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माँ की चुदाई • पठन समय: 10 मिनट • पढ़ा गया: 1,042 बार

माँ बहन संग चूत चुदाई -7

अभिषेक कुमार लायन

02 Sep 2020 को प्रकाशित

माँ बहन संग चूत चुदाई -7
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तभी दीदी की नज़र मेरे खड़े लंड पर पड़ी तो वो चौंक कर माँ से बोली- माँ देखो.. भाई कैसे सो रहा है और उसके सूसू पे क्या हुआ है?तो माँ ने मेरी तरफ देखते हुए कहा- हाँ.. उसकी सूसू में रगड़ लगने की वजह से छिल गया है.. मैंने ही क्रीम लगा कर खुला रखने को कहा है।दीदी बोली- वहाँ पर कैसे रगड़ लग गई.. जो इतना छिल गया?तो माँ हँसते हुए बोलीं- मुझे क्या पता?दीदी भी हँसते हुए बोली- अच्छा तो.. इसने ज़रूर वो ही किया होगा।माँ बोलीं- अच्छा.. तुझे कैसे पता.. तू भी वही करती है क्या?तो दीदी हँसने लगीं..

तभी प्लान के मुताबिक माँ ने अपनी नाईटी हल्का सा खींच कर अपनी बुर खुजलाने लगीं और ऐसे बैठ गईं कि दीदी को उनकी बुर दिखाई दे।माँ की बुर पर नज़र पड़ते ही दीदी बोलीं- माँ तुमने मेरी बाल साफ़ करने वाली क्रीम लगाई है क्या?तो माँ बोलीं- तुझे कैसे पता?दीदी ने कहा- तुम्हारी चिकनी बुर दिखाई दे रही है।

तो माँ झुक कर अपनी बुर देखने का बहाना करते हुए बोलीं- हाँ.. लगाई है.. उसमें ज़रा सी तो बची थी।

दीदी माँ की बुर की ओर इशारा करके हँसते हुए बोली- वो ज़रा सी थी? मेरी पूरी क्रीम एक बार में खत्म कर दी.. अपनी बुर का साइज़ तो देखो.. इतनी बड़ी बुर है कि पूरी की पूरी एक बार में ही खत्म हो जाए और ऊपर से शीशे में देख कर फैला-फैला कर लगाती हो।

तो माँ भी हँसते हुए बोलीं- अच्छा तो सिर्फ़ मेरी ही बड़ी है.. तेरी तो इसी उम्र में इतनी फैल गई है.. जितनी मेरी तेरे पैदा होने के बाद फैली थी और तू तो रोज लगाती है.. तो खत्म नहीं होगी।दीदी की चड्डी की ओर जो स्कर्ट से दिखाई पर रही थी.. इशारा करते हुए बोलीं।तो दीदी ने कहा- नहीं.. मैंने नहीं लगाई है.. मैं ढूँढ रही थी.. पर मिली नहीं।माँ ने कहा- मैं मान ही नहीं सकती।

अब दीदी भी मस्ती में भर कर अपनी चड्डी को साइड से हल्का सा खींच कर अपनी बुर माँ को दिखाते हुए बोली- नहीं लगाई.. ये देखो अभी मेरी बुर तुम्हारे जितनी चिकनी नहीं है.. 10-12 दिन हो गए है.. बाल साफ़ किए हुए।

ये सारी बातें सुन कर मेरा लंड पूरा 6-7 इंच का होकर तन गया और झटके लेने लगा।तभी मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी- वो देखो भाई का लंड कैसा हो गया है.. लग रहा है कि सपने में कुछ कर रहा है।तो माँ हँसने लगीं और कपड़े लेकर पलंग पर बैठ गईं तो दीदी भी साथ में पलंग पर आ गईं।

मैंने हाथ को अपने चेहरे पर इस तरह रखा था कि वो दोनों मुझे दिखाई दे रहे थे.. पर उन्हें मैं सोता हुआ लग रहा था।मैंने देखा कि दीदी की निगाहें मेरे लंड पर टिकी हुई थीं.. तो मैं अपने लंड को और झटके देने की कोशिश करने लगा।

