होम पर वापस जाएं
चुदाई की कहानी पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 581 बार

मेरी और मेरी कामवाली की चुदास-4

पूनम चोपड़ा

17 Feb 2021 को प्रकाशित

मेरी और मेरी कामवाली की चुदास-4
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

अब तक इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा कि मेरी कामवाली चिंकी मेरे भाई के साले संजय के लंड से चुद चुकी थी और अब मुझे भी संजय के मोटे लंड से चुदने का मन था तो हम दोनों उससे किस किस तरह चुदा जाए, इसकी प्लानिंग बनाने लगे.अब आगे..

उसको मैंने समझाया कि तुम उसको मेल करो कि जब दीदी घर पर नहीं होतीं तब तुम यहाँ आ करो मुझे चोदो. उससे कहना कि वो तो सारा दिन ऑफिस रहती हैं, इसलिए पूरे दिन में जब भी उसे मौका मिले तो वो आए.उसने हामी भर दी.

इसके आगे क्या करना है, मैंने उसे पूरी तरह से समझा प्रिया.

उसने मेरे सामने ही उसको मेल किया.‘मेरी चूत के बादशाह.. चूत की तुम्हारे लंड को सलाम. उधर तुम्हारा लंड खड़ा रोता है, इधर मेरी चूत गीली हो कर रोती है. हमें इस काम के लिए एक दूसरे से मिलने का टाइम नहीं मिल पाता. मैं तुमको एक रास्ता बताती हूँ. वंदना दीदी सुबह ऑफिस चली जाती हैं और मैं घर पर ही रहती हूँ. वो शाम तो 7 बजे से पहले कभी वापिस नहीं आती हैं. इसलिए तुम इस समय का इस्तेमाल करो, जिससे तुम्हारा लंड और मेरी चूत दोनों ही खुशियां मना सकें. मेल का जवाब जितनी जल्दी ही उतनी जल्दी देना.’

मेल को गए अभी 5 मिनट भी नहीं हुए थे कि उसका जवाब आ गया कि वाओ क्या बात बताई है.. मुझे मेरी खोपड़ी में यह बात पहले क्यों नहीं समझ में आई. तुम सही में मेरे लंड की मलिका हो. मैं कल ही दोपहर 12 बजे से लेकर 5 बजे तक अपने लंड को कहूँगा कि वो तुम्हारी चूत की सेवा में हाज़िर हो जाए. बाकी बातें मिल कर करेंगे.

जवाब पढ़ कर मैंने उससे कहा- तुम दोनों 1 बजे के आस पास पूरे नंगे होकर बेडरूम में होना और दरवाजा अन्दर से लॉक कर लेना. मैं आकर बाहर से अपने आप लॉक खोल कर सीडे बेडरूम में चली आऊंगी और दरवाजा इतने धीरे से खोलूँगी कि किसी को आवाज़ नहीं आएगी. तब मैं तुम्हें और संजय तो डांटते हुए कहूँगी कि यह सब क्या है.. मेरे घर को रंडी खाना बनाया हुआ है. तुम पूरा नाटक करना कि दीदी माफ़ कर दो, बहुत बड़ी ग़लती हो गई है.. तुम बस बार बार यही बोलती रहना. आगे क्या करना है.. मैं उस समय के हिसाब से बोलूँगी मगर तुम चिंता ना करना.. तुम्हें कुछ नहीं होगा.

अगले दिन मैं ऑफिस से छुट्टी ले कर 1 बजे के आस पास घर वापिस आ गई. मैंने धीरे से दरवाजा खोला और ध्यान से सुना कि बेडरूम से चिंकी के चुदने की आवाजें आ रही थीं- आह.. मज़ा आ रहा है.. और ज़ोर से करो!मैंने झट से दरवाजा खोल प्रिया. संजय को नहीं पता लगा कि दरवाजा खुल गया है मगर चिंकी से देख लिया था.

वो बोली- धीरे करो यार.. अगर वंदना दीदी आ गईं तो क्या होगा?संजय चिंकी को चोदते हुए बोला- अगर उसने कुछ कहा.. तो उसको भी चोद दूँगा.चिंकी फिर से बोली- छोड़ो मुझे.. दीदी आ गई हैं.संजय को यकीन नहीं था, इसलिए उसने बोला- चिंकी चुपचाप चुदवा.. मुझे वंदना की याद ना दिलाओ.. उसे देख कर मेरा लंड एकदम से खड़ा हो जाता है. वो तो मस्त माल है.

मैंने उन दोनों की चुदाई करते हुए की दो तीन पिक्चर कैमरे में रिकॉर्ड कर लीं.

