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काकी की नानी बनने की इच्छा पूरी की- 3

मानस यंग

18 Apr 2026 को प्रकाशित

काकी की नानी बनने की इच्छा पूरी की- 3
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मैरिड वर्जिन गर्ल की चुदाई का मौका मुझे तब मिला जब एक लड़की की शादी के बाद 3 साल तक उसे बच्चा नहीं हुआ. उसकी माँ उसे मेरे पास लेकर आई तो उसकी सील खुली.

कहानी के दूसरे भागनौकरानी की बेटी की कसी हुई चूतमें आपने पढ़ा कि मेरी दो नौकरानियां और उनमें से एक की बेटी मेरे साथ नंगी होकर सेक्स का खेल शुरू कर चुकी थी.

अब आगे मैरिड वर्जिन गर्ल की चुदाई:

दबाव बढ़ने की वज़ह से तनया के चेहरे पर दर्द के भाव छाने लगे.पर मैंने कोई दया दिखाए बिना एक तगड़ा धक्का देकर सुपारा अंदर घुसा प्रिया.

तनया छटपटाने लगी और मेरे छाती पर अपने हाथ रखकर मुझे रोकते हुए बोली- आअ ह्ह्ह ह मानस, धीरे करो मालिक … बहुत दर्द हो रहा है मम्मी ईई!

सुपारा चूत में फंसा कर मैं तनया के दोनों हाथ पकड़ कर उसके सर ले गया और बोला- बहनचोद, इतने से डर गयी तू छिनाल! तेरी माँ तो इस लौड़े से अपनी गांड भी चुदवा लेती है रंडी!

वैसे तो उसकी चूत गीली होने के कारण लंड धीरे धीरे अंदर घुसने लगा, लगभग आधा लौड़ा तनया की चूत में अपना डेरा जमा चुका था.

मैं कुछ देर तक तो वैसे ही तनया के ओंठ चूमते हुए उसके तंग भोसड़ी में आधा घुसा लंड रगड़ता रहा.पर अब मेरे धैर्य ने जवाब दे प्रिया था.

तनया को अपनी बाँहों में कसते हुए मैंने सुपारे तक लंड बाहर खींचा और एक लम्बी सांस लेते हुए पूरे ताकत से वार किया.चूत का विरोध ठुकराते हुए मेरा सुपारा तनया के बच्चेदानी से टकरा गया.

तनया अधमरी होकर सर कटी मुर्गी की तरह फड़फड़ा रही थी.दर्द इतना था कि चीख तो दूर … उसके गले से आवाज तक ना निकल पायी.

मेरे गोटे तनया की चूत की पंखुड़ियाँ चूम रहे थे.

तभी मुझे मेरे टट्टों पर कुछ गर्म गर्म चीज बहती महसूस हुई.मेरे दिमाग ने झट से पहचान लिया कि तनया की चूत आज सही मायने में फ़टी है.और मेरे टट्टों पर बहता हुआ ख़ून इस बात का पुख्ता सबूत था कि मुझे मैरिड वर्जिन गर्ल की चुदाई का मौका मिला है.

उसकी आँखों से बहता पानी देख कर मैं समझ गया कि मैंने वो काम कर प्रिया जिसे उसका पति रोहित ना कर सका.

दर्द से तड़पती तनया को देख सक्कू झट से आगे आयी और उसकी बग़ल में बैठ कर तनया का बदन सहलाने लगी.मैं भी थोड़ा सयंम दिखाते हुए बिना कुछ किये तनया की गर्दन और कान को चूसने लगा.

मेरे चूमने से और सक्कू के सहलाने से तनया कुछ ही देर में फिर से जीवित होने लगी और मेरी पीठ सहलाते हुए उसने भी मुझे चूमना चालू किया.

उसकी हिलती हुई कमर मुझे आगे बढ़ने का इशारा करने लगी.तो मैंने भी धीरे धीरे लौड़ा चूत में रगड़ना चालू किया.

