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रिश्तों में चुदाई पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 573 बार

मेरी मामी की तड़पती जवानी-2

हरजीत

01 Nov 2010 को प्रकाशित

मेरी मामी की तड़पती जवानी-2
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रिश्तों में चुदाई की मेरी कहानी के पहले भागमेरी मामी की तड़पती जवानी-1

में आपने अब तक पढ़ा कि दूर के रिश्ते में मेरे मामा मामी आये हुए थे. मैं और मामी एक दूसरे की तरफ वासनात्मक दृष्टि से देखते थे.अब आगे:

मामी ने नाइट सूट के ऊपर के तीन बटन खोल दिये और बूब्स के बीच की सुमन मुझे साफ़ साफ़ दिखाई देने लग गयी थी। उसके बूब्स देखकर मेरे लंड में उछाल आना शुरू हो गया था.बूब्स एकदम सीधे खड़े थे। मैंने अपना एक हाथ वंदना के गले से अन्दर डाल प्रिया और एक बूब्स को पकड़ कर ज़ोर से दबाया तो मामी तड़प उठी।मैंने अपना हाथ बाहर निकाला तो मामी बोली- बस और नहीं देखने 34 इन्च के बूब्स?तो मैंने कहा- अभी नहीं।

फिर मामी बोली- तुम उस समय मेरे सामने बिल्कुल नंगे खड़े थे, तुम्हारा लन्ड बहुत लम्बा है.तो मैंने कहा- हाँ जी, तुम देखना चाहती हो तो देख लो।वंदना ने अपना हाथ मेरे निक्कर के अन्दर डाला और लन्ड को अपने हाथों में भर लिया और धीरे से हिलाने लगी।वंदना बोली- तुम्हारा लन्ड कितना लम्बा है.मैंने कहा- निकाल कर देख ले।

वंदना मामी ने लंड को बाहर निकाला तो लंड पूरा तना हुआ था और वंदना लंड को ही देखे जा रही थी। फिर मुझे पापा और मामा की आवाज़ आई। हम बाहर आये तो देखा कि मामा ने दारू पी रखी थी।मुझे देखकर हैरानी हुई कि मामा दारू पीते हैं.माँ बोलने लगी- काफ़ी टाइम हो गया है.

तो सब सोने चले गये। मामा और मामी दोनों मेरे कमरे में सोने चले गये.

माँ व पापा अपने कमरे में चले गये और मैं ड्राईंग रूम में लेट गया। फिर मैंने वंदना के फोन पर एक मेसेज़ किया और साथ में ही उसने जवाब दे प्रिया।मैंने वंदना से कहा- जब मामा सो जायें तो मेरे पास ड्राईंग रूम में आ जाना!तो वो मान गयी।

फिर मैं वंदना से मेसेज़ पर चैट करता रहा. उसने बताया कि मामा हर रोज़ दारू पीकर आता है, मामी से ढंग से बात नहीं करता, बस अपने नशे में धुत रहता है। एक साल हो गया शादी किए हुए, प्यार का एक पल भी उन्होंने साथ में नहीं बिताया।वंदना ने मुझे उसके और मामा के रिश्ते के बारे में सब कुछ बताया।

मामी बोली- मैं आप से एक बात बोलूँ?मैंने कहा- हाँ, जी बोलो.मामी बोली- मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ.मैंने कहा- मैं भी तुमसे प्यार करने लगा हूँ.

मामी ने कहा- तुम्हारे मामा ने आज तक मुझे कभी प्यार नहीं किया. वो बस दारू के नशे में चूर रहता है.मैंने कहा- कोई बात नहीं, मैं तुमसे जी भर कर प्यार करूंगा लेकिन तुम सिर्फ मेरी बनकर रहोगी.तो मामी ने कहा- हाँ, मैं तु्म्हारी ही बनकर रहना चाहती हूँ।

बात करते-करते रात का 1 बज चुका था. वंदना बोली- मैं तुम्हारे पास आ रही हूं.तो मैंने कहा- आ जाओ.

उसने बाहर आने के बाद माँ और पापा वाले कमरे को बाहर से बंद कर प्रिया. मैंने आते ही मामी को अपने गले से लगा लिया और उसको प्यार करने लगा. यहाँ-वहाँ किस करने लगा.

मैं उसके बाद मामी को ऊपर वाले कमरे में ले गया और कमरे को अन्दर से बंद कर प्रिया. मामी के होंठों को अपने होंठों में भर लिया और जी भर कर चूसने लगा. मामी भी लिप्स पर किस करने लगी. मैं उसकी गांड पर हाथ फेरने लगा. साथ ही गांड को दबाने लगा. मैंने मामी का कमीज ऊपर से उतारा और देखा कि दो मोटे-मोटे मम्मे मेरे सामने ब्रा के अन्दर कैद थे. मैंने उनकी ब्रा को उतार प्रिया और बूब्स को आज़ाद कर प्रिया. बूब्स को मैं मुंह में भर कर पीने लगा.

