किस्से पर वापस जाएं
पड़ोसी पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,051 बार

माँ बेटी को चोदने की इच्छा-43

राहुल तारा

22 Nov 2013 को प्रकाशित

माँ बेटी को चोदने की इच्छा-43
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

अभी तक आपने पढ़ा…

मैं तो सीधा कमरे में जा कर लेट गया.. पर माया शायद फिर से दरवाज़े के बाहर खड़े होकर दोनों को समझाने में लगी हुई थी।

अब उसे समझाने दो.. तब तक मैं आपको बताता हूँ कि रूचि में ऐसा मैंने क्या देख लिया था.. जो मेरा लौड़ा फिर से चौड़ा होने लगा था। तो आपको बता दूँ जैसे दरवाज़ा खुला.. तो मेरी पहली नज़र रूचि की जाँघों पर पड़ी.. जो कि चुस्त लैगीज से ढकी थी.. उसकी दूधिया जाँघें उसमें से साफ़ झलक रही थीं और जब मेरी नज़र उसके योनि की तरफ पहुंची तो मैं देखता ही रह गया.. उसने आज नीचे चड्डी नहीं पहने हुई थी। जिससे उसकी चूत भी फूली हुई एकदम गुजिया जैसी साफ़ झलक रही थी।

मैं तो देखते ही खुद पर से कंट्रोल खो बैठा था.. अगर शायद उस वक़्त विनोद वहाँ न होता तो मैं उसकी गुजिया का सारा मीठापन चूस जाता। फिर जब मेरी नज़र उसके चेहरे पर पड़ी तो वो किसी परी की तरह नज़र आ रही थी। उसके बाल पोनी टेल की तरह बंधे हुए थे और बालों की लेज़र कट उसे खूबसूरत बना रही थी। उसके होंठ भी गजब के लग रहे थे.. मेरा तो जी कर रहा था कि मैं इनका रस अभी चूस लूँ.. मसल के रख दूँ उसकी अलहड़ जवानी को..

पर मैं दोस्त के रहते ऐसा कर न सका। हाँ.. इतना जरूर हुआ कि वो भी मेरी चक्षु-चुदाई से बच न सकी.. आँखों ही आँखों में मैंने उसे अपने अन्दर चल रहे उफान को जाहिर कर दिया था.. जिसे रूचि ने मेरे अकड़ते लंड को देखकर जान लिया था। उसकी मुस्कराहट उस पर मोहर का काम कर गई थी।

उस समय उसके चूचे तो क़यामत लग रहे थे। वो टी-शर्ट तो नहीं.. पर हाँ उसके जैसा ही ट्यूनिक जैसा कुछ पहना हुआ था.. जिसमें उसकी चूचियों का उभार आसमान छूने को मचल रहा था। उसकी इस भरी जवानी का मैं कायल सा हो गया था और इन्हीं बातों को सोचते-सोचते मेरी आँखें बंद हो चली थीं।मेरा हाथ मेरे सामान को सहला रहा था कि तभी माया आंटी अन्दर आईं और ‘धम्म’ से दरवाज़ा बंद किया।इसी के साथ में स्वप्न की दुनिया से बाहर आया।

अब आगे..

जैसे ही मेरी आँखें खुलीं.. तो मैंने आंटी का मुस्कुराता हुआ चेहरा सामने पाया..मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ.. आप इतना मुस्कुरा क्यों रही हो?तो वो बोलीं- बस ऐसे ही..मैं बोला- अच्छा.. ऐसा भी भला होता है क्या?तो वो बोलीं- तुम सो गए थे क्या?मैंने भी बोला- नहीं.. बस आँखें बंद किए हुए लेटा था..

तो वो बोलीं- क्यों?मैंने भी बोल दिया- बस ऐसे ही..बोलीं- तुम भी न.. चूकते नहीं हो.. तुरंत ही कुछ न कुछ कर ही देते हो..तो मैं बोला- तो फिर बताओ न.. कि अभी क्यों हँस रही थीं?

वो बोलीं- अरे मैं तो इसलिए हँस रही थी.. क्योंकि तुम ऐसे लेटे हुए थे जैसे काफ़ी थक गए हो..मैं तुरंत ही उठा और उनके चूचे मसलते हुए बोला- अब इनके बारे में क्या सोचोगी।

तो उन्होंने बिना बोले ही अपनी नाइटी उतार दी और मेरे गालों को चूमते हुए मेरे सीने तक आईं और फिर दोबारा ऊपर जाते हुए मेरी गरदन पर अपनी जुबान को फेरते हुए धीरे से बोलीं- अब सोचना नहीं बल्कि करना है.. आज ऐसा चोदो कि मेरा ख़ुद पर काबू न रहे..

