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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 502 बार

पड़ोसी ने तोड़ी मेरी दीदी की सील-22(Padosi Ne Todi Meri Didi Ki Seal-22)

moodchangerboy

29 Jan 2014 को प्रकाशित

पड़ोसी ने तोड़ी मेरी दीदी की सील-22(Padosi Ne Todi Meri Didi Ki Seal-22)
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दीदी का गुस्सा देख कर मैं भी हैरान था। वो थोड़ी-थोड़ी मम्मी पर भी बिफर रही थी, जैसे उनके भीतर का सारा आक्रोश अब बाहर निकलना चाहता हो। बातों-बातों में हम कब चलते-चलते सलीम के गोदाम तक पहुंच गए, पता ही नहीं चला। मम्मी हमारे सामने ही गोदाम के भीतर चली गई।

उसे अंदर जाते देख दीदी झल्लाते हुए बोली: देख रहा है अमित? कितनी उतावली है अंदर घुसने को। उसे भी मेरा ही बॉयफ्रेंड मिला था अपनी आग बुझाने के लिए।

उनका चेहरा गुस्से से तमतमा उठा था। होंठ कांप रहे थे और आँखों से जैसे अंगारे बरस रहे हों। मम्मी को कोसते हुए उनके मुँह से अब सीधी गालियाँ निकलने लगी थी।

फिर अचानक, वो मेरा हाथ पकड़ कर एक कदम पीछे हटते हुए बोली: भाई, आज मैं मम्मी का सारा पर्दाफाश कर के रहूंगी।

मैंने थोड़ी हिम्मत जुटा कर उन्हें शांत करते हुए कहा: एक बार रुक कर देख लेते हैं दीदी। क्या पता मम्मी सलीम के पास किसी जरूरी काम से गई हो और दस मिनट में ही वापस आ जाए।

दीदी (गुस्से में): अमित, मम्मी किसी काम से नहीं गई है। वो तो बस सलीम का लंड पकड़ कर अपनी चूत की आग बुझाने गई है।

मैं उसकी बात सुन कर थोड़ा असहज हो गया। अंदर ही अंदर मैं मम्मी को बचाने की कोशिश कर रहा था। पता नहीं दीदी मेरी बात मानेगी भी या नहीं, फिर भी मैंने धीरे से कहा: दीदी एक बार इंतज़ार कर लेते हैं? क्या पता वाकई किसी काम से गई हो।

दीदी ने मेरी आँखों में झाँका, शायद मेरी मासूमियत को पढ़ लिया। थोड़ी नर्मी से बोली: ठीक है भाई। तुझे लगता है कि वो सच में किसी ज़रूरी काम से गई है तो मैं 10 मिनट रुक जाती हूँ बाहर। लेकिन अगर वो इतने में बाहर नहीं आई, तो तुझे मेरे साथ अंदर चलना होगा।

मैं: ठीक है दीदी पर एक बात मानो, झगड़ा मत करना। अगर कुछ देखा भी, तो पहले सोच-समझ कर बात करना। वरना लोग कुछ और ही सोचेंगे हमारे बारे में। और हमारी बदनामी होगी।

हम दोनों वहीं चुप-चाप इंतज़ार करने लगे।10 मिनट हुए… फिर 15… फिर 20। लेकिन मम्मी बाहर नहीं आई। अब तो मेरे मन में भी संदेह गहराने लगा। मैंने सोचा, आज तो मम्मी पकड़ी गई। लगता है वो वाकई इतने दिन से सलीम के साथ चोरी-छुपे चुदवा रही थी। अब सच्चाई सामने आ जाएगी।

दीदी ने मेरी ओर देखा और सख़्त लहज़े में कहा: भाई, देख लिया ना तूने? अब तो यकीन हुआ? चल, अब जो काम करने वो अंदर गई है, उसे हम खुद सामने से देख लेते हैं।

