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Group Sex Story पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 878 बार

किरायेदार ने दोस्तों से मिल कर मुझे चोद डाला-1

वरिन्द्र सिंह

11 May 2023 को प्रकाशित

किरायेदार ने दोस्तों से मिल कर मुझे चोद डाला-1
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अभी आप मेरी एक मित्र की नई कहानी पढ़ कर मज़ा लीजिये।

मेरा नाम सविता ठाकुर है और मैं फिलहाल दिल्ली में रह रही हूँ, पर पीछे हम ग्वालियर से हैं, ग्वालियर और शिवपुरी के बीच हमारा गाँव है, जहां मेरी पति की पुश्तैनी ज़मीन जायेदाद है। अक्सर वो अपनी ज़मीन की देखभाल के लिए गाँव जाते रहते हैं। वैसे तो वहाँ कोई खास फसल नहीं होती, मगर चना और सोयाबीन हो जाता है।इसके अलावा मेरे पति गाँव के प्रधान भी हैं।मेरी उम्र इस वक़्त 42 साल है और मेरी एक 23 साल की बेटी भी है जो दिल्ली में पढ़ रही है।

यह बात तब की है जब मेरी बेटी स्कूल में पढ़ती थी और हमारे गाँव में कोई अच्छा स्कूल न होने की वजह से हम लोग ग्वालियर में आकर रहने लगे। यहाँ मेरे पति के एक दोस्त का मकान था, जो बरसों से खाली पड़ा था। घर के बीच में बड़ा सा आँगन और चारों तरफ कमरे।

मैंने गाँव से आकर इस घर को अच्छे से साफ करके सजाया। मगर दिक्कत यह थी कि मुखिया होने के कारण मेरे पति को अक्सर गाँव में ही रहना पड़ता था, जिस वजह से मैं और मेरी बस दो औरतें ही घर में रह जाती थी। मुझे अक्सर डर भी लगता था कि अगर रात बरात कोई आ गया, तो हम दोनों माँ बेटी क्या करेंगी। धन माल तो वो लूटेंगे ही, हम माँ बेटी को भी कहाँ छोड़ेंगे, बल्कि हमें तो पहले लूटेंगे।

मैंने बहुत बार अपने पति से कहा भी कि रात को सही समय पर घर आ जाया करो!मगर कहाँ … उनके पिछवाड़े में तो प्रधानगी घुसी हुई थी, वो या तो लेट आते और कभी कभी तो आते ही नहीं, वहीं अपने गाँव वाले घर में ही रुक जाते।

मुझे समस्या यह आने लगी कि एक तो अपने और अपनी बेटी के लिए डर लगता, और दूसरी बात … शादीशुदा होकर रात को अकेले सोना किसे अच्छा लगता है। मैं रातों को तड़पती, आधी आधी रात को उठ कर नहाने जाती, मगर जो आग जिस्म के अंदर लगी हो वो बाहर से पानी डालने से कैसे बुझती।

फिर एक दिन हमारे एक जानकार हमारे घर आए, उनके साथ एक नौजवान लड़का भी था, 25-26 साल का होगा।उन्होंने कहा- ये सतबीर है, हमारी पहचान का है, बहुत ही सीधा और शरीफ लड़का है, यहाँ पर ही एक फैक्टरी में काम करता है, इसके रहने का कोई इंतजाम नहीं है, बेचारा कितने दिनों से रेलवे स्टेशन पर सो रहा है।

मैंने प्रधानजी (मेरे पति) से बात करी तो वो बोले- हमारे घर में ही बहुत से कमरे खाली पड़े हैं, एक इसे दे देते हैं, और घर की रखवाली भी हो जाएगी।अब जब पति ने ही इजाज़त दे दी हो तो मैं कैसे मना कर सकती थी। जबकि मैं नहीं चाहती थी कि कोई गैर मर्द हमारे घर आ कर रहे, मेरी बेटी भी जवान हो रही थी, देखने में वो पूरी जवान लगती थी, चाहे आज शादी कर दो।अब क्योंकि मैं भी बदन से भरी हूँ, और मेरे पति भी खूब लंबे चौड़े हैं, तो बच्चों पर भी माँ बाप का असर पड़ता है, इसलिए मेरी कमसिन बेटी 20-22 की जवान लड़की को मात देती थी।

