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चाची की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 975 बार

मेरे भतीजे का यौवन और मेरी अन्तर्वासना-2

सिज़लिंग सोना

16 Sep 2009 को प्रकाशित

मेरे भतीजे का यौवन और मेरी अन्तर्वासना-2
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अब आगे-

अगले दिन सुबह उठकर हम दोनों फिर से घर के कामों में लग गए और आज शाम तक तो रवि रोहन और अन्नू भी आने वाले थे क्योंकि अगले दिन ही सगाई का फंक्शन था।

सुबह से विवेक और मेरे बीच किसी भी प्रकार की कोई बात नहीं हुई थी। दिन में हम घर के काम कर रहे थे, तब मेरी जेठानी मुझसे बोली- आज शाम को तू मेरे साथ बाजार चलना, मुझे कुछ खरीददारी करनी है।मैंने हाँ बोल प्रिया।

हम लोगों ने जल्दी से अपने घर के काम ख़त्म किये और बाजार जाने के लिए तैयार हो गए। मैंने नीले रंग का प्रिंटेड सूट पहना था जिसमें मेरी खूबसूरती अलग ही छा रही थी।ज्योति और विवेक भी हमारे ही साथ जाने वाले थे।

शाम को साढ़े चार या पांच बजे हम घर से बाजार के लिए निकल लिए। हम लोग कार में बैठ कर बाजार गये थे जिसे विवेक चला रहा था और मैं उसी के बगल वाली सीट पर बैठी थी।

हम लोग काफी घूमे और खरीददारी भी की।अभी ज्योति को भी कुछ ख़रीदना था पर ज्यादा घूमने की वजह से मैं थक गई थी।

मैंने जेठानी से कहा- भाभी, मैं थक गई, अब मुझसे नहीं चला जाएगा।तो जेठानी बोली- तुम विवेक के साथ यही कार में रुको, हम लोग थोड़ी देर से आते हैं।इतना कहकर वो ज्योति के साथ चली गई।

मैं और विवेक कार में बैठ गए, विवेक बोला- चलो थोड़ी देर के लिए ही सही… हमें हमारी चाची के अकेले में दीदार हुए, वरना आप तो बहुत व्यस्त हो गई हो।

मैं विवेक से बोली- तू तो पागल हो गया है, घर पर इतना टाइम ही नहीं मिला कि तेरे साथ बात हो पाए।विवेक बोला- अब तो टाइम मिल गया ना?इतना बोलते ही विवेक ने मेरा एक हाथ पकड़कर अपनी जीन्स की ज़िप के ऊपर रख प्रिया और मेरे हाथों से अपने लंड को दबाने, सहलाने लगा।

मैं विवेक से बोली- विवेक, पागल हो गए हो क्या? ऐसे कार में कोई ऐसी हरकत करता है क्या? किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा वो!

तो विवेक बोला- अच्छा तो यह बात है, फिर तो कहीं सेफ जगह ढूंढनी पड़ेगी।इतना कहकर विवेक ने कार स्टार्ट की और फिर पास ही में एक अंडरग्राउंड पार्किंग में ले जाकर कार को एक कम लाइट वाली जगह पर पार्क कर प्रिया।

मैंने विवेक से कहा- तू तो पूरी तैयारी के साथ आया है, इतना दिमाग कैसे चला लेता है।मुझे बोलते हुए ही विवेक ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया।

बस फिर क्या था विवेक ने अपने होंठ मेरे होठों से मिला दिए और फिर हम दोनों के बीच एक प्यारा सा चुम्बन हुआ।हमारे पास समय कम था तो विवेक ने देर ना करते हुए मुझसे कहा- चाची, आप पीछे की सीट पर चली जाओ।

मैं उठकर पीछे की सीट पर चली गई, विवेक भी उठ कर पीछे आ गया, उसने कार को लॉक कर प्रिया और खिड़कियों को विंडो कवर से ढक प्रिया।विवेक ने सीट पर बैठ कर मुझे सीट पर लेटा प्रिया।

आज मैं कार के अंदर चुदने वाली थी और यह मेरी जिंदगी की पहली कार चुदाई थी।

मैंने विवेक से कहा- विवेक, आज नहीं, फिर कभी! कार में मैंने कभी नहीं किया, मुझे डर लग रहा है, किसी ने देख लिया तो?विवेक बोला– मेरा भी तो पहली बार है चाची! हम पहली बार ट्राई करते हैं, काफ़ी चीज़ें ज़िन्दगी में पहली बार ही होती हैं।

