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भाभी की चुदाई पठन समय: 22 मिनट पढ़ा गया: 1,088 बार

बीवी की सहेली की चुदाई- 5

मोना सिंह 07

04 Jun 2025 को प्रकाशित

बीवी की सहेली की चुदाई- 5
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लाइव सेक्स ट्रेनिंग स्टोरी में मेरी बीवी की सहेली अपने जेठ की जवान बेटी को मेरे लंड से चुदवाने के लिए गर्म करने के लिए उसके सामने कैसे चुदी?

कहानी के चौथे भागजवान स्कूल गर्ल से सेक्स की बातेंमें आपने पढ़ा कि बीवी की सहेली की जवान भतीजी को मैं अपने लंड के नीचे लाने के लिए तैयार कर रहा था.

अब आगे लाइव सेक्स ट्रेनिंग स्टोरी:

किरण की उम्र के हिसाब से ज्यादा बड़ी गांड ऊपर को उठी हुई थी।

मैं जाकर किरण के पास बैठ गया और पीछे से उसकी नंगी जाँघ को हल्के से सहलाते हुए पूछा, “किरण, सच बताओ ना, तुम्हें कैसा लग रहा था?”किरण मेरे बार-बार यही सवाल पूछने पर मुँह छुपाए हुए ही सिर्फ एक शब्द बोली, “अच्छा।”

मैंने उसकी स्कर्ट थोड़ी ऊपर उसके चूतड़ों तक खिसकाते हुए, उसकी चूतड़ की एक गोलाई के निचले हिस्से पर अंगुलियाँ फिराते हुए कहा, “किरण, सच बताओ, तुम्हें अपनी चूत मसलवाकर अच्छा लग रहा था ना!”किरण बोली, “जी भैया।”

मैंने बिना कोई परवाह किए अपना एक हाथ किरण के चूतड़ों के बीच से निकालकर उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत की दरार में एक अंगुली फिरा दी।किरण ने मेरी हरकत से सिहरते हुए मेरा एक हाथ कसकर पकड़ लिया।

मैंने किरण की चूत को मुठ्ठी में बंद करना चाहा, तो उसने अपने चूतड़ हल्के से ऊपर उठा दिए।

मैंने अपनी हथेली में उसकी मक्खन जैसी चूत को पूरी तरह भरते हुए मसल प्रिया।किरण की आह सीसी, “अह भैया!” सिसकारी निकल गई।

मैंने किरण के कान के पास अपने होंठ लगाकर कहा, “किरण, ऐसे ही उसने भी तुम्हारी चूत मसली होगी ना!”किरण सिर हिलाकर बोली, “जी भैया, ऐसे ही!”

मैंने किरण की गर्दन से बाल एक तरफ किए और उसके कानों के पीछे और गर्दन पर चूमने लगा।

किरण आह सी, “आह भैया, चाची आ जाएगी! उफ्फ, बस करो ना!” करने लगी।

मैंने किरण की गर्दन चूमते हुए उसे गोद में उठा लिया।किरण का प्यारा सा चेहरा मेरी आँखों के सामने था। उसने आँखें बंद कर रखी थीं।

किरण में बिल्कुल भी वजन नहीं था, एकदम फूल जैसी और मासूम कोमल सी किरण मेरी बाहों में थी।

मैंने उसके लाल, सुर्ख होंठों को चूमकर कहा, “आँखें खोलो ना किरण!”किरण ने धीरे से आँखें खोलीं, तो मैंने कहा, “कैसा लग रहा है तुम्हें?”

किरण मुस्कुराते हुए बोली, “भैया, बहुत अच्छा!”

फिर मैंने किरण को प्यार से बेड पर लिटाया और उसकी शर्ट के बटन खोलकर ब्रा और शर्ट दोनों निकाल दिए।

किरण ने शर्म से अपने दोनों बूब्स हाथों से ढक लिए।

मैंने किरण के हाथ हटाते हुए कहा, “किरण, अपनी प्यारी सी चूचियाँ देखने दो ना!”

