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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 326 बार

Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti – Episode 8

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24 Apr 2020 को प्रकाशित

Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti – Episode 8
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समय बीतते मुझे महसूस होने लगा की अजित हमारी चुदाई के बाद से मुझे हीन नज़रों से देखने लगा था। वह मुझ पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश करने लगा था।

उसे लगा की जैसे मैं उसकी बपौती संपत्ति हूँ। मुझे यह कतई मंजूर नहीं था। मैं एक सम्मान के काबिल स्वतंत्र प्रोफेशनल महिला था। एक रात के वाकये से इंसान बदल तो नहीं जाता?

मैंने कई बार अजित को बताने की कोशिश की जो उस रात को हुआ वह आवेश में हुआ था। उसे पीछे छोड़ कर हमें आगे बढ़ना चाहिए। मैं कोई राँड़ नहीं थी। पर अजित का मेरी तरफ रवैया नहीं बदला। वह मेरे साथ वही अपमान जनक तरीके से बात करने लगा। तो फिर मैंने तय लिया की अजित से नाता तोड़ दिया जाए।

इतना ही नहीं, वह मुझसे अशिष्ट भाषा में बात करने लगा था। मुझे अपमान जनक शब्द वह आम बोलने लगा था। मुझे लगा की अजित को पहले से ही मुझे नियत्रण में रखना चाहिए था। पर तीर कमान से निकल चुका था।

तीसरी बार अजित बिना बुलाये घर आ गया। वह काफी शराब पिए हुए था और मुझसे बड़ा ही अपमान जनक व्यवहार करने लगा और मुझे बड़े भद्दे शब्दों में गालियाँ देने लगा।

उस रात अजित ने मुझ पर जबर दस्ती की। मेरे काफी मना कर ने पर भी उसने नशे में ही मुझे चोदा और मैंने उससे चुदाई तो करवाई पर मैंने तय किया की उस रात के बाद मैं अजित से कोई सम्बन्ध नहीं रखूंगी।

मैंने उसे सुबह जाते हुए कह दिया की अब हम नहीं मिलेंगे। उस रात के बाद मैंने उसके फ़ोन लेना बंद कर दिया।

फिर भी वह मुझे फ़ोन करने से बाज नहीं आया तो मैंने उसे धमकी दी की अगर वह मुझे फ़ोन करेगा तो मैं पुलिस में शिकायत कर दूंगी।

उसके बाद उसके फ़ोन आने बंद हो गए और उसके बाद हम नहीं मिले। उसके कई मैसेज आये। मैंने उसे एक ही मैसेज दिया की मैं अब उसमें इंटरेस्टेड नहीं हूँ।

उस रात के बाद मैं शाम को घर आते डरती थी। पर मुझे अजित ने और परेशान नहीं किया। मैंने मेरे ऑफिस जाने का समय भी बदल दिया। मैं अजित से दूर रहना चाहती थी।

ऐसे ही कई महीने बीत गए। मुझे अजित नहीं दिखा। शायद उसने घर या जॉब बदल दिया था। अजित से चुदवाने के बाद मेरी चूत कुछ दिनों के लिए तो शांत हुई, पर फिर तो उसकी भूख और भी बढ़ गयी। मैं अब अपने पति की और से निश्चिंत हो चुकी थी। बल्कि मुझे उनसे बदला लेना था।

मेरे पति को मुझ में कोई रस नहीं रहा था। मेरी चूत में बड़ी मचलन हो रही थी। मुझे किसी मोटे लण्ड से चुदवाने की ललक बढ़ गयी थी। जाते आते और ऑफिस में भी मुझे कई वीर्य वान और सुन्दर बदन वाले पुरुष हर रोज ताड़ते रहते थे।

शायद उनके मन में भी मुझे चोदने की इच्छा जरूर छिपी हुई होगी। यह सोच कर मेरी दबी हुई सम्भोग की इच्छा भड़क उठी। मैं रोज रात को किसी ना किसी पुरुष से सम्भोग के सपने देखने लगी।