जैसे जैसे लंड चूत की दीवारों को सहलाता गया, वैसे वैसे तनया की सिसकारियाँ हवा में महकने लगी.तो मैंने उसकी टांगें कन्धों से नीचे उतारकर मेरे कमर के इर्दगिर्द कर दी.

तनया को भी अब चुदवाने में मज़ा आने लगा और वह ख़ुद अपनी गांड ऊपर उठाते हुए लौड़ा निगलने लगी.

मेरे बगल में खड़ी शोभा काकी को देख कर मैंने कहा- ले रंडी, देख कैसे तेरे बेटी की चूत फाड़ रहा हूँ. आज तुझे और तेरे बेटी को एक साथ चोदूँगा.

सक्कू ने भी आगे बढ़ते हुए शोभा काकी को दबोच लिया और धकेलते हुए बिस्तर पर गिरा प्रिया.

काकी के ऊपर चढ़कर सक्कू ने अपनी गांड शोभा काकी के मुँह पर रख दी.अपना मुँह विपरीत दिशा में करते हुए सक्कू ने भी अपना मुँह शोभा काकी के जांघों में घुसा प्रिया और अपनी जीभ काकी के भोसड़े में घुसा दी.

वासना में अंधी होकर शोभा काकी सक्कू की गांड और चूत जीभ निकाल कर चाटने लगी.सक्कू ने भी अपनी दो उंगलियाँ काकी के भोसड़े में घुसा दी और काकी का भोसड़ा काट-काट कर चूसने लगी.

उन दोनों का खेल देख कर मैंने अपनी गति तेज़ करते हुए तनया से कहा- देख ले तनया, तेरे रांड मम्मी की असलियत … इस छिनाल ने तो तुझे पैदा करने के लिए मेरे मामाजी के लौड़े से चुदवा लिया!

मेरे बात को सुनते तनया ने सिसकारते हुए कहा- आआ ह्ह्ह् मानस … ऐसे ही चोद रे मुझे ईई … फाड़ दे मेरी चूत साले एएएएए … मज़ा आ रहा है मुझे एएईई एए! रंडी है साली तू शोभा आआआ!

सक्कू ने अपना मुँह शोभा काकी के भोसड़े से दूर करते हुए कहा- तू कौन सी सती-सावित्री है कुतिया, रांड की पैदाइश रांड ही होती है छिनाल!

तनया का साथ मिलने से मेरे अंदर का मर्द खूंखार भेड़िया बन चुका था.उसके गोरे आम चूस चूस कर मैंने लाल करते हुए अपने धक्के और तेज़ कर दिए.

लौड़ा मशीनगन की तरह तनया के भोसड़ी पर टूट पड़ा.थप-थप की आवाजों से कमरे की दीवारें गूंजने लगी थी.

तनया अपनी टांगें उठा कर मेरे लंड के लिए जग़ह बना रही थी तो लौड़ा पूरा अंदर तक घुसकर उसे बच्चेदानी को चूम रहा था.आअ ह्ह उफ्फ फ्फ ईश्श्श्श्श् श्श्स की आवाजें निकालते हुए रोहित की बीवी गैर मर्द के नीचे टांगें खोल के रंडी की तरह चुद रही थी.

काफ़ी देर तक मैंने तनया को अपने नीचे दबोच कर उसकी चूत के मज़े लिए.पर तभी मैं अपना लौड़ा बाहर निकालते हुए बोला- झुक जा अब सड़कछाप रंडी की औलाद, आज पूरे मज़े से चोदूँगा तुझे भोसड़ी की!

मेरे आदेश पर वह भी फुर्ती दिखाती हुई बिस्तर पर पलट गयी और घुटनों के बल बैठते हुए कुतिया की तरह झुककर अपनी गांड मेरी तरफ कर दी.

तनया की खुली गांड, चूतड़ देख पहले तो मैंने उनको प्यार से सहलाया पर फिर आख़िर में जोर का थप्पड़ भी मार प्रिया.

