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कोई मिल गया पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 843 बार

कोई मिल गया-2

अरविन्द कुमार

16 Aug 2015 को प्रकाशित

कोई मिल गया-2
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लेखिका : आयशा खान

प्रेषक : अरविन्द

सुरैया उस अजनबी के बदन से अलग हुई और वो दोनों नीचे हम लोगों के पास आ गये।

उस अजनबी का लंड अभी भी सख्त था और उस पर सुरैया की चूत का गाढ़ा सफ़ेद रस लगा था।

तभी उस अजनबी ने आलोक के पीछे आकर उसके चूतड़ को सहलाया और फिर एक उंगली आलोक की गाण्ड में पेल दी।

एकाएक गाण्ड में उंगली जाने पर आलोक दर्द से कराह उठा और मेरी चूची उसके मुँह से बाहर हो गई। वह अजनबी आलोक के दर्द की परवाह ना कर उसकी गाण्ड की उंगल-चुदाई करने लगा। तभी सुरैया एकदम नंगी ही मेरे पास आई और आलोक के थूक से भीगी मेरी चूचियों को चाटने लगी। अब कैबिन में चारों जने एक दूसरे से उलझे थे, अब वह अजनबी अपने भारी लंड को धीरे धीरे आलोक की गाण्ड में पेल रहा था और आलोक का लंड मेरी रिस रही चूत में उस अजनबी के धक्के के साथ आ जा रहा था।

सुरैया मेरी चूचियों को मज़ा दे रही थी और मैं उसकी चूत पर लगे चुदाई के पानी को उंगली में ले लेकर चाटने लगी।

जब उस अजनबी का पूरा लंड आलोक की गाण्ड में चला गया तो वह गाण्ड मारने लगा और मैं उसके हर धक्के के साथ नीचे से अपनी गाण्ड उचका उचका कर आलोक के लंड को निगल रही थी। कैबिन में हम चारों की आवाज़ें गूँज रही थी जिससे बड़ा ही अनोखा संगीत बन रहा था। सुरैया को चोदने में वह अजनबी झड़ा नहीं था इसलिए वह आलोक की गाण्ड में झरने को बेकरार था।

काफ़ी देर बाद आलोक का गाढ़ा पानी मेरी चूत में गिरने लगा तो मैंने उसकी गर्दन को मज़बूती से अपने पैरो में जकड़ा और खुद भी झरने लगी। इधर वह अजनबी भी आलोक की गाण्ड में अपना रस छोड़ने लगा। आलोक गाण्ड में गरम पानी महसूस कर काँपने लगा। मैंने झरते हुए सुरैया के सिर को अपनी चूचियों पर कस लिया था।

हम सभी झरने के बाद सुस्त पड़ गए। कुछ देर बाद उस अजनबी ने अपना लंड आलोक की गाण्ड से बाहर किया तो आलोक भी मुझसे अलग हुआ, मेरी चूत से आलोक के लंड का रस बाहर आने लगा और उसकी गाण्ड से भी रस बाहर गिरने लगा। सुरैया ने अपनी शमीज़ से मेरी चूत साफ की और फिर मैं और सुरैया कपड़े पहनकर टायलेट चले गये। वहाँ जाकर हम दोनों ने पेशाब किया और बिना कुछ बोले वापस आ गई।

जब कैबिन में वापस आए तू वी दोनो कपड़े पहनकर आपस में गपशप कर रहे थे। आलोक ने उस अजनबी का परिचय देते हुए कहा- आयशा डार्लिंग, ये हैं मिस्टर विकास ! सॉफ्टवेयर इंजिनियर हैं, दिल्ली तक जा रहे हैं और डार्लिंग ये हम लोगों का साथ दिल्ली तक देंगे।

“ओह मिस्टर विकास, आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई ! आलोक ये बहुत ही दमदार आदमी लगते हैं !” मैं मस्त होकर बोली।

ट्रेन अपनी रफ़्तार से चली जा रही थी, हम लोग आपस में गपशप करते और साथ में छेड़खानी भी कर रहे थे। अब हम लोग नीचे की बर्थ पर ही थे. एक पर मैं आलोक के ऊपर लेटी थी और दूसरी बर्थ पर सुरैया विकास के ऊपर लेटी थी। आलोक मेरी चूचियों को छेड़ रहा था जबकि विकास सुरैया की गाण्ड सहला रहा था। हम लोग एक दूसरे को देखकर मुस्करा रहे थे।

