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कंप्यूटर लैब से चौकीदार तक

वन्दना

24 Oct 2008 को प्रकाशित

कंप्यूटर लैब से चौकीदार तक
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कम्प्यूटर लैब में तीन लौड़ों से चुदीसे आगे:

सच में वो फौलाद था, था क्या? है! जिसने मेरी तसल्ली करवा दी!

जो कहता था वो सच करके दिखाया और मेरा पूरा-पूरा बाजा बजाया उसने! मेरा बहुत साथ दिया था उसने, मेरे लिए अपनी सरकारी नौकरी खतरे में डालता था क्यूंकि उसका काम स्कूल में रहना होता था फिर भी मेरी और अपने मास्टर दोस्तों की मदद करता, हमें मौके देता! इसलिए मैंने उसको आज रात घर बुलाया था ताकि उसको अपना जिस्म सौंप सकूँ!

पूरे ग्यारह बजे उसने मेरे घर में दस्तक दी, फिर से नौकरी खतरे में डाल दी। अपने साथ शराब की बोतल लेकर आया और गर्मी के दिन थे। रात को मैं अकेली रहती थी, आता भी था तो कोई आशिक ही! इसलिए पेंटी और ढीली शमीज़ पहनी हुई थी। वो खुद ही रसोई देख ग्लास लाया और दो पेग बना लिए।

बहुत प्यासा हूँ तेरी चूत का! मेरा लौड़ा खाएगी तो रोज़ ना बुलाया तो मेरा नाम बदल देना!

हाँ जीवन! तूने जब आज मुझे अपने लौड़े की झलक दिखलाई, उसी वक़्त जान गई थी कि तू बहुत कमीना है!

मैडम इस स्कूल में कब से नौकरी कर रहा हूँ, कई मैडमों ने मुझसे चुदवाया था लेकिन तू सबसे अलग चीज़ है!

हाँ! बहुत शौक़ीन हूँ मैं चुदाई की!

मैं तो पहले से ही लगभग नंगी थी। पेग खींचते ही मैंने पहले उसका पजामा उतारा और ऊपर से ही सहलाया पुचकारा बाकी का पजामा जीवन ने खुद उतार दिया और मैंने उसका कुरता उतार दिया उसकी छाती पर घंने बालों को देख मेरा सेक्स और भड़क उठा। मुझे बालों वाले मर्द बहुत पसंद हैं, मैंने जीवन की छाती पे न जाने कितने चुम्बन लिए! वो मेरे अनारों से खेलता रहा और मैं उसकी छाती से और एक हाथ से उसके लौड़े को मसल रही थी।

साली पेग बना और अपने हाथों से मुझे जाम पिला!

मैं रंडी की तरह उठी, गांड मटकाती हुई गई और कोठे वाली की तरहं एक जाम उसको पिलाया, एक खुद खींचा!

मैंने एक पल में उसका अंडरवीयर उतार दिया- ओह माय गॉ… यह लौड़ा है या सांप?

मैंने तभी आपको कहा था कि यह देखो, मेरा सोया हुआ लौड़ा भी खड़े लौड़े जैसा है।

वास्तव में जैसे जैसे मेरा हाथ उस पे फिरने लगा वो उतना ही भयंकर होने लगा।

साली चूस ले! जब खड़ा हो गया तुझसे चूसा नहीं जायेगा! और फिर जबड़ा तोड़ दूंगा!

ज़बरदस्ती से मैं डर सी गई और उसके लौड़े के टोपे को चूसने लगी। सही में फिर वो मुझ से मुँह में नहीं लिया जा रहा था तो मैंने उसकी एक गोटी को चूसना शुरु कर दिया और साथ साथ जुबान से उसके लौड़े को चाट रही थी। खुश भी थी, थोड़ा डर भी था। उसको शराब चढ़ती जा रही थी, पूरी बोतल डकार चुका था। मैंने चूसते हुए जब ऊपर देखा और पेग लेने की सोची तो देखा- बोतल ख़त्म थी।

चल कुतिया, मुझे तेरे साथ सुहाग रात मनानी है! मैं दारु लेकर आया अपने घर से। तब तक बन-सवंर के घूंघट लेकर बैठ जा!

