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अठरह की उम्र में लगा चस्का-3

निशा गुप्ता

09 Jun 2010 को प्रकाशित

अठरह की उम्र में लगा चस्का-3
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“तुम भी ना ! क्या लगता है, मैं इतनी जल्दी उसको सौंप दूंगी क्या? देख सुन बबलू, रॉकी, रॉ्बिन को इसके बारे मत बताना !अपनी चारों सहेलियों को मैंने काफी पिलवाई, जाते जाते मैंने सेक्सी ब्रा-पैंटी के दो सेट खरीद लिए, टांगों की वेक्सिंग करवाई।

छोटी उम्र में मैंने खुद पर काबू नहीं रखा, अब अपनी शरीर की ज़रुरत काबू में नहीं रख पाती, चाह कर भी मुझसे बिना चुदाई रहा नहीं जाता, चाहे वो लौड़ा किसी नौकर का हो या किसी अमीर का, मुझे बस चाहिए ऐसा मर्द जो मुझे मसल कर हल्की करके बिस्तर से निकाले।

जाते जाते मैंने सेक्सी ब्रा-पैंटी के दो सेट खरीद लिए, टांगों की वेक्सिंग करवाई, अगले दिन गुप्ता जी के साथ उनके घर जाना था, सुबह सुबह मुझे रॉकी का मैसेज मिला, वह मुझसे मिलना चाहता था, सुबह सुबह अकेला था।

जब मैं उसके कमरे गई मुझे दबोच लिया, कपड़े खोलने लगा, बोला- वाह, नई ब्रा, नई पैंटी? ओये होए, चिकनी हुई पड़ी है !“क्यूँ? नहीं हो सकती?”मेरे मम्मे चूसते हुए बोला- क्यूँ नहीं !मेरी चूत रगड़ता हुआ बोला- आज तेरी मैं नहीं लूँगा !“क्या मतलब तेरा?”“निशा, मेरी जान, आज भाई को खुश कर दे !”“कौन भाई?”“यादव भाई ! और कौन !”वहाँ का बदमाश था।“देख रॉकी, मैं कोई नया बंदा अपने ऊपर नहीं लिटाने वाली !”“साली, नखरे मत कर ! मुझे भाई का उधार चुकाना है, अगर तुम उसके नीचे लेट लोगी वो सब माफ़ कर देगा !”

तभी हटटा-कट्टा सा काले रंग का यादव दूसरे कमरे से निकला।“साली, नखरे मत करना ! अगर तीन तीन लड़कों के साथ एक वक़्त दे सकती है तो एक और हो जाएगा तो पहाड़ नहीं टूटेगा, अपने आप से मजे दे दे, वरना तीन चार गुंडे बुलवा लूँगा !”

नंगी तो मैं लगभग थी ही, मुझे पकड़ चूमने लगा उसने जब अपना लंड निकाला, देख कर मेरी जान निकल गई, काले रंग का लंबा मोटा लंड देख मेरी हालत ही खराब होने लगी, कैसे झेलूंगी इसका? इससे चुदने के बाद अगर गुप्ता से चुदी उसको शक हो जाएगा, मैंने उसको कहा- देखो वादा रहा, मैं वहाँ से जल्दी निकल आऊँगी, मेरी मजबूरी समझो, मैं कहीं शहर छोड़ कर भाग नहीं जाऊँगी।वो बात मान गया।“और हाँ, कंडोम खरीद कर रखना।” मैंने उससे कहा।

मैं वहाँ से निकली कि गुप्ता ने मुझे फ़ोन पर कहा- कंपनी नहीं जाना, सिंधी कॉफ़ी हाउस में आ जा।

मैंने ऑटो लिया, वहाँ से कॉफ़ी पी हम उनके घर चले गए। आलिशान बंगला था, उस वक़्त नौकरों के अलावा कोई नहीं था, सभी मुझे गौर से देख देख आँखें सेक रहे थे, मेरी कसी छाती, उभरी गांड !“यह है हमारा कमरा दोनों का !”क्या नर्म नर्म सा बिस्तर था, मुझे बाँहों में लेकर गुप्ता ने खूब चूमा, मेरा दाना कूदने लगा, आलीशान कमरे में चुदने की तमन्ना बढ़ने लगी, एक एक कर कपड़े उतरे, नयी ब्रा-पैंटी देख वो खुश था, मेरी चिकनी टांगें, चिकनी चूत देख गुप्ता जी का लंड खड़ा हो गया। वो भी सिर्फ चड्डी में थे, उठा कर वाशरूम ले गए, वहां झाग वाले पानी के टब में फेंक दिया खुद भी साथ आ गए।मैंने उनके लंड को मुठ में ले लिया सहलाने लगी।बोले- अल्टा पलटी कर !मेरे मुँह में उनका लंड था, उनकी जुबां मेरी चूत में घूम मुझे पागल करने पर तुली थी।