मैं अपनी बात करूँ तो मेरे बदन पर भी जवानी टूट कर आई थी। 40 साइज़ की तो मेरे ब्रा आती है, और फिर नीचे बड़ा सा पेट, और उसके नीचे खूब बड़े बड़े चूतड़, 42 कमर, मोटी जांघें। बिस्तर पर नंगी हो कर लेटती हूँ तो पति कहते हैं कि पूरा बिस्तर भर देती हूँ। गोरा रंग और खूबसूरत चेहरा, किसी का भी दिल ललचा दे, ईमान डुला दे।

सतबीर ने भी बैठे बैठे कई बार मुझे नज़र भर के देखा। मगर वो पतला दुबला सा नौजवान, मुझे लगा कि ये क्या कर सकता है, इसे तो मैं अकेली ही दबा लूँ। मैंने उसे कह प्रिया कि अपना सामान ले आए।

अगले दिन वो भी अपना समान ले आया और मेरे पति भी आए, मैंने अपने पति से भी गिला किया कि आपने मुझसे पूछे बिना मकान किराए पर दे प्रिया, और वो भी एक नौजवान लड़के को, अपने घर में भी जवान लड़की है।मगर पति ने मुझसे कहा- अरे ये भी अपना ही बच्चा है, बल्कि अपनी पहचान का कोई हो तो घर की रखवाली भी रहेगी, मैं तो अब प्रधानगी के काम से अक्सर बाहर ही रहता हूँ, तो घर में कोई मर्द भी तो होना चाहिए।

और मेरी बात बीच में ही रह गई क्योंकि पतिदेव 3-4 दिन बाद घर आए थे, और बस उन्होंने मुझे बेड पे धक्का दे प्रिया। मैं भी 3-4 दिन से उनके इंतज़ार में चुदासी हुई पड़ी थी, तो मैंने भी झट पट अपने कपड़े उतारे और उनका लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। फिर उन्होंने मुझे जम कर पेला, मेरी प्यासी आत्मा को तृप्त कर प्रिया। उस रात हमने दो बार सेक्स किया, वो दो बार झड़े, मैं तो 3-4 बार झड़ी।

खैर सतबीर से मुझे कोई खास दिक्कत नहीं थी, वो दिन में तो बाहर ही रहता, कभी कभार उस से बात होती थी।लड़का था तो शरीफ, मगर अक्सर वो मुझे और मेरी बेटी को घूरता था, मैं देख रही थी कि उसकी आँखों में मेरे और मेरी बेटी दोनों के लिए एक जैसे हवस थी कि जो भी पट जाए, उसको चोद डालूँ, मगर उसके हल्के बदन को देख कर मेरी चूत कभी खड़ी नहीं हुई।अब आप कहोगे कि ये क्या बात हुई, चूत भी कभी खड़ी होती है, खड़ा तो लंड होता है।

आपको बता दूँ कि जब मैं पूरी गर्म होती हूँ, तब मेरी चूत की भगनासा, वो जो चूत के बीच में जो आगे को बाहर निकला हुआ मांस होता है न, वो सख्त हो जाता है, और आगे को उभर आता है। मेरे पति ही कहते हैं, मेरा लंड खड़ा हो गया और तेरी चूत खड़ी हो गई। मेरे पति अक्सर इस खड़ी हुई चूत को अपने मुँह में लेकर चूसते हैं जैसे मैं उनके लंड की अपनेमुँह से चुदाईकरती हूँ, वैसे ही वो मेरी चूत की इस भागनासा को अपने मुँह में लेकर आगे पीछे करते हैं; और सच जानिए इसी से मेरा स्खलन सबसे जल्दी होता है।

अब आगे चलते हैं।सतबीर को हमारे घर में किराये पर रहते एक महीने से ऊपर हो गया था, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था।

एक रात मैं पेशाब करने उठी, और जब पेशाब करके अपने कमरे की ओर जा रही थी, तब मुझे सतबीर के कमरे में से रोशनी और आवाज़ सुनाई दी। मुझे लगा कि शायद फोन पे अपने गाँव बात कर रहा होगा, मगर जब एक लड़की के हंसने की आवाज आई तो मैं चौंक पड़ी।ये क्या … क्या सतबीर कोई लड़की लाया है अपने कमरे में?

मैं चुपके से उसके कमरे के पास गई और खिड़की से अंदर देखने की कोशिश की, अंदर का नज़ारा तो बहुत ही गर्म था, सतबीर अपने बिस्तर पर बिल्कुल नंगा बैठा था, और एक नंगी लड़की उकड़ूँ हुई उसका लंड चूस रही थी।सतबीर के पतले दुबले जिस्म के मुक़ाबले उसका लंड बहुत ही ज़बरदस्त था, मोटा भी और लंबा भी। वो पहली बार था जब मुझे सतबीर का लंड देख कर उसे छूने की चाहत हुई। मैं वहाँ खड़ी देखती रही.

