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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 908 बार

Mummy aur mere teacher ki sex kahani – Part 3

Manish69

09 Feb 2020 को प्रकाशित

Mummy aur mere teacher ki sex kahani – Part 3
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नमस्कार दोस्तो, पहले 2 पार्ट जरूर पढिये ताकि इस भाग में आपको पता चले. कि कैसे सर ने मेरे मम्मी को पटाकर उनके रिश्ते को आगे बढ़ाया और मम्मी के साथ नाजायज संबंध बनाये.

तो दोस्तो जैसे आपने पार्ट 2 में देखा कि मम्मी कैसे सजधज कर सर के सामने आयी थी. कि सर मम्मी को देखते ही रह गये थे वो मम्मी के हुस्न में इतने खो गये थे. कि उनको मम्मी की आवाज से होश आया तो पढिये आगे क्या हुआ.

मम्मी : राजकुमारजी..

सर : (अचानक मम्मी के मुंह से उनका नाम सुनकर सर चौक गये थे) जी..जी कहिये.

मम्मी : (मुस्कुराते हुये) चाय लीजिये खास आपके लिये बनाई है.

फिर सर ने चाय का कप लिया और मम्मी ने भी एक कप लिया और वही सर के सामने सोफे पर बैठ गयी. दोनों एक दूसरे को देखकर स्माइल करके चाय का मजा ले रहे थे. कोई बात नही कर रहा था शायद दोनों उसी मोमेंट में खो गये थे. शायद दोनों एकदूसरे को पसंद करने लग गये थे.

(मैं सब चुपचाप देख रहा था क्योंकि मैं सर से भी डरता था और मम्मी से भी.)

तभी सर बोले : जी आपको मेरा नाम कैसे पता ?

मम्मी : जी .. वो मनीष ने बताया.

सर : (मेरी तरफ देखते हुये)

अच्छा.. जी.

मेरा नाम तो पता चल गया आपको अब आप आपका भी नाम बता दीजिये ?

मम्मी : (थोड़ा शरमाते हुये) जी मेरा नाम रजनी.

सर : जी बहोत सुंदर नाम है आपका बिल्कुल आप की रूप की तरह.

ये सुनकर मम्मी शरमाकर लाल हुयी. (क्योंकि इतनी तारीफ तो कभी पापा ने भी मम्मी की नही की होगी )

मुझे देखने लगी पर मैं नीचे नोटबुक में लिख रहा था पर मेरा ध्यान इनकी बातो पर भी था. और फिर सर को देखकर मुस्करायी.

फिर दोनों की चाय होने के बाद मम्मी दोनों कप लेकर किचन की तरफ जाने लगी, तो सर को मम्मी के नंगे पीठ के भी दर्शन हो गये. क्योंकि मम्मी ने बैकलेस ब्लाउज पहना था और पीछे पल्लू भी नही लिया था.

शायद मम्मी ने जानबूझकर पल्लू नही लिया था, ताकि किचन की तरफ जाते वक्त मम्मी की पीठ सर को दिखे. पीछे मुड़कर देखकर मम्मीने सर को एक नौटी स्माइल दी.

सर की हालत खराब होते जा रही थी सर जैसे तैसे लंड को दबाकर शांत कर रहे थे. सर ये देखकर बहोत खुश थे क्योंकि दो दिनों में ही सर ने मम्मी को चोदने की मोहीम में अच्छी प्रगती की थी.

फिर ट्यूशन खत्म होने के बाद सर जा रहे थे कि उन्होंने मम्मी को उनके नाम से आवाज लगायी, तो मम्मी दौड़ी चली आयी. फिर सर ने मम्मी को बाय कहा, मम्मी ने भी मुस्कराकर बाय किया और सर गेट से बाहर गये और बाइक पर बैठने के बाद फिर हमारी घर की ओर देख रहे थे,

मम्मी आज भी सर को देख रही थी और मम्मी ने फिर से स्माइल करते हुये हात हिलाकर सर को बाय किया, और सर ने भी जवाब में बाय किया. =

सर के जाने के तुरंत बाद मम्मी ने वो ट्रांसपेरेंट सारी और बैकलेस स्लीवलेस बलाउज निकाला और गाउन पहन लिया. उस दिन मम्मी बहोत खुश थी. मैं तो ये देखकर हैरान हो रहा था. =

