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रिश्तों में चुदाई पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 409 बार

मुझे किस किस ने चोदा-1

आरती, मध्यप्रदेश

02 Sep 2023 को प्रकाशित

मुझे किस किस ने चोदा-1
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मेरा नाम किरण है, मैं मध्य प्रदेश के एक शहर की रहने वाली हूँ. मेरी उम्र चौबीस वर्ष की है, यह जो अपने जीवन की सच्चाई बताने जा रही हूँ वह तब की है जब मैं बीस साल की थी और बी एस सी फर्स्ट इयर की स्टूडेंट थी। मेरे बड़े भाई की ससुराल मेरे शहर से बीस किलोमीटर की दूरी पर एक गाँव में है। उस समय मेरा साइज़ कमर 28 सीना 32 और हिप्स 34 की रही होंगी. सब कहते हैं मैं हिरोइन जैसी चिकनी खूबसूरत हूँ मेरा फिगर आइडियल है।यह जो मैं लिख रही हूँ, बिल्कुल एक एक शब्द पूरा सच है यह चार साल पहले सात फरवरी की रात को मेरे साथ हुआ है।

मैं भाभी के साथ उनके मायके गई, वहां उनके घर में एक कार्यक्रम था जो पास के मंदिर में होना था, पर वहां तालाब में ही जाकर नहाना पड़ता है। मैं भाभी के साथ नहाने घुस गई और करीब 40 लेडीज जेन्ट्स थे जो नहा रहे थे।मैं तालाब में जैसे डुबकी लगा के खड़ी हुई, तभी भाभी ने कहा- किरण, तुम्हारा इस ड्रेस में सब दिख रहा है।मैंने देखा कि जो गुलाबी शर्ट और व्हाइट सलवार थी, दोनों इतने ट्रांसपेरेंट हो रहे थे कि पानी में डूबने के बाद ऐसा लग रहा था जैसे मैंने कुछ नहीं पहना था। मैंने ऊपर ब्रा नहीं पहनी थी तो मेरे बूब्स साफ़ दिख रहे थे, पूरा पेट, पीठ सब कुछ वैसा का वैसा ही दिख रहा था. नीचे ब्लू कलर की पैंटी पहनी थी तो पूरी पैंटी और पुसी के पास की फूली जगह भी साफ दिखाई दे रही थी. जांघें तो पूरी नंगी सी और जो मेरा बहुत ही निकला और उठान लिए है हिप्स और पूरी नंगी जैसी दिखने लगी. मैंने बहुत बारीक लाइन वाली पैंटी पहनी थी जिसमें सिर्फ पुसी की लाइन छुपे, तो मेरे पुसी के बाल थोड़ा बड़े थे, वो भी दिख रहे थे।

मैं बाहर निकलने में शरमा रही थी तो भाभी ने बोला- चलता है किरण, यहां कोई नहीं, सिर्फ लेडीज़ हैं और पापा लोग!जैसे ही मैं बाहर निकली और कपड़े जहां रखे थे, वहां पहुंची तो वहां कपड़े वाला बैग नहीं था।मैंने भाभी को आवाज लगा दी- भाभी कपड़ों का बैग नहीं है.भाभी ने तुरंत अपने पापा को बोली – पापा मेरे बैग में किरण के कपड़े हैं, दे दीजिए!

तभी मेरी नजर भाभी के पापा की तरफ पड़ीं तो देखा कि वो बिल्कुल अंडरवियर में नहाने की तैयारी में थे पर मुझे घूरे जा रहे थे और हाथ में उनका मोबाइल था, उनके बगल से एक और उन्हीं के रिश्तेदार या दोस्त उन्हीं के उम्र के, वो भी मोबाइल लिए मेरी तरफ किये हुए थे. मुझे लगा जैसे मेरी वीडियो बना रहे हैं या फोटो खींच रहे हैं।तभी भाभी के पापा ने अपने दोस्त को बोला- राजेंद्र देख, किरण की हेल्प कर, क्या चाहिए उसे।

वो दौड़ कर आये और बोले- किरण, मैं राजेंद्र मिश्रा, मैं तुम्हारी भाभी के पापा का भाई भी हूँ दोस्त भी तुम बुरा मत मानना, एक बात बोलूं तुम बहुत खूबसूरत हो! मैंने आज तक इतनी सुन्दर लड़की नहीं देखी है।मैंने कहा- थैंक्स अंकल!और थोड़ा मुस्कुरा दी.तो बोले- बेटी की उम्र की हो, पर कुछ सच बोल दूं बुरा नहीं मानना! न किसी से बोलना!