मैं उठी और सुन्दर सा ब्रा-पेंटी का सेट पहना, लाल रंग की आकर्षक साड़ी पहनी, पल्लू सरका घूंघट में बिस्तर के बीच बैठ गई। जीवन अन्दर आया, कुण्डी लगा मेरे पास आया और मेरा घूंघट उठाया और मेरे होंठ चूसने लगा। मैं भी शरमा के दुल्हन की तरह बैठी रही। केले के छिलके की तरह उसने मेरा एक-एक कपड़ा उतार दिया। मेरे बदन पर दारु डाल कर चाटने लगा।

एक दो पेग मुझे लगवाए और फिर जीवन मुझ पर छाने लगा। उसका लौड़ा साधारण नहीं था, हब्शी जैसा था! वो मुझे खींच के बेड के किनारे लाया ,खुद खड़ा हुआ और मेरी टाँगें खोल ली और मोटा लौड़ा चूत पे टिका दिया और झटका मारा।

मेरी सांसें रुक गई!जान निकल रही थी मेरी!लेकिन वो नहीं माना!

मेरी चूत फट रही थी, उसने पूरा लौड़ा घुसा दिया जो मेरी बच्चेदानी को छूने लगा!मैं गिड़गिड़ा रही थी, वो नशे में था। मेरी साड़ी उतार दी उसने!वो हर बार पूरा निकालता, फिर डालता!मैं चीखती रही- चिल्लाती रही- जीवन नहीं रुका!

और फिर उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरे कहने पर उसने वेसलीन लगाई और मुझे चोदने लगा!

वोही लौड़ा अब मुझे स्वर्ग की सैर करवाने लगा था और मेरी गांड खुद ही हिल-हिल कर चुदवाने लगी। लेकिन वो नहीं झड़ने वाला था, उसने मुझे अपने लौड़े पर बिठा फ़ुटबाल की तरह उछाला।

हाय! तौबा! क्या मर्द हो तुम! वाह मेरे जीवन लाल शेर! फाड़ दे आज! इस कुतिया को चलने लायक मत छोड़ना!

पूरी रात जीवन ने मेरा भुर्ता बना दिया। सुबह होते ही वो तो चला गया लेकिन मैं उस दिन स्कूल नहीं जा पाई, पूरा दिन कोसे पानी से चूत की टकोर करती रही, तब जाकर सूजन उतरी।

और उसके बाद तो हर रोज़ छुट्टी के बाद स्कूल के किसी न किसी कमरे में चुदवाती रही उससे!

उसके बाद में सिर्फ जीवन से चुदवाने लगी वो मुझ से बहुत प्यार करने लगा। मैं जीवन से शादी करना चाहती थी, वो अपनी बीवी को छोड़ देता पर उसके सालों ने उसकी जमकर पिटाई करवा दी। मैं जीवन के बच्चे की माँ बनने वाली हो गई तो वो अपनी बीवी को छोड़ मेरे साथ रहने लगा।

लेकिन मैंने समय रहते बच्चा गिरवा दिया और जीवन को उसके घर जाने को कहा। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी तरह उसका परिवार बिखरे। मैंने उससे पूरा नाता तोड़ लिया ताकि उसका जीवन बर्बाद न हो!

दोस्तो, यह थी मेरी एक और चुदाई!

स्कूल के बाद अकेलापन दूर करने के लिए ट्यूशन पढ़ाने लगी और उनसे कैसे चुदी, यह जानने के लिए अगली कड़ी की प्रतीक्षा करें!

आपकी वंदनाsupport@mohakkisse.com

कंप्यूटर सेन्टर-1

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रोहित कुमार 1234

2 weeks ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

कुमार चैनपुरा

3 weeks ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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