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Group Sex Story पठन समय: 19 मिनट पढ़ा गया: 523 बार

कुंवारी चूतों का मेला-1

विशु कपूर

05 Jan 2015 को प्रकाशित

कुंवारी चूतों का मेला-1
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मेरा नाम विशू कपूर है और मैं आगरा से एक 23 साल का एक युवक हूँ।

मेरे परिवार में मेरे माताजी, पिताजी, ताऊजी, ताईजी, भैया (ताऊजी के बेटे) और भाभी हैं।

सभी लोग पास के एक गाँव में रहते हैं लेकिन पढ़ाई की वजह से मैं केवल ही आगरा वाले मकान पर रहता हूँ।

शुरुआत में कभी कभार दो चार दिन के लिए माताजी मेरे पास आ जाती थी लेकिन अब उनकी तबीयत ख़राब होने के कारण मेरे पास नहीं आ पाती हैं।

बात आज से करीब दो साल पहले की है जब मेरे भैया, भाभी को लेकर अपनी ससुराल गए तो वहाँ भाभी के चाचा-चाची अपनी बेटी शालू की पढ़ाई को लेकर परेशान थे मगर कहने से घबरा रहे थे कि कहीं भतीजी और दामाद भी परेशान न हो जायें।

जब भैया भाभी ने काफी जोर देकर पूछा तो उन्होंने बताया कि हमारी चिंता का विषय यह है कि शालू ने इस साल बारहवीं पास कर ली है और वह आगरा से बी. एस. सी. करना चाहती है लेकिन वह आगरा में कैसे और कहाँ रहेगी? आप तो जानते ही हैं कि हमारी इतनी हैसियत नहीं कि हम हॉस्टल का भारी खर्चा उठा सकें।

तो भैया ने तपाक से जवाब प्रिया- चाचाजी, आपको जरा भी परेशान होने की जरूरत नहीं है, आगरा में अपना मकान है, शालू वहाँ रहकर अपनी पढ़ाई कर सकती है।

यह सुनकर चाचाजी बहुत खुश हुए मगर चाचीजी की चिता खत्म नहीं हुई बल्कि और बढ़ गई कि वहाँ पर बिटिया अकेली कैसे रहेगी?

तो शालू ने कहा- तनुजा, शिखा और शांति भी बी.ऐस.सी. करना चाहती हैं तो पापा, क्यों न हम चारों ही एक साथ रहकर पढ़ाई कर सकती हैं।

तो उन्होंने कहा- हाँ यह ठीक रहेगा।

कुछ दिन बाद शालू अपने पिताजी व तीनों सहेलियों के साथ सुबह के करीब 11 बजे आ धमकीं।

चूँकि मैंने इन लोगों को पहले कभी देखा नहीं था क्योंकि मैं भैया की शादी के बाद से ही उनकी ससुराल नहीं गया था इसलिए शायद उन लोगों को पहचान नहीं पाया।लेकिन जब उन लोगों ने अपना परिचय प्रिया तो मैं उन लोगों को पहचानने की कोशिश करने लगा क्योंकि मैं भैया की शादी पर बहुत छोटा था।

खैर कुछ समय के बाद मैंने अपने भैया से फ़ोन पर बात की तो उन्होंने बताया- हाँ विशु, मैं तुम्हें यह बताना भूल गया कि ये चारों लड़कियाँ भी तुम्हारे साथ ही रहेंगी, इनके लिए अंदर वाला कमरा दे देना।

मैंने भी अपने भैया की बात मानते हुए अंदर वाला कमरा खोल प्रिया।

वो कमरा काफी समय से बंद होने के कारण बहुत गंदा था। उन चारों लड़कियों ने कमरे की सफाई करके अपना सामान सेट कर लिया।

इस दौरान शाम का अँधेरा हो चला था तो मेरी भाभी के चाचाजी गाँव को चलने लगे तो मैंने उनसे कहा- आपको गाँव पहुँचने में काफी रात हो जायेगी इसलिए आप सुबह चले जाना, रात को यहीं रुक लो।

तो वो बोले- मेरी भैंस मेरे बिना किसी को दूध नहीं देती है, इसलिए मुझे अभी जाना होगा।

तो मैंने भी ज्यादा जिद न करते हुए उन्हें जाने प्रिया।

उन लड़कियों के रहने से मेरे खाने पीने का इंतजाम हो गया था क्योंकि मुझे खाना बनाना नहीं आता था। वे खूब सारा सामान खाना बनाने का साथ लाई थी।