किरण धीरे से बोली, “भैया, बहुत शर्म आ रही है!”मैंने किरण के हाथ पकड़कर धीरे से हटाते हुए कहा, “मेरी जान, एक बात बताओगी?”किरण बोली, “जी भैया, बोलिए!”

मैंने कहा, “जब उस लड़के से अपने आम चुसवा रही थी, तब शर्म नहीं आई?”

किरण मेरी बात पर गर्दन दूसरी तरफ घुमाकर रह गई।इधर मैंने किरण के रुई जैसे नरम बूब्स को सहलाते हुए उसकी एक निपल, जो हल्के भूरे रंग की थी और किशमिश के दाने जितनी बड़ी थी, को मुँह में भर लिया और चूसने लगा।

फिर मैंने किरण की दूसरी निपल को चूसा।किरण आह सी, “भैया, प्लीज छोड़ो ना मुझे!” बोल रही थी।

मैं अपने एक हाथ से किरण की चूत को लगातार मसले जा रहा था।किरण की पैंटी चूत के पानी से गीली हो चुकी थी।मैंने स्कर्ट के अंदर से उसकी पैंटी निकालनी चाही, तो किरण ने पैंटी को कसकर पकड़ लिया।वो बोली, “नहीं भैया, ऐसा मत करो प्लीज! चाची आ जाएगी!”

मैंने पैंटी छोड़कर उसका चेहरा पकड़ लिया और उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नरम होंठ चूसने लगा।किरण के बदन से मदमस्त करने वाली महक आ रही थी।

किरण भी अब किस करने में मेरा सहयोग करने लगी।मेरे हाथ उसके बूब्स को मसल रहे थे और हम दोनों पागल प्रेमी-प्रेमिका की तरह एक-दूसरे के होंठ और जीभ चूस रहे थे।

मैंने किरण के होंठ छोड़कर अपनी जींस उतार दी।मेरा लंड अंडरवियर में फुफकार रहा था।

मैंने किरण का हाथ पकड़कर अंडरवियर के ऊपर से लंड पर रखना चाहा तो वो नखरे दिखाने लगी।

आधी से भी कम उम्र की कमसिन लौंडिया के नखरे देखकर मेरा खून उबलने लगा।

मैंने अंडरवियर उतारकर जबरदस्ती लंड किरण के हाथ में पकड़ा प्रिया।लोहे जैसे सख्त लंड पर किरण के कोमल हाथ के स्पर्श से लंड झटके मारने लगा।

तभी डोरबेल बजी।

किरण फुर्ती से मेरा लंड छोड़ते हुए बेड से उठकर अपने कपड़े सही करने लगी और लंड की तरफ अपनी पतली अंगुली करके बोली, “भैया, प्लीज आप इसको जल्दी अंदर कीजिए! लगता है चाची आ गई!”

पर मैंने बेशर्मी से उसकी पतली कमर में हाथ डालकर उसे बाहों में झकड़ते हुए कहा, “किरण, देखना अब तुम्हारी यही चाची अपने हाथ से मेरा लंड तुम्हारी चूत में डलवाएगी!”किरण डरते हुए बोली, “नहीं भैया, प्लीज ऐसे मत बोलो! मुझे दरवाजा खोलने जाना है!”

मैंने कहा, “तुम यहीं रुको, मैं दरवाजा खोलकर आता हूँ!”मैं टी-शर्ट और बनियान उतारकर पूरा नंगा हो गया।

एक हाथ से लंड को आगे-पीछे करते हुए, दूसरे हाथ से किरण का नरम चूतड़ मसलकर बाहर की तरफ बढ़ गया।

मैंने दरवाजे के होल से बाहर देखा, तो भाभी ही थी।

मैंने दरवाजे की ओट लेते हुए दरवाजा खोला, तो भाभी अंदर आ गईं।

भाभी ने मुझे नंगा देखकर फुर्ती से दरवाजा बंद कर प्रिया और मेरे लंड को देखते हुए बोली, “क्या हुआ देवर जी! लगता है उसकी बलि चढ़ गई!”

