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बीवी की अदला बदली पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 851 बार

मुझे जीना सिखा प्रिया-3

राजीव खन्‍ना

10 May 2009 को प्रकाशित

मुझे जीना सिखा प्रिया-3
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अरे हाँ.. पायल कहाँ है? सोचते हुए मैंने भी निगाह दौड़ाई, तभी सफेद रंग के तौलिये में लिपटी पायल बाथरूम के दरवाजे पर दिखाई दी।

वो हम सब को देखकर मुस्‍कुरा रही थी, उसके पूरे बदन पर पानी की बूंदें उसकी सुन्‍दरता में चार चांद लगा रही थी।

पायल बोली- अब तुम सब इतने व्‍यस्‍त थे कि मैं क्‍या करती मुझे बहुत गर्मी लग रही थी तो मैं नहाने चली गई।‘अरे गर्मी निकालने को तो हम हैं ना जानेमन, नहाने से क्‍या होगा।’ मैंने रोमांटिक अंदाज में कहा।‘हुह… तुम तो बहुत निष्‍ठुर हो, सारा ध्‍यान सिर्फ अपनी शशि पर ही? मेरी तरफ देखा होता तो मुझे गर्मी निकालने को नहाना क्‍यों पड़ता?’ स्‍त्रीयोचित प्राकृतिक नखरा दिखाते हुए जैसे पायल ने मुझे ताना मारा।

तब तक शशि भी उठकर बाथरूम में जाने लगी, उसको जोर की पेशाब लगी थी।

बाथरूम के दरवाजे पर पायल के बराबर से निकलते ही शशि ने पायल का तौलिया खींचा संगमरमर जैसे बदन की पानी की बूंदों से सराबोर नग्‍न पायल को मेरी तरफ ढेलती हुई बोली- जाओ अब तो गर्मी वहीं दूर होगी तुम्‍हारी।औेर खुद बाथरूम में घुस गई।

मैंने भी तेजी दिखाते हुए अपनी तरफ आती गिरती हुई पायल को अपनी बलिष्‍ठ बाहों में थाम लिया।

मैंने पहली बार गौर से देखा पायल के बूब्‍ज बहुत ही बड़े और खूबसूरत थे। हालांकि पायल का रंग बहुत ज्‍यादा गोरा नहीं था पर वो बहुत ही कामुक प्रतीत हो रही थी। उसके भूरे रंग के अरोला के बीच लगभग 1 इंच बड़े चुचुक की घुंडियाँ पूरी तरह से तनी हुई थी।

मैंने पायल को पकड़ते ही अपनी जीभ से उन घुंडियों को एक एक करके चूसना शुरू कर प्रिया।पायल शायद इस हमले के लिये तैयार नहीं थी।‘सीईईई ईईईईईई… धीईईई… रेरेरे… करो… पर… करते रहो।’ पायल ने अटकते अटकते कहा।पायल का पूरा शरीर थरथराने लगा।

मेरे हाथ पायल की कमर और बहुत ही गुदाज नितम्‍बों को सहलाने लगे, पायल भी बहुत ही कातिल अंदाज में मेरा साथ देने लगी।तभी मेरी एक उंगली फिसलकर उसके नितम्‍बों के बीच की दरार में लहराने लगी, मैंने भी शैतानी करते हुए अपनी उंगली पायल के पीछे के रास्‍ते में सरका दी।

तब तक शशि भी बाथरूम से फ्रैश होकर बाहर निकल आई, और पायल के जवाब में बोली- मैं तो 12 साल से इनकी बदमाशियाँ देख रही हूँ पर पहले मुझे इनकी बदमाशियाँ बहुत बुरी लगती थी, गुस्‍सा आता था, अब बहुत ही अच्‍छी लगने लगी हैं।

पर पायल कहाँ हार मानने वाली थी, उसने पलंग पर बैठे-बैठे ही मेरे बरमूडा को पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचते हुए कहा- अभी करती हूँ इस बदमाश का इलाज…!!पास आते ही उसने अपने एक हाथ से मेरे बरमूडा के ऊपर से ही मेरे कड़े लिंग को अपनी मुट्ठी में दबाकर मेरी तरफ घूरा जैसे मुझसे पूछ रही हो कि ‘कर दूं क्‍या आज तुम्‍हारा इलाज…?’

