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भाभी की चुदाई पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 688 बार

मेरी सेक्सी बिंदास भाभी ने मेरे लंड की सील तोड़ी-7

शरद सक्सेना

28 Feb 2024 को प्रकाशित

मेरी सेक्सी बिंदास भाभी ने मेरे लंड की सील तोड़ी-7
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मैं भाभी की चुदाई बाद उनके साथ भाभी के बिस्तर पर उनसे चिपक कर सो गया।

नींद काफी अच्छी आई, लेकिन बीच रात मेरी नींद मेरे लंड के तनने के कारण टूट गई।हुँआ यूँ कि रात को सोते समय मुझे लगा कि मेरा लंड किसी चीज से रगड़ रहा है, नींद के आगोश में मेरा हाथ मेरे लंड पर चला गया और जिस दीवार (मतलब भाभी की चूत) से रगड़ रहा था और रगड़ने लगा।

मैं तेज-तेज लंड को भाभी की चूत से रगड़ रहा था, भाभी भी थोड़ा कसमसाई, फिर वो और कस कर मुझ से चिपक गई और मैंने अपना काम जारी करते हुए और रगड़ना शुरू किया।

दोस्तो अक्सर रात को होता है और आप लोगों को भी लगता है कुछ रियल में हो रहा है।कुछ देर बाद लंड को चूत से रगड़ने के बाद मेरा पानी निकल कर भाभी की चूत में गिर गया। उसके बाद क्या हुआ, मुझे नहीं पता!

पर सुबह भाभी मुझे जगाते हुए बोली- रोहित, क्या अपनी भाभी के लिये चाय बनायेगा?मैंने करवट बदली और उठने की कोशिश करने लगा, पर मुझे ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरे सर को कस कर जगड़ लिया है। थोड़ा उठने की कोशिश की जब नहीं उठा तो फिर मैं लेट गया।

भाभी अभी भी अलसाई हुई थी।

थोड़ी देर बाद फिर आवाज आई- रोहित, चाय बना दे, नहीं तो ऑफिस को देरी हो जायेगी।मैं किसी तरह हिम्मत करके उठा और रसोई की तरफ गया।

मुझे सुबह के समय नंगा रहना कुछ अजीब सा लग रहा था, तो मैंने पास पड़ी हुई कैपरी पहन ली और फिर रसोई पहुंच कर चाय बनाने लगा।चाय लेकर जब मैं वापस पहुंचा तो भाभी भी गाउन पहन चुकी थी और सिरहाने टेक लेकर और आँखें बन्द किये हुए बैठी थी।हम दोनों चुपचाप बैठे हुए चाय पीने लगे।

शायद भाभी को इस बात का अहसास नहीं रहा होगा कि सोते समय मेरा माल उनकी चूत में गिर चुका है। तो चाय पीते हुए भी उन्होंने इस बात का जिक्र भी नहीं किया।

चाय पीने के बाद भाभी उठी और मुझसे बोली- यदि तुम चाहो तो एक नींद और ले सकता हो, मैं नहाने के बाद जब नाश्ता तैयार कर लूंगी तो उठा दूंगी।उनकी बात सुनने के बाद मैं वापस बिस्तर पर आ गया और फिर नींद की आगोश में खो गया।

कुछ एक-आध घंटे के बाद भाभी नहा धोकर आई और मुझे जगाने आई। मुझे जगाते समय वो थोड़ा मेरे ऊपर झुकी हुई थी। हालांकि वो गाऊन पहने हुई थी लेकिन कमर पर ही वो कमर बन्द बाँधे हुए थी और इस वजह से उनकी चूची जो कुछ हद तक गाउन के अन्दर छुपी हुई थी, पर मेरी नजर वहाँ ही थी।

वो भी बेपरवाह थी और मुझे जगाते हुए बोली- अगर नहाना धोना चाहते हो तो नहा धो लो, नहीं तो फ्रेश होकर ब्रश कर लो! फिर हम दोनों नाश्ता करते हैं। नहीं तो मुझे ऑफिस की देर हो जायेगी।

मैं उठा और जल्दी से फ्रेश होकर नाश्ते की टेबल पर आ गया। नाश्ता लग चुका था, मैं और भाभी बैठकर नाश्ता करने लगे।नाश्ता करने के बाद भाभी उठी और कमरे में आकर कपड़े चेंज करने लगी, अब मैं भी निःसंकोच हो चुका था इसलिये मैं भी उनके पीछे-पीछे कमरे में आ चुका था।अलमारी से भाभी ने स्कर्ट, सफेट शर्ट और टी-टाई निकाली। मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और फिर गाउन को जिस्म से अलग कर प्रिया, श्रृंगारदान के पास आकर पाऊडर निकाला और अपने पूरे जिस्म पर अच्छे से मल लिया उसके बाद कोई क्रीम निकाली और अपने हाथ-पैर जांघ और चूत के उपर अच्छे से मल लिया और फिर कोई सेन्ट उठाकर अपने जिस्म के कुछ हिस्सो में लगाने के बाद चूत के आस-पास की जगह पर अच्छे से लगाया।