मैंने भाभी का हाथ पकड़कर उसे लंड थमा प्रिया और उसकी कमर में हाथ डालकर कमरे की तरफ ले गया।

कमरे में किरण हक्की-बक्की खड़ी भाभी को मेरा लंड हिलाते हुए देख रही थी।उसे ऐसे देखकर भाभी उसकी गाल सहलाते हुए बोली, “क्या हुआ बेटी? तुम ऐसे क्यों देख रही हो?”

किरण कुछ नहीं बोली।

फिर भाभी मुझसे बोली, “देवर जी, आप लंड को हिलाते हुए नंगे घूम रहे हो, और किरण बिटिया अभी भी पूरे कपड़ों में है! क्या आपने किरण बिटिया को अभी तक प्यार नहीं किया?”

मैंने भाभी को घुटनों के बल अपनी टाँगों में बिठाते हुए लंड उसके मुँह में ठूंस प्रिया, जिसे वो लपर-लपर चूसने लगी।

भाभी बिना किसी बात की परवाह किए बेफिक्री से लंड चूस रही थी, और किरण ध्यान से भाभी को देख रही थी।मेरी नजरें किरण के चेहरे पर टिकी थीं।भाभी को मेरी बॉल्स के साथ खेलते और लंड चूसते देखकर किरण का चेहरा वासना से लाल हो चुका था।

मैंने धीरे से किरण को आवाज दी।

उसने अपनी नजरें उठाकर मुझे देखा।मैंने उसे इशारे से अपने पास बुलाया तो वो चुपचाप मेरे पास आ गई।

मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर उसके होंठ चूसने लगा।

किरण के होंठ चूसते-चूसते मैंने उसकी शर्ट और ब्रा उतारकर फेंक दी।

उसके दोनों बूब्स अब आजाद थे।

मैंने दोनों को प्यार से मसलते और चूसते हुए उसकी स्कर्ट भी उतार दी।किरण मेरा पूरा साथ दे रही थी।

मैंने धीरे से उसके कान में कहा, “किरण, अपनी पैंटी भी उतार दो ना!”किरण ने बिना एक पल गँवाए पैंटी उतार दी।

पैंटी उतरते ही मैंने उसके हाथ से पैंटी ले ली और अपने नाक से उसकी चूत की मादक खुशबू सूँघने लगा।

नई-नई जवान हुई लौंडिया की चूत की खुशबू दुनिया के हर सेंट से अच्छी होती है।

मैंने किरण से कहा, “किरण, तुम्हारी चूत बहुत खुशबूदार है!”मेरी बात सुनकर किरण के होंठों पर प्यारी सी मुस्कान तैर गई।

मैंने पैंटी उसकी नाक से लगाकर कहा, “लो, अपनी चूत की खुशबू सूँघो!”

किरण छोटे से नाक को पैंटी से लगाकर सूँघते हुए बोली, “सच्ची भैया, मेरी चूत बहुत खुशबूदार है!”फिर मैंने भाभी से कहा, “भाभी, लो किरण की चूत की खुशबू सूँघकर देखो, कितनी मजेदार है!”

भाभी लंड मुँह से बाहर निकालकर किरण की संगमरमरी टाँगों पर धीरे-धीरे हाथ फिराते हुए, हाथों को किरण की टाँगों के जोड़ के बीच ले गईं।

और किरण के चेहरे की तरफ देखकर उसकी चूत की दरार में अंगुलियाँ फिराते हुए बोलीं, “देवर जी, जब किरण का खजाना हमारे सामने है, तो हम उसकी खुशबू सूँघेंगे! खजाने को ढकने वाले कवर को सूँघने का क्या फायदा!”