संजय चिंकी को पेलते हुए कहे जा रहा था- मगर क्या करूँ.. वो नहीं मिली तो तेरी चूत ही सही.. मगर उसका नाम ले कर मुझे डरा मत.चिंकी फिर से बोली- ज़रा पीछे मुड़ कर तो देखो.संजय ने जब मुड़ कर देखा तो उसके पसीने छूटने लगे.

मैंने उससे कहा- ये सब क्या हो रहा है.. रंडी खाना बना रखा है.. और क्या कह रहे थे कि मैं मस्त माल हूँ. मेरे दिल में आपके लिए बहुत इज्जत थी और आप मुझे मस्त माल समझते रहे. मेरे घर को रंडीखाना बना प्रिया है. पता नहीं कब से यह चल रहा है. शर्म आती है मुझे तुम दोनों पर. जिस थाली में खाया उसी में छेद कर प्रिया. मैं आज ही भैया से कहती हूँ कि आपका साला यहाँ पर क्या क्या करता है और भाभी से भी कहती हूँ कि ज़रा आओ और देखो इसकी करतूत को. साथ में मैं तुम दोनों की एक अभी ली हुई पिक्चर भी भेज दूँगी.

अब तो संजय की फट गई थी और मुझसे माफी माँगने की बारी आ गई थी. वो बोला- सॉरी मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गई.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.मैंने कहा- मैं तो मस्त माल हूँ ना. तुम्हारे ख्याल से तुम्हारी बहन की ननद माल है, तो फिर तुम्हारी बहन हमारी क्या हुई.. ज़रा यह भी बता दो?उसने कहा- मुझसे बड़ी गफ़लत हो गई है आपको आगे से कभी ऐसा मौका नहीं मिलेगा.

मैंने नरम होते हुए कहा- मगर आपने मुझे मस्त माल क्यों कहा.. यह तो बताओ.. अगर सच सच बताओगे तो मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी.उसने कहा- जब मैं यहाँ आया था तो आप एक नाइटी में थीं और उसमें सब आपका सब कुछ दिख रहा था. उसी को याद करके मैंने आप को मस्त माल कह प्रिया, जिसके लिए मैं समझता हूँ कि मुझसे ग़लती हो गई है.मैंने कहा- क्या तुमने मेरा सब कुछ देखा था?वो बोला- आप सब समझती हैं.मैंने कहा- नहीं.. मैं तुमसे सुनना चाहती हूँ.

वो बोला- फिर मुझे बहुत गंदे शब्द बोलने पड़ेंगे.मैंने कहा- ठीक है बोलो.. मैं सुनूँगी.उसने कहा कि आपके मम्मे और उन पर आपकी गुलाबी घुन्डियां और नीचे सेपूरी साफ की हुई चूत.. मेरा सब देखा हुआ है.मैं- ओह हो.. तो यह बात है. जनाब नज़र मुझ पर रखते हैं.. और चुदाई चिंकी की करते हैं. सुन लिया चिंकी.. अगर नहीं सुना तो बोलूं इसको कि दुबारा से बोले.

चिंकी ने कुछ नहीं कहा. अब तक दोनों सकते में थे. उन्हें अब होश आया कि दोनों ही पूरे नंगे हैं. वो जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगे तो मैंने उनसे कपड़ों को छीन कर दूर फेंक प्रिया और बोली- अब क्या छुपा रहे.. मैंने तो सब कुछ देख लिया है और पिक्चर भी ले ली है.. ये देखो.अब संजय बहुत डर गया और बोला- लगता है आपने मुझे माफ़ नहीं किया.. आप बोलिए तो मैं आपके आगे अपनी नाक रगड़ देता हूँ मगर प्लीज़ यह पिक्चर डिलीट कर दो.मैंने कहा- इतनी जल्दी क्या है.. इसे तो मैं अपनी मेल आइडी पर भी भेज चुकी हूँ ताकि अगर तू ज़बरदस्ती इसे डिलीट कर भी दे तो भी मेरे पास बनी रहे.

वो बोला- आपके घर पर इतने दिन रहा हूँ क्या आपने यही मुझे समझ पाया है. मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूँ.मैंने कहा- हां तभी तो मस्त माल हूँ मैं.. आपकी नज़रों में.. वाह इसी को इज्जत कहते हो.. तो मैं बाज आई ऐसी इज्जत से.वो अब हथियार डालते हुए बोला- जो दंड देना है.. मुझको दे लो.. मगर इसमें चिंकी का कोई कसूर नहीं है. मैं आपके हर एक दंड को स्वीकार करूँगा.मैंने कहा- ठीक है फिर तुम दोनों एक बार मेरे सामने फिर से चुदाई करो.संजय बोला- यह कैसा मज़ाक है?मैंने कहा- मज़ाक नहीं.. यह दंड है. मैं तुम्हारे सामने तुम्हारी पिक्चर डिलीट कर देती हूँ और मैंने कोई मेल भी कहीं पर नहीं की.