फिर कमीज और स्कर्ट को पहनने के बाद टी-टाई लगा ली। अपने कानों को बड़ी सी बालियों से सुशोभित किया और फिर चश्मा लगाकर मेरी तरफ देखते हुए बोली- कहो रोहित, मैं कैसी लग रही हूँ?मैं उनको एकटक देखते हुए बोला- भाभी, आपको तैयार होता देखकर मेरा लंड बेकाबू होकर तना हुआ है। अगर आप बोलो तो एक राउण्ड हो जाये?

‘न अभी न…’ वो बोली, इससे पहले वो और कुछ बोलती, मैंने पूछा- भाभी, एक बात नहीं समझ में आई, आपने न तो पेंटी पहनी, न ही ब्रा?’नहीं ऐसी कोई बात नहीं है।’‘बुरा न मानो, पर मुझे लगता है कि ऑफिस में बॉस आपकी चूत में अपना लंड डालने के लिये बेकरार होते होंगे इसलिये ये सब झमेला नहीं चाहते होंगे, बस स्कर्ट उठाई और लंड डाल कर बुर को चोद प्रिया।’

नहीं लौड़े के, ऑफिस में तो लोग मेरी चूत के दर्शन ही करते हैं और उन मादरचोदों के लिये ही मैं ब्रा-पेंटी नहीं पहनती। जो बहुत ज्यादा मुंह लगे हैं, वो साले मेरी चूत को चूम चाट लेते हैं।’

सुबह सुबह चूत और लंड पुराण सुनते ही मेरे लंड तमतमाने लगा। मैंने भाभी की कलाई पकड़ी और अपनी तरफ खींचते हुए बोला- भाभी, आज ऑफिस गोल मार जाओ, बना दो बहाना कि आप बीमार हो, नहीं आ सकोगी।‘नहीं मेरे लाल, बिमारी का बहाना नहीं बना सकती, नहीं तो पूरा ऑफिस यहीं आ जायेगा।’‘भाभी प्लीज!’ मैं गिड़गिड़ाने लगा और बोला- भाभी कुछ भी बहाना बनाओ, पर आज ऑफिस मत जाओ।

कुछ देर मेरी तरफ देखा और अपने गाल पर उंगली रखते हुए कुछ सोचने लगी, फिर बोली- चल मैं तेरी ही बात मान लेती हूँ!इतना कहकर भाभी ने मोबाइल उठाया और एक नम्बर डायल किया।स्क्रीन पर मि. मेहता करके नाम आया, दूसरी तरफ से हैलो की आवाज आई, जैसे ही भाभी ने भी हैलो बोला, तुरन्त ही मि. मेहता बोले- हाय मेरी जान, क्या हुआ, क्या आज जल्दी ऑफिस पहुंच गई हो?‘नहीं मि. मेहता, मैं आज ऑफिस नहीं आ पाऊँगी।’‘अरे यार, ऐसा सितम मत करो, मेरी जान अगर तुम कहो तो पूरा ऑफिस तुम्हारे घर में शिफ्ट कर देता हूँ।’‘नहीं बॉस, मेरे ससुराल से कुछ लोग आये हैं और आज मैं किसी हालत मैं नहीं आ सकती।’

मैं समझ रहा था कि मेरी प्यारी भाभी केवल मेरे लिये झूठ बोल रही हैं।

तभी उनके बॉस बोले- ठीक है, लेकिन तुम्हें भी मेरी बात माननी पड़ेगी।‘क्या?’ भाभी बोली।‘कुछ ज्यादा नहीं, तुम्हारी बात मानने के एवज में तुम्हारी मुनिया रानी के दर्शन करना चाहता हूँ।’भाभी उनकी बात काटते हुए बोली- अरे घर में मेहमान हैं, इस समय कुछ नहीं, कल मैं जब ऑफिस आऊँगी तो खूब जम कर देख लेना।‘मुझे आज ही देखनी है।’ वो भी गिड़गिड़ाते हुए बोले।

