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भाभी की चुदाई • पठन समय: 10 मिनट • पढ़ा गया: 972 बार

लण्डों की होली-1

क्यूट विराट

09 Jan 2025 को प्रकाशित

लण्डों की होली-1
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Lundo ki Holi-1विराटदोस्तो, आज मैं आपके लिए एक नई कहानी लेकर आया हूँ। यह घटना मेरी दोस्त निशा (बदला हुआ नाम) के साथ हुई है, जो मैं आपके लिए उसी की ज़ुबानी में लेकर आया हूँ।

आपको यह कहानी कैसी लगीम मुझे ज़रूर बताना।

अब निशा के शब्दों में पढ़िए।

मेरा नाम निशा है, मैं 22 साल की हूँ, मेरा फिगर 34-28-36 है। मैं बहुत ही सुंदर और सेक्सी लगती हूँ।

मैं आपको अपने परिवार के लोगों का परिचय दे देती हूँ। मेरे पति नवीन की लम्बाई 5’8″ हट्टे-कट्टे नौजवान हैं। उनके लंड की लंबाई 5.7 इन्च है।उनके बाद मेरे पति के बड़े भाई अशोक और उनकी पत्नी नीलम, दोनों ही बहुत खूबसूरत और दिखने में कामुक लगते हैं।नीलम भाभी का फिगर 36-30-38 है, अशोक का लंड 6.2 और बहुत ही मोटा है।उनसे बड़े अजय और उनकी पत्नी आरती, वो दोनों भी दुबले-पतले सेक्सी फिगर वाले, आरती भाभी का फिगर भी 36-30-38 है।

इस घर में सभी लोगों ने अपने आप को सेहत के नजरिए से चुस्त-दुरुस्त करके रखा हुआ था और अब मेरे सास-ससुर की बात करते हैं।मेरे ससुर लंबे अच्छी कद-काठी के थे। उनका लंड सबसे लंबा और मोटा था। मेरी सास थोड़ी सी मोटी थी, पर उनके मम्मे और चूतड़ भी बड़े-बड़े थे।

मेरी शादी एक बहुत बड़े घर में हुई थी, घर के सभी लोग मुझसे बहुत प्यार करते और मुझे पसंद भी करते थे। मेरे ससुर बहुत सख्त किस्म के इंसान थे, घर के सभी लोग उनसे बहुत डरते थे।

यह कहानी मेरी शादी के बाद पहली होली की है, मेरी शादी को 3 महीने हो गए थे और इस घर में यह मेरी पहली होली थी।

मुझे होली के पुराने रिवाज़ ही पता थे कि एक-दूसरे पर गुलाल डालना, पिचकारी से रंगों वाले पानी दूसरों पर डालना आदि।

इस घर में होली की रस्म कुछ और थी।होली की तैयारियाँ चार दिन पहले से शुरू हो गई थीं।घर की सभी महिलायें ब्यूटी-पार्लर के रोज़ शाम को चक्कर लगाने लगीं, पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

मैंने नीलम भाभी से पूछा- यह क्या हो रहा है?

तब मुझे भाभी ने बताया- हम ये सब होली की तैयारियाँ कर रहे हैं, तुम भी तैयार हो जाओ.. हम यहाँ कुछ अलग तरह से होली खेलते हैं।

मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी।

दूसरे दिन सुबह मेरे पति ने मुझसे पूछा- होली की तैयारी हो गई है?

‘किस तरह की तैयारी?’ मैंने पूछा।

तब नवीन ने नीलम भाभी को आवाज़ लगाई और उनसे कहा- निशा अब तक तैयार नहीं हुई है।

तो नीलम भाभी ने कहा- आज हो जाएगी और अभी हम सब भी तो बाकी हैं।

यह कहकर वो मुस्कुराते हुए चली गईं।

मैं फिर भी कुछ समझ नहीं पाई।

दोपहर को तीन बजे मेरी सास मुझे बुलाने के लिए आईं।

मैं उनके साथ ऊपर वाले कमरे में गई। वहाँ पर मेरी दोनों भाभियाँ साड़ी उतार कर, सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट पहने हुए थीं।

मेरे वहाँ जाते ही मेरी सास ने भी अपनी साड़ी निकाली और पैन्टी भी उतार दी।

उसके बाद नीलम भाभी और आरती भाभी ने भी अपनी पैन्टी निकाली।आरती भाभी ने अपनी पैन्टी मेरी सास के मुँह पर फेंकी और वो दोनों हँसने लगीं।मैं अब यह सब देख कर सोच रही थी कि यह सब क्या चल रहा है?