भाभी की अंगुलियों के टच से किरण सिहरकर मुझसे लिपट गई।मैंने किरण को कसकर पकड़ते हुए अपना लंड उसकी चूत से भिड़ा प्रिया और उसकी एक बाँह उठाकर लंड के सुपाड़े को चूत की दरार में रगड़ते हुए उसकी बगल चाटने लगा।

किरण मेरी इस हरकत से काँपने लगी।

मैं लंड के सुपाड़े का दबाव उसकी चूत के एकदम हार्ड दाने से रगड़ रहा था।

दो मिनट में ही किरण आह सी सीसी, “उफ्फ भैया, आह मम्मी, ये क्या हो रहा है! लगता है मेरा सूसू निकल जाएगा!”करते हुए झड़कर मुझसे लिपट गई।

किरण लंबी-लंबी साँसें लेकर बदहवास हो चुकी थी।

तब तक भाभी नीचे से खड़े होकर एकदम नंगी होकर किरण के बालों में हाथ फिराते हुए किरण से बोलीं, “बेटी, तुम्हें देवर जी के लंड की तुम्हारी चूत पर पहली दस्तक और चूत से पहली बार कामरस छोड़ने की बधाई हो!”

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किरण मेरे होंठों को बड़े प्यार से चूमते हुए भाभी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली, “थैंक्यू चाची!”फिर भाभी मुझसे बोली, “देवर जी, आप किरण को बधाई नहीं दोगे क्या?”

मैंने किरण की मखमली चूतड़ों को दोनों हाथों से भींचते हुए कहा, “क्यों नहीं भाभी! मैं तो किरण को बधाई के साथ बहुत बड़ा गिफ्ट दूँगा!”

मैंने आगे कहा, “पर वो तब मिलेगा, जब किरण मेरा पूरा लंड अपनी प्यारी सी चूत में लेकर अपना उद्घाटन करवा लेगी!”

भाभी किरण की हिम्मत बढ़ाने के तरीके से बोलीं, “देवर जी, हमारी किरण बेटी को कम मत समझो! ये आपके लंड को चूत में लेकर ना निचोड़ डाले, तो हमें बोलिएगा!”

मैंने किरण को गोद में उठाकर बेड पर लिटा प्रिया और उसकी टाँगें फैलाकर चूत से निकल रहे पानी को चाटने लगा।

अनचुदी कुंवारी चूत, जिसपर भूरे रंग के छोटे-छोटे बाल थे, उसकी महक जैसे मेरे रोम-रोम में बस रही थी।और चूत से निकल रहे कामरस के स्वाद का तो कहना ही क्या!

किरण बेड पर अपनी दोनों टाँगें फैलाए मेरे सामने लेटी थी।गजब की सुंदर थी किरण की चूत।चूत के होंठ गुलाबी-बज रंगत लिए हुए थे, जो पाव रोटी की तरह फूलकर एक-दूसरे से चिपके हुए थे।

मैंने दो अंगुलियों के सहारे किरण की चूत के होंठों को हल्का सा खोला, तो मुझे किरण की चूत का दाना, जो एकदम सख्त और उभरा हुआ था, नजर आया।

उसके थोड़ा नीचे चूत का छेद था, जो एकदम लाल था।उसमें से अभी भी सफेद पानी बह रहा था।

मैंने किरण की चूत की तारीफ करते हुए कहा, “कसम से किरण, तुम्हारी चूत बहुत सुंदर है! आज तक मैंने इतनी प्यारी चूत नहीं देखी!”

मैंने किरण के जवाब का इंतजार किए बिना अपनी जीभ को नुकीली करके चूत के छेद से लगाकर रगड़ना शुरू कर प्रिया।किरण फिर से बेचैन होकर तड़पने लगी।

भाभी उसके सिर के पास बैठकर उसके बालों में हाथ फिराते हुए उसके छोटे-छोटे बूब्स चूस रही थी।

थोड़ी देर बाद भाभी बोली, “किरण बेटी, क्या तुमने कभी चूत में लंड अंदर-बाहर होते देखा है?”किरण बोली, “नहीं चाची, मैंने कभी नहीं देखा!”

भाभी फुर्ती से एक सिरहाना उठाकर अपनी गांड के नीचे लगाकर लेटते हुए बोली, “देवर जी, आ जाओ! मेरी चूत में अपना लंड डालो!”वो आगे बोली, “किरण बेटी, चूत में लंड जाता हुआ देखकर आसानी से लंड ले सकेगी!”