तभी माँ दीदी से बोलीं- ज़रा तौलिया देना.. और कहते हुए अपनी नाईटी को कमर तक उठाते हुए अपनी बुर खोल दी।माँ दीदी को पूरी तरह गरम करना चाहती थीं और यही हमारा प्लान था।माँ खुद भी गरम हो गई थीं और उनकी बुर से पानी निकलने लगा था।शायद यही हाल दीदी का भी था.. तौलिया लेते ही माँ दीदी को दिखाते हुए अपनी बुर की पुत्तियों को हाथों से फैला कर पौंछने लगीं.. उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।

तभी दीदी ने माँ से कहा- माँ मुझे भी देना..तो माँ ने पूछा- क्यों तेरी बुर भी पानी छोड़ रही है क्या?दीदी ने कहा- हाँ.. मेरी भी चड्डी गीली हो गई है।

माँ अपनी बुर पौंछने के बाद दीदी को तौलिया देते हुए बोलीं- तूने तो फालतू में ही चड्डी पहन रखी है.. उतार क्यों नहीं देती.. देख पूरी गीली हो गई है.. कोई बाहरी थोड़े ही है यहाँ पर.. और फिर तू तो मेरे सामने कई बार नंगी हो चुकी है।

तो दीदी मेरी ओर इशारा करने लगी।माँ बोलीं- ये बेचारा तो वैसे ही परेशान है और ये भी तो नंगा ही है और तुझसे छोटा ही है.. इससे कैसी शरम.. चल उतार दे.. गीली चड्डी नहीं पहनते।यह कह कर माँ अपनी नाईटी उतारने लगीं।

यह देख कर दीदी भी जो अब तक मेरी वजह से शर्मा रही थी.. माँ का इशारा पाकर तुरंत अपनी टी-शर्ट.. स्कर्ट और चड्डी उतार कर नंगी हो गई।

दीदी की चूचियाँ माँ जितनी बड़ी तो नहीं थीं.. पर काफ़ी सुडौल थीं। उसकी बुर पर छोटे-छोटे बाल थे और बुर भी फूली हुई थी.. पर उसकी पुत्तियाँ माँ जितनी बड़ी नहीं थीं.. वहाँ पर हम तीनों ही नंगे थे।

पूरे पलंग पर बुर के पानी की खुश्बू फैल गई थी। तभी माँ ने मेरे लंड को हाथों में लेते हुए कहा- ज़रा देखूं तो अभी रगड़ सूखी या नहीं..वो मेरे सुपारे को घुमा कर चारों तरफ से देखने लगीं।दीदी भी मेरी तरफ खिसक आई थी और उसकी भी साँसें माँ की तरह तेज़ चल रही थीं।

माँ ने जानबूझ कर दीदी की तरफ अपनी कमर करके जाँघों को पूरा खोल प्रिया.. जिससे उनकी बुर पूरी तरह खुल गई और उसकी पुत्तियाँ बाहर निकल कर लटक गईं।

माँ धीरे-धीरे मेरे सुपारे को सहला रही थीं..दीदी मेरे सुपारे को बड़े ध्यान से देख रही थी और गरम हो गई थी, अब वो माँ के सामने ही अपनी बुर रगड़ने लगी।

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यह देख कर माँ दीदी को चुदाई के लिए तैयार करने के लिए हँसते हुए बोलीं- क्या हुआ.. लग रहा है लंड देख कर तेरी बुर ज्यादा पानी छोड़ रही है.. अभी तेरी बुर का छेद छोटा है.. इतना मोटा सुपारा उसमे फँस जाएगा और तेरी बुर फट जाएगी.. कोई बात नहीं.. तू ऊँगली करके पानी निकाल दे।

यह सुन कर दीदी और गर्म हो गई और एकदम खुल कर माँ से बोली- अच्छा.. तो क्या सिर्फ़ तुम्हारी बुर का छेद ही इसके साइज़ का है.. लंड दिख गया.. तो तुम्हारी बुर फड़कने लगी नहीं.. तो हमेशा ऊँगली करती रहती थीं और मेरी चूत का छेद इतना भी छोटा नहीं है.. ये देखो..