इतने में आरती भाभी ने मुझसे कहा- अपनी साड़ी और पैन्टी निकाल दे और आ इधर बैठ जा…

मेरी सास मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ कर कहा- घबरा मत कुछ नहीं होगा.. यह तो हम सब होली खेलने के लिए कर रहे हैं।

उन्होंने मेरे सारे जेवर निकाल दिए। नीलम भाभी भी उनका साथ देने लगीं।

और अंत में उन्होंने मेरी साड़ी निकाली।

सासू माँ ने मेरा पेटीकोट उठाया और नीलम भाभी ने मेरा पेटीकोट निकाल प्रिया।

मैं बहुत ही शरमा रही थी और घबरा भी रही थी, पर वहाँ कोई मर्द ना होने के कारण मैं अपने आपको सुरक्षित महसूस कर रही थी।फिर सभी महिलायें एक-दूसरे की चूत के बाल साफ करने लगीं, यह देखकर मैं दंग रह गई।

सबसे पहले आरती भाभी ने सासू माँ की चूत के बाल साफ किए, मैं और नीलम भाभी यह देख रहे थे।

फिर मेरी सास ने मेरी चूत के और नीलम और आरती भाभी ने एक-दूसरे के चूत के बाल साफ किए।

जब मेरी सास मेरे बाल निकाल रही थीं तब मैं बहुत ही वासना महसूस कर रही थी और मेरे चूत में से तो मेरा पानी निकल गया।

यह देख कर आरती भाभी बोलीं- इसे कल के लिए संभाल कर रखो, अगर आज यह इस तरह से निकल गया तो कल क्या करोगी?

यह सुन कर मैं हैरान हो गई और सभी लोग ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।

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शाम को करीब 6 बजे थे तभी मेरे पति ने आवाज़ लगाई और माँ ने कहा- उसे थोड़ा वक़्त लगेगा.. हम होली के लिए तैयार हो रहे हैं।

यह सुनकर वो अपने कमरे में चले गए।

मुझे ऐसा लगा कि उन्हें जैसे पता है कि हम लोग क्या कर रहे हैं।

जब हम सब बाहर निकले तो वो कमरे के सामने खड़े थे, उन्हें देख कर नीलम और आरती भाभी शरमा कर चली गईं।

माँ मुझे नवीन के पास छोड़कर चली गईं।कमरे में जाते ही मैंने उन्हें सारी बात बताई और पूछा- कल क्या होने वाला है?

यह सुन कर वो मुस्कुराए, मेरे गालों पर चुम्बन करते हुए कहने लगे- कल सुबह 6 बजे उठ जाना.. सब पता चल जाएगा।

मैं फिर सोचने लगी कि कल क्या होने वाला है?

सुबह जब मैं 6 बजे उठी तो देखा कि मेरे पति टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने खड़े हैं और उनकी अंडरवियर वहाँ ज़मीन पर पड़ी है।

मुझे यह सब सामान्य सा लगा, मैं फ्रेश होकर सफ़ेद रंग का ब्लाउज, पेटीकोट और साड़ी पहन कर बाहर आई।

नवीन मुझे देख कर हँसने लगे, तभी मैंने देखा कि नीलम भाभी एक पारदर्शी पीले रंग का ब्लाउज और पेटीकोट में घर में घूम रही थीं।नवीन ने उन्हें बुला कर मुझे दिखाया।

नीलम भाभी मुझे देखकर हँसी और मुझे अन्दर ले गईं।

उन्हें देखकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ, जो बिना सर पर पल्लू के किसी मर्द के सामने नहीं आती थीं, वो आज इस तरह के कपड़ों में घूम रही हैं।