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पहले तो उस लड़की ने सतबीर का लंड चूसा और फिर उस पर कोंडोम चढ़ाया, फिर जब सतबीर ने अपना लंड उस लड़की की चूत में डाला तो बोला- आह मेरी जान सविता, ले अपने यार का लंड अपनी चूत में ले, चुद साली, खोल चूत अपनी और अपने यार का लंड खा जा हरामज़ादी, साली कुतिया, पूरा लंड ले अपनी चूत में … ले ले साली ले, और ले, और ले!वो बोलता जा रहा था और इधर मेरी चूत में पानी आने लगा।

सच कहूँ तो मुँह में भी और चूत में भी दोनों जगह पानी पानी हो गया। मैं सोचने लगी अगर ये सतबीर मुझे चोदे तो क्या ऐसे ही ताबड़तोड़ चोदेगा। मैं तो जैसे वहीं जम गई, मेरा एक हाथ मेरे मम्मे पे और दूसरा हाथ मेरी नाईटी ऊपर उठा कर मेरी चूत पे जा पहुंचा.मैं उसे देखते रही उस रंडी को चोदते हुए और अपनी चूत को भी सहलाती रही।

मगर तभी मुझे आस पास का भी ख्याल आया, अगर मेरी बेटी उठ कर आ गई तो?बस मैं वहीं से वापिस मुड़ आई और अपने कमरे में आकर लेट गई। दूसरे बिस्तर पर मेरी बेटी सो रही थी, मगर मेरी आँखों से नींद कोसों दूर थी। मैं बेचैन थी, कभी इधर करवट, कभी उधर करवट।

फिर मैंने अपनी टांगें ऊपर उठाई तो मेरी नाईटी नीचे गिर गई। मेरी भरपूर मोटी, गदराई हुई टाँगें देख कर मैं सोचने लगी कि जितना मांस मेरी एक टांग पर है, उतना तो सतबीर के सारे बदन पर भी नहीं होगा शायद। पर अगर वो इस वक्त मेरी इन दोनों टाँगों के बीच में आकर खड़ा हो जाए और अपना लंड मेरी चूत में पेल दे, तो क्या मैं उसे रोक पाऊँगी।नहीं, मैं नहीं रोकूँगी उसे … बल्कि अपनी टाँगें खोल दूँगी, और मैंने अपनी टांगें फैला दी।

“आ रे मेरे प्यारे सतबीर आ और अपनी मालकिन को चोद दे, पेल इस प्यासी औरत को!” सोचते हुये मैंने फिर से अपने हाथ से अपनी चूत को सहलाया, चिकनी, बाल रहित चूत, अंदर से गीली, किसी मर्दाना लंड की राह में आँखें बिछाए।और मैं अपनी चूत में उंगली करने लगी, पर नहीं यार मज़ा नहीं आ रहा था, उंगली तो बहुत पतली है और सतबीर का लंड, वाह क्या लंड है। मुझे चाहिए, मुझे सतबीर का ही लंड चाहिए।

और मैं फिर से उठी और सतबीर के कमरे की तरफ चुपके से गई, मैंने देखा अंदर दोनों नंगे लेटे थे, शायद एक बार वो कर चुके थे। मैं कुछ देर उन दोनों को देखती रही। सतबीर का ढीला लंड लटक रहा था। वो शायद सो चुका था, वो रंडी अपने मोबाइल पे लगी थी।

अगली सुबह से मेरा सतबीर को देखने का नज़रिया और नीयत दोनों बदल चुके थे। वो जब भी मिलता था तो नमस्ते ज़रूर करता था। मगर अब मैं हमेशा उस पर नज़र रखती थी।एक रात मैंने देखा वो और उसके तीन और दोस्त, दो रंडिया लेकर आये और सब के सब नंगे, कोई किसी को चूम रहा है, चूस रहा है, चोद रहा है। बस पता ही नहीं चल रहा कि क्या हो रहा था।मैंने उस दिन वहीं खड़े रह कर सब देखा और तब तक अपनी चूत सहलाई, जब तक मेरा पानी नहीं छूट गया। मगर उसके बाद भी मुझे चैन नहीं पड़ा। उंगली से वो तसल्ली नहीं मिलती तो किसी मर्द के लंड से मिलती है।

