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भाभी की चुदाई पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 661 बार

मेरे दोस्त की पत्नी और हम तीन-3

सरस चन्द्र

26 Jul 2024 को प्रकाशित

मेरे दोस्त की पत्नी और हम तीन-3
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दोस्तो, मैं आपका अपना सरस एक बार फिर हाजिर हूं अपनी कहानी के अगले भाग के साथ। मेरे जिन पाठक और पाठिकाओं ने कहानी का पहला और दूसरा भाग नहीं पढ़ा हो वोऊपर दिए लिंक्स पर जाकर पढ़ सकते हैं।

उम्मीद करता हूं मेरे सभी पाठकों के लंड मेरी नई कहानी पढ़ने के लिए उछल कर बाहर आ गए होंगे और सभी पठिकायें मेरा लन्ड अपनी चूत में महसूस करके अपनी उंगली से अपनी चूत की चुदाई करते हुए मेरी कहानी के अगले भाग का लुत्फ़ उठाने के लिए तैयार होंगी। यदि ऐसा है तो आप मुझे लिखकर जरूर बताइए कि किस किस पाठक और पाठिका के साथ ऐसा हुआ है। सभी भाभियों और चाचियों से मेरा निवेदन है कि आप मुझे लिखकर जरूर बतायें कि क्या सरस की कहानियां आपका पानी निकाल पाती हैं या नहीं।

दोस्तो पहले आपको कहानी के पिछले भाग की तरफ लेकर चलते है जहां आपने पढ़ा कि मैं और नीलम अब एक जिस्म होने के लिए तैयार हो चुके थे और उसकी चूत की आग मेरी उंगलियां ठंडी कर चुकी थी। उसकी चूत से तो संतुष्टि का लावा बह चुका था दोस्तो लेकिन मेरा लन्ड अभी तक गीला भी नहीं हुआ था। मेरे लन्ड ने उसकी चूत के दर्शन भी नहीं किए थे।अब आगे:

नीलम अब तक अपनी सांसों को अपने बस में कर चुकी थी और मुझे अपने ऊपर खींचकर फिर से मेरी जीभ को चूसने लगी थी। मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और पेटीकोट को उसके शरीर से अलग कर दिया था। नीलम अब पूरी तरह से मेरे सामने नंगी पड़ी हुई थी। मैंने उसके एक पैर को उठाकर सोफे के ऊपर रख दिया जिससे कि उसकी गुलाबी गीली चूत खुल कर मेरे सामने आ गई थी। उसकी 32″ के चूतड़ और 32″ के बूब्स मुझे आमंत्रित कर रहे थे कि मैं आगे बढ़कर उनके ऊपर चढ़ाई कर दूँ।

नीलम की चूत भी होने वाले हमले और घमासान के लिए तैयार दिख रही थी। मेरा लन्ड अपने पूरे जोश पर था। नीलम अपने हाथ से मेरे लन्ड को सहला रही थी और मैं उसकी चूत को। नीलम फिर से गर्म होने लगी थी। उसके मुंह से फिर से सिसकारियां निकलने लगी थी।

“चोदो ना सरस!” नीलम बोली।नीलम के मुंह से ये सुनकर मैंने अपना लन्ड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। नीलम उत्तेजना से पागल हुई जा रही थी और अपनी गांड उठाकर मेरे लन्ड का स्वागत करने के लिए बेचैन हो रही थी। जब मैं लंड को नीलम की चूत के मुंह पर लाता तो नीलम मेरा लंड निगलने के उद्देश्य से अपनी गांड का जोर मेरे लन्ड पर लगती लेकिन उसे तड़पाने के लिए मैं हर बार उसकी कोशिश बेकार कर देता और मेरा लन्ड फिसल कर उसकी गान्ड के दरार से जा लगता।

नीलम अब उत्तेजना से अपनी गांड, कमर, मुंह, गर्दन सबको मरोड़ रही थी। नीलम के मुंह से ‘आह्हह उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम्म म्ममम आह्ह …’ आवाजें निकल रही थी। उसकी अतिउत्तेजना को समझते हुए अबकी बार मैंने अपने लन्ड को उसकी उम्मीद के विपरीत एक ही बार में पूरा का पूरा उसकी चूत में उतार दिया।मेरे द्वारा अचानक किए गए इस हमले से नीलम सम्भल नहीं पाई और जोर से चीख पड़ी।

“बस हो गया मेरी जान! मैंने नीलम को कहा और अपने होंठों की गिरफ्त में उसके होंठों को ले लिया। नीलम अपने दर्द को भूलने के लिए मेरे जिस्म में समा जाना चाहती थी इसलिए मेरे द्वारा उसे किस करते ही मुझसे बहुत कसकर लिपट गई और अपनी दोनों पैर मेरे गांड़ के ऊपर कैंची बनाकर रख लिए।“अब चोदो ना सरस … चोद डालो मुझे … अहहअः ह्हह ओहहह … हम्म … मुझे अपने बच्चे की मां बना दो। मेरी चूत में बो दो अपना बीज … अहहअःह्हह हम्मम अःह्हम्म … कर दो मुझ गर्भवती!”नीलम की बातें सुनकर मुझे और अधिक जोश आ रहा था और मैं उसकी चुदाई बहुत तेज गति से करता जा रहा था।“चोदो सरस चोदो … चोद डालो अपने दोस्त की बीवी को … आह क्या मस्त चोदते हो सरस … आह्ह अह हअःह्ह ओहहह हम्म! क्या कड़क लंड पाया है तुमने! फ़ाड़ दो मेरी चूत को! आह आह्हह अःह्ह हम्म चोदो जोर से चोदो सरस। अहह ममहम्म …”

