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भाई बहन पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 564 बार

मेरी चूत की भूख और भाई का लंड-1

सुमन कुमार

11 Feb 2019 को प्रकाशित

मेरी चूत की भूख और भाई का लंड-1
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मैं जब भी भाई-बहन की हिन्दी सेक्स स्टोरीज पढ़ती हूँ.. तो मुझे अपनी रियल लाइफ की चुदाई याद आ जाती है.. जो आज में आप सबके साथ साझा करने जा रही हूँ।ये मेरी पहली स्टोरी है.. जो एकदम सच्ची है.. सो अगर कोई ग़लती हो तो माफ़ करना।

पहले मैं अपनी फैमिली के बारे में बता दूँ। मेरी फैमिली में मैं.. मेरा भाई राज (उम्र 21 साल) और मेरी मॉम प्रियंका (उम्र 42 साल) और मेरे डैड (उम्र 45 साल) है।

यह स्टोरी उस वक्त की है.. जब मैं पढ़ती थी.. उस वक़्त मेरा भाई भी पढ़ता था। मेरे घर में उस टाइम दो ही कमरे हुआ करते थे। एक में मॉम-डैड और एक में मैं और मेरा भाई सोते थे।

मुझे सेक्स के बारे में बहुत अधिक तो पता नहीं था.. बस इतना पता था कि सेक्स कैसे होता है.. क्या-क्या किया जाता है।ये सब मेरी एक सहेली ने बताया था और मैंने थोड़ी पॉर्न वीडियो भी देखी थीं।

उस दिन से मुझे भी चुदने की इच्छा होने लगी। मुझे बॉयफ्रेंड बनाने का कोई शौक नहीं है.. पर मैंने सोचा कि कोई लंड तो ढूँढना ही होगा जिसके साथ चूत की खुजली शान्त की जाए।

उसके दो-तीन बाद ही रात में मुझे नींद नहीं आ रही थी.. पर मैं यूं ही लेटी थी, थोड़ी देर बाद मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी।

मैंने आँख खोली तो देखा भाई बिस्तर पर सोया है और मोबाइल की लाइट जली हुई है, वो पॉर्न वीडियो देख रहा था, उसी की आवाज़ मुझे सुनाई दी थी।

थोड़ी देर बाद भाई ने मोबाइल में मूवी देखते-देखते एक बार मेरी ओर देखा फिर उसने अपना लण्ड निकाल कर ऊपर-नीचे करने लगा।

पहली बार मैंने भाई का लण्ड देखा था। मोबाइल के लाइट में भाई का लण्ड ठीक से तो नहीं दिखा.. पर दिख गया।भाई का लण्ड देख कर मैंने उसी वक़्त सोच लिया कि यही लण्ड मैं अपनी चूत में लेकर रहूंगी।

भाई का लण्ड काफी लंबा और मोटा था। मैं उसके लौड़े को देख कर तो एक बारी डर गई थी कि इतना बड़ा और मोटा लण्ड मेरी चूत में अन्दर कैसे जाएगा।

उस दिन मैंने भाई को मुठ मारते भी देखा.. फिर उसको मुठ मारते देख कर मेरी चूत के अन्दर भी खुजली होनी शुरू हो गई थी।मैंने भी अपनी एक हाथ पैन्टी के अन्दर डाला और चूत पर धीरे-धीरे रब करने लगी ताकि भाई को पता नहीं चले कि मैं जागी हुई हूँ। चूत रगड़ते-रगड़ते कब मैं झड़ गई और फिर मुझे कब नींद आई.. मुझे पता भी नहीं चला।

अगले दिन रविवार का दिन था.. सो सुबह में थोड़ा देर से उठी.. पर उठते ही मुझे भाई का लण्ड याद आ गया।मैंने सोचा कि अब भाई को सिड्यूस करना ही पड़ेगा।

मैं आप सब को यहाँ एक बात बता दूँ कि मेरे डैड बिजनेस करते हैं.. तो वो अक्सर आउट ऑफ टाउन रहते हैं और वे पिछले ही दिन बाहर चले गए थे.. सो घर पर बस मैं और भाई के अलावा मॉम थीं।

मैंने फ्रेश होकर उस दिन बिना ब्रा और बिना पैन्टी का टॉप और लोवर पहन लिया। मेरा टॉप टाइट था.. जिसमें से मेरी घुन्डियाँ साफ़-साफ़ पता चल रही थीं।

भाई टीवी देख रहा था.. मैं उसके बगल में जाकर बैठ गई और टीवी देखने लगी।

ब्रेकफास्ट करने के बाद मैं सोचने लगी कि कैसे भाई को सिड्यूस किया जाए। भाई बिस्तर पर लेटा हुआ था… तभी मॉम आईं और बोलीं- मैं अपनी एक सहेली के यहाँ जा रही हूँ.. एक-दो घन्टे में आ जाऊँगी।

मैं मन ही मन बहुत खुश हुई, मैं बोली- ठीक है मॉम!