अब मुझे समझ आने लगा कि क्यों सर मुझे पर्सनल ट्यूशन देने के लिये इतने उत्सुक थे. सर का तो ठीक है सर के बारे में मैंने सुना था की सर ठरकी है. पर मुझे ज्यादा हैरानी मम्मी के बर्ताव से होने लगी कि कैसे एक सीधी साधी औरत दो दिन में सर से इतना घुलमिल गयी थी. शायद सर की मजबूत पर्सनालिटी और रंगबाज मिजाज मम्मी को पसंद आने लग गया था.

अगले दिन फिर सर आने के टाइम मम्मी तैयार होकर बैठी थी. मम्मी सर की राह देख रही थी बार बार खिड़की से बाहर देख रही थी. बाइक की आवाज सुनते ही उत्तसाहित होकर देख रही थी कही सर तो नही आये पर उसदिन सर आये ही नही.

फिर मम्मी ने मुझे पूछा ” मनीष आज राजकुमारजी नही आयेंगे लगता है ! स्कूल में आये थे क्या वो ?” मम्मी अब मुझसे भी सर का नाम लेकर ही बात कर रही थी. मैं तो दंग रह गया मम्मी सर का ऐसा नाम लेने लगी कि सर उनके कोई अपने हो.

मैं : हां मम्मी स्कूल में तो आये थे सर.

मम्मी : (थोड़ा नाराज होते हुये) तो ट्यूशन देने क्यों नही आये ? क्यों नही आये होंगे ?

आज मम्मी कल जितनी खुश थी उसके बिल्कुल विपरीत नाराज थी. शायद वो सर के ना आने से दुखी हुयी थी.

अगले दिन स्कूल से आने के बाद मम्मी ने फिर मुझसे पूछा ” आये थे क्या राजकुमारजी स्कूल में ? ”

मैंने कहाँ : हां मम्मी आये थे.

मम्मी : तो उनसे तुमने पूछा नही की कल क्यों नही आये थे ?

मैं : नही मम्मी वो स्कूल में ट्यूशन के बारे में बात करने से सर ने मना किया है ना.

मम्मी : हां अच्छा ठीक है जा फ्रेश होकर खाना खा ले.

मम्मी को लगा आज तो सर आ ही जायेंगे.

इसलिये मम्मी उसदिन भी तैयार हुयी थी पर सर उसदिन भी नही आये. मम्मी आज तो बहोत गुस्सा हो रही थी ऐसे कैसे नही आ रहे. नही आ रहे तो बताना चाहिये ना मम्मी खुद ही गुस्से से बात कर रही थी. मैं चुपचाप सुन रहा था. शायद मम्मी को अब सर को देखे बिना रहा ही नही जा रहा था.

अगले दिन स्कूल से आने के बाद मम्मी ने मुझे नही पूछा की सर आये थे कि नही, शायद मम्मी बहोत नाराज हुयी थी. इसलिये आज मम्मी तैयार भी नही हुयी. मुझे भी लगा कि सर नही आयेंगे इसलिए मैं भी खेल रहा था.

तभी अचानक डोरबेल बजी तो मम्मी ने मुझसे कहा कि : बेटा कौन है देख जरा ?

मैंने डोर खोलकर देखा तो डोर पर सर खड़े थे फिर सर अंदर आये मैंने जोर से मम्मी को आवाज लगाया “मम्मी …मम्मी सर आये है.”

मुझे लगा मम्मी दौड़कर आयेगी शायद सर को भी ऐसा ही लगा था लेकिन मम्मी नही आयी. फिर सर ने मुझे किताब लाने को कहा मैं किताब लेकर आया और सर मुझे पढ़ाने लगे. सर को लगा शायद थोड़ी देर बाद मम्मी आयेगी पर मम्मी आयी ही नही. सर को भनक लग गयी थी कि मम्मी नाराज हुयी है.

तो सर ने मुझसे कहा : बेटा क्या मैं बाथरूम जा सकता हूं ?

मैंने कहा : हां सर क्यों नहीं चलिये मैं आपको दिखाता हूं बाथरुम कहां है.