मामी को सेक्स चढ़ने लगा, वह मचलने लगी. फिर मैं रुक गया और कहा कि कोई ऊपर भी आ सकता है. मेरे साथ नीचे ही चलो. अन्धेरे में मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना.तो वह मान गयी. हम दोनों फिर से नीचे आ गए.

लाइट्स बन्द थीं और नीचे एकदम अन्धेरा था. मैं सोफे पर लेट गया मैंने अपने कपड़े उतार दिए और वंदना ने मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर प्रिया. मैंने वंदना के पूरे कपड़े उतार दिये थे. मैं उसके बूब्स को ज़ोर से खींचने लगा. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. वंदना लण्ड को कभी अन्दर ले जाती तो कभी बाहर निकाल देती. कभी मेरी गोलियों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगती. काफी देर तक वह मेरे लण्ड को चूसती रही.

मैंने उसको फिर अपनी गोद में बैठने को कहा और हम दोनों नंगे होकर एक-दूसरे की बाहों में लिपट गए. मैंने धीरे से उसके कानों में कहा कि उसके बूब्स बहुत ही ज्यादा सेक्सी हैं और उसका जिस्म बहुत ही मखमली है.वंदना मुझसे लिपटी हुई मेरे शरीर पर किस कर रही थी.

मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर प्रिया और अपनी उंगली जैसे ही मैंने उसकी चूत में डाली तो वह उचक गई. वंदना की चूत काफी टाइट लग रही थी. वह मुझसे ऐसे लिपटी कि उसके नाखून मेरे शरीर में गड़ने लगे थे. वंदना का सारा बदन किसी भट्टी की तरह गर्म हो चुका था. हम दोनों पसीने से नहा चुके थे.

उसके बाद मैंने वंदना को अपने बदन के साथ चिपका लिया. फिर मैंने उससे कपड़े पहनने के लिए कह प्रिया और उसको अपने कमरे में जाने के लिए कह प्रिया. मैंने उसे कल के लिए टाल प्रिया. वह जाना नहीं चाहती थी, मेरे साथ ही सोना चाहती थी मगर मैंने उसे कमरे में भेज प्रिया.

कुछ देर बाद मैं सो गया और सुबह उठा तो वंदना मेरे लिए चाय लेकर आई और कहने लगी- उठ जाओ जानू.मैंने पूछा- कल की रात कैसी रही?वह बोली- बहुत मज़ा आया.मैंने कहा- आज की रात और ज्यादा मज़ा आने वाला है.

वंदना मेरी माँ के साथ रसोई में काम करवाने चली गई और मैं नहाने के लिए चला गया. नाश्ता करने के बाद पापा और मामा किसी काम से बाहर चले गए और बोल गए कि वो शाम तक ही आएंगे, घर में केवल हम तीनों ही रह गए थे.वंदना ने माँ से पूछा- मुझे कुछ सामान लेना है तो क्या मैं हैरी को अपने साथ ले जाऊं?तो माँ ने हाँ कर दी.

हम 10 बजे के करीब घर से निकल गए. वंदना ने एक टाइट जीन्स पहनी थी और डीप नेक कट का टॉप पहना हुआ था.मैंने वंदना से पूछा- तुम्हें क्या लेना है?तो उसने कहा- मुझे तुम्हारे साथ बस दिन बिताना था तो सामान का बहाना करना पड़ा.मैंने कहा- चलो फिर कहीं घूमने चलते हैं.

मैं गाड़ी को घर से काफी दूर ले गया. गाड़ी को कच्चे रास्ते पर ले गया. मैंने गाड़ी रोक दी और वंदना के बूब्स के अन्दर हाथ डाला और दबाना शुरू कर प्रिया. मैंने अपना लंड भी बाहर निकाल प्रिया और वंदना को चूसने के लिए कहा तो उसने मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर प्रिया.वंदना मेरे लंड को मज़ा लेकर चूसने लगी और मैं आनंद में खोने लगा. उसके होंठों में जादू था. रात को भी जब वह मेरा लंड चूस रही थी तो मुझे ऐसा मज़ा आ रहा था कि मैं 5 मिनट में ही झड़ जाऊंगा. मैं बड़ी मुश्किल से खुद को कंट्रोल कर पा रहा था.

वंदना मेरे लंड को चाटने में लगी हुई थी और मेरे मुंह से कामुक सिसकारियाँ निकलना शुरू हो गई थीं.मैं उसकी चुसाई का पूरा मज़ा ले रहा था. फिर मैंने सोचा कि ऐसे तो मज़ा जल्दी ही खत्म हो जाएगा. फिर मैंने वंदना के बदन के साथ खेलना शुरू कर प्रिया.मैंने वंदना का टॉप ऊपर किया और ब्रा को पीछे से खोलकर उसके चूचों को ब्रा से बाहर निकाल लिया और दबाने लगा. मैंने पूरा लंड वंदना के मुंह में डाल प्रिया. मेरा लंड वंदना के गले तक पहुंच गया. वंदना मेरे लंड पर जीभ फिरा रही थी. मैंने उसकी जीन्स के अंदर ही उसकी गांड को सहलाना शुरू किया और वह मज़े से मेरे लंड को चूस रही थी. काफी देर तक वह मेरे लंड को चूसती रही.मैंने फिर उसको ऊपर उठाया और उसके बूब्स को मुंह में भर लिया. वंदना पागल होने लगी थी. मैंने उससे कहा कि किसी रूम पर चलते हैं वहां पर जाकर सेक्स करेंगे.