मैंने भी नजरों-नजरों में ही पायल को इसकी इजाजत भी दे दी।

पायल ने एक झटके से मेरा बरमूडा नीचे कर प्रिया, मेरा उत्‍तेजित लिंग रबड़ की भांति बाहर निकला और सीधा पायल के होठों से टकराया।आजशाम से जितना मैंने पायल को जाना था मैं समझ चुका था कि यह पायल की सबसे प्रिय लॉलीपॉप है।भला मैं ऐसा स्‍वर्णिम अवसर कैसे गंवा देता, मैंने भी पायल का पूरा साथ प्रिया।

पर मैं भी तो काफी समय से खुद पर काबू रखे था, मेरे तो जैसे रोंगटे खड़े हो गये, मेरे लिये और ज्‍यादा खुद पर नियंत्रण मुश्किल होने लगा तो मैंने खुद ही अपने लिंग को पायल के मुंह से बाहर खींच लिया।

इससे पहले कि पायल दोबारा मुझ पर हमला करती, मैंने उसको उठाकर सीधा लिटा प्रिया और अपनी टागें फैलाकर उसके ऊपर बैठ गया।पायल बिल्‍कुल पतली दुबली कामायिनी लग रही थी।मैंने पायल के दोनों हाथों को अपने हाथों से दबोचा ओर उसके तपते हुए अंगारे जैसे होठों पर अपने होंठ रख दिए।पायल को इस अवस्‍था में देखकर बराबर में ही लेटे आलोक को भी जोश आने लगा, उसने वहीं से थोड़ा सरक कर जगह बनाई और पायल के मोटे मोटे खरबूजों को दबाने लगा।

अब पायल पूरी तरह से हमारे हाथों में छटपटा रही थी, मुझे उसका इस तरह झटपटाना और ज्‍यादा अधिक उत्‍तेजित कर रहा था।मैंने पायल का ऊपरी हिस्‍से आलोक के हवाले करते हुए नीचे का रूख किया और उसकी दोनों टागों के बीच आकर पायल की भगोष्‍ठों को अपनी जीभ से सहलाना शुरू कर प्रिया।

मैं चाहता था कि पायल उत्‍तेजना में पागल हो जाये इसीलिये अपनी एक उंगली भी उसकी योनि में सरकाकर अन्‍दर बाहर करने लगा। पायलकामोत्‍तेजना के सागर में गोते लगाती हुई अपने नितम्‍बों को ऊपर नीचे करके बिस्‍तर पर पटकने लगी।मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा स्‍खलन कुछ ही दूर है अत: कुछ देर पायल का रस पीने के बाद मैं नीचे उतर गया, और पायल को भी पलंग से नीचे खींच लिया।

मेरे नीचे आते ही पीछे से शशि भी मुझसे लिपट गई।मैं पायल को छोड़कर तुरन्‍त शशि की तरफ मुड़ा तो शशि ने मुझे दोबारा पायल की तरफ ही घुमा प्रिया और बोली- कुछ उस बेचारी का भी ख्‍याल करो, कब से तड़प रही है।

शशि की इजाजत मिलते ही मैंने पायल को अपनी तरफ पीठ करके पलंग की तरफ घुमा प्रिया।शायद पायल समझ चुकी थी कि मैं क्‍या चाहता हूँ इसीलिये वो खुद ही आगे की तरफ पलंग पर झुक गई।

अब पायल के मोटे मोटे तरबूज जैसे चिकने नितम्‍ब बिल्‍कुल मेरे सामने थे और पायल सिर्फ अपनी दोनों टांगों पर आगे की तरफ झुकी मुद्रा में मेरा इंतजार कर रही थी।मैंने भी समय न गंवाते हुए अपने लिंग को पकड़कर पीछे से पायल की काली घनी गुफा में धकेलने का प्रयास किया पर ज्‍यादा चिकनाहट की वजह से वो अन्‍दर न जाकर नीचे सरक गया।

तभी शशि मेरी मदद करने को आगे आई, वो पायल के बराबर में नीचे बैठ गई और मेरा लिंग पकड़कर पायल की योनिमुख पर लगा प्रिया।मैंने एक जोर का झटका मारा तो मेरा शेर एक ही बार में पूरा का पूरा शिकारी के बिल में सीधा अन्‍दर तक घुसता चला गया।‘आईईईई ईईईईई… तुम सच में बहुत बदमाश हो।’ पायल चिल्‍लाई।

मैंने कुछ पल रूक कर पायल को आराम देना जरूरी समझा पर वो बोली- करो ना अब क्‍या सोचने लगे?

