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कोई मिल गया • पठन समय: 10 मिनट • पढ़ा गया: 914 बार

मुझे बस में मिली लड़की

riya_singh20092000

09 Feb 2017 को प्रकाशित

मुझे बस में मिली लड़की
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प्रेषक : रिया सिंह

मेरी उम्र २५ साल है, पेशे से एक डॉक्टर हूँ। कॉलेज ख़तम किये छः महीने ही हुए हैं। मैंने अपनी डिग्री शिमला से की है। मैं कॉलेज से ही उम्र में बड़ी उम्र की औरतों का बहुत शौकीन हूँ।

एक बार मैं घर से शिमला जा रहा था बस में। रास्ते में एक बहुत खूबसूरत लड़की बस में चढ़ी और मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गई। रंग एकदम गोरा और भरी भरी काया ! बस फिर क्या था, मैं सोचने लगा कि कैसे उसके साथ बैठूं !

एक स्टाप पर जाकर जब बस रुकी तो मैं कुछ लेने के बहाने बस से उतरा और उसे कहा कि मेरी सीट का ख्याल रखे। पर जब मैं वापिस चढ़ा तो वहाँ कोई मोटा सा अंकल बैठा हुआ था। बस मैं उसे भला बुरा कहता हुआ उस लड़की के साथ बैठ गया।

अब वो मुझे घूर कर देखने लगी। मैं भी चुपचाप उसे अनदेखा करके बैठ गया। फिर धीरे से उसकी तरफ देखा, उसके स्तन उसके बिन बाजू के ब्लाऊज़ से दिख रहे थे। मैं अपने आप पर काबू न कर पाया और मेरा लण्ड झटके मारने लगा।

पर जैसे उसने मुझे घूर कर देखा, मेरी हिम्मत नहीं हुई दोबारा उसकी आँखों में देखने की।

करीब एक घंटे बाद उसने मुझे खुद बोला- मैंने आपको पहले कहीं देखा है !

मैं सकपका गया। मैंने पूछा- कहाँ?

वो बोली- नहीं जानती, पर देखा ज़रूर है।

मेरे दिल में ख़ुशी के लड्डू फूट रहे थे।

मैंने उसे कहा- शायद आपने मुझे मेडिकल कॉलेज में देखा होगा।

तब वो बोली- हाँ ! मैं अपनी बहन को चेक करवाने आई थी।

बस फिर क्या था, बातों का सिलसिला शुरु हो गया। अब मैं समझा कि वो मुझे घूर कर देख नहीं रही थी बल्कि पहचानने की कोशिश कर रही थी।

जब उसने मुझे बताया कि वो दो बच्चों की अम्मा है तो मैं हक्का-बक्का रह गया।

फिर उसने मुझे अपनी सारी कहानी सुनाई कि कैसे उसकी शादी छोटी उम्र में हो गई और उसका अकेलापन।

जैसे कोई मरीज डॉक्टर से कोई बात नहीं छुपाता वैसे ही वो अपनी हर बात बताती गई!

और मैं भी एक अच्छे डॉक्टर की तरह उसकी हर बात सुनता गया।

जब वो बस से उतरी तो उसने मुझे अपना फ़ोन नम्बर प्रिया और अपने घर की तरफ चली गई और मैं अपने हॉस्टल की तरफ !

तब तक मेरे दिमाग में कुछ भी उल्टा सीधा नहीं था। अब घर से इतने दिनों बाद आया था तो दोस्तों के साथ मिलकर शाम को थोड़ी सी शराब पी ली और फिर अपने कमरे में सोने चला गया। तभी मेरी आँखों के सामने नीरू का चेहरा घूमने लगा (नीरू जो लड़की मुझे बस में मिली) उसके गोल मटोल स्तन, उसकी दिल को चीर देने वाली हँसी, उसका भोला सा चेहरा और उसकी भारी गाण्ड ! यह सब मेरी आँखों के सामने घूमने लगे।

मैंने मोबाइल निकाला और लगा प्रिया नंबर !