मैंने बिना सोचे समझे बोल दी- प्रामिस, नहीं बोलूंगी!वो बोले- समझदार हो!और मेरे एकदम करीब आकर बोले- किरण तुम कयामत लग रही हो! मैंने हर तरह की नंगी वाली फिल्म देखी पर किसी का हुस्न तुम्हारे पैरों की धूल बराबर नहीं… बिल्कुल मेनका हो!

मैं भी लड़की हूँ, वैसी ही मेरी आदत है लड़कियों वाली… वो अंकल लगभग पचास साल के थे पर उनकी तारीफ भी मुझे अच्छी लग रही थी। उनकी तारीफ करने का अंदाज और आवाज बहुत आकर्षक रहा, मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगा.

तभी भाभी के पापा बोले- राजेंद्र, बैग मैंने गाड़ी में रख प्रिया है लेकिन चाभी लेकर जा, वहीं कपड़े दे देना।वो अंकल बोले- चलो किरण, वहीं गाड़ी में बदल लेना, यहां बदलोगी तो हम जैसे मर्द बेमौत मर जायेंगे।मैं बोली – आप भी अंकल… इतनी भी अच्छी नहीं मैं!मैं अब उनसे खुलने लगी, बोली – चलिए जहां कपड़े हैं।अंकल बोले- वहाँ पर तालाब के जहां 8-10 गाड़ियां खड़ी हैं।

मैं चल दी, अंकल पीछे पीछे मेरे!अंकल बोले- किरण, मुझे प्लीज दोस्त मानो!मैंने ओके कह प्रिया.अंकल बोले- सच?मैंने कहा- जी!“थैंक गॉड, किरण मेरे दोस्त, मुझे सम्हालना, मेरी हालत बहुत खराब हो रही है!”मैं बोली – क्यूं?अंकल बोले- किरण, तुम्हारी चलने की अदा! कोई माडल ऐसे नहीं चल सकती… गुस्सा आए तो मार लेना पर किसी से कहना नहीं, अब रहा नहीं जा रहा, खुल के बोलूंगा गलती भी करूंगा।मैं बोली – ऐसा क्या कुछ नहीं करना अंकल बोले लीजिए भले जो मन हो!अंकल बोले- किरण, कुछ भी खुल के बोल लूं? वादा करो कि मारोगी नहीं मुझे?मैंने कहा- प्रामिस!अंकल बोले- किरण, आपकी गांड लगता है अभी बहुत चाटूं और उसमें पूरा लंड डाल दूं!

मैं एकदम शॉक्ड हो गई कि अब मुझे बहुत बुरा लगा, मैं सच में गालियां देने वाली थी अंकल को और घूर के देखा, तभी उधर 5-6 लोग बोले- यार क्या माल है, देखो देखो!

मैंने उनकी तरफ देखा, वो सब मेरी ओर देखने लगे और बोले- यार, इस अंकल की किस्मत देखो, क्या बीवी पायी है। ये तो फुल नंगी है, ये कपड़े भी क्यों पहने है, उतार दे, सब तो दिख रहा है।

मुझे अब और बुरा लगा, दो चार लोग तो हमारे तरफ आते जा रहे थे और बोले- अंकल, अपनी बीवी को अभी चोद लेना, नहीं ये किसी से चुदवा लेगी. क्या मस्त फूली चूत है और बाल भी नहीं बनाये नीचे के… पर सबसे मस्त तो गांड है. अंकल की क्या किस्मत है… लंगूर के हाथ में हूर! अरे बूब्स तो इसके बम हैं।तभी अंकल घूर के बोले- जुबां काट दूंगा सबकी!वो लोग भग लिए।

पर उनके एक एक शब्द मेरे कानों में गूंजने लगे और वहीं सोचने लगी, मेरे अंदर नीचे सुरसुरी होने लगी और पुसी में गीलापन महसूस होने लगा मन कितना पागल है। एकदम सोचने लगी कि अंकल ने जैसे अपना लंड पीछे से डाल प्रिया मेरी गांड में!तभी हम दोनों गाड़ियों के पास आ गए, सभी गाड़ियों के बीच में एक सफ़ारी थी, उसी का गेट अंकल ने खोला, मुझे बोले- किरण, देख लो अपना बैग!मैं गाड़ी में चढ़ी कि अंकल बोले- किरण, कयामत हो यार क्या करूं!और आहें भरने लगे.

