रात को करीब 11 बजे दरवाजे की घण्टी बजी और जब मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि स्वाति नशे में थी और उसके साथ एक लड़का खड़ा था.मैंने उस लड़के का नाम पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम सुनील है.मैंने उसको अंदर आने के लिए कहा. फिर हम दोनों ने सहारा देकर स्वाति को बिस्तर पर लिटा प्रिया.
रात ज्यादा होने के कारण मैंने सुनील को रात वहीं पर रुकने के लिए कहा तो वो मान गया और मैं और सुनील योगी के कमरे में आकर सो गए.मैंने सुबह जल्दी का अलार्म लगा प्रिया और सुबह 5 बजे ही उठ गया.
मैं सुबह-सुबह ही आयशा के कमरे में चल प्रिया. मैंने आयशा के रूम का दरवाजा बजाया, आयशा ने उठकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि वो नाईटी में है, मैं अंदर घुस गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया क्योंकि आयशा को देखने के बाद अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था.मगर आयशा ने कहा- स्वाति दीदी घर पर है अभी हम नहीं कर सकते.मैंने कहा- स्वाति तो सो रही है और वो सात बजे से पहले नहीं उठेगी!
तो आयशा मान गई और मैं योगी के पापा के कमरे में गया और वहाँ से दो कंडोम उठा कर ले आया ताकि आयशा को चोदने के बाद मुझे अपना लण्ड जल्दी में बाहर ना निकलना पड़े.
आयशा के कमरे में आने के बाद मैंने जल्दी से उसके कपड़े उतारे और उसकी चूत में अपना लण्ड घुसा प्रिया. इस बार आयशा इतना नहीं चिल्लाई क्योंकि अब उसकी चूत कुंवारी नहीं थी. मैंने उसको 6:30 बजे तक चोदा, उसके बाद वो स्कूल के लिए तैयार होने चली गई.
उसके स्कूल जाने के बाद 8 बजे मैं स्वाति के कमरे में उसको जगाने के लिए गया तो उसके कपडे अस्त-व्यस्त थे. तब मैंने देखा कि स्वाति की छाती पर काटने के निशान थे. मुझे समझते भी देर ना लगी कि स्वाति ने कल किसी के साथ चूमा-चाटी की है मगर उस निशान को छोड़ मैंने स्वाति को आवाज़ लगाई जिसे सुनकर वो जग गई.
उसके बाद मैंने सुनील को भी उठा प्रिया और मैं रसोई में आ गया. कुछ देर में मैं चाय लेकर सुनील के कमरे में गया तो देखा कि वहाँ कोई नहीं था.
मैं समझ गया कि स्वाति ने सब कुछ इस सुनील के साथ ही किया है.
उसके बाद मैं चाय लेकर स्वाति के कमरे में गया और जब मैं पहुँचा तो नजारा देख मुझे गुस्सा आ गया क्योंकि स्वाति अपने ही घर में सिगरेट जला कर बैठी थी और दोनों बैठ कर सिगरेट पीते हुए बातें कर रहे थे.
मगर यह मेरा नहीं योगी का घर था इसलिए मैं कुछ नहीं कर पाया और चुप रह गया.
मैं फिर उन दोनों की बातों में शामिल हो गया, बातों ही बातों में पता चला कि वो लड़का तो स्वाति का बॉयफ़्रेंड है. कुछ देर के बाद स्वाति फ्रेश होने चली गई और मैं और सुनील बातें करने लगे. सुनील मुझसे कहने लगा- मैं स्वाति को अभी चोदना चाहता हूँ.
मैंने भी कह प्रिया- हम दोनों एक साथ इस रण्डी को चोदेंगे!तो सुनील ने हाँ कह दी. शायद सुनील स्वाति को पहले भी चोद चुका था.
स्वाति जब नहा कर बाहर निकली तो सुनील और मैं तो स्वाति को देखते ही रह गए क्योंकि स्वाति ने उस वक्त काले रंग का चमकदार सूट पहना हुआ था जिसे देख किसी का भी मन डोल जाए. सुनील ने उठकर स्वाति को पकड़ लिया मगर स्वाति ने उसे झटक प्रिया, शायद स्वाति मेरी वजह से शरमा रही थी.