और ये कह कर अपनी बुर को हाथों से फैला कर माँ को अपना लाल-लाल छेद दिखाने लगी और वो दोनों हँसने लगे।हम सब इतने उत्तेजित थे कि किसी को कुछ भी होश नहीं था।

सिर्फ़ लंड और बुर दिखाई दे रहा था। तभी मैंने सही समय सोच कर उठने का नाटक करते हुए अपनी आँखें खोल दीं और उठने का नाटक करते हुए बैठ गया।

मेरे उठते ही माँ ने पूछा- अरे उठ गया बेटा.. अब दर्द तो नहीं हो रहा है।मैंने कहा- नहीं.. पर मुझे पेशाब लगी है।

और यह कह कर बिना दीदी की तरफ देखे.. बाथरूम जाने लगा।तो माँ बोलीं- मुझे भी पेशाब लगी है.. रुक मैं भी चलती हूँ।

वो मेरे साथ आ गईं.. बाथरूम पहुँच कर हम दोनों साथ-साथ मूतने लगे।माँ की बुर से तेज़ सीटियों जैसी आवाज़ निकल रही थी।हम अभी शुरू ही हुए थे कि दीदी भी आ गईं।

उसे देख कर माँ ने पूछा- क्या हुआ?तो दीदी ने कहा- मुझे भी पेशाब लगी है।तो माँ ने हँसते हुए कहा- अच्छा बैठ जा.. लगता है तेरी बुर लंड के लिए ज्यादा खुजली मचा रही है।

वो हम दोनों के सामने ही बैठ गई.. बैठने पर उसकी जाँघें फैल गईं.. जिससे उसकी बुर की फाँकें पूरा फैल गईं और बुर के लाल-लाल छेद से निकलते हुए पेशाब की धार को देख कर मेरा लंड और तन गया।

दीदी भी मेरे लंड से पेशाब की धार निकलते हुए बड़े ध्यान से देख रही थी।तो माँ ने मौका देख कर मुझसे पूछा- अब सुपारे पर पेशाब लगने से कल की तरह जलन तो नहीं हो रही है?तो मैंने कहा- नहीं..

तब तक माँ पेशाब कर चुकी थीं और मैं भी और दीदी के मूतने का इन्तजार करने लगे।जब दीदी मूत कर खड़ी हुईं तो हम सब कमरे में आ गए।मेरा लंड अभी भी एकदम खड़ा था।

माँ पलंग पर टेक लगा कर बैठ गईं और मुझे अपने पास बैठा लिया।दीदी भी हम दोनों के सामने बैठ गई।

फिर माँ मेरे सुपारे को हाथ में लेकर बोलीं- ठीक है.. अब कुछ दिन तक रगड़ना-वगड़ना नहीं.. लंड खड़ा होता है तो कोई बात नहीं… थोड़ी देर लंड को सहलाएगा तो ठीक हो जाएगा..‘लेकिन माँ ज्यादा तनने के कारण मेरे लंड में अब बहुत खुजली हो रही है।’ मैंने लंड माँ की तरफ बढ़ाते हुए कहा।

तो माँ बोलीं- ठीक है.. मैं इसका पानी झाड़ देती हूँ.. फिर ये थोड़ा नरम हो जाएगा.. नहीं तो चमड़ा खिंचने से और दर्द होगा।

मैंने कहा- क्या.. अभी तो माँ मेरे चूतड़ पर हाथ रख कर अपनी तरफ करते हुए लंड को दूसरे हाथ में लेकर बोलीं- तो क्या हुआ.. मेरे सामने कैसी शरम और अब तो दीदी के सामने भी शरमाने की कोई ज़रूरत नहीं है।

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