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भाई बहन • पठन समय: 6 मिनट • पढ़ा गया: 284 बार

बदलते रिश्ते-9

रानी मधुबाला

09 Jun 2017 को प्रकाशित

बदलते रिश्ते-9
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रानी मीनूबालाअनीता अपनी दीदी के घर से वापिस आ तो गई किन्तु रातें काटे नहीं कट रहीं थीं।जब उसे रामलाल के साथ गुजारी रातों की याद सताती तो वह वासना के सागर में गोते लगाने लगती और उसके समूचे बदन में आग की सी लपटें उठने लगतीं।आज तो उसे बिल्कुल नीद नहीं आ रही थी, वह जाकर खिड़की पर खड़ी हो गई और मंझली भाभी के कमरे में झाँकने लगी।रात के करीब ग्यारह बजे का समय था। ठीक इसी समय उसके बड़े भैया अजय ने भाभी के कमरे में प्रवेश किया।मझली भाभी के कमरे की हर चीज इस खिड़की से साफ़ दिखाई देती थी।उसने देखा- बड़े भैया के आते ही मझली भाभी पलंग से उठ खड़ी हुई और वह भैया की बाहों में लिपट गई।बड़े भैया ने उसके साथ चूमा-चाटी शुरू कर कर दी और उन्होंने भाभी को बिल्कुल नंगा करके उसकी चूचियाँ मुँह में भर कर चूसना शुरू कर प्रिया।अब वह खुद भी नंगे हो कर भाभी के नंगे बदन का जमकर मज़ा ले रहे थे।आज भैया ने भाभी के साथ कुछ अलग ही किस्म का मैथुन करना शुरू कर प्रिया, भाभी अपने दोनों नितम्बों को पीछे की और उभार कर झुकी हुई थीं और भैया अपना लिंग उनकी गुदा में डालने की कोशिश कर रहे थे।भैया का मोटा लिंग उनकी गुदा में नहीं घुस पा रहा था इसलिए भैया ने लिंग पर थोड़ा सा तेल लगाया और फिर अन्दर करने की कोशिश करने लगे।इस बार वह अपनी कोशिश में कामयाब हो गए क्योंकि उनका लिंग आधे से अधिक भाभी की गुदा के अन्दर घुस गया था।फिर भैया ने एक जोर का धक्का भाभी की गुदा पर लगाया। इस बार पूरा का पूरा लिंग भाभी की गुदा को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया, भाभी दर्द से चिल्लाने लगीं।भैया ने नीरज बंधाया- कोई बात नहीं मेरी जान, पहली बार गुदा-मैथुन में ऐसे ही दर्द होता है। आगे से ऐसा कुछ भी नहीं होगा।भाभी की गुदा का दर्द शायद कुछ कम हो गया था क्योंकि उन्होंने भी भैया की लिंग पर पीछे की ओर धक्के लगाने शुरू कर दिए थे।यह सब देखना अनीता की बर्दाश्त के बाहर था, अत: उसने अपना एक हाथ सलवार में डालकर अपनी योनि को कुरेदना शुरू कर प्रिया।इसी बीच छोटे भैया आ धमके, उसे खिड़की पर आँखें टिकाये देखकर मुस्कुराते हुए बोले- सुन्नो, दीदी के पास से आते ही तुमने फिर से भैया और मझली भाभी की ब्लू-फिल्म देखना शुरू कर दी। हट, अब मैं भी थोड़ा सा मज़ा ले लूँ।अनीता के वहाँ से हटते ही विजय भैया ने अपनी आँखें खिड़की पर टिका दीं, अनीता अपने कमरे में आकर कुर्सी पर बैठ गई।