मैंने किरण की चूत को चाटना छोड़कर भाभी की टाँगों के बीच पोजीशन ले ली।

भाभी ने मेरे लंड को बॉल्स के पास से पकड़ा और खींचते हुए अपने छेद से लगा लिया।

फिर वो गर्दन घुमाकर किरण से बोली, “देखो बेटी, मेरी टाँगों के बीच! लंड को अंदर कैसे लिया जाता है, सीख लो!”किरण उठकर बेड से खड़ी होकर मेरे पीछे आ गई।

मैंने भाभी के होंठों को अपने होंठों से झकड़ लिया और उसकी दोनों चुचियाँ पकड़कर एक झटका मारा।

उधर भाभी ने भी मेरे झटके के साथ ही नीचे से कमर उछका दी।लंड सरसराता हुआ पूरा का पूरा भाभी की चूत में चला गया।

भाभी मेरे वार को संभाल नहीं पाई।उसके मुँह से हल्की चीख निकली।पर उसने खुद को संभालते हुए अपनी कमर को उठाकर गोल-गोल घुमाना शुरू कर प्रिया।

इधर मैं भाभी की चूत में बिना रुके लंड पेले जा रहा था।

भाभी मेरी कमर कसकर पकड़ते हुए बोली, “आह उफ्फ, देख बेटी, तेरी मम्मी की चूत में लंड कैसे अंदर-बाहर हो रहा है!”वो और जोश में बोली, “और तेज देवर जी! आह उफ्फ, आह! फाड़ दो मेरी चूत!”

भाभी का जोश देखकर मैं समझ चुका था कि ये जानबूझकर किरण को उकसाने के लिए ज्यादा जोश दिखा रही है।

तभी भाभी जोर से बोली, “किरण!”किरण खड़े-खड़े बोली, “जी चाची!”भाभी फिर से बोली, “मुझे चाची मत बोल! मैं तेरी मम्मी हूँ!”

वो आगे बोली, “और जैसे पिंकी मेरी बेटी है, तुम भी मेरी बेटी हो! आह देवर जी, और तेज चोदो अपनी इस रंडी को! आज से मेरी दो बेटियाँ नहीं, तीन बेटियाँ हैं! आज आप मेरी किरण बेटी की चूत की सील भी खोल दो! जब पिंकी जवान हो जाएगी, तो उसकी चूत में भी मैं आपका लंड ही डलवाऊँगी!”

भाभी की गर्म बातें सुनकर मेरा जोश सातवें आसमान पर पहुँच गया।

मैं किरण की चूत मारना चाह रहा था इसलिए मुझे इस टाइम भाभी की चूत में कोई इंटरेस्ट नहीं था।पर उसकी बातें सुनकर मैंने उसे पलटकर घोड़ी बना लिया।

भाभी भी अपनी गांड फैलाते हुए किरण से बोली, “देख मेरी प्यारी बच्ची, कैसे किसी मर्द के सामने कुतिया बनकर उसके सामने अपनी चूत और गांड परोसी जाती है!”

मैंने लंड को भाभी के छेद पर लगाकर उसके कूल्हे पकड़े और लंड पर दबाव दे प्रिया।भाभी ने कमर को और झुका प्रिया और गर्दन को ऊपर उठाते हुए बोली, “उफ्फ देवर जी, एक झटके में डालो अपना लंड! आह!”

मैंने लंड को बाहर निकालकर एक झटके में पूरा अंदर पेल प्रिया।भाभी बोली, “उफ्फ आह देवर जी! शुरू हो जाओ, अब बिना रुके फाड़ दो आज हमारी चूत हमारी बड़ी बेटी के सामने!”