मेरी बात सुन कर दोनों नॉर्मल हो गए और अगले कुछ पलों में संजय का लंड फिर से चिंकी की चूत को सलामी मारने लग गया. मेरे सामने दोनों ने मिल कर ज़ोरदार चुदाई की.

मैंने संजय से कहा- तुम्हारा मस्त माल भी इस लंड को टेस्ट करना चाहता है. मगर शर्त यह होगी कि तुम मुझे चोदने से पहले प्रॉमिस करो कि तुम मेरी भाभी के भाई हो और मुझे मेरी भाभी की भाभी बनाओगे.उसकी समझ में नहीं आया कि मैंने उससे क्या कहा है.

जब उसकी समझ में आया तो बोला- ठीक है मगर मैं जब तक अपनी बहन को इसके लिए राज़ी ना कर लूँ.. मैं आपके साथ कुछ नहीं कर सकता. मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से मेरी बहन की शादीशुदा जिंदगी में कोई तूफान आए. मैं उससे पूछे बिना कुछ नहीं कह सकता.मैंने कहा- मंजूर है.. आज आपने जो कहा है, उससे मेरे दिल में आपकी बहुत इज्जत बढ़ गई है. अब मैं आपसे तभी बात करूँगी जब मुझे मेरे भाई और भाभी से उनकी रज़ामंदी मिलेगी. हां मगर मैं तुम दोनों के रास्ते में रोड़ा भी नहीं बनूंगी. तुम जो चाहो करो क्योंकि अभी तुम पर मेरा कोई अधिकार नहीं है.

यह कह कर मैं वहाँ से वापिस ऑफिस चली आई. अब मुझे लगता था कि चिंकी और संजय की चुदाई चलती रहती होगी. मगर मुझे चिंकी अब ज़्यादा चिंता थी कि कहीं वो किसी मुसीबत में ना फँस जाए.रात को मैंने उससे पूछा कि तुम लोग जब चुदाई करते हो तो कोई सावधानी बरतते हो?उसने कहा- दीदी कई बार नहीं बरती थी.

मैंने कहा- सुनो चिंकी कभी भी किसी लंड पर विश्वास ना करना.. वो चाहे 101 कसमें भी क्यों न खाए. उसका लंड चूत में लेने से पहले उस पर रबर चढ़वा लेना और साथ में खुद भी बचाव के लिए गोली खा लेना. कहीं रबर अन्दर जा कर फट ना जाए. कई बार यह फट भी जाता है और माँ बनने का पूरा डर बना रहता है.उसने कहा- आगे से पूरा ख्याल रखूँगी दीदी. मगर अब संजय मुझसे नहीं मिलता है.

मैं चुप रही तो उसने फिर कहा- दीदी, संजय भी अब नहीं आता. उस दिन के बाद एक बार आया था और बिना चुदाई किए ही चला गया था और जाते वक्त बोला था कि चिंकी तुम किसी अच्छे लड़के से शादी कर लो, मैं तुम्हारे साथ पूरी जिंदगी नहीं रह सकता. अच्छा होगा कि तुम मेरे साथ चुदाई की बिताई हुई घड़ियां एक हसीन सपना समझ कर भूल जाओ. वैसे तुम्हारी दीदी बहुत समझदार है, उससे सलाह मशवरा करके ही कोई कदम उठाना.. मैं तुम्हारी दीदी की नज़रों में बहुत गिर चुका हूँ.. अब और नहीं गिरना चाहता.

यह सुन कर मुझे दिल में बहुत खुशी हुई कि संजय सच में मुझे चाहता है. फिर मैंने उसे समझाया कि तुम जब किसी से चुदने का विचार बनाओ तो उसे पहले इस नज़र से देखना कि क्या वो तुम्हारा साथ उस वक्त देगा, जब कभी तुम पर कोई मुसीबत आए या भाग जाएगा. मेरे से पूछो तो तुम अपने लिए कोई ऐसे लंड तलाशो, जो तुम्हारे साथ शादी करके हमेशा के लिए तुम्हें अपनी चूत बना कर रखे.. ना कि तुम्हें बाज़ारू चूत समझे, जिसे रंडी भी कहा जाता है.

ये कहने के साथ ही मैंने ये समझ लिया कि मेरी बात संजय को दिल पर लग गई है. मुझे नहीं पता था कि उसने अपनी बहन से बात की या नहीं की, मगर कुछ दिनों बाद मुझे मेरे भाई का फोन आया. उन्होंने कहा- मैं एक मेल भेज रहा हूँ उसका जवाब सोच समझ कर देना. जल्दबाज़ी में कोई फैसला ना लेना.