‘आह्ह ह्ह मम्मी ईई’ करती हुई तनया अपनी गांड सहलाने लगी.तो मैंने फिर से उसके दूसरे चूतड़ पर तमाचा मार प्रिया.

तनया की चूत पर फिर से अपना लौड़ा रखते हुए मैंने कहा- वाह्ह री शोभा रांड, क्या मस्त छिनाल पैदा की है तेरे भोसड़े ने, कितनी मस्त गांड है तेरे बेटी की बहनचोद!

शोभा काकी अपना मुँह सक्कू के भोसड़े से बाहर निकाल कर हमें देखने लगी.सक्कू ने अपनी गांड रगड़ रगड़ कर काकी का मुँह लाल कर प्रिया था.

शोभा के बाल बिखरे हुए थे, अपने बेटी के सामने किसी दूसरी औरत का भोसड़ा चूस चूस कर उसका पूरा मुँह सक्कू के चूतरस से गीला हो चुका था.

तभी मुझे एक और शरारत सूझी, मैंने सक्कू को वहां से दूर करते हुए तनया को फिर से आगे झुकाया और उसका मुँह उसके मम्मी के तरफ़ कर प्रिया.

तनया के बाल पकड़ कर मैंने उसका सर नीचे की तरफ दबा प्रिया तो उसके मम्मी शोभा काकी का भोसड़े ठीक उसके मुँह के सामने आ गया.

एक हाथ से उसका सर दबाते हुए दूसरे हाथ से मैंने फिर से लौड़ा तनया के चूत में घुसाते हुए कहा- चल हिजड़े की बीवी, चूस तेरे रांड माँ का भोसड़ा, आज तेरे इस छिनाल माँ के सामने तेरे चूत का भोसड़ा बना दूंगा.

मेरे धक्के से तनया जैसे ही आगे गिरने लगी तो उसका मुँह शोभा काकी के भोसड़े पर दबाता चला गया तो मैं और बेहरमी से धक्के लगाने लगा.

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तेज धक्कों से तनया जैसे जैसे हिलने लगी, वैसे वैसे उसका मुँह शोभा काकी के भोसड़े पर रगड़ने लगा.अपने बेटी से भोसड़ा चुसवाते हुए शोभा काकी फिर से आहें भरने लगी.

चुदवाने का मज़ा लेते हुए तनया ने भी सिसकारते हुए अपने मम्मी के भोसड़े पर जीभ घुमाना चालू किया और ख़ुद अपनी गांड पीछे धकेलने लगी.

सक्कू उन दोनों की हवस देख कर बोली- वाह मेरे शेर, तूने तो आज इस रांड का भोसड़ा भी चुसवा प्रिया इसके बेटी से! चोदो साली को आज … इसकी चूकी माँ चोद दो!

मैंने सक्कू को भड़काते हुए कहा- तू क्या सिर्फ देख के मज़े लेगी छिनाल? जा रख दे तेरी गांड शोभा के मुँह पर, गांड साफ़ करवा इस मादरचोद से!

मेरे सुझाव पर ख़ुश होकर सक्कू कुटिल मुस्कान के साथ शोभा काकी के सर की तरफ़ गयी और अपनी गांड को शोभा काकी के मुँह पर दबाते हुए बोली- ले मादरचोद शोभा, चूस अच्छे से मेरी गांड भोसड़ी की! जीभ घुसा कर साफ़ कर तेरे माँ की गांड!

तनया की चूत अब पूरी तरह से खुल चुकी थी.लंड की रगड़ से चूत की दीवारें बून्द बून्द करके अपना कामरस मेरे लौड़े पर बहाने लगी थी.

तनया की गदरायी हुई गांड को थप्पड़ों से लाल करते हुए मैं अपना हाथ अब उसकी चूचियों की तरफ ले कर गया.हवा में झूलते उसके गोर स्तनों को अपने पंजों की पकड़ में ले लिया और बिना उसके दर्द की चिंता किया उनको मसलने लगा.

