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लेस्बीयन सेक्स स्टोरीज पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 361 बार

खेल खेल में चूत लन्ड का मज़ा

शिल्पा अग्रवाल

08 Nov 2010 को प्रकाशित

खेल खेल में चूत लन्ड का मज़ा
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मेरी कहानी आज से 4 वर्ष पहले की है.. मेरे घर के बगल में 3 बहनें रहती थीं उस समय उन तीनों की उम्र उनके नाम के साथ लिख रहा हूँ..

रूचि- 18 सालरचना- 19 साल औररितिका- 20 साल

मैं 18 साल का हूँ और मेरा नाम अमित है।हम लोग आपस में खूब लुका-छिपी का खेल खेलते थे।

एक दिन हम चारों घर में थे और उस वक्त घर में कोई नहीं था, मैंने देखा कि रूचि बाथरूम जा रही है.. बाथरूम मेरे घर की दूसरी मंजिल पर था।रूचि मुझसे बोली- प्लीज.. मेरे साथ ऊपर चलो.. मुझको बाथरूम जाना है।मैं उसके साथ ऊपर चला गया और वो बाथरूम में चली गई।

हमारे बाथरूम के दरवाजे में छेद थे। मैंने देखा कि ऊपर कोई नहीं है तो मैंने अपनी आँख एक छेद में लगा दी तो देखा कि रूचि पूरी नंगी होकर टॉयलेट की सीट पर बैठी है और अपने छोटी-छोटी मस्त चूचियों को मसल रही है। उसके निप्पल गुलाबी थे, उसकी चूत पर भूरे बाल थे। उसकी चूत खूब फ़ूली हुई थी, रूचि की चूत के बीच में छोटा सा गुलाबी दाना दिख रहा था।सब कुछ इतना मस्त था कि मेरे लण्ड को मज़ा आने लगा और वो धीरे-धीरे मोटा और खड़ा होने लगा और पूरा 7 इंच का हो गया।मैंने उसको बाहर निकाला और बाथरूम के छेद से देख-देख कर अपना लौड़ा हिलाने में मस्त हो गया।बार बार मेरा मन कर रहा था कि बाथरूम के अन्दर चला जाऊँ.. पर एक डर लग रहा था।

मैंने देखा कि रूचि अब हाथ धो रही थी, उसकी दोनों चूचियाँ पूरी सख्त थीं और उन पर गुलाबी निपल्स भी एकदम कड़े दिख रहे थे।दो मिनट तक उसने अपने दोनों निपल्स मसले और कपड़े पहनने लगी।फिर मैं और रूचि नीचे आ गए।

नीचे आकर मैंने रितिका के कान में कहा- रूचि बाथरूम में पता नहीं अपने चूचियों से क्या क्या कर रही थी।तो रितिका बोली- वो तो हम तीनों एक साथ मिल कर करती हैं।मैंने पूछा- कैसे?तो वो बोली- चलो.. मैं बताती हूँ।

फिर हम चारों एक कमरे के अन्दर आ गए।रितिका बोली- आज नया खेल शुरू करते हैं।‘कैसा खेल?’ मेरे मुँह से निकला।रितिका ने बोला- मैंने सुना है कि लड़के लोगों की ‘सुसू’ लम्बी सी होती है। आज हम लोग मिल कर एक-दूसरे की सुसू देखते हैं।

हम सभी राजी हो गए।

फिर रचना.. जो स्कर्ट और ब्लाउज में थी.. उसको रितिका ने बिस्तर पर लिटाया और उसका पहले स्कर्ट उतारा.. तो उसकी सफ़ेद पैंटी दिखने लगी, फिर रितिका ने उसका ब्लाउज उतारा।अब रचना सफ़ेद ब्रा और पैंटी में मस्त दिखने लगी। उसकी 32 साइज़ की मस्त चूचियाँ थीं.. जो ब्रा के अन्दर पूरी सख्त थीं।

रितिका मुझसे बोली- अमित तुम बिस्तर पर लेटो..