उस गाड़ी में बहुत सा सामान और बैग रखे थे, मुझे मेरा बैग नहीं मिला तो मैं बोली – अंकल, हेल्प कर दो, गाड़ी के अंदर आ जाओ और बैग ढूंढ दो!अंकल बोले- किरण, ढूंढने की मजदूरी लूंगा, अभी एडवांस, बस छोटी सी!“अंकल ढूंढो ना… सब आ जायेंगे!”अंकल बोले- प्लीज, छोटी सी प्लीज!

मैंने ओ के कहा तो अंकल सीधे चढ़े गाड़ी में और अंदर से गेट बंद कर लॉक कर प्रिया और सीधे मेरी लैगी पैंटी सहित झटके से खींच दी घुटनों तक और मेरी गांड में मुंह रख कर चाटने लगे.ये सब अंकल ने इतना जल्दी अचानक किया कि मैं सम्हाल नहीं पाई खुद को, मैंने अंकल को बोला- मुझे छोड़ दो प्लीज़, मुझे जाने दो, मैं आपकी बेटी की उम्र की हूँ, प्लीज मुझे जाने दो! मैं चिल्ला दूंगी, मुझे छोड़ दो!मैं घबरा गई।

अंकल बोले- सुना नहीं कि वो लोग रास्ते में क्या बोले कि क्या मस्त बीवी पाई है, जाते ही चोद देना, बहुत चुदासी है तुम्हारी बीवी. किरण प्लीज प्लीज! और मैंने तुमसे पूछा था भी कि मजदूरी लूंगा एडवांस में… तुमने ओके किया, बस थोड़ी सी सेर सिर्फ पांच मिनट किरण!मैं बोली – कोई देख लेगा अंकल तो मैं मुंह दिखाने लायक नहीं बचूंगी!अंकल बोले- किरण मेरी गारंटी, बस पांच मिनट प्लीज!मैंने कहा- सिर्फ पांच मिनट!

और अंकल ने सीधे मुझे बीच वाली सीट पर लिटा प्रिया और अपनी लुँगी और अंडरवियर उतार प्रिया और मेरे ऊपर चढ़ गये मेरे गर्म जलते होंठों पे अपने होंठ रख दिए और उनका लंड मेरी चूत में रगड़ खा रहा था मैं उनके लंड की छुअन से पागल हो रही थी।अंकल ने अब मेरे गीले शर्ट को ऊपर खिसका प्रिया और मेरी नाभि को चूम कर नाभि के अंदर अपनी जीभ डालने लगे मेरी हिचकी निकल गई.और अंकल मेरे शर्ट के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाने लगे दोनों हाथों से!“ऊं उहहहह उंहहह…” मैं करने लगी.अंकल बोले- किरण, मैं अपनी बीवी बोलूं तुम्हें?मैं बोली – 5 मिनट हैं आपके पास जो मन हो कहिए करिए पर जल्दी! कोई आ गया तो मैं बर्बाद हो जाऊंगी!

अंकल बोले- ओके मेरी सेक्सी किरण, तुम मेरी बीवी हो!और तुरंत मेरी टांगों को फैलाया, मुंह को मेरी चूत में रख कर पहले चूमा और फिर चाटने लगे.अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, मैं चीखने लगी और उनके बालों को पकड़ कर और दबा रही थी. उंहहह अहहह वोहहह की आवाज निकालने लगी.

तभी अंकल ने पूरी जीभ अंदर चूत में घुसा दी और अब थोड़ा ऊपर उठ कर नीचे मेरी गांड को चाटने लगे. इधर मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैं अपने हाथ से अपने बूब्ज़ दबाने लगी.“अंकल मेरे राजा, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा… आपने क्या कर प्रिया? मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा, कुछ करो!”

तभी अंकल ने अपनी पूरी जीभ मेरी गांड में डाल दी और जोर जोर से गांड को चाटने लगे. मेरे कूल्हों पर चट-चट मारने लगे और चूत में उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगे. मुझे पता ही नहीं चला कब गेट खुला कब भाभी के पापा गाड़ी में अंदर आ गये.मैंने जैसे अपना चेहरा स्टेरिंग की तरफ किया तो देखा कि भाभी के पापा गाड़ी में आगे वाली सीट पर बैठे एक हाथ से अपना लंड रगड़ रहे थे और एक हाथ में मोबाइल से मेरा वीडियो बना रहे थे.यह देख कर मैं डर गयी, घबरा गयी और बोली – मुझे छोड़ दो, प्लीज़ जाने दो!