रात के 2 बज रहे थे, अब आलोक मेरे गालों को चूमते हुए मेरी चूत के घने बालों को सहला रहा था और सुरैया विकास के लंड को सहला रही थी। विकास भी उसके मम्मों को मसल रहा था जिससे वह सिसक रही थी। तभी मेरा दिल विकास के लंड के ख्याल से सुलग उठा, उसका लंड आलोक के लंड से काफ़ी तगड़ा था। आलोक के लंड का मज़ा तो मैं ले ही चुकी थी, अब मेरा मन विकास के लंड से चुदवाने को बेकरार हो गया।

यह ख्याल आते ही मैं बोली- मेरा ख्याल है कि अब हम लोग अपने अपने साथी बदल लें?

मेरी बात सुनकर विकास मुझे घूरने लगा। उसके घूरने के अंदाज़ से मैं समझ गई कि वह भी मेरी जवानी को चखना चाहता है। मैं उसके घूरने पर मुस्करती हुई बर्थ से उठी तो वह फ़ौरन मेरे पास आया और चिपक कर मुझे चूमने लगा। उसका चुम्बन मुझे मदहोश कर गया और मैं उससे चिपक गई।

आलोक और सुरैया एक बर्थ पर चुपचाप बैठे हम दोनों को देख रहे थे। मैं विकास के साथ खूब आ ऊ कर सीसियाते हुए मज़ा ले रही थी, हम दोनों एक दूसरे को होंठों पर किस कर रहे थे, विकास मेरे नाज़ुक बदन को भींचकर मेरे होंठ चूमते हुए मेरी जम्पर को मेरे बदन से अलग करने लगा। मुझे इस वक़्त कपड़े बहुत भारी लग रहे थे, नंगे होकर ही चुदाई का मज़ा अलग ही आता है।

कुछ देर में विकास ने मुझे नंगा कर प्रिया और मेरी गोरी गोरी चूचियों को मेरे पीछे से चिपककर पकड़ लिया और दबाने लगा। इस तरह से उसका लंड मेरी गाण्ड की दरार पर चिपका था और मेरी सनसनी बढ़ने लगी।

मैंने आलोक और सुरैया को देखा, वो अलग अलग बैठे हमें ही देख रहे थे। अब विकास अपनी उंगली को मेरी चिपकी जाँघों पर लाकर मेरी चूत सहलाने लगा था। तभी उसने मेरी क्लिट को मसला तो मेरी चूत ने जोश में आकर पच से पानी बाहर फेंक प्रिया। मैं मस्त होकर चूत में लंड डलवाने को बेकरार हुई तो विकास के कपड़े खोलकर उसे भी एकदम नंगा कर प्रिया।

ओह, नंगा होते ही विकास का लंड फुदकने लगा, एकदम लोहे के डण्डे की तरह लग रहा था। उसका लंड अपने हाथ में लेकर मैं सहलाने लगी, सच में यह आलोक के लंड से काफ़ी बड़ा था। मैं हाथ से मुठियाने लगी तो विकास मेरी चूत को उंगली से चोदने लगा।

कुछ देर बाद विकास नीचे बैठा और अपना चेहरा मेरी जाँघों के बीच ला मेरी चूत पर जीभ फिराने लगा।

मैं सुरैया से बोली- अरे सुरैया, तुम क्या हम लोगों को ब्लू फिल्म की तरह देख रही हो? अरे क्यों मज़ा खराब कर रही हो? तुमको लंड की ज़रूरत है और आलोक को चूत की, तुम आलोक के लंड का मज़ा लो।

मेरे बोलने का असर उन दोनों पर हुआ, उन दोनों ने एक दूसरे को देखा फिर आलोक उठकर सुरैया के पास गया और उसके गाल को चूमने लगा। सुरैया गाल पर चुम्बन पाकर मस्त हो गई और खड़ी होकर आलोक से चिपककर उसके होंठ चूमने लगी।