अब तो मैं ये सोचने लगी थी कि किसी दिन सतबीर मुझे ही पकड़ ले, सच में एक बार भी मना नहीं करूँगी, पहली बार में ही उसे चोद लेने दूँगी। मगर सतबीर पकड़े तब न!दिन बीतते गए, और सतबीर और शेर बनता गया, अब तो वो इतवार को छुट्टी के दिन घर में ही दिन दिहाड़े अपनी करतूत दिखाने लगा।दिन में ही घर में रंडियाँ आती, टीवी पर ब्लू फिल्में चलती, मांस मच्छी पकाते, शराब और शवाब के दौर चलते।

हम लोग पूरे शाकाहारी और वो पूरी तरह से मांसाहारी … हर तरह का मांस खा जाने वाले, चाहे कच्चा मांस हो या पक्का मांस। भेड़, बकरी, मुर्गा, मच्छी, औरत जवान, सबको चबा डालने वाले। उसके दोस्त भी बड़े बदतमीज़ थे, जब भी मौका मिलता मुझे घूरते, मेरी बच्ची को घूरते। अपना तो मैं बर्दाश्त कर लेती क्योंकि मेरी अपनी नीयत साफ नहीं थी, मगर अपनी बेटी को घूरते देख मुझे बड़ी आग लगती। बेशक मेरे लिए वो मेरी बच्ची थी, मगर उनके लिए तो सिर्फ एक जिस्म थी, जिसकी कच्ची जवानी को वो वहशी नोच जाना चाहते थे।

इस लिए मैंने सोचा कि इससे पहले के इन हरमियों के हाथ मेरी बच्ची के दामन तक पहुंचे या तो मैं इन्हें इस घर से ही निकाल दूँ, या फिर अपने आपको उनके आगे पेश कर दूँ। मगर ऐसा कोई भी मौका नहीं बन रहा था कि मैं उनके आगे बेशर्म हो जाऊँ।एक दो बार ऐसा हुआ कि जब सतबीर अपने कमरे में रंडी हो चोद रहा था, तो मैंने जानबूझ कर बाहर कोई आवाज़ की, ताकि वो बाहर निकल कर देखे, मगर फिर मेरी उससे कोई सेटिंग नहीं हो रही थी।

मैं देखती थी अक्सर उसे। नौजवान था, तो हफ्ते में एक दो बार तो वो अपने कमरे में रंडी लाता ही था।

बहुत दिन निकल गए मगर मेरी चूत की आग ठंडी नहीं हो रही थी।

फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरी सारी उम्मीदें ख्वाहिशें पूरी हो गई। उस दिन 8 तारीख थी, इतवार का दिन था और सतबीर ने अभी तक कमरे का किराया नहीं प्रिया था।दोपहर हो चली थी, मैंने सोचा कि आज इतवार है, सतबीर घर पर ही होगा, तो उससे कहती हूँ कि भाई मकान का किराया तो दो।

मेरी बेटी अपनी सहेली के घर पढ़ने गई हुई थी क्योंकि उस दिन मैं घर के काम काज में बहुत व्यस्त रही थी, तो नहाई भी नहीं नहीं थी और रात वाली नाईटी ही पहनी हुई थी। थोड़ा फ्री हुई तो सोचा कि उसके रूम में जा कर कह आती हूँ।जाकर देखा तो रूम का दरवाजा पूरा खुला था। मैं जैसे ही अंदर घुसी तो अंदर का माहौल देख कर सन्न रह गई। अंदर सतबीर के साथ उसके वही तीन बदमाश दोस्त बैठे थे। सब के हाथों में गिलास, बीच में रखा हुआ खाने पीने का मीट मच्छी।

टीवी पर चलती ब्लू फिल्म और चारों के चारों हरामज़ादे नंगे बैठे, सबने बड़े बड़े अपने लंड खड़े कर रखे थे। एक बार तो लगा जैसे मैं जन्नत में आ गई हूँ, मेरे मन की मुराद पूरी हो गई, मगर इस तरह तो मैं नहीं करना चाहती थी।

मेरी जोरदार ग्रुप सेक्स की कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

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किरायेदार ने दोस्तों से मिल कर मुझे चोद डाला

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Hello friends, main apka Sourabh meri aur aunty ki gair mard ke sath chudai ki story ke new part me swagat karta hu aur last part me kuch aunty aur bhabhi sab reply diye the uske liye apko sab ko bahot bahot dhanyawad.

11 मिनट 969

पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

मन्थन

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

मनीष सक्सेना

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

रोहन अरोड़ा

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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