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Group Sex Story पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 440 बार

मेरे ससुर ने मुझे चोदा-6

जूजाजी

02 Dec 2014 को प्रकाशित

मेरे ससुर ने मुझे चोदा-6
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प्रेषिका : रत्ना शर्मासम्पादक : जूजाजी

‘रत्ना रंडी.. मेरी जान तूने अपने ससुर का लंड बहुत बार लिया है.. रंडी बता और किस-किस का लंड अपनी चूत में खाया है। रत्ना मादरचोदी बहुत सती सावित्री बनती है तू घूँघट निकालती है रण्डी.. साली सब मोहल्ले की गाँव की औरतें तुझे सीधी समझती हैं और तू रंडी साली एक बहुत ही चुदासी औरत है। तू और तेरी चूत आह.. ओह्ह..ले..’

‘रमेश जी.. आह.. ऐसी बातें मत कीजिए प्लीज़.. मेरी चूत में खुजली हो रही है…’

‘अहह.. ओह्ह रत्ना आह मेरी रंडी.. आह आह ले मेरा लंड अब तुझे मैं रोज चोदूँगा।’

‘हाँ.. रमेश आहह हाँ.. रोज चुदवाऊँगी.. बस अहह.. बहुत मज़ा आ रहा है आह..’

रमेश ने मुझे लगभग 20 मिनट तक धकापेल चोदा।

‘आह रंडी रत्ना.. मेरा..पानी निकलने वाला है किधर निकालूँ?’

‘आह मेरे बोबों पर आह..’

‘आह.. ले आज उउउमा ले आह ले आह…’

रमेश और मैं दोनों ही झड़ गए और एक-दूसरे के ऊपर निढाल होकर लेट गए।

‘आह रत्ना बहुत खुश कर प्रिया तूने..’

फिर मैं भी उठ गई।

‘रमेश जी मुझे बहुत देर हो गई, घर जाना है.. नहीं तो बाबू जी को मुझ पे शक हो जाएगा कि मैंने आपके साथ कुछ किया होगा तो देर हो गई है।’

‘अरे कुछ नहीं कहेगा तेरा ससुर.. बस तुझे चोदेगा और क्या.. मेरी रंडी।’

‘क्या रमेश जी अब तो मुझे रंडी मत बोलो ना.. आपने जो बोला वो मैंने किया। अब तो कुछ नहीं कहोगे ना मेरे पति को प्लीज़?’

‘हाँ.. नहीं कहूँगा.. लेकिन मैं जब भी बोलू तब मुझसे चुदाई करवानी होगी।’

‘हाँ.. ठीक है मैं आ जाऊँगी.. बस अब जाऊँ?’

‘नहीं.. अभी एक राउंड और चोदूँगा।’

यह कर रमेश ने मेरे पपीतों को जोर से अपने मुँह में भर लिया।

‘आह प्लीज़.. आराम से.. आह बोबों को काटो मत ना.. अभी घर जाऊँगी तो मेरे ससुर जी इन मम्मों को कटा हुआ देख कर मुझसे हजार सवाल पूछेंगे।’

अभी हम अपनी चुदाई में ही लगे थे कि मेरे ससुर मुझे ढूँढ़ते हुए यहाँ आ गए और खिड़की से हमको चुदाई करते हुए देख लिया।वे एकदम से अन्दर आ गए।

‘ओह्ह रमेश तुम बहुत बदमाश हो, तुमने मेरी बहू को खराब कर प्रिया।’

‘साले बालू तुम भी तो पापी हो, मेरी रानी को उसके पति के होते हुए चोदते हो।’

मेरे ससुर जी चुप हो गए और रमेश भी चुप हो गया।

फिर अचानक रमेश मुझसे मुखातिब होकर बोला- साली तू पापिन है, तू ही अपने ससुर और पति के दोस्त के साथ चुदाई कर रही हो?

‘मैं क्या करूँ.. इसमें मेरा क्या कसूर? जब मेरा पति मेरी चूत का ख्याल नहीं रखता तो और नहीं चोदता है, तो दूसरे तो चोदेंगे ही ना मुझे.. मैं ही ऐसी तो वो क्या करें।’

मेरी बात सुनकर वे दोनों हँसने लगे।

रमेश ने अपना लंड हवा में लहराया और कहा- ले चूस मेरा लंड रत्ना..