फिर मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया और वह दोस्त भी मान गया. मैं वंदना को दोस्त के घर पर ले गया. दोस्त को मैंने शाम तक के लिए घर से बाहर भेज प्रिया. दोस्त चला गया. मैंने कमरे को अन्दर से बंद किया और वंदना को अपनी बांहों में भर लिया. मैंने उसके सारे कपड़े निकाल दिए.

हम दोनों नंगे हो चुके थे और मैंने वंदना के बूब्स को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर प्रिया. वंदना के बूब्स को चूसते-चूसते मैंने उसे बेड पर लेटाया और उसकी चूत को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा. मैं वंदना को 69 की पॉजीशन में ले आया. वंदना ने मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और मैं उसकी चूत को चूसने लगा. मैं तेज़ी के साथ अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था. वंदना भी ज़ोरों से मेरे लंड को चूसने में लगी हुई थी. फिर मैं बेड पर लेट गया और वंदना मेरे ऊपर आ गयी. मैंने लंड को वंदना की चूत के अन्दर डाला और एक धक्के से पूरा लंड उसकी चूत में उतार प्रिया.

वह दर्द से तड़प उठी क्योंकि उसकी चूत काफी टाइट थी. फिर वह धीरे-धीरे नीचे और ऊपर होने लगी. फिर मैंने उसको बेड पर लेटाया और सामने से उसकी चूत में लंड डाला और उसको चोदने लगा. फिर मैंने उसको घोड़ी बनने को कहा और चुपके से लंड को उसकी गांड में डाल प्रिया. गांड बहुत ही ज्यादा टाइट थी और लंड अंदर जा नहीं रहा था.फिर मैंने एक ज़ोर का धक्का प्रिया तो लंड अंदर जाने लगा. उसके बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. मैं काफी देर तक वंदना की गांड को चोदता रहा. फिर मैंने अपने लंड को उसकी गांड से बाहर निकाला और अपनी मुट्ठ मारने के लिए कहा.

वंदना मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी. मेरा माल निकलने ही वाला था. मैंने वंदना को बेड पर लेटाया और उसकी दोनों टांगों को पूरा आगे करके लंड को उसकी चूत में डाला और धीरे-धीरे धक्के देने लगा. कुछ देर की चुदाई के बाद वंदना का माल भी निकल गया पर मैं उसकी चूत को अभी भी चोद रहा था.वंदना उम्म्ह… अहह… हय… याह… कर रही थी पर मैं उसे लगातार चोदता जा रहा था और काफी देर तक उसकी चूत मारने के बाद मेरा माल भी निकल गया और मैं वंदना के नंगे बदन के ऊपर लेट गया।

वंदना मुझे किस किए जा रही थी और मेरे साथ सेक्स करके बहुत खुश थी। हम काफ़ी देर तक ऐसे ही एक-दूसरे के साथ लेटे रहे। वंदना की जवानी के मज़े लूटने के बाद हम बाज़ार गये और फिर शाम को घर वापस आ गये।

घर पर रात को जब पापा और मामा आये तो तब उन्होंने बताया कि मामा को पापा ने अपने साथ अपने आफिस में लगवा लिया है और अब से वो हमारे साथ ही रहने वाले हैं।बस मेरी तो ऐश थी. ऐसी जवानी को चोदकर मेरे लंड की प्यास बुझने लगी थी. दूसरी तरफ वंदना भी खुश रहने लगी थी. मुझे हर रोज़ चोदने के लिए वंदना मिल गयी थी और वंदना को मैं।

उस रात फिर से मैंने खाना खाने के बाद वंदना को लंड चुसवाया और उसकी गांड मारी और रात को सबके सोने के बाद छत पर वंदना की अच्छे से चुदाई की।

आज 6 महीने गुज़र चुके हैं, वंदना मेरे साथ बहुत खुश है और हमारे साथ घर पर रहती है।

वंदना कहने को मामा की पत्नी है पर वो मुझे अपना पहला और आखिरी प्यार और पति मानती है और लगभग हर रोज़ मैं उसे चोदता हूँ।दोस्तो, यह थी मेरी कहानी, अपनी अगली कहानी मैं जल्दी ही लिखूँगा।support@mohakkisse.com

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मेरी मामी की तड़पती जवानी

कुल भाग: 2
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