प्रिया- सर, वो मार्निंग-वॉक के लिए गई हैं।

विजय ने कहा- ठीक है, वो आ जाएँ तो उन्हें बता देना कि मैं किसी जरूरी काम से जा रहा हूँ, लौटने में थोड़ी देर हो जाएगी।

यह कह कर विजय अपने कमरे की ओर चले गए और तैयार होने लगे …

कपिल ने पूछा- साहब, नाश्ता लगाऊँ?

विजय ने जवाब प्रिया- नहीं, मैं बाहर ही कर लूँगा, तुम गाड़ी निकलवाओ।

विजय अपने आलीशान चेम्बर में बैठे थे, सामने एक बड़ी सी मेज रखी थी, एक तरफ़ लैपटॉप खुला हुआ था और वो उस पर बड़े गौर से कुछ पढ़ रहे थे। सामने की कुर्सी पर सुरेश बैठे थे और बगल में सीमा खड़ी थी। सीमा विजय की सेक्रेटरी थी, गोरी, गदराया बदन, बड़ी-बड़ी चूचियाँ उसके टॉप से बाहर आने को तरस रही थी और उसने बिल्कुल कसा हुआ मिनी-स्कर्ट पहना हुआ था, जिसमें से उसकी गाण्ड साफ दिख रही थी।

विजय ने अपनी नजरों को लैपटॉप से हटाया और सुरेश की तरफ देखते हुए बोले- सुरेश ये सब क्या है ?… इतना बड़ा घपला तुम्हारी नाक के नीचे चलता रहा और तुम्हें पता तक नहीं चला? तुम्हें पता है सुरेश कि कितने का घपला है यह?

सुरेश- हाँ सर, पता है ! पूरे डेढ़ सौ करोड़ का मामला है यह !

विजय ने मेज पर हाथ पटकते हुए कहा- मुझे जल्द से जल्द इसकी पूरी रिपोर्ट चाहिए, कौन-कौन इसमे शामिल है, वो सब ! जितनी जल्दी हो सके पता करो सुरेश।

सुरेश- ज….जी सर ! आप चिन्ता न करें !

विजय- (गुस्से में) चिन्ता न करूं? इतना सब-कुछ होने के बाद भी चिन्ता न करूँ? मैं वो सब नहीं जानता, मुझे सच्चाई जाननी है, जो भी करना है करो … और हाँ यह बात मीडिया में नहीं जानी चाहिए सुरेश ! समझ गए? अब तुम जा सकते हो !

विजय- सीमा, मेंरे लिए एक सैंडविच और कॉफी भिजवाओ।

सीमा- यस सर ! अभी भिजवाती हूँ …

कहते हुए सीमा भी बाहर चली गई।

विजय की बीवी लक्ष्मी घर लौटती है :

कपिल ! कपिल ! विजय कहाँ है?

कपिल तेज कदमों के साथ आता है और अदब के साथ खड़ा होकर जवाब देता है- मैडम, साहब के पास सुरेश साहब का जरूरी फोन आया था तो वो ऑफिस चले गए हैं।

लक्ष्मी- साहब ने कुछ खाया या नहीं?

कपिल- नहीं मैडम, साहब ने कहा कि वो बाहर ही खा लेंगे।

लक्ष्मी- अच्छा, ऐसी भी क्या इमरजेंसी थी उन्हें? … साहब से बात करवाना मेरी !

कपिल- जी मैडम, अभी फ़ोन लगाता हूँ।

लक्ष्मी- विजय, तुम कहाँ हो यार? इतनी सुबह ऑफिस में क्या कर रहे हो?

अचानक लक्ष्मी चिन्तित दिखने लगी और कहा- ठीक है, लेकिन ज्यादा परेशान मत होना तुम।

लक्ष्मी अपने कमरे में चली गई अपने कमरे में पहुँचकर उसने कपिल को आवाज लगाई।

कपिल अब लक्ष्मी के कमरे में था।

लक्ष्मी ने कहा- मेरी मालिश की मेज़ तैयार करो, मैं आती हूँ अभी कपड़े बदल कर !

कपिल वहाँ से दूसरे कमरे में चला गया।

थोड़ी देर में वहाँ लक्ष्मी भी पहुँच गई, उसने गाउन पहन रखा था। सामने मालिश की मेज़ थी और मेज़ के एक तरफ़ तेल और क्रीम की कई शीशियाँ रखी थी। कपिल वहीं पास में सिर्फ एक छोटे सी हाफपैंन्ट पहने खड़ा था। गठीला सांवला बदन था, कपिल की उम्र यही कोई 23 की रही होगी।

लक्ष्मी ने अपने गाउन की नॉट को खोल प्रिया और सिर्फ काले रंग की पैंटी में वहाँ से मेज़ की ओर बढ़ गई।

लक्ष्मी- कपिल, पूरा बदन टूट रहा है ! आज जरा बढ़िया मालिश करना मेरी !

कपिल- जी मैडम… इससे पहले कभी शिकायत का मौका प्रिया है कभी आपको? आप बिल्कुल बेफिक्र रहें ! एन्ड जस्ट रिलेक्स।

लक्ष्मी पेट के बल लेट गई..

बगल से उसकी चूची साफ झलक रही थी और गोरे जिस्म पर उसकी काली पैंटी बहुत सेक्सी लग रही थी। गाण्ड काफी मुलायम और उभरी हुई थी …

कपिल एकदम ललचाई हुई नजरों से उसे देख रहा था।

कपिल ने अपने हथेली में थोडा ऑलिव-आयल लिया और हल्के-हल्के कंधों की मालिश करने लगा। मालिश करते करते वो लक्ष्मी की पीठ पर पहुँच गया और बडे प्यार से पूरी पीठ की मालिश करने लगा। मालिश करते करते उसकी उंगलियाँ बगल से लक्ष्मी की चूचियों को स्पर्श करने लगी। जैसे ही बगल से कपिल ने चूचियों को छुआ, मस्ती से लक्ष्मी की आँखें बंद होने लगी।

कपिल समझ गया था कि मैडम अब मस्त हो रही हैं !

वो धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा। अब वो लक्ष्मी की कमर की मालिश कर रहा था, कभी कभी उसके हाथ लक्ष्मी की पैंटी की इलास्टिक को भी छू जाते थे।

कपिल ने धीरे से मालिश करते करते लक्ष्मी की पैंटी को थोड़ा नीचे सरका प्रिया। अब उसकी आँखों के सामने लक्ष्मी की गाण्ड की दरार साफ दिखाई दे रही थी…

कहानी जारी रहेगी।