तभी उसकी निगाह मेज पर रखी एक इंग्लिश मैगजीन पर पड़ी। उठाकर देखा तो ज्ञात हुआ कि वह एक सेक्सी-मगज़ीन थी, उसमें एक जगह पर अनीता ने मास्टरबेशन, फिंगरिंग और फिस्टिंग जैसे शब्द पढ़े, जो उसकी समझ में नहीं आ रहे थे।उसने मन में सोचा कि भैया से सेक्स के बारे में बात करने का इससे बढ़िया मौका उसे कभी नहीं मिलेगा, क्यों न भैया के कमरे में चल कर इन बातों का ही मज़ा लिया जाए।वह उठ कर भैया के कमरे की चल दी। विजय अपने कमरे में एक कुर्सी पर बैठा हुआ था। अनीता दरवाजा ठेल कर अन्दर आ गई और विजय से बोली- भैया, मुझे इन शब्दों के अर्थ नहीं समझ में आ रहे हैं, मुझे बता दो प्लीज़…विजय ने देखा कि वही सेक्सी मैगज़ीन अनीता के हाथ में थी जिसे वह स्वयं अनीता की अनुपस्थिति में उसकी मेज पर रख आया था जिससे कि अनीता उसे पढ़े तो उसके अन्दर भी सेक्स की भावना प्रबल हो उठे।सेक्स की मैगज़ीन को अनीता के हाथ में देखकर विजय मन ही मन खुश हो उठा पर ऊपर से गुस्सा दिखाते हुए उसे डांटकर बोला- अरे यह तो सेक्सी मैगज़ीन है। कहाँ से लाई इसे? ऐसी सेक्सी किताबें पढ़ते हुए तुझे शर्म नहीं आती? मालूम है, ये सेक्सी-मैगज़ीन बड़े लोग पढ़ा करते हैं।अनीता बेझिझक होकर बोली- भैया, मैं भी तो अब बालिग़ हो चुकी हूँ। पूरे 19 वर्ष की हो चुकी हूँ। फिर मेरी शादी भी तो होने वाली है अब।विजय चुप हो गया और बोला- बता, क्या पूछना चाहती है?अनीता ने पूछा- भैया, यह मास्टरबेशन क्या होता है? एक ये फिंगरिंग और फिस्टिंग शब्दों का मतलब समझ में नहीं आ रहा।विजय मुस्कुराया और बोला- जा पहले कमरे की सिटकनी लगा कर आ… तब मैं डिटेल में तुझे इसका मतलब समझाऊंगा।अनीता ने दरवाजा अन्दर से बंद कर प्रिया। उसके मन में लड्डू फूट रहे थे कि आज विजय उसकी जरूर लेगा।वह ख़ुशी-ख़ुशी लौटकर आई और कुर्सी खींच कर विजय के पास ही बैठ गई।विजय ने कहा- सुन्नो, देख मैं तुझे समझा तो दूँगा इन शब्दों का मतलब, लेकिन जब तब इन पर प्रेक्टिकल करके नहीं समझाऊँगा, तेरी समझ में कुछ नहीं आने वाला ! बोल…समझेगी?‘हाँ भैया, मुझे कैसे भी समझाओ, मुझे मंजूर है।’‘उस दिन जब मैंने तेरी चूचियों पर हाथ फिराया था तो तू नाराज होकर अन्दर क्यों भागी थी?’‘भैया, उस समय मुझे डर लग रहा था। हम लोग बाहर खड़े थे, कोई देख लेता तो..? मैं अन्दर आई ही इसीलिए थी कि अगर आप अन्दर आकर मेरी चूचियाँ सहलाओगे तो किसी को भी पता नहीं चलेगा और मुझे भी अच्छा लगेगा।’विजय बोला- इसका मतलब तो यह हुआ कि तू उस दिन भी तैयार थी अपनी चूचियों को मसलवाने के लिए? अरे यार, मैं ही बुद्धू था, जो उस दिन बुरी तरह डर कर भाग निकला। अच्छा, आ बैठ मेरे पास और एक बात बता …क्या सच में तू मेरे साथ मज़े लूटना चाहती है या मुझे उल्लू बनाने के मूड में है। अगर वाकई तू जवानी के मज़े लेना चाहती है तो चल मेरे बैड पर चलते हैं।

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