कुछ देर के बाद हम पाँचों ने खाना खाया और हँसी मजाक करते हुए अपने अपने कमरों में सो गए।

मैं आप लोगों को यह बताना भूल गया कि मैं कभी भी अंडरवियर नहीं पहनता था और अकेला रहने के कारण सुबह नंगा होकर ही नहाता था।

परंतु अब इन लड़कियों के आने से मैं नंगा होकर नहीं नहा सकता था क्योंकि पूरे घर में एक ही बाथरूम था और उसका दरवाज़ा टूट चुका था इसलिए मुझे नहाने में बड़ी ही दिक्कत होती थी।इसलिए मैं तौलिया पहन कर नहाने लगा था।

कुछ दिनों के बाद मैंने बढ़ई को बुलाकर बाथरूम का दरवाजा सही करवा लिया।

15-20 दिन ऐसे ही गुजर गए।एक दिन की बात है, जैसा मैंने आपको बताया की मैं अंडरवियर नहीं पहनता हूँ और रात को सिर्फ लुंगी पहन कर सोता हूँ, रोज़ उसी तरह उस रात को भी सो गया।

सुबह के पहर में मैंने सपना देखा कि मैं पड़ोस में रहने वाली लड़की मोहिनी की चुदाई कर रहा हूँ इसलिए मेरा लंड शायद लुंगी में हिचकोले खा रहा था।

कुछ देर पश्चात वह लोहे की गरम छड़ की तरह तन गया।

सपने में मोहिनी को चोदने की वजह से मेरी लुंगी पता नहीं कब खुल गई।

उसी दौरान शालू मेरे लिए चाय बना कर लेकर आई तब उसने मेरा 7.5″ लंबा और खूब मोटा खड़ा लंड देखा तो वह मुझे चाय देकर जगाना भूल गई और वहाँ खड़े होकर एकटक मेरा खड़ा लंड देखने लगी।

कुछ देर बाद मेरी पिचकारी छूट पड़ी।

उस पिचकारी ने इतनी धार छोड़ीं कि मेरे आस पास का सारा बिस्तर ख़राब हो गया।

जब मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूट रही थी उसी दौरान शालू ने अपनी सहेलियों को भी बुलाकर मेरे लंड को झड़ते हुए दिखाया।बताते हैं कि उन चारों ने मेरे लंड को खड़े होकर नज़दीक से भी देखा जो झड़ने के बाद भी टाइट और गरम था।

लेकिन मुझे कुछ होश ही नहीं था।

जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मैं नीचे से बिल्कुल नंगा हूँ और मेरी लुंगी खुली हुई एक ओर पड़ी हुई थी।

मैं एकदम बिस्तर से खड़ा हुआ सीधे लुंगी बाँधने लगा।

मुझे इतना भी नहीं पता था मेरा वीर्यपात हो चुका है और ज्यादातर गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी लुंगी पर लगा था।

मैं तो यह समझ रहा था मेरी लुंगी खुल गई है और घर में समझदार लड़कियाँ हैं कहीं वो सब मुझे नंगा देखकर गलत फील न करें इसलिए जल्दबाज़ी में मैंने लुंगी उठाकर पहन ली।

जब मैं लुंगी बाँध रहा था तभी शालू ने मुझे चाय के लिए आवाज़ दी।

लुंगी बांधते हुए मैं चाय पीने उनके कमरे में पहुँचा तो शिखा, शांती और तनुजा ने मेरा स्वागत हँसते हुए किया।साथ साथ शालू भी हँस रही थी।

पर मैं समझ नहीं पाया कि ये चारों लड़कियाँ मुझे देखकर क्यों हँस रहीं हैं?

मैं आपको उनका फिगर बताना तो भूल ही गया।वो सभी मॉडल की तरह लंबी और दुबली पतली सी थी उनका साइज़ होगा 34-24-36, हाँ मोहिनी जो मेरे घर के पीछे रहती थी, वो थोड़ी मस्त और गदराए बदन की मलिका थी, उसके चूचे एकदम गोल और तने हुए थे, जांघें मोटी और भरी हुई थी।वो वास्तव में काम की देवी लगती थी जिस किसी की शादी उसके साथ होगी उसकी तो किस्मत ही खुल जायेगी और तो और दोनों मोटी जांघों के बीच एक छोटी सी एक अनछुई चूत जिस पर अभी तक झांटे भी नहीं उगी थी।और हाइट करीब 5′ 6” की है।सच में एक ऐसा बम थी की 80-90 साल का बुड्ढे का भी लंड झटके मारकर खड़ा हो ही जायेगा।

यह सोच ही रहा था कि तनुजा ने लुंगी में लगे वीर्य की ओर इशारा करके कहा- विशू, यह क्या है?