दीदी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे सलीम के गोदाम की ओर खींच ले गई। फिर वह धीरे से गेट का कुंडा पकड़ कर हल्के हाथों से दरवाज़ा खोलने लगी। जैसे ही हम अंदर घुसे, भीतर से सिसकारियों की धीमी लेकिन साफ़ आवाज़ें आने लगी। ये आवाज़ें सुनते ही दीदी ने चौंक कर मेरी ओर देखा। मैं मन ही मन सोच रहा था, अब तो सब सामने आ जाएगा। मम्मी सलीम के साथ रंगे हाथों पकड़ी जाएगी।

मैंने दीदी को ज़्यादा आगे जाने से रोका और उसे लेकर वापस उस जगह आ गया जहाँ से हम अंदर का नज़ारा साफ़-साफ़ देख सकते थे, बिना खुद नज़र आए।

वहां पहुंच कर दीदी बोली: रुक, मैं देखती हूं।

वो झांकते हुए अंदर देखने लगी। उसकी आँखें गुस्से से भड़क उठी। चेहरा सुर्ख हो गया था। वो बार-बार अपने हाथ की मुट्ठी कस रही थी, फिर ढीली कर रही थी। जैसे खुद को काबू में रखने की कोशिश कर रही हो।

मुझे तो अब साफ़ अंदाज़ा था कि अंदर क्या हो रहा था। फिर भी मैंने धीमी आवाज़ में कहा: दीदी क्या हो रहा है अंदर?

दीदी गुस्से से तमतमाए चेहरे के साथ मेरी तरफ मुड़ी और बोली: भाई, जो मैंने सोचा था, वही हो रहा है। देख उस रोशनी को… कैसे अपनी प्यास बुझाने में लगी है।

इतना कह कर दीदी पीछे हटी ताकि मैं भी अंदर देख सकूं। मैंने झांक कर देखा अंदर का नज़ारा साफ़ था। मम्मी सलीम के नीचे लेटी हुई थी, अपनी दोनों टांगे फैलाए। उसके ऊपर सलीम झुका हुआ था, उसके चेहरे के क़रीब, और दोनों के बीच जबरदस्त चुदाई चल रही थी।

सलीम, मम्मी की चूत में अपना लंड घुसा रहा था, और दोनों के चेहरे पर चुदाई और साज़िश की झलक साफ़ दिख रही थी। मैं कुछ पल के लिए सुन्न हो गया। जो शक था, वो अब हक़ीक़त बन चुका था।

मम्मी सलीम को बोल रही थी: आअआअ आ आह सलीम और चोदो मुझे, फाड़ दो। मेरी चूत और गांड आपके बिना एक पल भी नहीं रह पाती, उफ्फ आअआअ सीईईई उफ्फफफ।

मम्मी की कामुक आवाजें अब और भी साफ़ सुनाई दे रही थी। दीदी उन्हें सुन कर और ज़्यादा बेकाबू हो रही थी। चेहरा गुस्से से लाल, आँखों में आग जैसी चमक। मैं सामने देख रहा था। मम्मी और सलीम अपनी ही चुदाई में मग्न थे। तभी दीदी मेरी पीठ के ठीक पीछे आकर खड़ी हो गई। वो इतनी क़रीब थी कि मैं उसकी साँसों की गर्मी अपनी गर्दन पर साफ़ महसूस कर पा रहा था। उसकी चूचियां हल्के से मेरी पीठ से टकराई वो भी शायद बेसाख्ता। उसकी गर्म साँसे मेरे कान के पास महसूस होते ही मैं एक पल को सिहर गया।

फिर दीदी ने अपने होंठ मेरे कान के क़रीब लाते हुए धीरे से कहा: अब तो खुद देख लिया ना, भाई मम्मी की करतूत? साली रंडी कैसे अपनी टाँगें फैला कर सलीम का लंड ले रही है। मेरे बॉयफ्रेंड का लंड लेना उसे भारी पड़ेगा। अब उसकी इस आग को मैं घर जाकर अपने तरीके से शांत करूंगी।

