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कामिनी की अतृप्त कामाग्नि-1

ऐश

16 Aug 2023 को प्रकाशित

कामिनी की अतृप्त कामाग्नि-1
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यह कहानी है कामिनी की! कामिनी की शादी को अभी एक साल भी नहीं हुआ था और उसके पति को उसके साथ संभोग में कोई दिलचस्पी नहीं रही। कारण यह नहीं था कि कामिनी में कोई कमी थी, बल्कि उसके पति को सेक्स में कोई रूचि ही नहीं थी।

कामिनी काम की अग्नि में झुलसी जा रही थी। रोज इन्टरनेट पर ब्लू-मूवीज देख कर अपनी काम-अग्नि कोई कब तक शांत कर सकता था। ऐसा ही कुछ कामिनी के साथ भी हुआ।

देखने में तो कामिनी पूरी सेक्स की देवी थी। सुंदर सुडौल वक्ष, पतली नाज़ुक कमर, उस पर भरे हुए गोल नितम्ब यानि सामने अगर कोई वाकई में मर्द हो, तो बिना चुदाई किए नहीं छोड़ेगा। कामिनी अपने मन को मारती भी तो कब तक।

एक दिन सुबह-सुबह जब दरवाजे की घंटी बजी, तो कामिनी को भी नहीं पता था कि वो अब सेक्स के किस दरवाजे को खोलने जा रही थी। जिस को खोलने के बाद उसकी ज़िंदगी में सेक्स के सिवा और कुछ भी नहीं रहने वाला था।

सुबह के 4:30 बजे थे। दूध वाला तो 5 बजे तक आता है, इतनी जल्दी कौन आ गया? यही सोचते-सोचते कामिनी ने दरवाज़ा खोला। दरवाजे पर एक 5 फुट 10 इंच लंबा, चौड़ी मांसल छाती, पहलवानों जैसा कसरती बदन वाला एक मर्द खड़ा था।

कामिनी की आँखें खुली की खुली रह गईं। कामिनी बिना कुछ पूछे उसे ऊपर से नीचे तक देखती रह गई। तभी सामने खड़े मर्द ने उसे अपना परिचय प्रिया।

उसने अपना नाम भीम बताया और कहा- वह उनके दूध वाले भोला का जीजा है और किसी कारणवश उनके दूधवाले को अपने गाँव जाना पड़ा है। और आज से वो ही उनके लिए दूध लेकर आएगा।

कामिनी का ध्यान उसकी बातों में कम पर उसके दमकते बदन पर ज़्यादा था। और होता भी क्यों नहीं, भीम ने अपने कंधे पर एक गमछा रखा हुआ था। चौड़ी छाती पूरी खुली हुई थी और केवल एक सफेद रंग की धोती पहन रखी थी। जो पारदर्शी होने के कारण बदन को ढक कम दिखा ज़्यादा रही थी।

यही नहीं कमर और जाँघ के पास के हिस्से को देख कर ऐसा लग रहा था कि शायद उसने धोती के अंदर कुछ नहीं पहना था।

कामिनी यही सब देख रही थी कि अचानक भीम ने उससे कहा- बीवी जी दूध ले लीजिये।

उसने जैसे-तैसे अपने होश बटोरे और मुड़कर अंदर दूध का बर्तन लेने चली गई। पर अंदर जाते वक्त से लेकर वापस आने तक वो केवल भीम के बदन के बारे में ही सोचती रही।

और बाहर आते ही उसने भीम से कहा- तुम दूध वाले हो या पहलवान?

यह सुन कर भीम मुस्कुरा प्रिया और कंधे से गमछा उतारकर बाजू में रखते हुए, जैसे शौच के लिए बैठते हैं, उस तरह से पंजों के बल पैरों को ज़्यादा खोलते हुए बैठ गया। ऐसा करने से उसकी धोती का एक तरफ का खुला हुआ भाग, बाईं जाँघ को पूरी तरह से प्रदर्शित करते हुए नीचे हो गया।

अब कामिनी के सामने उसकी बाईं जाँघ उसके आंडों तक बिल्कुल नंगी दिख रही थी। तभी कामिनी ने ध्यान प्रिया कि भीम उसे बोल रहा था कि वो पेशे से दूधवाला है। पर उसे पहलवानी का शौक जवानी से ही था। इसलिए उसका बदन पहलवान जैसा हो गया है।

यह बात सुन कर कामिनी का ध्यान फिर टूटा और उसने बातचीत आगे बढ़ाते हुए उससे पूछा- तुम इतनी जल्दी क्यों आए हो?