मैंने उसके कहने के अनुसार जब अपनी लुंगी देखी तो हड़बड़ी में मेरा लंड बाहर आ गया और मैं शर्म के मारे अपने कमरे में भाग गया।कुछ देर के बाद सब कुछ सामान्य हो गया पर मैं उन चारों से नज़रें नहीं मिला पा रहा था।

वो चारों घर का काम खत्म करके नहा धोकर कॉलेज चलीं गई और मैं भी अपने कॉलेज चला गया।

सब कुछ सामान्य हो चुका था कि एक दिन उनके कमरे में मोहिनी के साथ शिखा, शान्ति और तनुजा को मैंने बात करते हुए सुना।

वो चारों मेरे लंड के बारे में बात कर रही थी कि विशु का लंड कितना बड़ा है।

तभी शिखा बोली- जब भी विशु के लंड की घटना याद आती है तो पता नहीं मेरी चूत में से सफ़ेद गाढ़ा सा पानी सा रिसने लगता है। ऐसा मन करता है कि विशु को नंगा करके उनके लंड से खूब जी भरके खेलूँ और उनका मस्त लंड अपनी चूत में लेकर खूब चुदाई करूँ। मगर समझ नहीं आता कि कैसे पहल करें क्योंकि विशु तो बहुत ही शर्मीला है।

तो सभी पाँचों ने मेरा लंड लेने की प्लानिंग की कि आज कुछ भी हो विशु के लंड से अपनी अपनी चूत का उद्घाटन करवा कर ही रहेंगी।

इसलिए मोहिनी ने भी पढ़ाई के बहाने आज रात को मेरे घर आने की बात कही और मेरा देह शोषण करने की करने की प्लानिंग करके वो अपने घर चली गई।

प्लान के मुताबिक वो शाम को मेरे घर आई और चुदाई के बारे में मूक बातें होने लगी।

शाम को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर कपड़े बदलकर जैसे ही पढ़ने के लिए बैठा तभी शालू, शिखा, तनुजा, शांति और मोहिनी मेरे कमरे में आईं और मुझसे पूछा- विशु हमें ज़ूलॉजी समझ नहीं आ रही है, तुम हमें समझा सकते हैं।

मैंने कहा- हाँ, समझा सकता हूँ।

कुछ देर तक ऐसे ही बातें होती रहीं उसके बाद मैंने पूछा- जूलोजी के कौन से चैप्टर में प्रॉब्लम है?

तो शिखा ने कहा- ह्यूमन रिप्रोडक्शन समझ नहीं आ रहा है, वो समझा दीजिये।

मेरी तो शर्म के कारण हवा टाइट होने लगी लेकिन लड़कियाँ पूरी तैयारी के साथ मुझसे चुदाई चाहती थी।

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पर पाँचों ही ऐसी अनजान बन रही थी की जैसे कुछ जानती ही नहीं… लेकिन मेरा लंड लुंगी में खड़ा हो गया था और बाहर झाँकने लगा था।उसके बाद सबसे पहले अंगों की चर्चा हुई। अंगो की चर्चा में मेल ऑर्गन यानि की लंड की बात हुई तो तनुजा ने पूछा- विशु, शिश्न किसे कहते हैं और यह काम कैसे करता है?

मैंने कहा- समझाता हूँ…

और मैं उन्हें किताब की भाषा में समझाने लगा तो सभी ने कहा- हमें समझ नहीं आ रहा है।

इधर मेरा लंड खड़ा होकर मुझे परेशान कर रहा था।

मैंने कहा- प्रैक्टिकल करके बताता हूँ यदि आप सभी तैयार हो तो?

सभी ने कहा- यह ठीक रहेगा।

जैसे ही उन सभी ने कहा, तभी मैंने शिखा को पूछा- आप प्रैक्टिकल के लिए तैयार हो? सोच लो !

तो शिखा ने हाँ में सर हिला प्रिया।

फिर मैंने अपनी लुंगी में से अपने लंड को निकाला जो अब तक लोहे की रॉड बन चुका था, उसको शिखा के हाथ में पकड़ा प्रिया और बताया- इसे शिश्न, लिंग या लंड कहते हैं, इसको लड़की की चूत में डालने को चुदाई कहते हैं और चुदाई के अंत में लंड में से जो रस निकलता है, उसे वीर्य कहते हैं।

तो तनुजा बोली- विशु, तुम क्या कह रहे हो, समझ नहीं आ रहा है?