बस मैं तो जैसे इसी इंतजार में था, मैंने पिछले 4 घंटे का पूरा जोश एक साथ पायल पर चला प्रिया।पायल भी भूखी शेरनी की तरह मेरा शिकार करने को तैयार होकर अपने नितम्‍ब आगे पीछे हिलाकर मेरा साथ थप… थप… थप… की थाप के साथ तबला बजाने लगी।

शशि ने नीचे बैठकर पायल के दोनों उरोजों को मसलना शुरू कर प्रिया तो अब तो पायल काम सुख के चरम पर थी, कुछ ही झटकों के बाद पायल तो निहाल हो गई।

जिस अवस्‍था में खड़ी थी, उसी अवस्‍था में बिस्‍तर पर जा पड़ी।

मेरा शेर बेचारा ऐसे खड़ा था जैसे शिकार दिखाई देने का बाद हाथ से निकल गया हो।पर बिस्‍तर पर लेटते ही पायल ने पलटी ली और तुरन्‍त मेरी तरफ फिर से अपनी टांगें फैला दी।मैंने भी एक झटके में उसकी दोनों टांगों को पकड़ा अपनी तरफ खींचा ही था कि पायल ने खुद ही देर न करते हुए मेरे प्रत्‍यंचा पर चढ़े तीर को फिर से शिकार का रास्‍ता दिखाया।

इस बार मेरे धक्‍के पहले से अधिक शक्तिशाली थे, आह… आह… आह… उफ्फ्फ… उफ्फ्फ… आह… की कामुक सीत्‍कार के साथ पायल भी हर धक्‍के में मेरा सहयोग कर रही थी।

कुछ ही क्षण में मेरा सारा जोश पायल के अन्‍दर ठण्‍डा हो गया, मेरा स्‍खलन इतना जोरदार था कि कामरस पायल की योनि के बाहर तक बहता हुआ टपक रहा था।

मैं भी सांड की तरह डकारता हुआ पायल के बराबर में जा गिरा, शशि भी मेरे बराबर में आकर बैठ गई, उसने बराबर में पड़े तौलिये से मेरे शेर से चूहा हो चुके यौनांग को साफ किया।

हम चारों ने लगातार बहुत मेहनत की थी, इतने थक चुके थे कि अब हिलना भी वश में नहीं था।

शशि मेरे बराबर में आकर मुझसे लिपटकर लेटती हुई बोली- बात सिर्फ सैक्‍स की नहीं है पर आपने मुझे जीना सिखा प्रिया वरना मैं तो वही रसोई को अपनी जिन्‍दगी समझकर खुश थी। मेरे माता-पिता ने मुझे पैदा अवश्‍य किया पर जीना तो आपने ही सिखाया। कुछ दिनों पहले तक मैं हमेशा परिवार के लिये ही जीती थी। आपने ही मुझे सिखाया कि खुद के लिये भी जीना होता है। आप ही हैं जिन्होंने मुझे बताया कि मेरी भी कोई खुशी है मेरी भी कोई पहचान है मेरा भी कोई अस्‍तित्‍व है। पिछले कुछ दिनों में आपने कम से कम मुझे जिन्‍दगी का मतलब समझाया, मैं सच में आपको पाकर धन्‍य हो गई हूँ।

हालांकि मैं शशि की बात का जवाब देना चाहता था पर उस समय थकान इतनी थी कि मैंने चुपचाप शशि के बदन को अपनी बदन से चिपकाया और उसकी बाहों में सो गया।

आलोक और पायल भी तो उसी अवस्‍था में पता नहीं कब सो गये।

अभी हमारे पास एक और दिन शेष था।पर उस दिन क्‍या हुआ वो फिर कभी बताऊँगा, अभी के लिये इतना ही!

आपको मेरे जीवन की यह घटना कैसी लगी, मुझे जरूर लिखिएगा, आपके विचार ही मेरा उत्‍साहवर्धन करेंगे।किसी भी प्रकार के विचार आप मुझे support@mohakkisse.com पर मेल करें।राजीव खन्‍ना

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मुझे जीना सिखा प्रिया

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