दर्द से तनया कसमसाने लगी तो मैंने जोर का धक्का देते हुए पूरा लंड चूत के अंदर दबा प्रिया.

बच्चेदानी पर गहरी चोट लगने से तनया अपने माँ के भोसड़े पर सर रख कर सुबकने लगी.उसके दर्द की परवाह किये बिना मैं लगातार धक्के देता रहा.

दर्द के बावजूद भी तनया आहें भर रही थी और अचानक कुछ धक्कों के बाद उसका खेल ख़ल्लास हो गया.

शोभा काकी के भोसड़े पर अपना मुँह दबाते हुए तनया झड़ने लगी, उसके चूतरस से मेरा लौड़ा गीला होने लगा तो मैंने और जोर जोर से धक्के देना चालू किया.

तनया की चूत को मुट्ठी दबोच कर धक्के देते हुए मैं बोला- साली रंडी की औलाद, इतने ज़ल्दी मूत प्रिया तूने मादरचोद? ले अब कुतिया और चुदवा ले मेरे लौड़े से!

चूत से निकलते पानी पर धक्कों की बरसात होने लगी तो पूरे कमरे में चप-चप की आवाजें होने लगी.

झड़ने के सुख से तनया का बदन थरथर कांपने लगा था.अपनी चूत का सारा पानी निकाल कर वह मूर्छित होकर वैसे ही पड़ी रही.

तो मैंने अपना लौड़ा उसके चूत से बाहर निकाल लिया.

सक्कू को दूर करते हुए मैं वैसे ही उसके मम्मी के यानि शोभा काकी के पास गया और लौड़ा उसके मुँह में देते हुए उसका मुँह चोदने लगा.

मुझे रोकते हुए सक्कू ने याद दिलाया- अरे छोटे मालिक, इस छिनाल को बाद में देख लेना. पर आपका बीज़ तो आज सिर्फ तनया के चूत में ही गिरना चाहिए.

सक्कू की बात मानकर मैं फिर से तनया के पास गया.वह अभी भी मदहोशी के हालत में आँखें बंद करे हुए अपनी दुखती चूत को पकड़ कर लेटी हुई थी.

तनया के गालों पर अपना लौड़ा रखा और हुए उसके भरे हुए चूचे सहलाते हुए सुपारा उसके गालों पर रगड़ना चालू किया.

अपने गालों पर हुए लंड स्पर्श से उसने आँखें खोली और मुझे देख कर सीधा लौड़ा अपने मुँह में ले लिया.

कुछ देर तक तो मैंने ऐसे ही अपने लौड़े को उसके मुँह से मालिश करवा ली.पर अब मुझे भी अपना वीर्य तनया के बच्चेदानी में निकालने की ज़ल्दी थी.

उसके मुँह से लौड़ा निकालते हुए मैंने कहा- सीधी हो जा शोभा रंडी की पैदाइश, आज से तू सिर्फ मेरे बच्चे पैदा करेगी मादरचोद!

बच्चे का नाम सुनकर तो तनया में जैसे नया जोश भर गया, अपनी माँ की बगल में लेटते हुए उसने अपनी अपनी टांगें खोल कर मुझे अपने चुदी हुई भोसड़ी का द्वार दिखा प्रिया.

जैसे ही मैं उसके सामने घुटनों पर बैठा, उसने ख़ुद अपने हाथों से मेरा लौड़ा पकड़ लिया, सुपारे को अपनी भोसड़ी पर रगड़ते हुए अपने चूत में घुसाने लगी.

तनया की वासना देख कर मैंने भी जोर का धक्का देते हुए पूरा लौड़ा अंदर ठूंस प्रिया.एक बार चुदने और झड़ने की वज़ह से चूत काफ़ी खुल चुकी थी.

बिना कोई विरोध के अब लंड घपाघप तनया के चूत में अंदर बाहर करने लगा, उसकी हिलती हुई चूचियों को पकड़ कर मैं भी तनया के बदन को नोचने लगा.

