नाइस सेक्स विथ अलोन भाभी का मजा मैंने लिया पड़ोस वाली भाभी को पटा कर. वे अपने पति से अलग रहती थी तो काफी समय से उन्हें लंड नहीं मिला था.
दोस्तो, मैं आपका दोस्त बाबा बकचोद हाजिर हूं, आप लोगों की सेवा में एक नई कहानी के साथ।
मेरा नाम बाबा बकचोद है, मैं राजस्थान का रहने वाला हूं।
मेरी उम्र 27 साल है और मेरे लन्ड का साइज औसतन है।
मेरी पिछली कहानी थी:पड़ोसन भाभी के जिस्म का भोग
मुझे शादीशुदा औरतें बहुत पसंद है क्योंकि पहला वो समझदार होती है और नखरे नहीं दिखाती, दूसरा चुदाई करवा के उनका बदन भी गदराया और मांसल हो जाता है जिसे मसलने में मज़ा आता है।
खैर ये तो हुआ मेरा परिचय, अब आते हैं कहानी पे!
तो यह नाइस सेक्स विथ अलोन भाभी की बात कुछ महीनों पहले की है,मैं अक्सर नींद नहीं आती तो अपने घर की छत पे टहलने चला जाता हूं।
उस दिन भी मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मोबाइल लेके अपने घर की छत पे चला गया.
मैं मोबाइल पर गाने सुनते सुनते टहल रहा था कि मेरी नजर सामने वाले घर की छत पर पड़ी।
चूंकि रात का वक्त था तो एक बल्ब की मद्धम रोशनी के अलावा छत पे कुछ नहीं था।
एक लड़की फोन पे किसी से बाते करते हुए छत पे घूम रही थी.मगर अंधेरे के कारण मैं उसे देख नहीं पा रहा था।
थोड़ी देर बाद उसने मोबाइल हाथ में ले लिया.शायद कॉल कट गया होगा.तो वो उनकी छत पे घूमने लग गई।
अगले दिन मैं रोज की तरह अपनी जॉब पे जा रहा था, तब सामने के घर से एक लड़की बाहर निकली।हाय क्या मस्त कयामत थी वो!
कुछ तो कशिश थी उसने एक नज़र में उस लड़की का दीवाना हो गया था मैं!
बाद में पता चला कि वो किरायेदार है, अपने दो बच्चों के साथ किराये से रहती है वहां!
उसके बाद तो रोज किसी न किसी तरह से उस सुंदरी के दर्शन हो जाते थे.मगर उससे बात करने का मौका नहीं मिल पाता था.और रोज बस मैं आंखों से ही उसे चोद कर उसके नाम की मुठ मार कर रह जाता था।
एक शाम मैं मार्केट से कुछ समान लेकर घर आ रहा था कि रोड पे काफी भीड़ लगी हुई थी.वहां एक ऑटो का एक्सीडेंट हुआ था शायद.
मैंने भी वहां जाकर देखा तो वो तो वही लड़की थी, उसके हाथ पैरों में चोट आई थी।
चूंकि वो मेरी पड़ोसन ही थी तो पुलिस वाले से मैं उसे हॉस्पिटल ले जाने की बोल कर उसे अपने साथ हॉस्पिटल ले गया और वहां उसकी मरहम पट्टी वगैरा करवाई और डॉक्टर ने कुछ दर्द की दवाई लिख कर दी जो मेडिकल शॉप से मैंने लाकर उसे से दी थी।
अब मैं उसे बाइक पे बिठा कर अपने घर लाया और उसे अपने कमरे तक छोड़ के आया.इस बीच हमारे बीच कोई बात नहीं हुई थी।
कुछ दिन बाद ऐसे ही एक रात मैं अपने घर की छत पे टहल रहा था.पूर्णिमा की रात थी तो छत पे चांद की अच्छी रोशनी थी.
मैं टहल रहा था कि वो भाभी फोन लेकर छत पे आ गई और मेरी तरफ मुस्कुरा कर फोन पे किसी से बात करने लग गई।
थोड़ी देर टहल के मैं जाने को मुड़ा तो उसने इशारे से मुझे रुकने की बोला और फोन काट के छत पे करीब आ गई।
उफ़ क्या कयामत लग रही थी वो!लंबे खुले बाल, बड़ी बड़ी आंखें, 34-30-36 की चलती फिरती कयामत थी वो!उसके चेहरे और मुस्कान में कुछ तो कशिश थी दिल करता था बस उसे देखता ही रहूं।
तभी उसने उस दिन के लिए धन्यवाद प्रिया और मेरे बारे में जानने लगी.मैंने भी उसके और उसकी फैमिली के बारे में पूछा.