मैंने मेल बॉक्स खोल कर देखा तो उसमें भाई ने मुझसे पूछा था कि तुम्हारी भाभी तुम्हें अपनी भाभी बनाना चाहती है. संजय को तो तुम जानती हो ना.. पसंद न हो तो साफ़ साफ़ कह देना अगर पसंद हो तो बहुत सोच समझ कर जवाब देना.मैंने जवाब प्रिया कि भैया वो बहुत अच्छा लड़का है, मगर मैं नहीं जानती कि वो मुझे पसंद करता हैं या नहीं. मगर एक बात बताती हूँ कि अगर आप कोई लड़का मेरे लिए देखोगे तो भी उस जैसे नहीं मिल पाएगा. अगर आप लोगों को वो पसंद है, तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं.

दो तीन दिनों बाद मुझे मेरी भाभी का फोन आया और उन्होंने पूछा- क्या मैं तुम्हें अपनी भाभी अब बोल सकती हूँ?मैंने कहा- मैं क्या कह सकती हूँ. आप जो चाहे मुझको बोल सकती हैं, मैं आप से छोटी हूँ और आपका हुक्म मानना ही पड़ेगा.तब भाभी बोली- ओ मेरी प्यारी भाभी.. तुम नहीं जानती कि तुमने अपनी भाभी के दिल से कितना बड़ा बोझ उतार प्रिया है. मेरा भाई तो शादी के लिए तैयार ही नहीं होता था. मगर पता नहीं जब से उसने तुम्हें देखा है, उसका पूरा ही मन बदल गया है. मैं तो डर रही थी कि कहीं तुम इन्कार ना कर दो. अबसे तुम मेरी भाभी हुईं.. मगर मैं तुमसे बड़ी हूँ इसलिए भाभी जी नहीं कहूँगी.. सिर्फ भाभी ही कहूँगी.

मैंने कहा- मैं आपके लिए वही वंदना हूँ और वही वंदना रहूँगी भाभीजी.“ठीक है वंदना भाभी.. मेरी प्यारी भाभी!”

अगले दिन संजय का फोन आया और बोला- मुझे आपसे सुनना है, जो मुझे मेरी बहन ने बताया है.मैंने कहा- फोन पर ही सुनोगे या मिल कर पूछना चाहोगे?उसने कहा- जैसा आपको अच्छा लगे. मगर मैं आपके घर पर नहीं आ पाऊंगा क्योंकि मैं अब चिंकी से नज़रें नहीं मिला सकता. आप कल शाम को मुझे डॉमिनो पिज़्ज़ा हट पर मिलो, तो मैं अपने को खुशकिस्मत मानूँगा.मैंने कहा- ठीक है.

अब मुझे एक काम करना था, वो था चिंकी को पूरी तरह से किसी के साथ सेटल करवाना.

वासना और प्यार से परिपूर्ण यह हिंदी सेक्स कहानी आपको कैसी लग रही है, प्लीज़ मुझे मेल करेंsupport@mohakkisse.comकहानी जारी है.

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मेरी और मेरी कामवाली की चुदास

कुल भाग: 6
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

स्वीमिंग पूल बना मस्ती पूल-2
चुदाई की कहानी

स्वीमिंग पूल बना मस्ती पूल-2

कहानी के पहले भाग में आपने पढ़ा कि एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट विकास जो तैराकी में भी चैंपियन था, उसे नॉएडा के बड़े अस्पताल में जॉब मिली. एक स्विमिंग पूल वाली सोसाइटी में उसने एक फ़्लैट किराये पर ले लिया. सोसाइटी की भाभियों ने उससे तैराकी सीखने की जिद की.अब आगे:

12 मिनट 558
तीसरी न्यूज़ एंकर की चुदाई- 1
चुदाई की कहानी

तीसरी न्यूज़ एंकर की चुदाई- 1

मेरी पिछली इंडियन सेलिब्रिटी सेक्स स्टोरीएक और टीवी एंकर की चुदाईमें टीवी न्यूज़ की दूसरी एंकर गुड्डी रानी की कैसे चुदाई की गयी उसका विस्तार से वर्णन किया था.

13 मिनट 659
गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार सेक्स
चुदाई की कहानी

गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार सेक्स

यह बात उस वक़्त की है, जब मैं बीए फाइनल इयर में था. मेरे घर के थोड़ी दूरी पर मेरी एक फ्रेंड रहती थी, जिसका नाम अदिति (बदला हुआ नाम) था. हम दोनों करीब 4 साल से बहुत अच्छे दोस्त थे और करीब दिन भर व्हाट्सऐप पर बात किया करते थे. पूरा दिन उससे बात करने म...

12 मिनट 1,334

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

सेक्सी जाट

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।