फिर मैंने सबका ध्यान अपनी ओर करके शिखा को लंड आगे पीछे करके हिलाने को कहा और तनुजा को एक रसोई से छोटी कटोरी लाने को कहा और उस कटोरी को अपने लंड के सामने लगाने को कहा।

करीब 10 मिनट के बाद मेरे लंड ने बहुत ही तेज रफ़्तार से वीर्य की तेज धार के साथ पिचकारी छोड़ी जो सीधी कटोरी में गिरी और कुछ बूंदें जमीन पर गिरी।

वीर्य निकलने के बाद भी तनुजा ने जब तक लंड नहीं छोड़ा जब तक वीर्य की एक एक बून्द नहीं निचुड़ गई।

जब मैंने कटोरी की और देखा तो लगभग एक चौथाई कटोरी भर चुकी थी।

मुझसे शांति ने पूछा- विशु, ये क्या है?

तो मैंने बताया- यह रस ही वीर्य कहलाता है। जो लड़की की चूत में जाने से बच्चा पैदा करता है। लेकिन यह तभी संभव है जब लड़की को महीना यानि की एम. सी. न हो। यदि महीना आने के बाद लड़की की चुदाई होती है और चुदाई के दौरान वीर्य चूत में गिर जाता है तो लड़की माँ बनेगी अन्यथा नहीं। लड़की का माँ बनना ही ह्यूमन रिप्रोडक्शन कहलाता है। तो बताओ आप में से कौन कौन महीने से होके चुकी हो या हो रही हो?

तो सभी ने कहा- हम में से कोई नहीं है जिसे महीना आ रहा है या आने वाला है और न ही आ के चुका है।

फिर मैंने सभी से कहा- जल्दी से अपने अपने सारे कपड़े उतारो, आपके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं होना चाहिए।

पाँच मिनट में ही सभी लड़कियाँ नंगी हो गई।

मैंने सबसे पहले मोहिनी को अपने पास बुलाया तो मोहिनी ने मुझसे पूछा- मेरी छोटी सी चूत में तुम्हारा इतना बड़ा और मोटा लण्ड कैसे घुसेगा?

तो मैंने उसे समझाया कि लड़की की चूत फ्लेक्सिबल होती है, इसमें छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा लंड भी घुस जाता है। हाँ यदि चूत बिना चुदी हो तो शुरू में बड़े लंड से थोड़ा दर्द होता है और बाद में बहुत मज़ा आता है।

यह कहकर मैं उसे चूम चाट कर गरम करने लगा।

सबसे पहले मैंने उसे कान के पीछे किस किया, उसके बाद गाल, होंठ पर किस किया, उसके बाद मैं उसकी चूचियों पर किस करने लगा और अपने एक हाथ से उन्हें दबाने लगा।फिर उसके पेट पर होते हुए मैं उसकी चूत पर आ गया और मैंने उसकी अनछुई चूत पर एक चुम्बन जड़ प्रिया, जैसे ही मैंने उसकी चूत पर चुम्बन किया तो वो एकदम से सिहर गई।

उसके बाद मैं उसकी चूत के दाने को अपनी जीभ से सहलाता रहा और तब तक सहलाता रहा जब तक उसकी चूत ने पानी नहीं उगल प्रिया।

फिर मैंने मोहिनी को अपना लंड चूसने को कहा पर उसने मना कर प्रिया लेकिन शिखा बिना कहे ही तैयार हो गई और उसने अपने होठों से एक जोरदार चुंबन मेरे लंड के सुपाड़े पर कर लिया।

उसके बाद वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने की कोशिश करने लगी लेकिन मेरा लंड उसके मुँह में जा नहीं पा रहा था।

फिर भी वो कोशिश करके मेरे लंड को चूसने लगी।

इधर मैं मोहिनी की चूत को अपनी जीभ से चाट रहा था।

कुछ देर के बाद मोहिनी ने कहा- विशु जी, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है, तुम मेरी चूत में अपना लंड डाल भी दो… ज्यादा मत तड़पाओ।

मैं भी मौके की नज़ाकत देखते हुए तुरंत ही मोहिनी की टांगों के बीच आ गया, मेरे लंड का सुपाड़ा शिखा के चूसने से एक बड़े से मशरूम की तरह फूल गया।