फिर दीदी ने मुझे पीछे हटाया और खुद आगे बढ़ कर अपना फोन निकाल लिया। वह चुप-चाप मम्मी और सलीम की चुदाई को रिकॉर्ड करने लगी। करीब दस मिनट तक वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद दीदी ने फोन वापस रखा, फिर मेरा हाथ पकड़ कर घर की ओर चल पड़ी।

घर पहुँचने के बाद दीदी सीधे आँगन में जाकर बैठ गई। उनका गुस्सा अब भी कम नहीं हुआ था। मैं मन ही मन सोच रहा था — इतना सब कुछ देखने के बाद अब दीदी क्या करेगी?

समय धीरे-धीरे बीतता जा रहा था। दीदी लगातार गेट की ओर नज़रें गड़ाए बैठी थी। मानो बस इंतज़ार कर रही हों कि मम्मी कब घर लौटे। मम्मी आज रोज़ की तुलना में ज़्यादा देर लगा रही थी। दीदी के माथे पर गुस्से के साथ पसीना साफ़ झलक रहा था। उसे देख कर मैं उसके लिए एक गिलास पानी लेने चला गया।

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मैंने कहा: दीदी पानी ले आय़ा हूँ, पी लो।

दीदी (गुस्से में): नहीं अमित, मुझे अभी नहीं पीना। मैं आज इस रंडी को सबक सिखा कर ही दम लूंगी।

थोड़ी ही देर बाद, जैसे ही घर का गेट खुला-मेरी सांसें थम-सी गई। जो होने वाला था, उसकी चिंता दिल में घर कर गई।

मैं डरते हुए हल्की आवाज़ में दीदी से बोला: दीदी, अभी कुछ मत कहना मम्मी से।

तभी मम्मी अंदर आई। उसकी आवाज़ थकी हुई और ढीली थी: अमित, मेरा हैंडबैग ज़रा कमरे में रख देना।

मैं उसके पास गया और एक नज़र उसे गौर से देखा। सुबह जो उसके बाल सिल्की और सधे हुए थे, अब वो उलझे हुए और बिखरे दिख रहे थे। चेहरे का रंग उतरा हुआ था। थकावट तो थी ही, लेकिन कहीं ना कहीं हल्की-सी संतुष्टि भी झलक रही थी। उसकी कलाईयों में जो सुबह कई चूड़ियाँ थी, अब कुछ गायब थी। जैसे कुछ टूट गया हो या उतार दिया गया हो। मैंने कुछ नहीं कहा, बस चुप-चाप उसका बैग उठाया और कमरे में रख दिया।

दीदी ने नरम आवाज़ में, पर गहरी संयम के साथ कहा: अमित, मम्मी काफ़ी थकी हुई लग रही हैं। उनके लिए एक गिलास पानी तो ले आओ। (फिर मम्मी की ओर देखती हुई बोली) है ना मम्मी? आज भी लगता है आपके ऑफिस में बहुत काम था। आप इतनी देर से आई। क्या आप थक गई हैं?

मम्मी ने दीदी की ओर बिना देखे जवाब दिया: हाँ बेटा, बहुत थक गई हूँ। अभी फ्रेश होकर आती हूँ, फिर बात करते हैं।

दीदी ने दाँत पीसते हुए मुस्कराहट में जवाब दिया: हाँ-हाँ, आओ ज़रूर।

कुछ देर बाद मम्मी बाथरूम से नहा कर बाहर आई। उन्होंने हल्का-सा मैक्सी पहन रखा था और आकर आँगन में, मंजू के ठीक सामने बैठ गई। मैंने देखा नहाने के बाद उनका चेहरा और भी खिला हुआ लग रहा था। चेहरे पर एक सुकून और हल्की चमक थी। लेकिन मेरे मन में साफ़ था कि कुछ ही देर में यह मुस्कान ग़ायब होने वाली है। जो होने वाला था, वह उनके चेहरे की शांति को पलट देने वाला था।

दीदी धीरे से मम्मी के पास आकर बैठ गई और मुस्कराते हुए बोली: तो बताओ मम्मी, आज आपका दिन कैसा रहा?