मैंने विकास के चेहरे को अपनी चूत पर दबाया और उन दोनों को देखने लगी। आलोक जम्पर के अंदर हाथ डालकर सुरैया की चूचियों को पकड़े था और सुरैया आलोक के लंड को। अगले कुछ ही वक़्त में आलोक ने सुरैया को एकदम नंगा कर प्रिया। सुरैया की चूत पर घुंघराले बाल थे जिनको आलोक उंगली से सहलाने लगा। सुरैया ने आलोक के लिए अपनी जांघों को फैलाया हुआ था।तभी आलोक ने उसे उठाकर बर्थ पर लिटा प्रिया. तब सुरैया ने दोनों पैरो को चौड़ा किया तू विकास की तरह आलोक भी उसकी चूत पर झुकता चला गया, आलोक अपनी जीभ निकालकर सुरैया की चूत को चाटने लगा, सुरैया के पैर मेरी तरफ होने की वजह से नज़ारा एकदम साफ़ दिख रहा था। सुरैया कमर उछाल कर अपनी फ़ुद्दी चटवा रही थी।

फिर आलोक ने अपनी जीभ सुरैया की चूत में पेल दी और सुरैया अपनी चूत को आलोक की जीभ पर नचाने लगी। सुरैया की चूत के नमकीन रस को आलोक मज़े से चाट रहा था।

इधर विकास भी आलोक की तरह मेरी चूत की गुलाबी मोरी में अपनी जीभ पेलकर मेरा जिह्वा चोदन कर रहा था. आलोक की तरह विकास ने भी मेरी टाँगों को फैलाया हुआ था।

मैं जब बेकरार हो गई तो बोली- ओह विकास डार्लिंग अब चूत को चूसना खत्म करो और मेरी चूत में अपना लंड डाल दो, नहीं तो मैं मर जाऊँगी, आ जल्दी चोद मुझे !

मेरी बात सुनकर विकास ने अपने लंड को मेरी चूत पर सटाकर एक करारा शॉट मारा तो उसका लंड मेरी चूत को फ़ाड़ता हुआ अंदर जाने लगा। दर्द हुआ तो मेरे मुँह से निकल पड़ा- हय विकास, आराम से ! ओह तुम्हारा तो आलोक से बहुत मोटा है। ज़रा धीरे धीरे पेलो डार्लिंग ! मैं कही भागी नहीं जा रही हूँ !

विकास मेरी बात सुनकर रुक गया और मेरी चूचियों को दबाने लगा। वह लंड को मेरी चूत में डाले दोनों मम्मों को दबा रहा था। कुछ देर बाद दर्द कम हुआ और मज़ा आया तो मैं नीचे से गाण्ड उचकाने लगी। वह मेरी कमर के उछाल को देखकर समझ गया और धक्के लगाने लगा।

कुछ पल में ही उसका लंड मेरी चूत की तह में ठोकर मारने लगा। विकास के साथ तो अनोखा मज़ा आ रहा था, उसके पेलने के अंदाज़ से ज़ाहिर हो रहा था कि वह चुदाई में माहिर है।वह मेरे मम्मों को दबाते हुए चूत की तली तक हमला कर रहा था। मैं होश खो बैठी थी, उधर चूत चूसने के बाद आलोक सुरैया की चूचियों को चूस रहा था। सुरैया अपने हाथ से अपने मम्मों को आलोक को चूसा रही थी। सुरैया ने आलोक के कपड़े अलग कर दिए थे और उसके लंड को मुठिया रही थी।

वह मेरी ओर देखकर बोली- ओह आलोक, देखो ना विकास और आयशा को कैसे मज़े से चोद रहा है। तुम भी अब मुझे तरसाओ नहीं और जल्दी से मेरी चुदाई करो।

आलोक ने सुरैया के पैरों को अपने कंधे पर रखकर लंड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया तो सुरैया बोली- हाय मेरे राजा, क्यों मुझे तड़पा रहे हो? हय जल्दी से मुझे अपने लण्ड से भर दो।

आलोक ने अपने लंड को उसकी चूत पर लगा धक्का लगाया तो चौथाई लंड उसकी चूत में चला गया। सुरैया ने उसके चूतड़ों को दबाते हुए कहा- पूरा डाल कर मेरी फ़ुद्दी मारो !

