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जवान लड़की पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 597 बार

खिलता बदन मचलती जवानी और मेरी बेकरारी -1

अर्षित मिश्रा

06 Aug 2015 को प्रकाशित

खिलता बदन मचलती जवानी और मेरी बेकरारी -1
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मेरा नाम अर्शित है.. मैं 23 साल का हूँ। मैं बहुत सालों से यहाँ कहानियां पढ़ता आ रहा हूँ। अपनी आपबीती बताने का कई बार मेरा मन हुआ.. फिर कुछ सोच कर रुक जाता था.. पर आज आप सबके सामने मैं बताने जा रहा हूँ।

मैंने अब तक तीन लड़कियों को प्यार किया है.. मैं तीनों के बारे में बताऊँगा.. पर पहले दूसरे प्यार के बारे में बताने जा रहा हूँ।यहीं से मुझे ऐसे काम में थोड़ी हिम्मत मिली।

बात उस टाइम की है.. जब मैं पढ़ता था और किशोर अवस्था में था, मेरे घर में दादा-दादी.. पापा-मम्मी और एक भाई हैं।मेरे गाँव में भी एक घर है.. जहाँ दादा-दादी कभी-कभी चले जाते थे। पापा उन्हें लेने गए थे.. और कुछ ही दिनों में वो आने वाले थे।

एक दिन सुबह ट्रेन से वो आ गए पर उनके साथ एक लड़की भी थी। जो मेरी दादी के रिश्ते में होती थी।जब मैंने पढ़ने जाते हुए उसे देखा.. वो एक काली.. पतली सी लड़की थी। मेरे मुँह से निकल गया- काली-पीली चुहिया..

मैं पढ़ने चला गया.. पर दोस्तो, शहर आते ही उसका रंग निखर गया और जिस्म भी भर गया। उसके गाल गुलाबी और होंठ भी थोड़े लाल हो गए.. उसके बाल.. उसके गाल.. उसकी कमर.. हे भगवान वो एकदम पटाखा बन गई थी, वो अब बहुत हसीन दिखने लगी थी।

जब एक दिन वो नहाने के बाद बाहर आई.. तो उसके छोटे तंग हो चुके सूट के दबाव से उसके निप्पल ऊपर से बाहर महसूस होने लगे थे। जब मैंने उसके निप्पलों को देखा.. तो मैं देखता ही रह गया, मेरा मन किया कि मैं आगे जा कर उसके निप्पल को छू लूँ.. पर तभी उसने मुझे देख लिया और अपना दुपट्टा ठीक कर लिया।मैं भी डर गया था।

उस दिन के बाद मैं बस उसके निप्पल के बारे में ही सोचता रहता था कि कैसे मैं बस एक बार उसे चूस सकूँ।

उसके नए और भरे-भरे शरीर को उसके पुराने कपड़े ठीक से नहीं ढंक पा रहे थे। उसके बड़े-बड़े मम्मे चुस्त होते कपड़ों में एकदम दब से जाते और उसके सूट के गहरे गले से बाहर झाँकने लगे थे। उसकी वो बल खाती कमर की कटिंग.. आह्ह.. दोस्तों उसको देखने के बाद ऐसा लगता था कि भगवान ने उसके जिस्म को बहुत प्यार और सफाई से बनाया है। लोग कहते हैं.. शराब पीने से नशा होता है.. मैं तो उसे देख कर नशे में आ जाता था।

कुछ दिन बाद त्यौहार था.. दादा जी ने किसी को बुलाया था.. जो भाँग बनाते थे। उन्होंने सबके लिए घर में ठंडाई भी बनवाई.. पर मैंने नहीं पी.. दादा जी ने थोड़ी भाँग बाद में खाने के लिए रख ली थी.. जो रिया ने देख लिया था।उसने मेरे भाई को मना कर दोनों के लिए उस भाँग के गोले से थोड़ी सी निकाल ली और दोनों ने खा ली।

यह तब पता चला जब भाई ने मम्मी को कहा- मम्मी पकड़ो मुझे.. मैं उड़ जाऊँगा.. और रिया ने भी कहा कि उसे चक्कर आ रहे हैं। तब मम्मी ने उसको दही खिला कर सुला दिया।

तब हम किराए पर रहते थे.. तो दो रूम एक किचन और बाथरूम था.. पर सब छोटे-छोटे थे। अन्दर के कमरे में एक दीवान.. और उसके सामने सोफा था। दीवान के बगल में फोल्डिंग पलंग पर रिया सोती थी। जो सोफे से जुड़ कर बिछती थी.. क्योंकि दीवान के बराबर में अलमारी थी।

उस रात टीवी पर कोई प्रोग्राम आ रहा था.. तो मैं सोफे पर लेट कर देख रहा था।अचानक मैंने देखा कि रिया ने नींद में अपने हाथ रज़ाई से बाहर निकाले.. शायद उसे गर्मी सी लगी और फिर अन्दर कर लिया।अब उसका चेहरा और थोड़ा सा हाथ रज़ाई से बाहर आ गया था।

मैंने उसके हाथ को कवर करने की सोची। तभी मुझे याद आया कि अब भी वो नशे में होगी। मैं एक बार उसके दूध छू लेता हूँ।मैंने उठ कर देखा कि दीवान पर मम्मी और भाई सो रहे थे.. मैंने थोड़ी हिम्म्त की और धीरे से अपना हाथ पहले उसके नर्म गालों पर रखे.. फिर फिसलते हुए गले पर ले गया और दोबारा थोड़ा सा उठ कर ये देखने लगा कि रिया जागी तो नहीं.. और साथ ही में एक बार मम्मी को भी देखा।