किरण हमारे पास खड़ी अपनी एक निपल को सहलाते हुए ध्यान से हमारी चुदाई देख रही थी।किरण को देखकर मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई।

मैंने भाभी की एक टाँग उठाकर कंधे पर रखी और जोर-जोर से उसकी चूत मारने लगा।पूरे कमरे में भाभी की सिसकारियाँ और फच-फच की आवाजें गूंजने लगी।

भाभी बोली, “आह देवर जी, उफ्फ! क्या मस्त लौड़ा है आपका! बहुत मजा आ रहा है! ऊऊह मम्म आह! किरण देख, आह! थोड़ी देर बाद यही लंड तेरी चूत में होगा!”

मैंने किरण की तरफ देखा, तो वो एक हाथ से अपनी चूत सहलाते हुए, दूसरे हाथ से अपनी एक चूची को जबरदस्ती मुँह में डालने की कोशिश कर रही थी।

कमरे में ऐसा कामुक माहौल था कि कोई भी लड़की देखकर अपनी चूत फैलाकर लंड लेने को तड़प उठे।

तभी भाभी बोली, “आह मम्मी, उफ्फ! रुको देवर जी, मेरा होने वाला है! रुको, मैं किरण को आपके लंड की सवारी करके दिखाना चाहती हूँ!”

मैंने झटके से लंड बाहर खींच लिया और किरण की गर्दन पकड़कर उसके होंठों से लगा प्रिया।

किरण चूत के पानी से भीगे लंड को चाटने लगी।किरण का लंड चाटने का तरीका देखकर मुझे हँसी आ गई।किरण मेरे पत्थर जैसे लंड को अपने नरम हाथों में लेकर बड़े प्यार से चाट रही थी, जैसे कोई छोटी बच्ची कुल्फी चाटती है।

मुझे हँसता देखकर भाभी ने किरण के हाथ से मेरा लंड पकड़ते हुए कहा, “चल बेटी, मैं तुझे लंड को चूसना सिखाती हूँ!”

लाइव सेक्स ट्रेनिंग देने के लिए भाभी ने लंड को बॉल्स के पास से कसकर पकड़ते हुए कहा, “पहले लंड को जितना हो सके कसकर पकड़ो! क्योंकि लंड के साथ जितनी कड़ाई से पेश आओगी, ये उतना खुश होगा!”

फिर भाभी ने जीभ को तीखी करके लंड की चमड़ी को पूरा पीछे खींचते हुए, जहाँ से लंड का टोपा शुरू होता है, वहाँ जीभ फिराते हुए कहा, “किरण, ये लंड की सबसे कोमल जगह होती है! यहाँ जितनी जीभ फिराओगी, लंड उतनी जल्दी खड़ा होगा!”

भाभी ने अपना पूरा मुँह खोलकर लंड को गले तक अंदर ले लिया और लंड पर होंठ कसते हुए मुँह में अंदर-बाहर करने लगी।फिर उसने लंड बाहर निकालकर किरण को समझाते हुए कहा, “देखो बेटी, लंड को मुँह में जितना हो सके उतना अंदर लेना चाहिए! क्योंकि अगर लंड गले तक लेकर चूसोगी, तो लंड को ऐसा लगेगा जैसे वो चूत में हो!”

वो आगे बोली, “और लंड चूसने के समय लंड पर होंठों की पूरी कसावट होनी चाहिए! लंड पर अगर होंठ ज्यादा कसे होंगे, तो लंड को ऐसा लगेगा जैसे वो किसी कुंवारी चूत में हो!”

फिर वो मेरे लंड पर बहुत ज्यादा उभरी नसों को किरण को दिखाते हुए बोली, “देखो बेटी, इन नसों को और पत्थर जैसे इस लंड की सख्ती को! इन नसों और इस लंड की सख्ती को लंड चूसने के समय होंठों पर ऐसे महसूस करो जैसे वो तुम्हारी चूत के अंदर रगड़ मार रहा हो! इससे तुम्हें और भी ज्यादा मजा आएगा!”

वो बोली, “बेटी, अगर तुम्हें लंड सही से चूसना आ गया, तो समझो तुम किसी भी मर्द के लंड का पानी निकाल सकती हो!”