जब वो मुझे अन्दर लेकर आईं, उन्होंने मुझसे कहा- ये कपड़े उतारो और यह ब्लाउज और पेटीकोट पहन लो और हाँ इसके अलावा कुछ भी मत पहनना, ब्रा और पैन्टी भी नहीं…

जब मैं उनके मुताबिक तैयार हो गई तो वो मुझे बंगले के पीछे वाले हिस्से में ले गईं, जहाँ पर तरणताल भी था।

वहाँ पर घर के सभी लोग खड़े थे और ज़ोर-ज़ोर से हँस-हँस कर बातें कर रहे थे।

सभी औरतें सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं और सभी मर्द शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहने हुए थे। जब मैंने अजय और ससुर जी को देखा तो उनके शॉर्ट्स में टेंट बने हुए दिख रहे थे।

मैं तुरंत समझ गई कि उनका लंड खड़ा हुआ है।

मैंने नवीन को मुझे चोदते समय देखा है और मेरी नज़र उस पर टिक गई।

मुझे यह देखते हुए नीलम भाभी ने देख लिया और वो तुरंत अजय के लंड को पकड़ते हुए कहने लगी- क्या देख रही हो?

सब हँसने लगे, मैं हैरान हो गई कि ये सब क्या हो रहा है?पर मैं समझ गई कि कुछ सेक्स को लेकर होने वाला है और मैं भी थोड़ी गर्म हो गई।

फिर मेरे ससुर हरी ने कहा- पहले सारी औरेतें नमस्ते कहेंगी।

उनके कहने के बाद सारे मर्द और महिलाओं उम्र के हिसाब से खड़े हो गए। सबसे पहले मेरी सास नीता आगे आई तो सारे पुरुषों ने अपने शॉर्ट्स नीचे कर दिए।

सासू माँ ने सबसे पहले ससुर जी के लंड के सुपारे को चुम्बन किया, फिर आरती भाभी ने सबके लंड को चुम्बन किया।

तभी नीलम भाभी जो मुझसे आगे खड़ी थी, उन्होंने मुझे बताया- इसे लंड नमस्कार कहते हैं।

मैं और गर्म हो गई, पर थोड़ा नर्वस भी थी।

फिर नीलम भाभी की बारी आई उन्होंने भी सबका हथियार मुँह में लिया। जब वो नवीन के पास पहुँची, तो वो उन्हें देखकर थोड़ा मुस्कुराई और जहाँ सारी महिलाओं ने सुपारे पर चुम्बन किया था, वहीं उसने नवीन का पूरा लंड मुँह में ले लिया और फिर वहाँ से चली गई।

अब मेरी बारी थी, मुझे ज़रा घबराहट हो रही थी।

पहले जब मैं ससुर हरी के पास गई सभी की नज़रें मुझ पर जड़ गईं। जैसे ही मैंने चुम्बन करने के लिए मुँह खोला, उन्होंने अपना पूरा लंड मेरे मुँह में डाल प्रिया और सब हँस पड़े।

मैं उसे निकालना चाहती थी, पर उन्होंने मेरा सिर कस कर पकड़ लिया था और मैं छूट नहीं पाई।फिर मैंने सबका लंड मुँह में लिया।

अब उन्होंने शॉर्ट्स ऊपर किए और ससुर जी ने कहा- अब सब घर की महिलायें घर में छुप जायें, अगर हमने किसी को ढूँढ लिया तो सब मिलकर उसे चोदेंगे।

तब घर की सारी महिलायें भागने लगीं। नीलम अपने साथ मुझे ले गई, पर मैंने देखा वो तो ऐसी जगह पर छुपी थी कि कोई भी इससे ढूँढ लेता।

मुझे डर लग रहा था कि मैं इतने भूखे लोगों के लंड कैसे झेल पाऊँगी, तो मैं ऊपर वाले कमरे में जाकर छुप गई, मैं वहाँ से सारे मर्दों को देख सकती थी।आपको यह कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर बतायें।कहानी जारी रहेगी।

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

लण्डों की होली

कुल भाग: 2
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