तभी एकाएक झटके से मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर आ कर उनके होंठों को चूसने लगा।अब माया भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी.. लगातार उसके हाथ मेरी पीठ सहला रहे थे.. उसकी चूत मेरा औज़ार से रगड़ खा रही थी और उसकी टाँगें मेरी कमर पर बँधी हुई थीं।उसके गुलाबी होंठ मेरे होंठों को चूस और काट कर रहे थे.. माहौल अब इतना रंगीन हो चुका था कि दोनों को भी रुकने का मन नहीं था। अगर कुछ था तो वो था जज्बा.. एक-दूसरे को हासिल करने का।

तभी माया ने देर न लगाते हुए अपने हाथों को मेरे लोवर पर रख दिया और धीरे से उसे नीचे की ओर खींचने लगी।मैं भी अपने आप को संभालते हुआ खड़ा हुआ और अपना लोवर उतार दिया।

मेरे लोवर उतारते ही आंटी ने मेरा हाथ खींचकर मुझे नीचे लिटा दिया और अपने हाथों से मेरे औज़ार को सहलाते हुए एक शरारती और कातिल मुस्कान दी।तो मैंने भी उनके मम्मे भींच दिए जिसका उन्हें शायद कोई अंदाजा न था तो उनके मुँह से चीख निकल गई ‘आहह्ह्ह्ह..’इसी के साथ ही मैंने उनके चूचे छोड़ दिए मेरे चूचे छोड़ते ही वो बोलीं- तूने तो आज जान ही निकाल दी।वो अपने चूचे को मेरी ओर दिखाते हुए बोलीं- देख तूने इसे लाल कर दिया.. इतनी बेरहमी अच्छी नहीं होती.. आराम से किया कर न..

तो मैंने उनके उसी चूचे के निप्पल को अपनी जुबान से सहलाते हुए बोला- धोखा हो जाता है.. कभी-कभी तेज़ी में गाड़ी चलाते समय तुरंत ब्रेक नहीं लग पाती..इसी तरह वो झुकी और उन्होंने मेरे होंठों को चूसते हुए पोजीशन में आने लगीं।मतलब कि उन्होंने मेरे ऊपर लेटते हुए होंठों को चूसते हुए अपने घुटनों को मेरी कमर के बाज़ू पर रखा और चूसने लगीं।

इस चुसाई से मैं इतना बेखबर हो चुका था कि मुझे होश ही न रहा कि कब उन्होंने अपनी कमर उठाई और मेरे सामान को अपनी चूत रूपी सोख्ते से सोख लिया।उनकी चूत इतनी रसभरी थी और मेरे से चुद-चुद कर उसने मेरे लण्ड की मोटाई भाँप कर मुँह फैलाने लगी थी।तभी उन्होंने धीरे-धीरे मेरे औज़ार को अन्दर लेते हुए आधा घुसवाया और पुनः बाहर थोड़ा सा निकालकर तेज़ी से जड़ तक निगल लिया।

जिससे मेरे औज़ार ने भी उनकी बच्चेदानी में चोट पहुँचाते हुए उनके मुँह से ‘शीईईई ईएऐ..’ की चीख निकलवा दी।इसी के साथ उनका दर्द के कारण चुदने का भूत कुछ कम हो गया।

अब मैंने होश में आते हुए अपने दोनों हाथों को उनकी कमर पर जमा दिए.. फिर तभी मैंने हल्का सा सर को ऊपर उठाया और उनकी गरदन को चूसते हुए फुसफुसाती आवाज़ के साथ कहा- अभी आप आगे का मोर्चा लोगी.. या मैं ही कुछ करूँ?

इसी तरह मज़े से हमारी चुदाई कुछ देर चली कि अचानक से माया ने अपनी कमर को तेज़ी से मेरी जाँघों पर पटकते हुए मुँह से तरह-तरह की आवाजें निकालना आरम्भ कर दीं ‘अह्ह ह्ह्ह्ह… ऊओऔ.. अम्म म्म्मम.. श्हि.. ऊओह्ह्ह.. ऊऊऊ.. ह्ह्ह्ह्ह..’

जिसके परिणाम स्वरूप मुझे ये समझते हुए देर न लगी कि अब ये अपनी मंज़िल से कुछ पल ही दूर है।मेरे देखते ही देखते उनके आंखों की चमक उनकी पलकों से ढकने लगी।‘अह्ह्ह.. आह..’ करते हुए आनन्द के अन्तिम पलों को अपनी आँखों में समेटने लगीं।

उस दिन उनको उनकी जिंदगी में पहली बार इतना बड़ा चरमानन्द आया था.. जो कि उन्होंने बाद में मुझे बताया था।अब इसके पीछे एक छोटा सा कारण था जो कि मैं आगे बताऊँगा.. अभी आप चुदाई का आनन्द लें।

उनके स्खलन के ठीक बाद मैंने अपनी जाँघों पर गीलापन महसूस किया और इसी के साथ वो अपनी आँखें बंद किए हुए ही मेरे सीने पर सर टिका कर निढाल हो गईं।

मैं उनके माथे को चूमते हुए उनकी चूचियों को दबाने लगा.. जिसे वो छुड़ाने के लिए वो अपनी कोहनी से मेरे हाथ को हटाने लगीं।मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोलीं- कुछ नहीं.. बस ऐसा लग रहा है.. आज मैं काफी हल्का महसूस कर रही हूँ.. अब बस तुम कहीं भी छू रहे हो तो गुदगुदी सी लग रही है।मैंने बोला- अच्छा.. तुम्हारा तो हो गया.. पर मेरा अभी बाकी है.. तो क्या मुँह से करोगी?