भीम बोला- मुझे मेरे साले के चले जाने से, दो लोगों का काम करना पड़ रहा है। इसलिए उसे जल्दी आना पड़ा।

यह बोलते-बोलते उसने दूध का पतीला कामिनी की ओर कर प्रिया। पर कामिनी का ध्यान तो कहीं और ही था। उसकी आँखें तो भीम के पैरों के बीच में घुसी हुई थीं।

वो तो यह सोच रही थी कि जो उभार सामान्य अवस्था में कसी हुई धोती के अंदर इतना बड़ा दिख रहा है, वह उत्तेजित अवस्था में बिना किसी बंधन के कितना प्रबल, प्रचंड, व्यापक, कामुक और सुंदर दिखाई देता होगा।

कामिनी का ध्यान अपने लवड़े में घुसा देख कर भीम को कामिनी की मनोदशा का अहसास हो गया।

उसने उसे भंग करते हुए कामिनी से कहा- बीबी जी, अगर आप कहें तो मैं देर से ही आऊँगा।

यह सुनकर कामिनी का ध्यान फिर टूटा और उसकी नज़रें भीम से चार हो गईं। ऐसा होते वक्त भीम ने कामिनी को एक मनमोहक स्वीकारोक्ति सी मुस्कान दी, और फिर से अपना सवाल दोहराया।

अब कामिनी का ध्यान भीम के रस भरे होंठों पर गया और उसकी चिकनी चूत ने काफ़ी सारा पानी छोड़ प्रिया। ऐसा होते ही कामिनी के होश ठिकाने आए। उसके दिमाग़ में भीम के सवाल और जवाब दोनों ही ने, दस्तक दी।

कामिनी ने अपनी साँस गुटकते हुए भीम से कहा- उसे कोई परेशानी नहीं है।

ऐसा बोलते-बोलते उसकी जीभ उसके होठों को गीला कर गई। और उसका ध्यान फिर से भीम के चिकनी जांघों से होते हुए उसके लवड़े पर जा कर रुक गया। कुछ पल ऐसे ही बीतने के बाद कामिनी का ध्यान फिर टूटा और उसने देखा कि भीम उसे देख, अभी भी मुस्कुरा रहा था। बिना हिले, बिना कुछ कहे, कामिनी को अपने लवड़े के पूरे दर्शन दे रहा था।

यह देख कामिनी सकपकाती हुई खड़ी हो गई। कामिनी के खड़े होने के बाद, भीम भी मुस्कुराता हुआ खड़ा हो गया।

कुछ पल के लिए वहाँ ऐसा मौन था, मानो जैसे कोई वहाँ था ही नहीं।

फिर भीम ने मुस्कुराते हुए कहा- मैं कल आता हूँ।

और वो दूध का कंटेनर लेकर लिफ्ट से नीचे चला गया। उसके जाने के बाद कामिनी दूध का पतीला ले कर किचन में चली गई और पतीला रख कर अपनी बाल्कनी में जाकर खड़ी हो गई।

कुछ ही पल में उसे भीम बिल्डिंग से बाहर अपनी साइकल की ओर जाते दिखाई प्रिया। पर कमाल की बात तो यह थी कि साइकल में अपना कंटेनर टाँगने के बाद भीम ने सिर उठा कर सीधा कामिनी की ओर देखा। मानो उसे पता था कि वो उसे ताक रही होगी। और फिर प्यारी सी कातिलाना मुस्कान देते हुए साइकल पर चढ़ कर गेट की तरफ चल प्रिया।

कामिनी के लिए यह बिल्कुल आशा से परे था। भीम के जाने के बाद तो जैसे उसके होश ही उड़ गये थे। सारा दिन वो केवल उसके बारे में ही सोचती रही। ऊपर वाला भी कामिनी पर मेहरबान ही था। ऑफिस जाने के बाद उसके पति का फोन आया कि उसे एक अर्जेंट मीटिंग के लिए लंदन जाना पड़ेगा और वो दोपहर की फ्लाइट से ही जाने वाला है। इसलिए वो घर जल्दी आएगा। उसका ज़रूरी समान पैक कर दे।

पति के जाने के बाद तो कामिनी सेक्स के लिए पागल सी हुई जा रही थी। उसका मन कर रहा था कि अभी भीम आ जाए और उसे जम कर चोदे। उसकी अतृप्त प्यास को अपने वीर्य से सराबोर कर दे। इस चाह में वो अपने सारे कपड़े उतार कर, बिल्कुल नग्न होकर अपने आप को दर्पण में देखने लगी।

उसने पाया कि सोच मात्र से उसके वक्ष इतने उभर गये थे। जब भीम उसे चोदेगा तो उसे कितना आनन्द आएगा। यही सोचते-सोचते उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ प्रिया।

