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Group Sex Story पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 506 बार

हवसनामा: मेरी चुदती बहन-4

इमरान ओवैश

03 Jun 2025 को प्रकाशित

हवसनामा: मेरी चुदती बहन-4
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वे एकसाथ तीनों मिल कर उसे रगड़ने लगे। राजेश ने भी लिंग निकाल लिया और उसके होंठ चूसने लगा। तीनों ही उसे बुरी तरह रगड़ रहे थे, चाट रहे थे और चूस रहे थे… उसके होंठ, वक्ष, चुचुक, योनि और नितंब कुछ भी महरूम न रहा और बार-बार तीनों में से कोई न कोई अपना लिंग उसके मुंह में दे देता, जिसे वह चपड़-चपड़ कर चूसने लगती।

अब देख के लग रहा था कि शरीर को मिलते घर्षण का आनंद अब उसे उत्तेजित कर चुका था और वह सिर्फ एक चीज को छोड़ कर बाकी सब भूल गयी थी कि वह स्त्री थी और कुछ पुरुष उसे यूँ शारीरिक सुख दे रहे थे, जो कि उसका हक था।

मैं सबके लिये नगण्य हो कर रह गया था और एक चीज मैं भी महसूस कर रहा था कि उस लाईव पोर्न को देखते मैं भी बस पुरुष हो कर रह गया था। न भाई बचा था न दोस्त… उन्नीस का होने तक भले मेरे साथ पांच छः बार गुदामैथुन किया गया हो लेकिन मुझे कभी वेजाइनल सेक्स का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ था तो अब तक मैं उस सुख से वंचित ही था।

जो सामने था, वह उत्तेजना से भर देने वाला था, रगों में उबाल ला देने वाला था और मैं अपने लिंग को कठोर होते महसूस कर सकता था।

मेरी बहन का मखमली गोरा गुदाज बदन वह तीनों मजबूत मर्द मसल रहे थे, रगड़ रहे थे… उसका मुखचोदन कर रहे थे, दूध दबा रहे थे, घुंडियां चूस रहे थे, योनि सहला रहे थे, आगे पीछे के छेदों में उंगली कर रहे थे और वह सीत्कार कर रही थी, कभी-कभी जोर से कराह उठती थी और अब बस कमरे में पांच शरीर ही रह गये थे, कोई रिश्ता न बचा था। तीन मर्द एक स्त्री शरीर का घर्षण कर रहे थे और एक मर्द उस लाइव नजारे को देख कर उत्तेजना से तप रहा था।

मैंने महसूस किया था कि मेरे लिंग से भी पानी निकलने लगा था और मैं अपने सूखे होंठों पर जीभ फिराते पैंट के ऊपर से ही उसे दबाने सहलाने लगा था। बहन या बहन की चुदाई को ले कर जो भी प्रतिरोध या आक्रोश मेरे मन में था, वह खत्म हो चुका था… जब जिसके शरीर का उपभोग हो रहा था, शुरुआती हिचकिचाहट के बाद वह खुद उस सबको एंजाय कर रही थी तो मैं प्रतिरोध करने वाला कौन होता था।

जल्दी ही वह चारों पूरी तरह गर्म हो गये। तीनों के लिंग कठोर हो कर तन गये थे और रुबीना की योनि भी गीली हो कर बहने लगी थी… तब वह अलग हो गये।

“चल मेरी जान… अपने पहले लंड के लिये तैयार हो जा। थोड़ा दर्द तो होगा पर बाद में मजा भी खूब आयेगा।” राजेश अपने लिंग को हाथ से सहलाते हुए बोला।

गुड्डा और जिंकू उसके दायें बायें लेट कर उसका एक-एक दूध सहलाते पीने लगे और हाथ से नीचे योनि भी ऊपर-ऊपर से सहलाने लगे। राजेश ने रुबीना के घुटने मोड़ कर उसके पैर फैला लिये थे। इसके बाद राजेश ने उठ कर अलमारी में मौजूद एक शीशी उठाई और उससे ढेर सा जेल निकाल कर अपने लिंग पर मलने लगा। यह देख मुझे बड़ी राहत हुई कि कम से कम चिकना कर के घुसायेगा… वैसी ही घुसाने की कोशिश करता तो बेचारी की हालत खराब हो जाती।

इतना गर्म होने के बाद रुबीना की योनि हालाँकि आलरेडी बह रही थी लेकिन उसने वहां जेल डाल कर उसे और चिकना कर प्रिया और छेद में बिचली उंगली अंदर बाहर करने लगा… जबकि दोनों जमूरे उसकी योनि के ऊपरी सिरे पर छेड़छाड़ करते उसके दाने को सहला रहे थे।

फिर जब दोनों अंगों पर काफी चिकनाहट हो गयी तो वह अपने लंबे मोटे लिंग को एक हाथ से पकड़ कर उसकी चिकनाई बहाती योनि पर ऊपर नीचे रगड़ने लगा।