मम्मी (थोड़ी हैरान होकर): बेटा वैसे दिन तो काफी अच्छा रहा। पर आज अचानक तू ये सब क्यों पूछ रही है?

दीदी ने चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान लाते हुए कहा: बस यूं ही, मम्मी। आजकल आप ऑफिस से बहुत थकी-थकी सी लौटती हो। लेकिन अजीब बात ये है कि आते ही बड़ी खुश भी लगती हो। पर आप मुझसे कुछ भी नहीं कहती। क्या चल रहा है आपके ऑफिस में?

मम्मी (थोड़ी हँस कर): अरे ऐसा कुछ नहीं, बस काम थोड़ा ज़्यादा हो गया है इन दिनों, तो थक जाती हूं। और खुश इसलिए रहती हूं क्योंकि जल्दी ही मेरा प्रमोशन होने वाला है। सोचा था, प्रमोशन के बाद तुझे एक गिफ्ट दूंगी, तेरे रिज़ल्ट वाले दिन।

यह सुन कर दीदी का चेहरा सख्त हो गया। अब उसके चेहरे से झूठी मुस्कान ग़ायब थी।

वो तेज़ आवाज़ में बोली: ओहो मम्मी! मुझे आपसे कोई गिफ्ट नहीं चाहिए। आप तो मुझसे मेरी सबसे प्यारी चीज़ भी छीनने में लगी हो!

मम्मी ने चौंक कर दीदी की तरफ देखा, कुछ पल चुप रही, फिर घबराहट में बोली: क्या मतलब तेरा? मैंने कौन-सी चीज़ छीन ली?

दीदी ने उसे बीच में ही रोकते हुए कहा: बस, अब और ये मासूम बनने का नाटक मत करो। मैं तुम्हें कुछ दिखाती हूं!

यह सुनते ही मम्मी का चेहरा ज़र्द पड़ गया। उसकी आंखों में चिंता उतर आई। वो गहरी सोच में डूब गई, और तब तक दीदी अंदर जाकर अपना फोन ले आई और स्क्रीन ऑन करने लगी।

मम्मी (हड़बड़ा कर): नहीं, मुझे कुछ नहीं देखना। प्लीज़, हटो यहां से, मुझे अकेला छोड़ दो!

दीदी (सख्ती से): नहीं मम्मी, अब तुम ये ज़रूर देखोगी। क्योंकि अब सच छुपाना बंद होगा।

दीदी ने बिना कुछ कहे अपना फोन निकाला और वीडियो चला कर मम्मी के सामने रख दिया। मैं थोड़ी दूरी पर बैठा था, लेकिन वीडियो से आती आवाज़ें साफ़ सुनाई दे रही थी।

“उफ़्फ… सलीम… और पास आओ… और चोदो मुझे … आह…” जैसे ही मम्मी को अपनी ही आवाज़ उसके कानों में पड़ी, उसका चेहरा एक-दम फीका पड़ गया। उसकी आँखों की चमक बुझ चुकी थी- जैसे शरीर वहीं था, लेकिन आत्मा कहीं और जा चुकी हो। वो पूरी तरह खामोश हो गई। एक-दम निःशब्द। ना कोई प्रतिक्रिया, ना सफाई, बस गहरी शर्म और सन्नाटा।

दीदी ने उसे झिंझोड़ने के अंदाज़ में गुस्से से कहा: साली रंडी, मैंने ये सब अपनी आंखों से देखा है। तू हर रोज़ ऑफिस का बहाना बना कर मेरे ही यार, सलीम के पास जाती थी अपनी प्यास बुझाने के लिए!

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