मैं भाभी की शिक्षा, जो वो किरण को दे रही थी, उसका कायल हो चुका था।उधर किरण वासना से धधकती अपनी चूत लेकर ध्यान से भाभी से शिक्षा ले रही थी।

मैंने किरण को अपने पास खींचते हुए उसकी एक चूची को चूसने लगा।मैंने निपल मुँह में लेकर जैसे ही चूची को मुँह में खींचा, किरण बोली, “आह धीरे भैया, दुखता है!” और अपनी दूसरी चूची को हल्के से मसलने लगी।

उधर भाभी उसकी चूत सहलाते हुए बोली, “देख बेटी, चुदाई के समय कितना भी दर्द हो, उसे मजा समझकर बर्दाश्त करना चाहिए! क्योंकि दर्द के बाद ही असली मजा मिलता है!”

फिर भाभी मुझसे बोली, “चलो देवर जी, लेट जाओ! मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा! एक बार अपने लंड से मेरी चूत ठंडी कर दो! फिर मैं अपनी बेटी की चूत में आपका लंड डलवाऊँगी!”

मैंने लेटते हुए किरण को अपने मुँह पर खींच लिया।किरण अपनी प्यारी सी फूल जैसी चूत मेरे मुँह पर रखकर बैठ गई।

उधर भाभी ने अपनी पोजीशन लेकर लंड को अपनी चूत से लगाया और बोली, “देखो बेटी, अगर अपनी मर्जी से लंड का स्वाद लेना हो, तो ऐसे मर्द को लिटाकर उसका लंड अपनी चूत पर सेट कर लो!”

वो आगे बोली, “फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर लेकर, जैसे मर्जी बच्चेदानी तक पूरा अंदर लो! फिर चाहे धीरे या तेज, या फिर अपनी चूत की किसी भी दीवार की तरफ लंड की रगड़ महसूस करो!”

भाभी किरण को ये समझाते हुए मेरे कंधे पकड़कर जोर-जोर से, “आह सीसीसी आह, बहुत मजा आ रहा है!” करते हुए लंड पर कूदने लगी।

मैं किरण की चूत पर अपनी जीभ फिराते हुए दोनों हाथों से भाभी के बड़े चूतड़ पकड़कर नीचे से भाभी के हर झटके का जवाब झटके से दे रहा था।

भाभी बोली, “बस देवर जी, आह! मेरा निकलने वाला है! उफ्फ, आप मत झड़ना! आज आपको मेरी बड़ी बेटी की चूत खोलकर उसे अपने गर्म और गाढ़े पानी से भरना है! आह देवर जी, सकोगे ना आप मेरी बेटी की चूत खोलने? आह, कितनी छोटी है इसकी चूत! उफ्फ, आपके लंड का टोपा मेरी बेटी की पूरी चूत से बड़ा है!”

फिर भाभी किरण से बोली, “बेटी, ले सकेगी ना देवर जी का लंड अपनी चूत में? उफ्फ, आह मम्मी! बोल बेटी!”किरण चुदाई का नंगा नाच देखकर बोली, “हाँ मम्मी! मैं भैया का लंड लेना चाहती हूँ! आह, आप उठो जल्दी भैया के ऊपर से! मुझे भी लंड चाहिए!”

भाभी बोली, “वाह मेरी प्यारी बेटी! उफ्फ आह, आईईईई आह!” और झड़ने लगी।भाभी झड़ती हुई मेरे ऊपर गिर गई।

कोई दो-तीन मिनट बाद जैसे ही वो शांत हुई, तो उसने मेरे ऊपर से उठकर अपनी चूत को साफ किया।

मैं भी पास में रखी किरण की स्कर्ट से लंड को साफ करने लगा.तो भाभी बोली, “देवर जी, रुको! ये किरण की मम्मी की चूत की चिकनाई है! आप इसको साफ मत करो! मेरी कोमल सी बेटी की छोटी सी चूत में आपका मूसल लंड आराम से चला जाएगा!”

फिर भाभी नंगी ही उठकर अपनी भारी गांड मटकाते हुए बाहर जाने लगी।

आगे की कहानी की प्रतीक्षा कीजिये.

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