तो बोलीं- नहीं.. अब मैं कुछ देर हिल भी नहीं सकती.. पर हाँ तुम्हारे लिए मैं एक काम करती हूँ.. थोड़ा कमर उठा लेती हूँ.. तुम नीचे से धक्के लगा लो।

तो मैंने ‘हाँ’ में सर हिला दिया.. तभी उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा उचका लिया और अपने मुँह को मेरी गरदन और कंधों के बीच खाली जगह पर ले जाते हुए पलंग के गद्दे से सटा दिया ताकि उनके मुँह की आवाज़ तेज़ न निकले।

अब बारी मेरी थी.. तो मैंने भी उनकी पीठ पर अपने हाथों से फन्दा बनाते हुए अपनी छाती से चिपकाया और तेज़ी से पूरे जोश के साथ अपनी कमर उठा-उठा कर उनकी चूत की ठुकाई चालू कर दी।

इससे जब मेरा लौड़ा चूत में अन्दर जाता तो उनका मुँह थोड़ा ऊपर को उठता और ‘आह ह्ह्ह्ह..’ के साथ वापस अपनी जगह चला जाता। इस बीच उनके मुँह से जो गर्म साँसें निकलतीं.. वो मेरे कन्धे और गरदन से टकरातीं.. जिससे मेरा शरीर गनगना उठता।

‘अह्ह्ह ह्हह्ह.. श्ह्ह्ह्ह.. और तेज़.. फिर से होने वाला है..’ उनकी इस तरह की आवाजें सुनकर मेरा जोश बढ़ता ही चला जा रहा था।

अब शायद उनमें फिर से जोश चढ़ने लगा था.. क्योंकि अब वो भी अपनी कमर हिलाने लगी थीं.. पर मैंने चैक करने लिए उसके चूचे फिर से दबाने चालू किए और इस बार उन्होंने मना नहीं किया।जबकि पहले वहाँ हाथ भी नहीं रखने दे रही थीं.. पर मैं अब फिर से भरपूर तरीके से उसके मम्मे मसल रहा था।

तभी अचानक वो फिर से झड़ गईं.. तो फिर मैंने उसे अपने नीचे लिटाया और फुल स्ट्रोक के साथ चोदने लगा। फिर कुछ ही धक्कों के बाद ही मेरी भी आँखों के सामने अंधेरा सा छा गया और माया की बांहों में खोते हुए उसके सीने से अपने सर को टिका दिया।

अब माया मेरी पीठ सहलाते हुए मेरे माथे को चूमे जा रही थी और जहाँ कुछ देर पहले ‘अह्ह हह्ह्ह्ह.. श्ह्ह्ही.. ईईएऐ.. ऊऊओह.. फक्च.. फ्छ्झ.. पुच.. पुक..’ की आवाजें आ रही थीं.. वहीं अब इतनी शांति पसर चुकी थी.. कि सुई भी गिरे तो उसके खनकने आवाज़ सुनी जा सकती थी।

अब आगे क्या हुआ यह जानने के लिए उसके वर्णन के लिए अपने लौड़े और चूतों को थाम कर कहानी के अगले भाग का इंतज़ार कीजिएगा.. तब तक के लिए आप सभी को राहुल की ओर से गीला अभिनन्दन।आप सभी के सुझावों का मेरे मेल बॉक्स पर स्वागत है और इसी आईडी के माध्यम से आप मुझसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।

support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

डॉक्टर ने पंडित की गांड मारी
पड़ोसी

डॉक्टर ने पंडित की गांड मारी

पिछली कहानी:मेडिकल स्टूडेंट्स को गांड चुदाई का शौक

15 मिनट 881
बीवी को मालिश वाले के बड़े लंड से चुदवाया- 2
पड़ोसी

बीवी को मालिश वाले के बड़े लंड से चुदवाया- 2

लॉन्ग डिक सेक्स कहानी में मेरी बीवी को चुदाई पसंद है पर मैं उसकी जोरदार चुदाई नहीं कर पाता. तो मैंने उसके मजे के लिए लम्बे लंड वाले की तलाश शुरू की.

17 मिनट 1,203
पति को धोखा देकर यार से चुदी होटल में
पड़ोसी

पति को धोखा देकर यार से चुदी होटल में

माय हॉट पुसी स्टोरी में मैं अपने पड़ोस के लड़के को पसंद करती थी. मैं उसके जवान लंड का मजा लेना चाहती थी. मैंने उसका लंड अपनी चूत में कैसे लिया?

9 मिनट 845

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
g

garamlohewala

6 days ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

हरि सिंह

3 weeks ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।