मैं घबरा रही थी तो मुझे देखकर विवेक बोला– चाची हम केवल अपने नीचे के कपड़े ही उतारेंगे ताकि हम आराम से चुदाई कर सकें। अगर अचानक कोई आ गया तो ऊपर के कपड़े पहने होने की वजह से हम नंगे नहीं दिखेंगे।

मैंने विवेक की बात मान ली इसलिए ऊपर के कपड़े बदन पर पहन कर चुदवाने को राज़ी हो गई।

उसने अपने हाथों से ही मेरी सलवार के नाड़े को खोल प्रिया और उसे मेरे घुटनों तक नीचे कर प्रिया। फिर विवेक ने मेरी पैंटी जो मेरी चूत से बिल्कुल चिपकी हुई थी, उसको भी उतार कर मेरी जांघों तक सरका प्रिया।

मेरी चूत अभी तक गीली नहीं हुई थी तो विवेक ने मेरी चूत को चाटना शुरू कर प्रिया।विवेक अपनी जीभ से मेरी चूत को रगड़ रहा था, हालांकि मेरी चूत पर हल्के हल्के रेशमी बाल थे जो की उसे बहुत ही मादक लग रहे थे।विवेक बार बार मेरी चूत पर थूक कर उसे गीला कर रहा था।

अब विवेक उठा और फिर अपनी उंगलियों से मेरी चूत को सहलाने लगा। वो तेजी के साथ मेरी चूत को सहला रहा था, मैं काफी उत्तेजित हो रही थी पर मेरी सिसकारियाँ मेरे अंदर ही घुट रही थी क्योंकि मुझे आवाज़ नहीं करनी थी।

जब मेरी चूत से हल्का हल्का पानी बाहर आने लगा तो विवेक उठ गया, अब उसने अपनी जीन्स को उतार प्रिया और फिर अपनी चड्डी को भी अपने घुटनों तक कर लिया।

विवेक का लंड जो लगभग सात इंच लम्बा था बिल्कुल कड़क हो चुका था। विवेक के लंड का टोपा बाहर को निकल आया था।

मैं अभी भी बैक सीट पर लेटी हुई थी, विवेक ने मेरी टांगों के बीच आकर मेरी सलवार और पैंटी को उतार कर अलग कर प्रिया औरखुद टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ गया, उसने मेरे दोनो पैरों को अपनी कमर के दोनों तरफ रख लिया।

विवेक ने देर ना करते हुए अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया और उसे अपने लंड पर मलने लगा, उसका लंड अब मेरी चुदाई के लिए बिलकुल तैयार था।

विवेक अपने लंड को मेरी चूत पर लाकर रगड़ने लगा और फिर मेरी चूत के छेद पर लाकर रख प्रिया और फिर हौले से पहले अपने लंड का सुपारा अन्दर घुसाया और फिर अगले धक्के में विवेक ने आधा लंड अन्दर मेरी चूत में पेल प्रिया।

मैं सिसकार उठी ‘ऊऊह्ह माँ… उम्म्ह… अहह… हय… याह…’तो विवेक ने कहा- दर्द हुआ क्या चाची?तो मैं बोली- हाँ जरा आराम से कर ना!

मैं हल्की आवाज़ों में सीत्कार कर रही थी।फिर विवेक ने एक और धक्का मारा और फिर उसका पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर चला गया तो अब उसने मेरी चूत में धक्के देना शुरू कर दिए।

पहले तो विवेक धीरे धीरे धक्के दे रहा था पर फिर मौके की नजाकत और वक्त को देख़ते हुए विवेक ने जोर जोर से धक्के देना चालू कर दिए।मैं उसके हर धक्के पर सीत्कार कर रही थी और कमर उठा उठा कर विवेक का पूरा साथ दे रही थी।

कुछ देर बाद विवेक के धक्कों की गति कम हो गई क्योंकि देर तक एक ही पोजीशन की वजह से वो थक गया था और यह जगह भी तो ऐसी थी को यहाँ कोई और पोजीशन नहीं बन सकती थी।