“डालूं?” राजेश ने उसकी तरफ देखते हुए पूछा और मेरी बहन ने सर हिला कर “हां” में इशारा किया।

हमारे यहां एक देसी कहावत है कि भैंस बियाये और बर्ध की गांड फटे। यह हाल मेरा हो रहा था कि चुदने मेरी बहन जा रही थी और फट मेरी रही थी कि कैसे जायेगा उसका इतना मोटा लिंग जहां छेद तक ठीक से नहीं दिख रहा था।

उधर राजेश ने एकदम से धक्का प्रिया और रुबीना की चीख निकल गयी। मेरा दिल जोर से धड़का और पसीना सा आ गया जबकि वह छटपटाने लगी थी। जिंकू और गुड्डा ने उसे दबोच लिया था कि वह ज्यादा हिल न सके और राजेश ने उस पर झुकते हुए उसका मुंह दाब लिया था कि वह और चीख न सके और उन्हें देखते मेरी हालत खराब हो रही थी।

फिर मेरे देखते राजेश ने दूसरा धक्का और जोर से लगाया और उस पर लद गया। दोनों चेले साइड हो गये और राजेश उस पर छा गया और उसके होंठ चूसने लगा। वह उसके नीचे दबी छटछपटाती रही और मेरी बेचैनी बढ़ती रही।

धीरे-धीरे उसकी छटपटाहट शांत हो गयी और फिर राजेश उसके होंठों को छोड़ उसके दूध दबाने और चूसने लगा। फिर अपनी कमर को उसी पोजीशन में रखते, घुटने मोड़ते वह उठा तो दोनों चेलों ने फिर हमला कर प्रिया उसके दूधों पे और उन्हें मसलने चुभलाने लगे।

बैठ कर राजेश ने अपना खून से नहाया लिंग बाहर निकाला तो उसकी खून खच्चर योनि मुझे दिखी और मेरा कलेजा हलक को आया। सारी उत्तेजना हवा हो गयी। मैं बेचैनी से हाथ मलता उठने को हुआ तो राजेश ने घुड़कती हुई निगाहों से मुझे देखा और मैं कसमसाते हुए वापस बैठ गया।रुबीना शायद बेहोश हो गयी थी।

उसने सरहाने पड़ा अंगोछा उठाया और लिंग और योनि के खून को साफ करने लगा। अच्छे से साफ करने उसने फिर जेल लगाया और एक बार फिर उसकी योनि से लिंग सटा कर अंदर ठेल प्रिया। नीम बेहोशी में भी उसके शरीर का निचला हिस्सा हल्के से छटपटाया लेकिन इस बार राजेश ने थामने की कोशिश नहीं की।

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दोनों चेले ऊपर पहले की तरह लगे रहे और राजेश धीरे-धीरे लिंग अंदर बाहर करने लगा। साथ ही वह अपने अंगूठे से उसके दाने को रगड़ भी रहा था ताकि उसमें उत्तेजना का संचार होता रहे। जबकि मुझे लग रहा था कि वह होश में ही नहीं रही थी।

सबकुछ यूँ ही होता रहा और करीब तीन चार मिनट बाद उसमें हलचल हुई और वह आंखें खोल कर राजेश को देखने लगी। फिर उसने चेहरा घुमा कर मेरी ओर देखा जैसे मुझे आश्वासन दे रही हो कि वह ठीक है … साथ ही उसकी निगाहों में गर्व का भी भाव मैंने महसूस किया कि जैसे कह रही हो कि देखा, मैंने कहा था न कि हमारे अंगों की बनावट ऐसी होती है कि मैं झेल लूंगी।

जबकि राजेश अब फिर उस पर झुकता हुआ उसके होंठों को चूसने लगा।

फिर धीरे-धीरे उसके धक्कों में तेजी आने लगी और वह उठ कर बाकायदा बैठ गया। अब जिंकू उसके सीने पर बैठ गया अपने ही घुटनों पर वजन रखते हुए और अपना लिंग उसके दूधों के बीच रख कर, उसे दोनों दूधों से दबाते हुए आगे पीछे करने लगा। गुड्डा उसी पोजीशन में उसके मुंह पर बैठ कर अपना लिंग उसके मुंह में दे कर आगे पीछे करने लगा और यूँ इन पोजीशंस में तीनों उसे चोदने लगे।

जब धीरे-धीरे मैंने उसे सहज होते देखा तो मुझे भी राहत हुई और मेरी उत्तेजना का स्तर फिर बढ़ने लगा।

जब राजेश ने भी उसकी सहजता को महसूस कर लिया तो उसने उन दोनों से हटने को कहा और दोनों ही रुबीना को छोड़ के अलग हट गये। ऐसा लगा जैसे वह अब वन ऑन वन चोदन के मूड में हो।

