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मुम्बई के सफ़र की यादगार रात-3

सन्दीप शर्मा

01 Jan 2023 को प्रकाशित

मुम्बई के सफ़र की यादगार रात-3
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लेखक : सन्दीप शर्मा

मैं थोड़ा और नीचे खिसक कर उसकी नाभि के पास आया और मैंने उसकी नाभि के चारों तरफ अपनी जीभ चलाना शुरू कर दी। मेरी जीभ जैसे ही उसकी नाभि पर गई वो तो उछल गई, उसने हाथों से मेरे बालों को नोचना शुरू कर प्रिया और अपने पैरों को मेरी पीठ पर लपेट लिया। मैंने अपनी जीभ को उसकी नाभि के अंदर तक घुसा प्रिया और जोर जोर से चलाने लगा, मेरा सीना उसकी चौड़ी टांगों के बीच में था जिससे वो खुद को रगड़ रही थी। मैंने उसकी नाभि के छेद को जीभ से चूसना लगातार चालू रखा और वो मुझे अपने में समाने की कोशिश करते हुए अचानक अकड़ने लगी और मैं कुछ समझता उससे पहले ही वो बुरी तरह से झड़ने लगी और झटके मारने लगी।

हर झटके के बाद उसकी पकड़ ढीली होती और हर झटके के वक्त मुझे कस लेती, जब वो दस-बारह झटके मार कर पूरी तरह से झड़ गई तो बड़े प्यार से उसने मेरे सिर को पकड़ कर मुझे ऊपर की तरफ खींचा और मैं भी उसकी तरफ खिचंता चला गया।

उसने अपने तपते हुए होंठ को मेरे होंठों पर रख दिए… और हम दोनों फिर एक दूसरे को के होंठों का रसपान करने लगे, जिस तरह से साक्षी झड़ी थी मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि वो दूसरी बार के लिए भी इतनी जल्दी तैयार होगी, अब उसने मुझे पलट कर नीचे कर प्रिया और खुद मेरे ऊपर आ गई और उसके ऊपर आने के बाद उसके नर्म नर्म स्तन मेरे सीने पर दब रहे थे, उसके होंठ मेरे होंठों को चूस रहे थे, उसके हाथ मेरे बालों पर चल रहे थे और मेरे हाथ उसकी ब्रा को खोलने में मग्न थे।

वो मुझे चूमती जा रही थी और मैंने उसकी ब्रा खोलने के बाद मेरे हाथों से उसकी पैंटी को भी थोड़ा सा नीचे खसका प्रिया और फिर मेरे पैरों का इस्तेमाल करते हुए उसकी पैंटी को पूरा निकाल प्रिया, जिसमें साक्षी ने भी मेरी पूरी मदद की।

अब साक्षी पलट कर के मेरे पैरों की तरफ आ गई और मेरे लण्ड को उसने मुँह मे लेकर चूसना शुरू कर प्रिया, कभी वो मेरे लण्ड को सीधे चूस रही थी कभी बगल से चाट रही थी और कभी मेरी अंटियों को मुँह में भर ले रही थी और दूसरी तरफ मैं भी उसकी चूत को चूमते जा रहा था, कभी मेरे होंठों से उसके निचले बड़े बड़े होंठों को मुँह मे भर कर निचोड़ लेता तो कभी वो मेरे लण्ड के सुपारे को अपने मुँह से निचोड़ रही थी…

हम दोनों का यही सब काम कुछ देर तक चला था कि मैं झड़ने वाली हालात में आ गया, मैंने कहा- साक्षी, मैं झड़ने वाला हूँ !

यह सुनते ही उसने मेरे लण्ड को चूसना बंद कर प्रिया, मेरे लण्ड के सुपारे की चमड़ी को पलट कर उसे चाटने लगी और जोर जोर से जीभ सुपारे के ढके रहने वाले संवेदनशील हिस्से पर चलाने लगी और जीभ से उसे चाटने लगी।

मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ ! और इसके साथ ही वो अपनी चूत को भी मेरे होंठों पर रगड़े जा रही थी। मेरी हालत ऐसी थी कि मैं कभी भी झड़ सकता था।

साक्षी ने इसी तरह से कुछ देर मेरे सुपारे को चाटा और फिर मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर उसे वापस चूसना शुरू कर प्रिया और मैं पूरे वक्त उसकी चिकनी चूत को चूस रहा था, रस का मजा ले रहा था, उसकी मोटी गाण्ड को मसल रहा था कि अचानक वो झड़ने लगी, वो झड़ते हुए मेरे लण्ड को भी जोर जोर से चूस रही थी और मैं भी झड़ने लगा, कभी मैं झटका मार रहा था कभी वो !

साक्षी की चूत से ढेर सारा नमकीन रस निकला जो मैं पूरा पी गया और मेरे सारे वीर्य को वो पी गई, उसने एक बूँद भी इधर उधर नहीं जाने दी, पूरा वीर्य अंदर गटक गई।

जब हम दोनों का झड़ना बंद हुआ तो मैं तो बुरी तरह से थक चुका था और साक्षी की भी हालत कोई ठीक नहीं थी तो वो मेरे बगल मे आ कर मेरे दायें कंधे पर सर रख कर लेट गई और मेरे बालों को सहलाने लगी और बड़े प्यार से बोली- तुम्हें कम से कम तुम्हारे प्यूबिक हेयर तो साफ़ करके रखना चाहिए ना ! कितनी तकलीफ देते हैं, मुँह में आते हैं।

मैंने कहा- सॉरी डार्लिंग ! आगे से कर लूँगा !

और लेटे लेटे ही फोन उठा कर पावभाजी का एक्स्ट्रा पाव के साथ आर्डर दे प्रिया, और चार बोतल पानी की भी लाने को कह प्रिया। मुझे सेक्स के बाद यूँ भी बहुत भूख प्यास लगती है और तब तो दिन भर का भूखा था ही।

मैंने खाने का आर्डर दे प्रिया तो वो बोली- थोड़ा आराम कर लो, फिर कुछ काम करना पड़ेगा..

मैंने कहा- काम तो आज रात भर करना है ! जानू, तुम क्यों चिंता करती हो?

हम दोनों थोड़ी देर लेटे थे कि दरवाजे की घंटी बजी… साक्षी ने कम्बल पूरी तरह से ओढ़ लिया मैने जल्दी से शर्ट पहनी, तौलिया लपेटा और जाकर ट्रॉली ले ली और वेटर को बाहर से ही चलता कर प्रिया।

अब हम दोनों ने पाव भाजी खाई और उसके बाद साक्षी मुझसे बोली- अब तुम्हें एक काम करना होगा मेरी मर्जी से…

मैंने कहा- हुकुम करो जान ! क्या करना है?

वो उठी, उसके बैग में से कुछ निकालने गई और मुझसे बोली- तुम बाथरूम में चलो, मैं भी आ रही हूँ।

मैं आज्ञाकारी बच्चे की तरह बिना किसी सवाल के बाथरूम में चला गया, पीछे पीछे वो भी आई, जब वो अंदर आई तो उसके हाथ में…

इसके बाद की कहानी अगली कड़ी में !

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मुम्बई के सफ़र की यादगार रात

कुल भाग: 6
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

संजय ठाकुर

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

कूल ऑनेस्ट

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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