तब विवेक बोला उठा और उसने मुझे घोड़ी बनने के लिए बोला, मैं भी बिना किसी सवाल के अपने घुटनों और हाथों के बल खड़ी होकर घोड़ी बन गई।फिर विवेक अपना लंड पीछे से मेरी चूत में डालने लगा और अगले तीन चार धक्कों में विवेक का पूरा लंड मेरी चूत में उतर गया।विवेक तेजी के साथ अपने लंड से मेरी चुदाई किये जा रहा था, उसके दोनो हाथ मेरी गदराई हुई गांड को सहला रहे थे।थोड़ी देर की चुदाई के बाद में अपने चरम पर आ गई, मैं ‘आहाहाहा… अहहाह… अहहाह… अहह… विवेक… मेरा होने वाला है… विवेक…’ बोलते हुए सिसकार उठी और फिर अपनी कमर को सीट पर झुकाते हुए जोर से झड़ने लगी।

विवेक अभी भी मैदान में था, वो अभी भी लगातार धक्कों से अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर करके मुझे चोद रहा था। मैं अपने स्तनों के बल सीट पर झुकी हुई थी मेरी चूत से निकलता हुआ पानी मेरी कमर से बहता हुआ मेरे सूट को गीला करने लगा पर इस बात का मुझे कोई आभास नहीं था, मैं तो बस अपनी चूत चुदाई में मगन थी।

विवेक के धक्कों से मैं लगातार आगे पीछे हो रही थी। फिर एकाएक विवेक ने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी, शायद वह भी अब झड़ने वाला था।कुछ ही पलों में विवेक ने मुझे जकड़ लिया और देखते ही देखते वो ‘आहहहह… सोना… चाची…’ बोलते हुए मेरी चूत के अंदर ही झड़ने लगा।मैं उससे छूटना चाहती थी पर वो मुझे एकदम कस कर पकड़े हुए था।

विवेक के लंड से लगातार वीर्य की बारिश से मेरी चूत अंदर तक गीली हो गई थी, मेरे भतीजे के गर्म वीर्य से मेरे शरीर मैं एक अलग ही सरसराहट हो रही थी।

झड़ने के बाद विवेक मुझसे ही लिपट गया और अब हम दोनों सीट पर लेट गए, उसका लंड मेरी चूत से बाहर आ गया था।

मैं विवेक से बोली- तूने अपना पानी अंदर क्यों छोड़ा? अगर कुछ हो गया तो?विवेक बोला- सॉरी चाची, मैं खुद को रोक ही नहीं पाया और कुछ नहीं होगा चाची, मैं आपको टेबलेट ला कर दे दूँगा। आप चिंता मत करो।

फिर हम लोग उठकर अपने कपड़े पहनने लगे।

विवेक का वीर्य मेरी चूत से बाहर आ रहा था जिसे मैंने अपनी पैंटी से साफ कर लिया और फिर उसे पहन लिया।हम दोनों ने कपड़े पहने और वापस मार्केट आ गए।

थोड़ी देर बाद भाभीजी और ज्योति भी आ गई और फिर हम सब घर की तरफ जाने लगे।

रास्ते में विवेक ने एक मेडिकल पर कार रोक ली और फिर वहाँ से कुछ लेकर आया।मैं समझ चुकी थी कि वो मेरे लिए एंटी प्रेगनेंसी टेबलेट लाया है।

रात के आठ बजे हम लोग घर पहुँच गये। घर पहुँच कर विवेक ने मुझे चुपके से वो दवाई दे दी।

घर के अंदर जाने पर मैंने देखा कि रवि रोहन और अन्नू सब लोग आ चुके हैं, मैं उन्हें देख कर बहुत खुश हो गई।मुझे देखते ही रोहन मेरे गले से आकर लग गया, मैंने भी उसे प्यार से अपने सीने से लगा लिया। रोहन मुझसे बोला- मम्मी, मैंने आपको बहुत मिस किया।

मैंने भी कहा- मम्मी ने तुझे बहुत याद किया।

फिर हम लोग रात को खाना खा कर सो गए। रात को रोहन विवेक के साथ और अन्नू ज्योति के रूम में जाकर सो गए।मैं रवि और भाभीजी हम लोग एक ही रूम में सोए थे।जेठ जी सगाई की तैयारियों के लिए घर से बाहर थे।

इससे आगे की कहानी अगले भाग में।तब तक के लिए धन्यवाद।

आपको यह कहानी कैसी लगी, आप अपने विचार मुझे मेल कर सकते हैं इस मेल परsupport@mohakkisse.comआप मुझे अब फेसबुक पर भी अपने विचार भेज सकते हैं, मेरा यूज़रनेम नीचे प्रिया गयाहै।Fb/sonaligupta678

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मेरे भतीजे का यौवन और मेरी अन्तर्वासना

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

सोना दीदी

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

प्रकाश चंद

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

देव मनीष

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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