सब ठीक लगा.. तो मैं अपना हाथ और अन्दर ले जाने लगा.. पर रिया ऐसे सोए थी कि मेरे हाथ को आगे जाने की जगह ही नहीं मिली।

बस थोड़ा सा सीना ही उसके दूध मान कर सहला लिया और हाथ निकाल लिया। मैं टीवी देखने लगा.. अचानक उसने फिर अपना हाथ निकाला.. पर इस बार अन्दर नहीं किया।वो नींद में थी.. तो मैंने ही उसके हाथ को अन्दर डालना चाहा।मैंने जब रज़ाई उठा कर हाथ अन्दर किया.. तो देखा अब रिया सीना चौड़ा करके सोई थी।

टीवी की कम रोशनी में भी उसके मम्मों इतने चमक रहे थे कि मेरी आँखें रोशन हो गई। मैंने एक और कोशिश करने की सोची। फिर से एक बार दुबारा मम्मी को देखा और अपना हाथ वैसे ही ले जाने लगा। मैंने उसके सूट के ऊपर से ही उसके मम्मों को हल्का सा सहलाया.. फिर धीरे-धीरे मम्मों को थोड़ा दबाना शुरू किया।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि जाने कौन सी मजेदार चीज मेरे हाथ लग गई थी। उसका सूट टाइट था.. मैं ठीक से मम्मों को हाथ में नहीं ले पाया.. बस अपने हाथ से उसके मम्मों को दबाता रहा।मेऱा दिल बहुत जोरों से धड़कने लगा था।मैंने काफ़ी देर तक उसके मम्मों को दबाया था.. क्योंकि मुझे पता था.. कि आज के बाद ऐसा मौका नहीं मिलेगा।

तभी अचानक रिया हिली.. तो मैंने हिलना बंद कर दिया। मैं बिना हिले-डुले चुपचाप पड़ा रहा और जैसे ही वो स्थिर हुई.. मैं आहिस्ते से अपना हाथ बाहर निकालने लगा। मैं उसके चेहरे तक ही आया था कि रिया ने मेरी एक उंगली दाँत में पकड़ी और तुरंत हाथ बढ़ा कर मेरा हाथ पकड़ लिया।

मैं बुरी तरह से चौंक गया.. पर तभी कहीं वो मम्मी को ये सब बता ना दे.. ये सोच कर मैंने डर के मारे अपना हाथ बाहर खींच लिया।

कुछ पल वो रजाई में हिलती रही.. मैं बुरी तरह से डर गया था.. पर तभी उसने रज़ाई से बस अपनी हथेली निकाली और फोल्डिंग पलंग के ऊपर हल्के से पटकी। मैंने ध्यान दिया तो ऐसा लगा मानो वो मेरा हाथ माँग रही हो।

थोड़ी देर बाद मैंने सोचा कि रिया शायद भांग के नशे में ऐसा कर रही थी।

मैंने मम्मी को फिर से देखा और लेट कर अपना हाथ उसकी हथेली में रख दिया। उसने मेरे हाथ को अन्दर रज़ाई में खींचा और सीधे अपने मम्मों पर ले गई।मैं जब इस बार उसके मम्मों को दबाने लगा.. तो मुझे उसके मम्मों पर उसका सूट नहीं बल्कि उसकी ब्रा मिली.. जाने कब और कैसे उसने सूट हटा लिया था।

तभी मेरा अच्छा टाइम ख़त्म हो गया.. दीवान पर हरकत देख कर मैंने हाथ खींच लिया।मम्मी उठीं और उन्होंने पूछा- क्या कर रहा है चल सो जा।मैंने कहा- बस अभी सो रहा हूँ.. यह शो ख़त्म ही होने वाला है।

थोड़ी देर बाद जब मुझे यकीन हो गया कि मम्मी को कुछ नहीं पता चला.. तो टीवी बंद किया और एक बार फिर से उसके पास गया.. रज़ाई हटाई और अंधेरे में ही उसके गालों को चूमा और सोने के लिए दीवान पर आ गया।

अगले दिन सभी का नशा उतरा.. पर मैं अब भी कल रात के नशे में रह-रह कर मुस्कुरा रहा था। अब एक किशोर वय के लड़के को और क्या चाहिए।

पापा का शिफ्ट में काम होता है। वे एक हफ्ते दिन में और अगले हफ्ते रात की शिफ्ट में ड्यूटी करते थे।

मम्मी-पापा सुबह-शाम सैर पर जाते थे, अगले रात भी गए। मैं और मेरा भाई सोया था.. पर रिया फोल्डिंग पर थी।आज रिया थोड़ा बदली-बदली सी लग रही थी। मेरे सर में कुछ दर्द सा था.. तो मैं टाइगर बाम लगाने लगा।रिया अचानक मेरे पास आई और मेरे हाथ से बाम लेने लगी।मैंने जब गुस्सा दिखाया तो उसने कहा- मेरी कमर में भी दर्द है.. लगाना है।

दोस्तों मैं अपने जीवन की एकदम सत्य घटना लिख रहा हूँ.. इसमें कहीं कोई तिल मात्र भी झूठ नहीं लिखा है.. इस घटना के विषय में आप सभी से गुजारिश है कि अपने विचार मुझे ईमेल जरूर कीजिएगा।support@mohakkisse.comघटनाक्रम जारी है।

कहानी का अगला भाग :खिलता बदन मचलती जवानी और मेरी बेकरारी-2

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खिलता बदन मचलती जवानी और मेरी बेकरारी

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

आर्णव 1

1 week ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

लाला मलिक

1 week ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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