‘आअह्ह्ह उफ्फ मम्मीईई’ करते हुए तनया की गांड हवा में उठने लगी.मेरा सुपारा अब आसानी से उसकी बच्चेदानी तक जाकर ठोकर देने लगा.

तनया के निप्पल बिल्कुल तनकर उभर चुके थे और मैं भूखे भेड़िये की तरह उन दोनों को मुँह में भरते हुए जोर जोर से चूस रहा था.

पता नहीं कितने समय तक मैंने ऐसे ही जोर जोर से अपना लौड़ा उस शोभा रंडी की औलाद के भोसड़े में पेलता रहा.पर एक लम्बी चुदाई के बाद मेरा पतन भी नज़दीक आ चुका था और इसीलिए मैंने तनया की दोनों टांगें फिर से मेरे कन्धों पर लेते हुए पूरे जोर से उसे चोदने लगा.

तेज तफ़्तार के साथ मुझे अनुभूति हो रही थी कि मेरे वीर्य का उबाल अब ऊपर की तरफ बढ़ते हुए बाहर आने के लिए तैयार हो चुका था.

आख़िर मेरे लंड ने अपना काम कर प्रिया, मेरे उबलते वीर्य की पहली धार जैसे ही उछल पड़ी तो मैं बस ‘आआह्ह ह्ह्ह्ह तननुउ उउउउ’ इतना ही कह पाया.एक के बाद एक वीर्य की धाराएं उसे बच्चेदानी में जमा होने लगी और उस उबलते वीर्य के गर्माहट से तनया की भोसड़ी फिर एक बार झड़ने लगी.

जब तक पूरा वीर्य तनया की चूत में ख़ाली नहीं हुआ तब तक मैं वैसे ही उस पर लेटा रहा.वह भी मुझे अपनी बाहों में भरते हुए झड़ने का आनन्द लेती रही.

सक्कू और शोभा काकी दोनों के सामने आज मैंने तनया को बाजारू रंडी की तरह चोद चोद कर मेरे लंड का ऱस उसके कोख़ में दान किया था.

उस रात तनया फिर एक बार मेरे लौड़े से चुद गयी.दर्द और थकान से वह अधमरी हो चुकी थी पर मेरे लौड़े की प्यास बुझाने के लिए मैंने उसकी माँ का इस्तेमाल किया.

तनया के सामने ही मैंने शोभा काकी को दो कौड़ी की रखैल की तरह चोद प्रिया.काकी की गांड और भोसड़ा चोदने के बाद ही मैंने अपना मूत उस रंडी शोभा को पिलाया.

इस बात को अब 10 साल से ऊपर हो चुके हैं, आज तनया मेरे दो बच्चों की माँ है पर आज भी जब कभी मैं अपने गाँव जाता हूँ तो तनया दौड़ी दौड़ी मेरे लौड़े की सेवा करने आ जाती है.

मुझे पता है कि कहानी थोड़ी लंबी थी पर हक़ीक़त बताने के लिए मुझे सारी बातें बताना ठीक लगा.आशा है कि आपको यह कहानी भी पसंद आयी होगी.

फिर कभी आऊंगा अगली कहानी के साथ!तब तक मेरी इस मैरिड वर्जिन गर्ल की चुदाई कहानी पर अपने विचार मुझे बताएं.मानस पाटिलsupport@mohakkisse.com

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काकी की नानी बनने की इच्छा पूरी की

कुल भाग: 3
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Hello dosto. Umeed karta hu ki aapko meri iss kahani ke pichle dono episode ache laage honge. Toh aaj hum continue karenge apni kahani.

13 मिनट 448

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

जीतू सिंह

3 months ago

चाची की चूत का वर्णन बहुत ही कमाल का किया है।

अमित कुमार 12

4 months ago

गजब की आंटी है भाई, पढ़ते हुए मजा आ गया।

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