पर सपने भला सच्चाई की जगह थोड़े ही ले सकते हैं? जाते आते मैं अब पुरुषों को ज्यादा पैनी नजर से देखने लगी। पर मेरी नजर में मुझे मेरे काबिल कोई भी पुरुष नहीं लगा।

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हाँ एक योगराज थे जो मुझे मेर काबिल लगे। वह मुझसे थोड़ा सीनियर थे। एकदम आकर्षक व्यक्तित्व, लंबा, गठा हुआ सुडौल कसरती बदन, भरी हुई मांसल भुजाएं, घने बाल, चौड़ा सीना और न जाने क्यों पर चेहरे पर एक अजीब सा खोया खोया सा भाव मेरे मन को छू गया।

उसे देखते ही जैसे मेरे पाँव के बीच में से कुछ कुछ होने लगता। शायद मेरे मन में एक गुप्त भाव हुआ की वह जरूर मेरे बदन की गर्मी और भूख को शांत करने की क्षमता रखते थे।

वह पहले व्यक्ति थे जिसको मैंने ध्यान से देखा था जब मैंने पहली बार मेरी कंपनी ज्वाइन की थी। पर उस समय मैं अपने पति के रंग में रंगी हुई थी।

फिर भी जब पहली बार उनसे मिलने उनके कमरे में गयी तब उन्हें देख कर मैं देखती ही रह गयी। और आश्चर्य मुझे तब हुआ जब वह भी मुझे कितने लम्बे समय तक ताकते ही रहे।

साधारणतः आपकी महिला साथीदार कितनी ही सुन्दर क्यों ना हो, पर आप उसे ताक कर देख नहीं सकते। यह असभ्य माना जाता है।

पर योगराज मुझे ना सिर्फ ताकते रहे बल्कि मुझे देखकर उनका मुंह खुला का खुला ही रह गया। यह तो एक बड़ी अजीब बात थी।

मैंने गला खूंखार कर जब उन्हें इशारा किया तब उन्होंने अचानक अपने आपको सम्हाला और बोलै, ” प्रिया, प्लीज आप को इस तरह ताकने के लिये मुझे माफ़ करें। आपकी शक्ल देख कर मैं थोड़ी देर के लिए धोका सा खा गया। आप कितनी खूब सूरत हो।” फिर एक गहरी साँस लेकर वह वहाँ से हट गए।

शर्म के मारे मैं पानी पानी हो रही थी। सामान्यतः ऐसे प्रशंशा से भरे हुए वचन सुनकर मैं खुश हो जाती। पर उस दिन मुझे उनका यह वर्तन कुछ अजीब सा लगा।

खैर वह समा चला गया और योगराज ने मुझे अपना परिचय दिया और उनकी टीम से मिलाया।

शुरुआत के वह अजीब लम्हें को नजर अंदाज करें तो वह मीटिंग यादगार रही। मैं योगराज के बरबस आकर्षित करने वाले व्यक्तित्व से काफी प्रभावित या कहूं की आकर्षित हुई तो वह गलत नहीं होगा। वह हमेशा छोटी सी कटी हुई दाढ़ी रखते थे जो उनके आकर्षक व्यक्तित्व को कामुकता प्रदान करती थी।

पहले ही दिन से मैं महसूस कर रही थी की जब भी मौक़ा मिलता, योगराज मुझे ताकते ही रहते थे। जब हमारी नजरें मिलतीं तो वह शर्मिन्दा होकर अपनी नजर हटा दिया करते। उनकी नज़रों में मैं एक गहरा अजीब भाव देख रही थी। उन्होंने कभी भी मुझसे किसी तरह की कोई गलत हरकत नहीं की।

इस कहानी का अगले एपिसोड जल्दी ही आपको देसी कहानी डॉट नेट पर पढने को मिलेगा!

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