मैं लेट गया।फिर रितिका ने मेरा शॉर्ट्स उतारा और बनियान को भी निकाल प्रिया।

उसके बाद मैंने रितिका को बिस्तर पर अपने बाजू में लिटा लिया। उसने सलवार कुर्ता पहना था। सबसे पहले मैंने उसका कुर्ता उतारा और फिर सलवार निकाल दी। अन्दर 34 साइज़ की ब्रा में उसकी चूची मस्त लग रही थीं.. उसकी पैंटी पिंक थी।

उसके बाद रूचि भी पैंटी और ब्रा में हो गई। मेरा मस्त लण्ड कड़क और टाइट हो गया और अंडरवियर में से उभरा हुआ दिखने लगा।

तो रूचि बोली- अमित तुम्हारी सूसू अंडरवियर के अन्दर कैसी सी दिख रही है.. इसको क्या हो गया?तो मैंने बोला- ये जब नंगी लड़कियों को देखता है.. तो ऐसा ही कड़क हो जाता है।

फिर मैंने रितिका को बोला- बिस्तर पर लेट कर तू भी अपनी चूत दिखा न..तो बोली- मुझको शर्म आती है।मैं बोला- अच्छा पहले मेरा देखो..और मैंने अपना अंडरवियर उतारा और मेरा 7 इंच का मस्त लण्ड बाहर निकल आया।

उसको उत्तेजित अवस्था में देख कर तीनों ही हैरान रह गईं और एक बोली- क्या ये ही चूत में जाता है?मैंने कहा- छूकर देखो।

सबसे छोटी वाली रूचि.. जो कि 18 साल की थी.. वो बोली- हम लोग की सूसू तो छेद की तरह होती है। तुम्हारी तो लम्बी और खूब मोटी सी है।तीनों लड़कियाँ मेरा लण्ड खूब ध्यान से देख रही थीं।वो तीनों बोलीं- आज पहली बार किसी लड़के का लण्ड देखा है।

तभी रूचि ने मेरा लण्ड अपने मुलायम हाथ से पकड़ा और बोली- ये तो बहुत गरम और कड़ा है।तो रचना और रितिका आगे को आईं और उन दोनों ने भी लौड़ा पकड़ कर देखा और उसको सहलाने लगीं।

तीनों ने पूछा- ये कभी-कभी मुलायम और कभी कड़ा कैसे हो जाता है। हम लोगों ने तो आज तक छोटे लड़कों का सूसू देखा है.. वो तो जरा सा ही होता है।

फिर मैंने तीनों से पूछा- क्या तुमको मालूम है कि ये लण्ड तुम लोगों की चूत के छेद के अन्दर पूरा चला जाता है?तो तीनों बोलीं- हाँ हम सब सहेलियां आपस में बात करते हैं.. पर इतना मोटा और 7 इंच लम्बा जरा से छेद के अन्दर कैसे जाता होगा? जब कि हम लोगों की एक उंगली भी ठीक से पूरी नहीं जाती।मैंने कहा- कहो तो डाल कर दिखाऊँ?वे सब एक स्वर में बोलीं- हाँ दिखाओ।

दरअसल हम सब चुदास की आग में जल रहे थे और सभी जानते थे कि ये खेल कैसे खेला जाता था बस अभी तक किसी ने इस खेल को खेला नहीं था तो आज सब के मन में इसको खेल को खेलने की इच्छा थी।

फिर मैंने रूचि को बिस्तर पर लिटाया और मैंने कहा- अब तुम तीनों अपनी चूची और चूत दोनों दिखाओ।

इस बात पर सबसे पहले मैंने रूचि को पूरी नंगी किया.. उसकी दोनों चूचियाँ पूरी कड़क हो गई थीं और चूत तो इतनी मस्त और गुलाबी थी कि मेरा लण्ड खूब टाइट होता जा रहा था।इतने में रितिका ने रूचि का निप्पल मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।

रूचि को इतनी अधिक मस्ती चढ़ी कि उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया। मैंने भी उसकी चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर प्रिया।

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