सुनील बोला- मेरी रानी! तू कब से दो लण्डों से चुदवाना चाहती थी, आज हम दोनों मिलकर तेरी चुदाई करेंगे.
खेत में 69 और चुत चुदाई का मजा
यह बात सुनकर स्वाति घबरा गई, मगर सुनील काफी शातिर खिलाड़ी था, उसने देर ना करते हुए स्वाति का सूट उतार फेंका और ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध मसलने लगा.
मैंने भी उठ कर उसकी पेंटी उतार दी और उसकी चूत चूसने लगा. उसकी चूत में एक अजीब सा नशा था क्यूंकि उसने एक दिन पहले ही चूत मरवाई थी.
हम दोनों ने स्वाति को पकड़ा और ले जाकर सोफे पर बिठा प्रिया, हम दोनों ने एक-एक चूचा पकड़ लिया और मसलने लगे. मैंने अपनी पैंट खोली और अपना लंड ले जाकर स्वाति के मुँह के पास ले गया तो स्वाति ने खुद ही उसे पकड़ा और चूसने लगी क्योंकि वो इस खेल में काफी माहिर खिलाड़ी थी तो वो सब कुछ जानती थी और काफी देर तक मेरा लण्ड चूसती रही.
जैसे ही मैंने अपना लण्ड हटाया, सुनील ने अपना लण्ड उसके मुँह में घुसा प्रिया और मैं उसके दूध मसलने लगा. फिर मैंने स्वाति को अपनी बाहों में उठाया और अंदर ले जाकर बिस्तर पर लिटा प्रिया. मैंने सुनील को एक तरफ करते हुए एक जोर का झटका स्वाति की चूत में लगा प्रिया.
स्वाति बहुत जोर से चिल्ला उठी शायद सुनील का लण्ड मुझसे छोटा था इसलिए स्वाति को ज्यादा दर्द हुआ. मैं 10 मिनट तक उसकी चूत पेलता रहा, इस बीच स्वाति दो बार झड़ गई. उसके बाद मैंने पानी छोड़ प्रिया.
मैं हट गया और सुनील उसकी चूत मारने के लिए गया.
इतने में मैंने फिर से पाना लण्ड जाकर स्वाति में मुँह में रख प्रिया और वो उसको बड़े मजे से चूसने लगी. थोड़ी ही देर में सुनील भी झड़ गया और हम एक दूसरे के ऊपर लेट गए.
फिर मैंने स्वाति को उल्टा किया तो स्वाति मना करने लगी. शायद स्वाति ने उससे पहले कभी गाण्ड नहीं मरवाई थी, मगर मैंने उसकी एक भी ना सुनी और उसके दोनों चूतड़ों के बीच में अपना लण्ड घुसाने लगा. मुझे देख सुनील भी जोश में आ गया. फिर मैंने सामने की तरफ़ से स्वाति को सुनील के ऊपर लिटाया और पीछे से मैं स्वाति की गाण्ड में धीरे धीरे अपना लंड घुसाने लगा.
20 मिनट तक गाण्ड मारने के बाद मैं रुका और मैंने स्वाति को सीधा कर प्रिया और उसके बाद हम काफी देर तक बिस्तर पर लेटे रहे.
उसके बाद हमने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ़ किया, लगभग 11 बजे सुनील चला गया और उसके बाद मैंने और स्वाति बातें करने लगे.तभी स्वाति मुझसे बोली- तुम मेरे साथ सेक्स करने की फीस नहीं दोगे?तो मैंने भी कह प्रिया- जो चाहे मांग लो मेरी जान!
स्वाति ने एक सिगरेट मेरी तरफ बढ़ा दी, वो पहली बार था जब मैंने सिगरेट पी थी. फिर हम सिगरेट पीते हुए एक-दूसरे से बातें करने लगे.लगभग दो बजे आयशा भी घर वापिस आ गई.शाम को 7 बजे योगी का फोन आया कि वो आज रात ही 10-11 बजे तक घर पहुँच जायेंगे.
आगे मेरी जिंदगी में क्या-क्या हुआ! जैसे उस रात भाभी के कमरे में कौन था और आगे क्या-क्या हुआ, यह मैं बाद में लिखूँगा!अपनी राय बताने के लिए मुझे मेल कीजिये!support@mohakkisse.com