वहां से निकल कमरे में ले जा कर उन्होंने अपना लंड आखिर मेरी चूत में घुसा ही दिया, मैंने अपनी सांस खींच ली, जाँघें भींच ली, उनका जोर लगवाया, लंड घुस गया लेकिन मेरे गर्म शरीर और गर्म चूत में उनका लंड ज्यादा खेल नहीं पाया, पिंघल गया।मैंने कोई शिकयत नहीं की।उन्होंने कहा- दोबारा खड़ा होगा अभी !दूसरी बार उनका लंड पहले से कुछ समय ज्यादा चला, करीब सात आठ मिनट ! मेरा पानी निकलवा दिया था, मैंने पूरी ख़ुशी जताई। दोनों बार पानी मेरे अंदर छोड़ा था, मैंने कहा- अगर कुछ ऐसा वैसा रुक गया तो?बोले- उससे पहले तुझे दुल्हन बना लूँगा !

उम्र ज्यादा थी लेकिन पैसा बहुत था, एक बारहवीं पास लड़की इतने बड़े बिज़नस वाले की बीवी बन जाए, और क्या चाहिए।

गुप्ता से चुदाई में मुझे पूरी मंजिल नहीं मिली थी, मैं गुप्ता जी के घर से पूरी संतुष्ट नहीं होकर आई थी पर उसके लिए यादव का औज़ार अभी बाकी था।वहाँ से सीधी रॉकी के कमरे में जाना पड़ा, शरीर भी चाहता था, मजबूरी भी थी।

यादव खुश हो गया, मैंने उसके लंड को खुलकर चाटा-चूसा लेकिन वो झड़ने वालों में से नहीं था, मैं फिर से बेवफा हो गई।रॉकी ने भी अपनी पैंट उतारी उसका लंड जो पहले मुझे सबसे बड़ा लगता था, वो यादव के सामने कुछ भी नहीं था।“वाह क्या मस्त चूसती है साली ! छिनाल रंडी ! तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊँगा !”

उसने मुझे कहा- मेरी गोदी में लंड पर बैठ जा।वैसा किया तो तकलीफ हुई लेकिन उसके सामने कुछ कहना फर्क नहीं डालता था।लेकिन जल्दी ही यादव का लंड मेरी चूत में मजे देने लगा, मुझे घोड़ी बना लिया, रॉकी ने अपना लंड मेरे मुँह में दे रखा था, जब यादव की फौलादी मर्दानी जांघें मेरे चूतड़ों पर बजती, मुझे मानो स्वर्ग दिखने लग जाता था।

उसकी दोनों गेंदें जब चूत पर बजती तब भी आनन्द आता।उसने मेरी गांड पर थूका और उंगली घुसा दी, फिर दूसरी, फिर तीसरी !“यह सब क्या हो रहा है?”बोले- दो लंड हैं, एक घुसेगा तो दूसरा बुरा मानेगा !“तेरा बहुत बड़ा है, मेरी फट जायेगी !”“एक बार रानी, तुझे मालूम है जब तुझे चलती देखता हूँ तेरी गांड हिलती है, यह तेरे में आकर्षण है।”

उसने सुपारे को गांड के छेद पर रखा, थोड़ा घुसाया, मेरी जान निकल गई, इतना बड़ा लौड़ा मैंने अपनी गाण्ड में नहीं डलवाया था।उसने निकाला, रॉकी से बोला- तेल है घर में?

रॉकी ने बोतल लाकर दी, उसने तेल लगाकर घुसाया, धीरे धीरे पूरा घुस गया, उसने रफ़्तार पकड़ ली, वो झड़ने का नाम नहीं ले रहा था, इतना स्टेमिना था।

यादव ने निकाला तो रॉकी सीधा लेट गया, उसकी तरफ पीठ करके बैठ गई, मैं उछलने लगी। मेरे मम्मे हिलते तो यादव ने मेरे मम्मे पकड़ लिए, रॉकी से रुकने को कहा, वो गांड में डाले हुए था, यादव आगे से आकर मेरी चूत में घुसाने लगा।“यह सब क्या है?”“तेरी माँ की चूत साली ! रंडी को ऐसे ही ठोका जाता है !”मैं चुदवाती हुई बोली- हरामजादो, मैं रंडी हूँ? मादरचोदो कुत्तो !“साली, छिनाल, रंडी से कम कहाँ है, तीन तीन लड़कों के साथ बंद कमरे में लेटती है।”“कुत्तो ! सालो ! अब ठोको, जोर जोर से मारो मेरी !”