अब घर पर बस हम और भाई ही थे। मॉम के जाने के बाद मैं भाई के बगल में ही जाकर लेट गई और बोली- क्या कर रहे हो भाई?

वो एक चादर में घुसा हुआ लेटा था, वो कुछ नहीं बोला.. तो मैं भी उसी की चादर के अन्दर लेट गई।भाई एक टी-शर्ट और हाफ पैंट में था।

भाई की पीठ मेरी तरफ थी.. मैं उससे पूरी तरह से सट गई। जब वो कुछ नहीं बोला.. तो मैंने अपने मम्मों को उसके पीठ पर पूरी दबा कर उसके पैर पर पैर रख दिए।

वो बोला- क्या कर रही हो?तो मैंने बोला- सो रही हूँ।वो बोला- ठीक है, सो जाओ।

फिर भाई भी पलट गया.. मतलब अब भाई के हाथ मेरी पीठ पर थे और मेरा एक हाथ भाई की पीठ पर था।

मेरे मम्मे अब भाई के सीने से दबे हुए थे।

उसका लण्ड छूते ही मुझे करेंट जैसा लगा।अब मैं पैंट के अन्दर उसका लण्ड सहला रही थी, उसका लण्ड पूरी तरह गर्म और कड़क हो चुका था।

वो फिर भी आगे नहीं बढ़ रहा था.. पर कुछ बोल भी नहीं रहा था।

मैंने फिर उसका हाथ पकड़ा और अपने लोवर के अन्दर डाल दिया। मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। जैसे ही भाई ने मेरा चूत को टच किया.. उसे पूरा जोश आ गया।

अब भाई का हाथ मेरे लोवर में था और मेरा हाथ भाई के लोवर में था।भाई मेरी चूत में उंगली घुमा रहा था और मैं भाई के लण्ड को सहला रही थी।

थोड़ी देर बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।भाई ने मेरी गीली चूत से हाथ निकलना चाहा.. पर मैं बोली- अन्दर ही रखो ना..

हम लोग वैसे ही लेटे रहे.. लेटे-लेटे हम लोगों की कब आँख लग गई.. पता ही नहीं चला। एक घंटे बाद जब नींद खुली तो हम लोग वैसे ही चिपके हुए पड़े थे।

मैं उठी और अपने आप को थोड़ा ठीक किया और साफ किया, उसके थोड़ी देर बाद ही मॉम आ गईं।

मैंने सोचा कि बच गई नहीं तो मॉम को पता चल जाता.. तो गड़बड़ हो जाती। भाई सोया ही था.. वो थोड़ी देर में उठा और मुझे देख कर उसने स्माइल दी.. मैंने भी दी।

उस रात को हम लोगों ने कुछ नहीं किया.. क्योंकि मॉम घर पर थीं।भाई ने भी मना कर दिया था।

अगले दिन मेरी मौसी का फोन आया कि वो हॉस्पिटल में हैं और उनको बच्चा होने वाला है। मेरी मौसी उसी टाउन में रहती थीं.. पर थोड़ा दूर रहती थीं।

मॉम बोलीं- मैं मौसी के पास जा रही हूँ.. रात में आऊँगी।मैं बहुत खुश हो उठी।मैंने बोला- ठीक है मॉम।

थोड़ी देर के बाद मॉम चली गईं।

मैं नहाने चली गई, मैंने अपनी चूत के बाल साफ़ किए और एक तौलिया में बाहर आ गई।

भाई वहीं बैठा था.. भाई मुझे अधनंगा देखते ही बोला- आह्ह.. बहुत हॉट है तू तो।मैं बोली- थैंक्स.. ये सब तो तुम्हरे लिए ही है भाई।

वो इतना सुनते ही उठा और मुझे किस करने लगा। भाई ने मेरा तौलिया खोल दिया, मैं बिल्कुल नंगी हो गई।भाई मुझे नंगी देख कर बहुत खुश हो गया, उसने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया, फिर मेरे नंगे बदन के ऊपर लेट कर किस करने लगा।मैं ‘आआहह..’ करने लगी।

फ्रेन्ड्स.. मेरे भाई से आज मेरी चूत चुदाने की तमन्ना पूरी होने वाली थी और मेरी चूत की भूख मिटने वाली थी।

अगले भाग में मैं आपको अपनी पूरी चूत चुदाई की घटना सुनाती हूँ.. अपने आइटम संभाल लेना और मुझे ईमेल जरूर करना।लव यू फ्रेन्ड्स

कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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मेरी चूत की भूख और भाई का लंड

कुल भाग: 2
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