मैं भी अपने चूतड़ मटकाती हुई गई और रमेश के लौड़े को अपने मुँह में ले लिया।

‘आहहह मुआ उमाम्मा आह.. अब चल दीवार के सहारे खड़ी हो जा.. आईने के सामने चल रत्ना।’

‘आह्ह मार क्यों रहे हो.. प्लीज़ दर्द होता है।’

रमेश ने मुझे दीवार के सहारे खड़ा करके मेरी चुदाई शुरू कर दी।

‘वाह मेरी बहू रानी.. मैं सोच रहा हूँ वहाँ रमेश के घर पर खाना खा रही होगी तू यहाँ उल्टा रमेश को खाना और दुद्दू पिला रही है। अब बहू मैं भी आ गया हूँ ना तुझे और तेरी लेने। बहू क्या मस्त लग रही है मेरी जान।’

‘हाँ.. बाबू जी आपकी बहू तो बहुत हो सेक्सी माल है बिल्कुल एक रंडी है इसको आज हम दोनों चोदते हैं..’

‘हाँ रमेश मैंने भी एक बार सोचा कि बहू को दो लौड़ों से चुदवाऊँ.. आज वो आस भी पूरी हो जाएगी।’

दोनों भूखे कुत्ते की तरह मुझ पर टूट पड़े।

‘आहझहह बाबू जी… आह बाबू जी।’

‘नहीं बालू बोल बहू रानी।’

‘आह रमेश प्लीज़ धीरे ना.. तुम तो दो बार चुदाई कर चुके हो ना..’

‘आह रत्ना रंडी.. लेकिन तू है ही ऐसी चीज़ कि छोड़ने का बिल्कुल मन नहीं करता। आज रात तेरी सुहागरात है रत्ना!’

‘हाँ.. बहू रानी आह ओह्ह..’

एक ने मेरी गाण्ड में और दूसरे ने मेरी चूत में अपने-अपने लौड़े पेल दिए।

दोनों ज़ोर-ज़ोर से मेरी चुदाई करने लगे।

उस रात में 5 बार दोनों ने मिल कर मेरी चुदाई की।

चुदाई के बाद हम तीनों ऐसे नंगे ही रमेश के घर पर सो गए।सुबह मेरी 7 बजे नींद खुली, वो दोनों अभी तक सो ही रहे थे।मैं उठ कर फ्रेश हुई, रसोई में चाय बनाने लगी।तभी दोनों ने पीछे से नंगे ही आकर मुझे उठा लिया।मैं डर गई कि अब पीछे से कौन आ गया।

‘ओह्ह रत्ना रानी तुम नंगी बहुत ही खूबसूरत सेक्सी औरत लग रही हो।’

‘चुप करो बाबू जी.. अब चलो घर.. नहीं तो मोहल्ले वाले सोचेंगे कि हम ससुर-बहू रमेश के घर पर क्या कर रहे हैं।

‘हाँ.. बहू चलते हैं।’

‘नहीं रत्ना और बाबू जी आज रुक जाओ ना बाद में चले जाना।’

‘नहीं बाबा.. अब और नहीं चुदवाना.. मुझे तो पूरा रंडी बना प्रिया आप दोनों ने।’

‘हाँ.. बहू तू तो है ही हमारी रंडी.. अब से रोज मैं और रमेश दोनों चोदेंगे।’

‘अच्छा बाबू जी चोद लेना.. पर अभी तो चलो।’

‘हाँ.. किसी को बाहर पता नहीं चलना चाहिए, नहीं तो और बाहर से भी गाँव के, मोहल्ले के लोग आ जायेंगे। रंडी खाना बन जायगा आपका घर।’

‘तो उसमें क्या हुआ बहू? क्या पैसे तो देंगे ना वो सब।’रमेश और ससुर जी जोर-जोर से हँसने लगे।

फिर मैं और बाबू जी घर पर आ गए और बस तब से यह मस्ती चालू है जो अभी तक मेरे साथ चल रही है।अब इसमें मेरी कुछ ग़लती हुई हो तो आप बताओ।जो कुछ हुआ सब हालत की वजह से हुआ।मेरी पूरी कहानी में कोई यकीन करे ना करे लेकिन मेरी यह आपबीती है जो अभी भी चल रही है, मुझे आपकी राय दीजिए कि मैं आगे अपनी ज़िंदगी में क्या करूँ?आपके विचार मुझे लिखें।

इससे आगे की कहानी:स्कूल के गुरू जी ने मुझे चोदा

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मेरे ससुर ने मुझे चोदा

कुल भाग: 6
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
k

katariya19

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

लवर ब्वॉय

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

s

seema_khan791

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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