फिर मैं अपना लंड मोहिनी की चूत पर रखकर रगड़ने लगा लेकिन लंड चूत में घुसने के बजाय फिसल कर इधर उधर हो जाता।

कुछ देर बाद मोहिनी ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रखा और मैंने अपने होठों को मोहिनी के होठों पर रखकर पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार धक्का लगा प्रिया, जिससे मोहिनी की एक जोरदार चीख निकलती लेकिन उसके होंठ मेरे होठों में दबे होने के कारण वो चीख नहीं पाई और उसके साथ ही मेरा लंड करीब 3″ उसकी चूत में घुस गया था।

लेकिन मैंने देखा कि मोहिनी की आँखों में मोटे मोटे आँसू थे जो शायद मेरे से कह रहे थे कि विशु अपना लौड़ा मेरी चूत से बाहर निकल ले लेकिन मैंने उसके आँसुओं पर कोई ध्यान नहीं प्रिया और फिर करीब पूरा लंड चूत से बिना बाहर निकाले खींचा और वापस दुगनी ताक़त से जोरदार धक्के के साथ दुबारा घुसेड़ प्रिया।

इस बार तो मोहिनी की दर्द के मारे आँखें ही बाहर की ओर निकल आई लेकिन मैंने कोई रहम न करते हुए आखरी और तीसरा जोरदार धक्का लगा प्रिया।

जिससे मेरा पूरा लंड मोहिनी की चूत में जड़ तक घुस गया।

फिर मैं कुछ देर के लिए रुक गया।

उसके बाद धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा।

कुछ देर के जब मोहिनी का दर्द कम हुआ तो मोहिनी भी नीचे से अपने कूल्हे उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी और साथ साथ मदहोशी में बड़बड़ा भी रही थी- विशु, जोर से… और जोर से… हाँ, ऐसे ही चोदो मुझे।

उसके बड़बड़ाने से मुझे भी जोश आ गया, मैंने भी अपनी स्पीड तेज कर दी।

कुछ देर के बाद मोहिनी का बदन अकड़ने लगा और वो तुरंत ही झड़ गई।

मैं बहुत ही तेजी के साथ धक्के मार रहा था।लगभग 10 मिनट बाद वो फिर झड़ गई।

हमें चुदाई करते हुए करीब 25 मिनट हो चुके थे।

कुछ देर बाद जब मैंने उसके कान में कहा- मोहिनी, अब मैं झड़ने वाला हूँ।तो उसने कहा- विशु जी, अभी कोई खतरा नहीं है, तुम मेरी चूत में ही झड़ जाओ।

इसके साथ ही मैं बहुत तेज धक्के मारने लगा, करीब 8-10 धक्कों के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

कसम से इस बार मेरा बहुत बड़ी मात्रा में वीर्य निकला।

हमारी सांसे बहुत तेजी से चल रही थी और मैं हाँफते हुए मोहिनी के ऊपर ही गिर गया।

मुझे उसके ऊपर गिरते ही मोहिनी ने मुझे प्यार से चूमना शुरू कर प्रिया।

इसी तरह से मैंने शांति, शिखा, तनुजा और शालू की भी सील तोड़ी।

उसके बाद तो हमें जब भी मौका मिलता मैं लोगों को चोद लेता था।

फिर एक दिन सभी ने निर्णय लिया कि घर के अंदर हम पाँचों में से कोई भी एक कपड़ा भी नहीं पहनेगा, यदि कोई भी कपड़े पहने हुए दिख गया तो उसे 500/- का फाइन भरना पड़ेगा।

एक दिन शांति और शिखा ने मुझसे पूछा- विशु, हमारी एक सहेली और उसकी भाभी को तुम्हारा लंड चाहिए… तो क्या तुम उन दोनों को चोदना चाहोगे?क्योंकि तुम्हारे महाबली लंबे और मोटे लंड के बारे में बताया कि तुम्हारे लंड में बहुत ताक़त है और तुम्हारा वीर्य भी बहुत स्वादिष्ट है इसलिए हमने तुम्हारे बारे में अपनी सहेली और उसकी भाभी को बता प्रिया तब से उन दोनों की चूत खुजा रही है।

मैंने कहा- ठीक है।शेष कहानी अगले भाग में…तो बताइये दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? मुझे आपकी राय की ज़रूरत है।

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

कुंवारी चूतों का मेला

कुल भाग: 2
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8 मिनट 727

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

आकाश सेन

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

सुलक्ष्णा

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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