तभी भाभी के पापा बोले- किरण, चिंता मत करो, डरो नहीं, कोई दिक्कत नहीं होगी! मेरी जिम्मेदारी… भरोसा रखो, किसी को पता नहीं चलेगा, तुम एंजॉय करो, मेरा वादा है, भरोसा रखो. और यह उम्र इसी के लिए होती है. प्लीज डरो नहीं!और यह कहते हुए वे मेरे बूब्स को दबाने लगे और मेरे होठों को चूमने लगे.

उधर मुझे राजेंद्र अंकल ने जोर से मेरी चूत में उंगली अंदर बाहर करने लगे तो मैं सब भूल गई, मैं भी भाभी के पापा के होंठों को चूसने लगी.

तभी भाभी के पापा उठ कर एकदम मेरे मुंह के ऊपर टांग रख कर अपना लौड़ा मेरे मुंह में रख कर बोले- किरण, मेरा लंड चूसो!मैं बोली – अंकल, मुझे अच्छा नहीं लगता!अंकल बोले- किरण, इसमें जादू है, इसे चूस के देखो, लड़कियां मरती है इसके लिए!मुझे उनके लंड की खुशबू बहुत मस्त लगी, मैंने मुंह खोल प्रिया और चूसने लगी.“आहह हह …!” सच में बहुत अच्छा लगा मुझे, मैं जोश में लंड पूरा चूस रही थी.तभी भाभी के पापा बोले- यार, बहुत गजब माल हो तुम किरण, जब तुम्हारे घर अपनी बेटी का रिश्ता लेकर गया था, तभी तुम पसंद आ रही थी और सोच लिया था कि अगर बेटी की शादी हो गई तो एक बार तुम्हें चोदूंगा जरूर!और मुंह को लंड से चोदने लगे और बोले- किरण, शर्ट उतारो, तुम्हारे बूब्स चूसने हैं.मैं बोली- अंकल, कोई आ गया तो मैं मुंह दिखाने लायक नहीं बचूंगी!तब भाभी के पापा बोले- अरे, तुम ये गीला शर्ट पहने हो, इसे चेंज करना ही है ना!मैंने सोचा कि ये ठीक बोल रहे हैं, मैंने ओ के बोला तो भाभी के पापा ने मेरा शर्ट ऊपर खींच के उतार प्रिया.

जैसे ही मेरे बूब्स देखे, दोनों अंकल ने एक एक बूब जोर से पकड़ लिया और बोले- किरण, तुम्हारे ये मस्त दूध हैं यार कितनों से दबवा चुकी हो?और मेरे दोनों बूब्स को पूरी ताकत से दबा दिये.मैं चिल्ला उठी- ऊईईईई आहहह…मेरी चीख सुन कर अंकल और जोश में आकर जोर जोर से दोनों चूचे दबाने लगे और फिर अपने मुंह में भर लिया मेरे एक एक बूब को दोनों ने और बदल बदल कर जैसे चूसना शुरू किया, मैं पागल हो उठी ‘ओहहह आहहह…’ करने लगी, मेरे मुंह में भाभी के पापा का लंड था जिसे मैं चूस रही थी और वो मेरे बूब्स को मसलने और चूसने में लगे थे.

राजेंद्र अंकल मेरे ऊपर चढ़े हुए थे और बूब्स को चूसने में मस्त थे नीचे उनका लंड मेरी चूत को टच कर रहा था तो मुझसे अब सहन नहीं हो पा रहा था.तभी अचानक बिना बताए भाभी के पापा उठे, अपना तौलिया उठाया और ड्राइवर सीट वाले गेट से बाहर निकल गये।मैं बोली- क्या हुआ?तो राजेंद्र अंकल बोले- पता नहीं यार, चलो मैं तो हूँ मेरी किरण डार्लिंग!और वो बूब्स को चूसने लगे.

मेरी सेक्स स्टोरी हिंदी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.comकहानी का अगला भाग :मुझे किस किस ने चोदा-2

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मुझे किस किस ने चोदा

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