रॉकी नीचे से चूतड़ उठा कर मेरी गाण्ड मारने लगा, जल्दी उसने मेरी गांड को गर्म गर्म वीर्य से भर दिया, यादव ने जोर जोर से करते हुए मेरी फ़ुद्दी को वीर्य से भर दिया।हम तीनों नंगे हांफ रहे थे।“साली, मस्त माल निकली तुम ! सही सुना था।”

कपड़े पहने, वहाँ से निकली कंपनी के लिए !छोटी उम्र में बड़े बड़े काम करवा रही थी, मेरे जिस्म की आग प्यास दिन-ब-दिन बढती जा रही थी।

कंपनी पहुँची, थोड़ी देर में मुझे अंदर बुलाया गया।“जी !”गुप्ता जी बोले- मेज के नीचे मेरा पैन गिर गया है, उठा दो !मैं नीचे झुकी तो सामने नाग देवता मुझे सलामी दे रहे थे, गुप्ता जी ने लंड निकाल रखा था, मैं कुतिया की तरह गई, पकड़ सहलाने लगी, मुँह में डालकर चूसने लगी, लंड को चूस चूस मैंने मलाई पूरी निकाली और पी गई।

“मजा आया सर?”“बहुत मजा आया ! अब तेरे बिना रहना मुश्किल हो गया ! मेरी जान तुम नहीं जानती, मैं रात को जल्दी सोता हूँ कि जल्दी सुबह हो जाए, अब मैं तुझसे शादी करना चाहता हूँ, आज ही तेरे घर तेरा हाथ मांगने चाचा-चाची को भेज रहा हूँ। मॉम-डैड तो ऑस्ट्रेलिया हैं, उनसे मैंने कह दिया है कि मुझे लड़की पसंद आ गई है, बोले, रिश्ता पक्का कर, हम शादी करने आ जाएँगे।

खैर मेरा रिश्ता लेकर मेरे घर आये, पहले तो मॉम डैड थोड़ा हैरान थे, चमचमाती कार हमारे घर में आई, सभी देख रहे थे।मुझे बुलाया गया कि यह सब क्या माज़रा है?मैंने कह दिया कि मैं गुप्ता को चाहती हूँ।

मॉम मान गई लेकिन मेरी उम्र बहुत छोटी थी, लेकिन अब उनको क्या पता कि मेरा दाना रोज लंड के लिए फड़कता है लेकिन वो मनानहीं कर सके, हफ्ते बाद ही शादी की तारीख तय करने घर आ गये।लेकिन पापा बौखला गए- इतनी जल्दी हम कैसे कर सकतें हैं?तब उन्होंने कहा कि पूरा इंतजाम हमारा होगा, आप बस कन्यादान करो।

शादी हुई, मैं अब मिसेज गुप्ता बन गई, ससुराल में इनके रिश्तेदार जल गए कि इतनी कमसिन लड़की उम्र में कम इसका रिश्ता कैसे हो गया, जलने वालों में थे मेरे नंदोई जी, इनके कज़न, कुछ दोस्त जल उठे थे।

पहली रात हमारी फाईव स्टार होटल के सेक्सी स्वीट में बुक करवाई, यह रात हक़ से चोदने के लिए थी, चोरी छिपे इधर उधर मिलने के बजाए लाएसेंस वाली रात थी।

लहंगा पहने मैं बैड पर बैठी थी, बिना किसी डर के एक एक कर इन्होंने मुझे निर्वस्त्र कर दिया, एक एक अंग को चूमने लगे।

पहले हम दोनों एक साथ नहाने गए फिर आकर काम शुरु हुआ, मैं मजे से उनका लंड चूस रही थी, उस रात हमने तीन बार चुदाई का मजा लिया था।

दिन बीतने लगे, हम दोनों खुश थे, बिज़नस में रम गए, हर रात को हमारा होता ज़रूर था लेकिन मेरी पूरी तस्सली नहीं हो पाती थी।

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अठरह की उम्र में लगा चस्का

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

मनीषा4

1 week ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

भगवानदास रायकवार

4 weeks ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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