रात के १२ बज रहे थे, मैंने सोचा कि वो सो गई होगी तो मैंने फ़ोन काट प्रिया।

थोड़ी देर बाद उसका फ़ोन आया और मुझे पूछने लगी कि फ़ोन क्यूँ किया?

मैंने कहा- बस तुम्हारी याद आ रही थी, इसलिए कर लिया। पर सॉरी मुझे समय का ख्याल नहीं रहा !

वो बोली- नहीं ! मैं जाग रही थी !

मैंने पूछा- वो क्यूँ?

वो बोली- बस मुझे भी तुम्हारी याद आ रही थी !

बस मेरा मन खुश हो गया। थोड़ी देर और बातें चली और उसने बताया कि वो अकेली सोती है अपने पति के साथ नहीं।

इस तरह मैंने उसे अगले दिन मिलने के लिए बुला लिया।

वो दूसरे दिन ठीक मेरे बताये हुए समय पर पहुँच गई जब हॉस्पिटल बंद होने का वक़्त होता है।

मैंने उससे पूछा- कहाँ चलें?

वो बोली- तुमने बुलाया है ! तुम हो ले चलो कहीं भी !

मैं अपनी फुद्दुपंथी पे इतना पछताया कि किसी कमरे का इंतजाम भी नहीं किया था मैंने।

मैंने नहीं सोचा था कि वो आते हो मुझसे ऐसे बोलेगी, पर क्या कर सकते थे, मैं उसे हॉस्पिटल के पीछे एक सुनसान जगह पर ले गया और कहा- तुम बहुत खुबसूरत हो नीरू ! मैं तुम्हें चाहने लगा हूँ !

तो वो यह बात सुन कर डर गई और बोली कि उसके दो बच्चे हैं और वो उनसे बहुत प्यार करती है। वो इन बन्धनों से बंधी हुई है।

पर मेरे उसे समझाने पर कि मैं किसी को नहीं पता लगने दूंगा हमारे बारे में, उसने मुझे चूमने प्रिया। धीरे धीरे मैं उसके वक्ष को चूमने लगा। मुझे पता हो नहीं चला कब मेरा हाथ उसके पिछवाड़े पर चला गया और वहां उंगली करने लगा।

वो बहुत उत्तेजित हो गई थी। वो मुझसे छिटकते हुए बोली- बस, बहुत हो गया ! तुम हद पार कर रहे हो !

वैसे बात भी सही थी, वहां कोई भी आ सकता था। मैंने उसे जाने प्रिया और वो भागते हुए वहाँ से चली गई।

फिर रात को मैंने उसे फोन किया और अपने किये पर सॉरी बोला। उसे मिलने के लिए बुलाया फिर से !

पहले तो उसने ना-नुकुर की पर उसके दिल में जो मेरे लण्ड को चखने की चाह थी, शायद वोही खाज उसे मेरे पास मिलने के लिए ले आई।

इस बार मैं पूरी तरह से तैयार रहना चाहता था। वो बुधवार का दिन था और मैं बुधवार को नॉन-वेज़ खा लेता हूँ। वो आई और चुपचाप मेरे साथ चलने लग पड़ी। हम मेरे दोस्त के कमरे पर पहुंचे, हॉस्टल तो ले जा नहीं सकता था नहीं तो जोर आजमाइश वाला चोदन हो जाता उसका।

कमरे पर पहुँचते हो मैंने उसका पर्स एक कोने में फ़ेंक प्रिया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया। वो थोड़ा शरमाई।

मैंने पूछा तो बोली- डर लगता है !

मैंने उसे कहा- दो बच्चों की माँ होकर डर लगता है तुझे?

तो बोली- यह बात नहीं है ! डर लगता है कहीं तुमसे प्यार न हो जाए !

मैंने उसे समझाया कि डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, देख, मैं ठहरा अकेला लोंडा अभी, और कल को मेरी शादी हो जायेगी, और मैं हूँ डॉक्टर तो सोसाइटी में तो कभी नहीं पता लगने दूंगा। बाकी सब तुम पर है कि तुम सुख चाहती हो या नहीं !