रुबीना को भी शायद यही चाहिये था। अब तक वह निर्लिप्त भाव से उन्हें जैसे झेल रही थी लेकिन अब वह खुद से सहयोग करने लगी। दोनों एक दूसरे से चिपटने रगड़ने लगे और अब वह खुद से एंजाय करने लगी राजेश के हैवी लिंग को। दोनों पोजीशन बदल-बदल कर एक अति उत्तेजित संभोग कर रहे थे। सबसे ज्यादा एंजाय शायद उसने डोगी स्टाईल में किया। मुझे लगा कि अब तक उसके दिमाग में शायद जो-जो रहा हो, वह सब भोग लेना चाह रही हो।

कमरे के सीमित वातावरण में उनकी धचर-पचर गूँज रही थी और मुझे यह देख कर थोड़ा हैरानी भी हो रही थी कि कैसे राजेश अपने लंबे मोटे लिंग से इतनी आसानी से उस योनि से समागम कर पा रहा था जिसने पहले कभी कोई उंगली तक अंदर न ली हो।

फिर वह थक कर हट गया तो रुबीना की योनि को फिर साफ कर के जिंकू ने अपना लिंग घुसा प्रिया और भचीड़ भचीड़ कर उसे चोदने लगा। मुझे यकीन था कि राजेश के मुकाबले उसे राहत महसूस हो रही होगी।

हालाँकि भले जिंकू उसके लिये अजनबी हो लेकिन उससे चुदाने में भी वह वही आत्मीयता दिखा रही थी जो राजेश के साथ दिखा रही थी और ऐसा लग रहा था जैसे कोई प्रेमी जोड़ा संभोगरत हो। धक्के खाते हुए उसका पूरा शरीर लहरें ले रहा था और उसके वक्ष बुरी तरह हिल रहे थे।

फिर वह थक गया तो उसे हटा कर गुड्डा लग गया और वह उससे भी उसी अंदाज में चुदाने लगी जैसे पहले राजेश और जिंकू से चुदा रही थी।

चुदते-चुदते वह झड़ी न झड़ी, मुझे नहीं पता लेकिन अगले दो घंटे तक वह तीनों मिल कर उसे बारी-बारी चोदते रहे और इस बीच दो-दो बार झड़े। बहरहाल मेरे हिसाब से गनीमत यह रही कि उसके मुंह में नहीं झड़े। कोई योनि में झड़ा, कोई चूतड़ों पे, कोई पेट पे तो कोई चूचों पे।

और इस दो घंटे की चुदाई में वह बुरी तरह थक गयी थी और उसका हाल ऐसा हो गया था कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। हालाँकि उस चुदाई को देख के मेरी अंडरवियर भी भीग गयी थी और बड़ी मुश्किल से मैंने खुद को झड़ने से बचाया था।

इसके बाद वहां रुकने की जरूरत नहीं थी। मैं उसे ले के घर आ गया और वह पड़ गयी। अगले दो दिन उसकी हालत खराब ही रही और उसे तकलीफ से उबरने में दवा खानी पड़ी थी। अम्मी के पूछने पर खराब तबीयत का बहाना बना प्रिया था।

राजेश का अंदेशा सही निकला था और वह बुक हो गया था। एक बार की चुदाई में उससे छुट्टी मिल गयी थी। जैसा उसने कहा था कि उसके जाने के बाद भी कोई रुबीना को परेशान नहीं करेगा। वाकई उसके पीछे मुहल्ले के लौंडे लफाड़ी फब्तियां भले कसते रहे हों या पीठ पीछे बातें बनाते रहे हों लेकिन सामने से कोई हरकत नहीं करता था और इसी तरह उसका ग्रेजुएशन कंपलीट हो गया और बाहर निकलने की झंझट ही खत्म हो गयी।

फैजान की कहानी यहीं खत्म होती है। अगर आपके पास भी कुछ ऐसा अनुभव है जो आप इस मंच पर शेयर करना चाहते हैं और किसी वजह से कह नहीं पा रहे तो मुझे बताइये, मुझे वह इस मंच पर शेयर करने लायक लगेगा तो अपने शब्दों में लिख कर जरूर पेश करूँगा। अपनी राय या अपनी कहानी मुझे मेल या फेसबुक पर बता सकते हैं।मेरी मेल आईडी और फेसबुक एड्रेस हैsupport@mohakkisse.com://facebook.com/imranovaish2

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हवसनामा: मेरी चुदती बहन

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

लव कुमार

1 month ago

रिश्तों की ये कहानी सच में बहुत ही कामुक थी। अंत बहुत ही गर्म था।

विशाल मित्तल

1 month ago

बहुत ही उत्तेजक और रोमांचक कहानी लिखी है भाई। मजा आ गया।

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