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भाभी ने मुझे देखा और आँख मारते हुए मुझे चुप ही रहने का आदेश प्रिया। भाभी उससे बार-बार मना करती जा रही थी और वो बार-बार रिक्वेस्ट करते जा रहे थे।कुल दो-तीन मिनट का ये हाँ और न का खेल चला फिर अन्त में भाभी बोली- ठीक है, मैं अपने बेड रूम में जा रही हूँ और लैपटॉप ऑन कर रही हूँ। लेकिन ज्यादा देर मैं सामने नहीं रहूंगी।

दूसरी तरफ से आवाज आई- ओ.के. मेरी जान, थोड़ी ही देर सही पर अपनी जान को देख तो लूंगा।‘ठीक है, मैं लैपटॉप ऑन करने जा रही हूँ।’‘ठीक है।’

फोन कटते ही मैंने भाभी से पूछा- भाभी ये सब क्या है?भाभी अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोली- तेरा लंड तो तगड़ा है पर दिमाग तगड़ा नहीं है। तू ही तो अभी कह रहा था कि मैं पेंटी और ब्रा क्यों नहीं पहनती, बस इसलिये ही नहीं पहनती, ये साले सब मेरी चूत और गांड की छेद को देखकर ही खुश होते हैं।

‘इसका मतलब काफी लंड आपकी सेक्सी चूत के लिये हैं?’‘नहीं!’ मुस्कुराते हुए बोली- ऐसी कोई बात नहीं है।

पर मैं उनकी कातिल मुस्कान को देखकर समझ चुका था कि ऑफिस में भाभी की चूत क्या कमाल करती होगी, यही सोचते हुए मैं उनके पीछे पीछे चल प्रिया।

भाभी कमरे में गई और लैपटॉप के ऑन कर प्रिया। थोड़ी देर बाद ही दोनों कनेक्ट हो गये।एक बार फिर दोनों के बीच हाय हैलो हुआ।भाभी ने मुझे पहले ही लैपटॉप के पीछे ही रहने को कहा।

उसके बाद भाभी ने अपनी स्कर्ट को ऊपर कर प्रिया। पर शायद मि. मेहता सन्तुष्ट नहीं थे क्योंकि भाभी कुछ टाईप कर रही थी। लेकिन थोड़ी देर बाद भाभी ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए। और कभी अपने पीछे हिस्से को लैपटॉप के तरफ करती और थोड़ा झुक कर चूतड़ों को फैला देती और एक उंगली गांड की छेद में डालती तो कभी आगे का हिस्सा लैपटॉप की तरफ होता और फिर खुद अपने हाथों से अपनी चूचियों को मसलती और कभी चूत पर हाथ फेरती।

उनको इस तरह से करते देखकर मेरा लंड जो पहले से टाईट था और कड़क होने लगा, मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिए।मेरे खड़े लंड को देखकर भाभी लैपटॉप के पास आ गई और झुकते हुए अपनी मुंह के हिस्से को मेरी तरफ लाई और लंड को गप्प से मुंह में ले लिया और उसको चूसने लगी। फिर पास पड़ी हुई कुर्सी पर अपने एक पैर को रखा और चूत की फांकों को फैलाते हुये उसके बीच अपनी उंगली चलाने लगी, कभी पुतिया को दबाती तो कभी उंगली चूत के अन्दर डालती और फिर बाहर निकाल कर चूसने लगती।कुछ देर ऐसा करने के बाद भाभी ने लैपटॉप बन्द कर प्रिया और मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा, मुझसे चिपकते हुए बोली- देख मेरे प्यारे देवर, दुनिया मेरी चूत के लिये दीवानी है और तेरी भाभी तेरे लंड की दीवानी है। अब बता तुझे मेरे में सबसे ज्यादा अच्छा क्या लगता है?‘आप में ऐसा क्या है जो मुझे अच्छा नहीं लगता।’‘फिर भी बोल सबसे ज्यादा अच्छा क्या लगता है?’‘सबसे अच्छा तो आपकी गांड है।’

‘तो चल आ जा मेरे राजा, मेरी गांड को चाट और उसको चोद दे!’ इतना कहते हुए वो पंलग पर पट लेट गई और फिर बोली- शर्मायेगा तो नहीं मेरी गांड चाटने में? तेरा भाई भी मेरी गांड का बहुत बड़ा दीवाना है। तेरा भाई बुर तो चोदेगा ही… पर जब तक मेरी गांड नहीं मार लेगा तब तक वो मुझे नहीं छोड़ता।

‘नहीं भाभी, तेरी गांड देखकर मेरे मुंह में पानी आ रहा है।’ इतना कहने के साथ ही मैं उनकी टांगों के बीच आकर उनके चूतड़ों के उभार को कस कस कर मलने लगा। मुलायम मुलायम चूतड़ दबाने में बड़ा मजा आ रहा था और भाभी चुपचाप लेटी हुई थी।

थोड़ी देर तक चूतड़ दबाने के बाद मेरी जीभ का मिलन उनके छेद से हो गया। उनके छेद में काफी सारा थूक उड़ेलने के बाद मैं उस पर अपनी जीभ चलाने लगा और इधर भाभी की आवाज आने लगी- बहुत अच्छे!