मैं नीलम को चोदे जा रहा था, मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी और मेरी बढ़ती स्पीड के साथ साथ नीलम की सिसकारियां भी बढ़ती जा रही थी। नीलम बड़बड़ाती जा रही थी और मैं उसे चोदे जा रहा था। मुझे महसूस होने लगा कि मेरा लन्ड अब उस मोड़ पर आ गया था जब नीलम और मेरी दोनों की संतुष्टि महज कुछ पल दूर रह गई थी।“मेरा निकलने वाला है नीलम!” मैंने कहा।“मुझे बच्चा चाहिए सरस!” मेरे आगे कुछ कहने से पहले ही नीलम बोल पड़ी।

और नीलम के फैसले के कुछ ही पल बाद मेरे लन्ड ने नीलम की चूत का मान रखते हुए अपना आत्मसमर्पण नीलम की चूत के सम्मान में कर दिया। मेरे लन्ड से वीर्य की तेज गर्म पिचकारियां नीलम की चूत में भर गई और धीरे धीरे नीलम और मेरा वीर्य एक साथ हमारे मिलन की गवाही देते हुए बाहर बह निकला।

मैं निढाल होकर नीलम के ऊपर गिर गया और नीलम ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया जैसे उसे दुनिया का सबसे बेशकीमती खजाना मिल गया हो। नीलम मुझे किस किए जा रही थी, मैं उसे गले लगाकर सो गया और ना जाने कब मुझे और नीलम को सुकून की नींद आ गई पता ही नहीं लगा।

सुबह के तीन बजे थे तब मेरी नींद खुली। मैंने नीलम को जगाया और कपड़े पहनने को कहा। हम दोनों ने कपड़े पहने और नीलम को मोहित के पास भेज दिया सोने के लिए!और मैं अलग एक कमरे में जहाँ अक्सर मैं सोया करता था चला गया। अब आंखों में नींद नहीं थी। शायद यही हाल नीलम का भी था। अलग सोना हम दोनों में से किसी को गवारा नहीं था लेकिन हाय रे मजबूरी, क्या क्या नहीं करवाती।

नीलम सुबह पांच बजे ही मेरे लिए चाय लेकर आई। मोहित अभी तक सोया हुआ था। नीलम के आते ही मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और जोर से किस करने लगा। मैंने उसे अपने बिस्तर पर पटक लिया।“पता नहीं तुमने क्या जादू किया है मुझ पर भाभी … कि तुमसे अलग होकर नींद ही नहीं आई!” मैंने कहा।“मुझे भी तो नींद नहीं आई सरस!” नीलम ने कहा- लेकिन मेरे मन की कुछ इच्छा है, क्या तुम पूरी करोगे सरस?“हाँ बोलो ना भाभी?” मैंने कहा।

“पहली बात तो मुझे भाभी मत बोला करो और दूसरा हम दोनों के बीच जो भी हुआ है, वो ना तो संयोग है और ना ही अवसर। इसलिए मुझे कभी अपने से अलग मत करना सरस।”“नहीं मेरी जान, कभी नहीं!” और मैंने नीलम को फिर से गले लगा लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा।“तुमने अपनी इच्छा तो बताई नहीं जान?” मैंने कहा।“पहले वादा करो कि तुम मना नहीं करोगे … और ना ही मुझे गलत समझोगे?” नीलम बोली।“वादा …” मैंने नीलम का हाथ अपने हाथों ने लेकर जवाब और आश्वासन दोनों ही दिए।

“मुझे ग्रुप सेक्स करना है सरस!” कहकर नीलम ने अपना मुंह मेरे सीने में छिपा लिया और अपना मुंह मेरे सीने में दबाए हुए ही कहा- मुझे अनुभव करना है ग्रुप सेक्स का, आनन्द लेना है एक साथ कई लंड का!” नीलम बोले जा रही थी।अब मैं भौचक्का सा रह गया … मैं सोच भी नहीं सकता था कि नीलम ऐसा भी कुछ कह सकती है। मैंने उसका चेहरा अपने हाथों के बीच लिया और प्रश्वाचक निगाह से उसकी तरफ देखा- आखिर क्यों नीलम?मेरे इस सवाल के जवाब में नीलम कुछ नहीं बोली और अपनी निगाहें नीचे करके मेरे कंधे पर सर रखकर बैठ गई।

मैं गहन सोच में था।

कुछ देर बाद नीलम चली गई और एक बड़ा ही मुश्किल सवाल मेरे सामने छोड़ गई कि जब मोहित के साथ उसकी सेक्स लाइफ ठीक चल रही थी तो उसने मेरे साथ सेक्स क्यों किया और जब मेरे साथ सेक्स कर भी लिया तो ग्रुप सेक्स की चाहत उसके दिल में क्यों उमड़ रही थी? आखिर क्या वजह हो सकती है?मैं ये सब सोच रहा था लेकिन मेरे पास कोई जवाब नहीं था।अगर आपके पास इस सवाल का कोई जवाब है तो मुझे जरूर मेल करके बताइएगा मेरे दोस्तो।

अब तक मोहित जाग चुका था और मैं चाय पीकर अपने घर के लिए निकल चुका था।कहानी आगे जारी रहेगी दोस्तो! आप सभी से अनुरोध है कि मुझे मेरे सवाल का जवाब देकर मेरी उलझन दूर करने की कोशिश करें। सभी पाठक इस बारे में क्या सोचते हैं और पाठिकायें स्त्री मन से क्या सोचती हैं।आप सभी के प्यार भरे ई मेल का मुझे इंतज़ार रहेगा तो मुझे जरूर लिखें।मेरा मेल आई डी है support@mohakkisse.com

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मेरे दोस्त की पत्नी और हम तीन

कुल भाग: 5
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