वो यह सब सुनते हो मेरी बाँहों में लिपट गई, मैंने उसे चूमना शुरू कर प्रिया और न जाने कब उसके स्तन मेरे हाथों मैंने आ चुके थे, और मैं पहुँच गया स्वर्ग वाटिका में।

धीरे-धीरे मेरा हाथ उसके नाड़े की तरफ बढ़ गया। मैंने हलके से उसका नाड़ा खींच प्रिया। जिस काले सूट की मैं तारीफ कर रहा था वो अब बेडशीट का काम कर रहा था और उसकी लाल कच्छी आवाज़ दे दे कर मुझे बुला रही थी कि आओ और मुझे उधेड़ दो।

मेरे लण्ड का आकार जो कभी ७ इंच से बड़ा नहीं हुआ था, आज १ इंच ज्यादा होने की दौड़ में था।

वो मेरे ऊपर अपने भारी पिछवाड़े को सटा कर बैठी हुई थी। मैंने उसके नंगे स्तन अपने मुँह में लेकर जैसे हो चबाये कि वो सिस्कारियां भरने लगी, उसकी ऐसी आवाजें सुनकर मेरा बुरा हाल हो गया। मेरा लण्ड तो मानो जैसे सुन्न हो गया। बस मुझे तो उसका भरा हुआ शरीर ऐसे लग रहा था कि एक एक हिस्सा खा जाओ।

उसकी मेमने की तरह गदराई हुई फुदी के सुनहरे बाल !

उन्हें अपनी जीभ से सहलाते हुए मैं फुदी के द्वार पर पहुंचा, पर वहीं पर उसने मुझे रोक लिया और वो सी सी सी करती हुई मुझसे लिपट गई, मेरे कान में धीरे से फुसफुसाती हुई बोली- इतनी ख़ुशी इकट्ठी मत दो कि मैं संभाल न पाऊँ !

इससे पहले वो कुछ और बोल पाती उसकी आँखों से आंसू बह निकले, उधर आँखों से आंसू और इधर फुदी से आंसू !

अब मैं समझ नहीं पा रहा था मैं किन आंसुओं पर ध्यान दू..

फिर मैंने चुने फुदी के आंसू और अपनी दो उँगलियों से उसकी फुदी सहलाने लगा और उसे औंधे मुंह लेटा कर अपना लण्ड-बाबा उसकी फुदी पे लगाया। मेरा लण्ड उसके अंदर जाता गया और वो मेरी तरफ धक्के लगाते हुए और अंदर अंदर, बस थोड़ा और, सी सिस इस सी ,, उईईईम उइंमा बस थोड़ा और बस थोड़ा और,,,, आज मुझे मत छोड़ना अधूरी….

मैं बरसों की प्यासी हूँ ! मुझे भर दो अपने गरम लौड़े से…

इतना कुछ सुनने के बाद भी मेरा लण्ड था कि बस लगा हुआ था बुरी तरह से… तभी नीरू पूरा जोर लगा कर मुझे अपनी और खींचने लगी… मैं समझ गया कि वो झड़ रही है… मैंने सोचा फटाफट अपना काम भी निपटा लो वरना फिर उसे पता नहीं कब इतनी पॉवर आये, पहले तो मैं उसे खाना चाहता था, पर अब शायद वोही मुझे खा रही थी… उसकी सिस्कारियों के दौरान मेरी चमड़ी पे उसने अपने नाखूनों से कई घाव कर दिए थे, बहुत जंगली थी वो…

तो दोस्तो, मैंने कई बार मजे लिए उससे पर मैं उसे आज भी नहीं भूल पाया हूँ….. वो जहाँ भी रहे खुश रहे…हमे मिले हुए पूरा एक साल हो गया है… मैं आज भी उसे याद करता हूँ… और इसी तलाश में हूँ कि वैसी कोई मस्त फुदी फिर मिल जाए …

आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे ज़रूर लिखें…

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
अ

अंजलि शर्मा सेक्सी

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

न

नवनीत शर्मा

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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