बहुत देर तक मैं केवल गांड चाटता रहा। फिर अपने लंड को गांड से सटा कर उसके साथ खेलने लगा, कभी छेद से लंड को रगड़ा तो कभी छेद के अन्दर सुपारा डालकर निकाल लेता।मेरे इस तरह करने से भाभी सिसयाती हुई बोली- बहुत अच्छा मेरी जान! इसी तरह करते रहो, बहुत अच्छा लग रहा है। अब तुम पक्के चोदू पंडा बन गये हो।

धीरे-धीरे करते रहने से लंड उनकी गांड में पेवस्त हो गया और मैं उनके ऊपर लेट गया, कभी उनकी गर्दन पर तो कभी गालों पर किस करता, पर भाभी मेरे वजन को नहीं संभाल पा रही थी, बोली- लल्ला, मैंने तुमसे मेरी गांड मारने को कहा है, मेरी जान लेने को नहीं!‘क्या हुआ भाभी?’ मैं उनके गाल को चूमते हुए बोला।

तो बोली- भोसड़ी के, अपना वजन मेरे ऊपर से हटा, मेरा दम घुट रहा है।मैं उनकी बात सुन कर झटके से उनके ऊपर से हट गया, इससे मेरा लंड भी उनकी गांड से बाहर आ गया।वो पलट गई और अब उनकी चूत भी मेरी आंखों के सामने थी।

मैं वहीं बैठा और उनकी चूत चूसने का मजा लेने लगा और साथ ही साथ बुर और गांड दोनों को चोदने लगा।मेरी इस चुदाई को झेल कर भाभी बोली- मेरे राजा, मुझे इसी तरह चोदो, बहुत मजा आ रहा है।

मैं उनकी इस बात से और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहा था, मैंने अपना लंड निकाला और भाभी के सीने पर चढ़ गया और अपना लंड उनके मुंह में पेल प्रिया, वो सुपारे को आईसक्रीम की तरह चूस रही थी।कुछ देर चुसाई के बाद मैं एक बार फिर उनकी चूत को चोदना शुरू कर प्रिया। भाभी भी उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह… ओह! की आवाज के साथ मेरा साथ दे रही थी।मैं उनकी बुर और गांड एक साथ चोद रहा था कि बुर चोदते समय भाभी बोली- मेरी जान मैं खलास होने वाली हूँ, मेरा निकलने वाला है!मेरी स्पीड और तेज हो गई, उनकी चूत गीली होने से फच फच की आवाज आ रही थी। मैं बहुत स्पीड में था, पर मेरा निकल नहीं रहा था और बड़ी मीठी सी जलन का अहसास हो रहा था, मुझे लग रहा था कि मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है पर पानी नहीं निकल रहा था।मैं लंड निकाल कर भाभी के पास गया और सुपारे को उंगली से खुजलाते हुए बोला- भाभी सुपारे में बड़ी मीठी जलन हो रही है, लग रहा है कि पानी निकलने वाला है, पर निकल नहीं रहा है।

भाभी पलंग पर ही बैठ गई और मेरे लंड को मुंह में लेते हुए बोली- लगता है कि तेरा लौड़ा जिद्दी हो गया है, निकलना नहीं चाह रहा है। आ मेरे लाल!कह कर लंड को एक बार फिर से मुंह में ले लिया और दांतों के बीच सुपारे को फंसा कर उसे काटने लगी, इससे मुझे बड़ा आराम मिला और कुछ देर उनके इसी तरह से चूसते रहने से मेरा पूरा माल उनकी मुंह के अन्दर गिरने लगा, वो बड़े प्यार से उसको पी रही थी और लंड सिकुड़ने तक वो मेरे लंड को चाटती रही।

फिर हम दोनों उनके बिस्तर पर ही चिपक कर लेट गये, मैंने भाभी को अपने से कस कर चिपका लिया था और उनके कमर के हिस्से को अपनी टांगों के बीच फंसा लिया था।हालाँकि सुबह का समय था, करीब 10 बज रहे थे, फिर भी मुझे नींद सी आ रही थी।

भाभी की चूत चुदाई की कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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