सर ने कहा : नही बेटा तुम ये लिखकर खत्म करो मैं अभी जाकर आता हूं.

और सर अंदर जाने लगे फिर सर ने जानबूझकर खासी की ताकि मम्मी को पता चले कि सर हॉल से अंदर आये है पर मम्मी बाहर नहीं आयी. मम्मी किचन मैं ही थी.

सर ने किचन में झांककर देखा और मुस्कराये और मम्मी ने सर को देखकर उनकी तरफ पीठ की अब सर समझ चुके थे कि मम्मी वाकहि मैं बहोत नाराज है. (मुझे पता था कि सर जरूर मम्मी से बात करने गये इसलिये मैं भी चुपके से अंदर आकर दोनोंकी बात सुनने लगा.)

फिर सर अंदर गये और मम्मी को कहने लगे “क्या हुआ रजनी जी ? नाराज है क्या आप मुझसे ?” मम्मी ने कुछ जवाब नही दिया और सर की ओर भी नही देखा.

फिर सर कहने लगे : जी मुझे पता है आप नाराज है मुझसे. मुझे आपको बताना चाहिये था. कि मैं दो दिन नही आनेवाला पर क्या करू स्कूल में ट्यूशन की बात कैसे करता मनिष से बाकी स्टूडेंट को पता चल जाता इसलिये मैंने मनिष को भी नही बताया. जी बहोत जरूरी काम आया था इसलिये नही आ पाया अब माफ भी कीजिये और छोड़ दीजिये नाराजगी. आपसे ज्यादा तो मैं नाराज हूं खुदपर की कैसे मैंने आपकी सुंदरता को देखने के और आपसे मिलने के दो मौके गवा दिये. मेरे ना आने में मेरा ही ज्यादा घाटा है.

सर की मुह से अपनी तारीफ सुनकर मम्मी तो खुश हो रही थी. लड़कियों को कैसे मनाना है सर को अच्छे से आता था लगता है सर इसमें एक्सपर्ट थे.

तुरन्त ही मम्मी मान गयी और सर की तरफ घूमकर मुह फुलाकर सर से कहा. “जी ठीक है कोई बात नही” (अब मम्मी भी नखरे कर रही थी.)

सर : सच मे आप नाराज नही है ना.

मम्मी : जी नही.

सर : तो स्माइल क्यों नही कर रही.आज मैं हैंडसम नही दिख रहा क्या ? लगता है मैं लाल कलर में मैं अच्छा नही लगता! है ना ?

मम्मी सर के बातो से हस पड़ी और सर भी मुस्करा दिये.

मम्मी : नही जी. आपपर तो कोई भी कलर जचता है आप स्मार्ट लग रहे है. जाइये चाय लाती हूं कही मनीष ना आ जाये आपको ढूंढते हुये की सर इतनी देर क्या कर रहे है अंदर !!

फिर सर मुस्कराते हुये हॉल में आये और मम्मी चाय लेकर आयी और दोनों चाय पिने लगे. फिर से दोनों में सब अच्छा चलने लगा.

फिर जाते वक्त सर ने मम्मी से कहा : रजनी जी आपको ऐतराज ना हो तो आप मुझे आपका नंबर दीजिये ताकि मैं आपको बता सकू की मैं आनेवाला हूं कि नही.

मम्मी : जी क्यों नही लीजिये 98******

फिर मम्मी ने सर को नंबर दिया और सर चले गये.

मम्मी ने स्माइल करते हुये सर को बाय किया. आज मम्मी दो दिन बाद खुश नजर आ रही थी. इसबीच पापा को इसबारे में कुछ भी पता नही था क्योंकि पापा तो रातको आ जाते खाना खाते और सो जाते.

शायद ही मम्मी के साथ पापा ने हालही में कुछ प्यार जताया हो या सेक्स किया हो. इसलिये शायद मम्मी की प्यासी जवानी मम्मी को सर की ओर खींच रही थी.

अगले पार्ट में पढिये कैसे सर ने मम्मी के साथ फोनेपर क्या क्या बात की और कैसे मम्मी को प्रपोज किया. फिर कैसे सरने मम्मी के साथ उनकी पहली रात गुजारी.

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Mummy aur mere teacher ki sex kahani

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