पानी छूटते ही कामिनी ने ध्यान प्रिया कि उसकी चूत के बाल काफ़ी बड़े हो गये हैं, इसलिए वो तुरंत बाथरूम में चली गई और हेयर-रिमूवर लगा कर अपने अनचाहे बालों को हटा प्रिया।

अब तो वो बिल्कुल चिकनी हो गई थी। उसकी चूत एक छोटी बच्ची की तरह चमकने लगी थी। इसके बाद उसने अपने बदन को और मुलायम करने की सोची और सारे बदन पर खूब सारा उबटन लगा कर उसे मखमली और कोमल कर लिया।

कुछ घंटों की देखभाल के बाद कामिनी का बदन एक खूबसूरत अप्सरा के समान दमकने लगा था। वो फिर से दर्पण के सामने नग्न आ कर खड़ी हो गई। अपने आप को देख, उसे अपनी खूबसूरती पर नाज़ हुआ और फिर वो बिस्तर पर लेट कर भीम के साथ अपने संभोग की अर्चना करने लगी।

उसके मन में अलग-अलग मुद्राओं, अलग-अलग तरह के रति काम कलाओं के विचार आने लगे। तभी उसने घड़ी के घंटों की आवाज़ सुनी और पाया कि रात के 10 बज चुके थे।

कामिनी ने अपनी अलमारी से एक पारदर्शी छोटे साइज़ की, गहरे गले की काले रंग की नाइटी निकाली और उसे पहन लिया।

नाइटी की लंबाई केवल उसकी चूत तक ही थी। उसका पीछे का भाग तो पूरा खुला हुआ था। यानि नाइटी का कपड़ा केवल उसके नितंबों के हिस्से पर ही था। नाइटी गले पर एक डोरी से बँधी थी। और डोरी के दोनों दूसरे छोर, वक्षों के लगभग बीच पर आकर सामने के भाग से जुड़े हुए थे।

कामिनी के वक्ष आधे ही ढके थे। यही नहीं गले की बीच की गहराई नाभि के दो अंगुल ऊपर ही ख़त्म हो रही नाइटी ज़्यादा ढीली नहीं थी। इसलिए लगभग बदन से चिपकी हुई थी। नाइटी कामिनी के बदन के उतार-चढ़ाव को साफ़ दिखा रही थी।

नाइटी पहनने के बाद कामिनी रसोई में गई। दोपहर का बचा हुआ खाना खाने लगी, कारण उसे कुछ बनाने का मन नहीं था और वो कोई काम करके थकना नहीं चाहती थी।

खाना खाने के बाद कामिनी टीवी देखने बैठी पर उसका मन नहीं लगा तो वो कंप्यूटर पर पोर्न देखने लगी। अर्चना से परे आज उसका मन पोर्न देखने में भी नहीं लगा तो वो बिस्तर पर आकर लेट गई।

आज कामिनी को नींद कहाँ आनी थी! कुछ देर बाद उसने अपनी नाइटी बिस्तर पर उतार फेंकी और नग्न ही बाल्कनी में आ कर खड़ी हो गई। क्योंकि सामने खुला मैदान था और इस वक्त रात के 12 बज चुके थे। उसे किसी के देखने का डर नहीं था। आज तो वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि अगर कोई देख भी लेता तो शायद उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

कामिनी को बाल्कनी में खड़े हुए कुछ वक़्त ही हुआ था कि अचानक ज़ोरों की बरसात शुरू हो गई। कुछ देर ठंडी हवा खाने के बाद कामिनी बाथरूम में चली गई, और गरम पानी के टब में घुस गई। जब पानी ठंडा हो गया तो वो बाहर आ गई।

उसने अपने शरीर पर खूब सारा बॉडी लोशन लगा कर मालिश की। इसके बाद वो वापस बिस्तर पर आकर नग्न ही लेट गई। और भीम के ख्यालों में खो गई।

तभी अचानक कामिनी को घंटी बजने की आवाज़ आई उसने तुरंत घड़ी की ओर देखा और पाया कि रात के 3 बजे थे। वो एकदम विचलित हो गई और उसे लगा कहीं उसका पति वापस तो नहीं आ गया। यह सोचते हुए उसने अपनी नाइटी उठा कर पहन ली, और दरवाज़े की तरफ भागी दरवाज़ा खोलते ही जो उसने देखा तो उसके होश ही उड़ गए।

कहानी का अगला भाग:कामिनी की अतृप्त कामाग्नि-2

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कामिनी की अतृप्त कामाग्नि

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सोनू वाडिया

1 month ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

मानव

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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