वो दोनो एक दूसरे के विपरीत धक्के लगाने लगे और इस तरह आलोक का पूरा लंड सुरैया की चूत में चला गया। सुरैया की चूत के बाल उसके लंड के चारों ओर फैल गये थे। आलोक पूरा पेलकर उसके मम्मों को मसलने लगा था।

इधर विकास मेरी चूत में अपने मोटे लंबे लंड को पक्क पक्क अंदर-बाहर कर रहा था और मैं हर धक्के के साथ सिसक रही थी। आलोक से ज़्यादा मज़ा मुझे इस अजनबी विकास के साथ आ रहा था। मैं चुदवाते हुए दूसरी बर्थ पर भी देख रही थी। आलोक उरोजों को मसलते हुए सुरैया की चूत को चोद रहा था और वह नीचे से कमर उचकाते हुए आलोक की गाण्ड को कुरेद रही थी।

अब आलोक सुरैया की चूचियों को मुँह में लेकर चूसते हुए तेज़ी से चुदाई कर रहा था।

सुरैया मदहोशी में बोली- ओह आलोक, मेरे यार, बहुत मज़ा आ रहा है ! हाय ! और ज़ोर से चोदो ! पूरा जाने दो ! फाड़ दो मेरी चूत ! चिथड़े उड़ा दो !

सुरैया पूरे जोश में अपनी कमर उचकाकर लंड का मज़ा ले रही थी। मैं उन दोनों की चुदाई का नज़ारा करते विकास से चुदवा रही थी। विकास ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा तो मुझे ऐसा लगा कि मेरी चूत से पानी निकल पड़ेगा।

ऐसा महसूस करते ही मैं विकास से बोली- आ विकास डार्लिंग, मेरा निकलने वाला है, राजा मेरी हेल्प करो, तुम भी मेरे साथ ही अपनी मलाई मेरी चूत में ही निकालो।

विकास पर मेरी बोली का असर हुआ और वह तेज़ी से चुदाई करने लगा, कुछ देर में ही मेरी चूत से फव्वारा चलने लगा और मेरे साथ ही विकास के लण्ड की पिचकारी भी चल दी। उसकी पिचकारी ने गरम पानी से मेरी चूत भर दी।

जब मेरी चूत भर गई तो मलाई चूत से बाहर निकलने लगी। झड़ने के बाद हम दोनों एक दूसरे लिपटकर उखड़ी सांसों को दुरुस्त करने लगे।

मेरा ध्यान फिर सुरैया की तरफ गया। सुरैया मदहोशी में कराह रही थी और कमर को लहराते हुए आलोक से चुदवा रही थी। कुछ देर बाद जब विकास अलग हुआ तू में उठकर सुरैया के पास गई, मेरी चूत लंड के पानी से चिपचिपा गई थी और विकास के लंड ने इतना ज़्यादा पानी उगला था कि जांघें तक भीगी थी।

मैं ऐसे ही सुरैया के पास गई और उसको लिप्स पर किस करने लगी। सुरैया ने मेरी गर्दन को अपने हाथों से पकड़ लिया और मेरे सिर को अपनी चूचियों पर लाने लगी. मैं समझ गई कि वह अपनी चूचियों को चुसवाना चाहती है।

मैं उसके एक मम्मे को मुँह में लेकर चूसने लगी, उसकी एक मोटी मोटी चूची को चूसते हुए मैं दूसरी को दबाने लगी। सुरैया चूतड़ तेज़ी से उठाने गिराने लगी और आलोक भी ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगा।

20-22 धक्कों के बाद सुरैया की गाण्ड रुक गई, उसकी चूत से पानी गिरने लगा था। आलोक ने भी दो चार धक्के और लगाए और सुरैया के ऊपर लेटकर लंबी लंबी साँसें लेने लगा। उसका लंड भी गरम लावा निकाल रहा था। आलोक अपनी क्लासमेट की चूत में अपने लंड का माल उड़ेल रहा था। वो दोनों काफ़ी देर तक सुस्त होकर एक दूसरे से चिपके रहे।

फिर वो अलग हुए तो मैंने सुरैया की ओर अपनी चूत कर दी औड़ खुद उसकी चूत चाट कर साफ़ करने लगी। सुरैया भी मेरी चूत चाटने लगी। फिर हम दोनों ने उन दोनों के ढीले लण्डों को भी चाट कर साफ किया। फिर हम लोग अलग होकर सोने चले गये।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

योगी पण्डित

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

सतीश पटेल

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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