तो पता चला कि वो झगड़ों के कारण एक साल से अपने पति से अलग रहती है।
भाभी का नाम चिंकी है, उसकी उम्र 25 साल है, उसका पति शराब पीकर उसे मारता था.कम उम्र में शादी हो जाने के कारण चिंकी को देख के लगता नहीं था कि उनके दो बच्चे भी होंगे।
खैर उस दिन उनसे बातों का सिलसिला ऐसा चला कि दिन दर दिन रोज ही हम अक्सर रात में टहलते टहलते बाते करते.
चिंकी भाभी काफी हंस हंस के बातें करती थी.बीच बीच में मैं उनकी तारीफ भी कर देता था.जिसपे वो शर्मा कर मुस्कुरा जाती थी।
एक दिन ऐसे ही उन्होंने मुझसे मेरा फोन नम्बर मांगा.मैंने दे प्रिया.
उस रात उन्होंने व्हाट्सएप पे मैसेज किया.
मुझे तो अपने नसीब पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि इतनी सुंदर भाभी से मैं बात कर रहा हूं।
धीरे धीरे हमारी व्हाट्सएप पर बातें होने लगी.कभी कभी मैं फनी मैसेज भी भेज प्रिया करता था या कभी डबल मीनिंग चुटकुले भी भेज देता था.जिन पर चिंकी भाभी स्माइली भेज देती थी।
इतना तो मुझे उनकी बातों और आंखों से पता लग गया था कि भाभी को अपने पति से अलग हुए एक साल से ज्यादा हो गया तो चुदवाने को तो उनकी चूत भी तड़प रही होगी।बस थोड़ा संभल के कोशिश करनी पड़ेगी और एक मक्खन मलाई की चूत चोदने को मिलेगी।
मैं चिंकी भाभी के छोटे मोटे काम कर प्रिया करता था.जिससे भाभी भी इंप्रेस थी मुझसे!
कभी भाभी बोर होती थी तो हम फोन पे बात कर लेते थे।
एक दिन चिंकी भाभी ने दुकान से कुछ समान लेके आने को कहा.मैं भी दुकान से सारा समान लेके उनके घर पहुंच गया.
मकान मालिक घर पे नहीं था.ऊपर का पोर्शन पूरा भाभी ने किराए पे ले रक्खा था।
उस वक्त भाभी सफेद रंग का पेटीकोट और हरे रंग के ब्लाउज में बैठी कुछ काम कर रही थी।
उफ … क्या कयामत लग रही थी भाभी! सफेद पेटीकोट में भाभी की मोटी गांड के दोनों पट अलग अलग दिख रहे थे.अंदर शायद उन्होंने पैंटी नहीं पहनी थी.उनकी नंगी गांड पेटीकोट में कुछ कुछ दिख रही थी।
ये नजारा देख के तो मेरा लन्ड पजामे में सलामी देने लग गया था।
कुछ देर पीछे से दर्शन करने के बाद मैंने भाभी को आवाज़ लगाई.
चिंकी भाभी मेरी तरफ मुड़ी तो … हाय उनके बड़े बड़े बोबे ब्लाउज फाड़ के बाहर आने को मचल रहे थे.दो बच्चे हो जाने के कारण उनका थोड़ा सा पेट निकला हुआ था.मगर फिर भी भाभी कयामत लग रही थी.
उन्होंने मेरी तरफ देखा और हमेशा की तरह मुस्कुरा दी.मैं भी मुस्कुरा प्रिया.
तभी भाभी की नजर मेरे पजामे पर पड़ी जहां मेरा लन्ड पजामे के अंदर से ही भाभी को सलामी दे रहा था.
तो भाभी ने बिस्तर पे रखा एक पतला सा पारदर्शी दुपट्टा अपने वक्ष पर डाल लिया.
मुझे शर्म आई और झिझक भी थी कि ना जाने भाभी क्या सोचेंगी.तो मैं जल्दी से चिंकी भाभी को समान पकड़ा दिए और जाने लगा।
चिंकी भाभी ने आवाज देकर मुझे रोक लिया और चाय पीकर जाने को बोला।
पड़ोसी भाभी और उसकी ननद की धमाकेदार चुदाई
मैं भी शर्मा कर चुप चाप बिस्तर पे बैठ गया और दोनों हाथ आगे रख के पजामे में बने तंबू को छुपाने लगा।
भाभी सब देख रही थी और मुस्कुरा भी रही थी।
चिंकी भाभी किचन में चली गई और वहीं से चाय बनाते बनाते बात कर रही थी.और मैं पीछे से भाभी की पेटीकोट में छुपी नंगी गांड को देख के पजामे में अपना लन्ड सहला रहा था।
भाभी- क्या हुआ, क्या छुपा रहे हो तुम जेब में?मैं- कुछ नहीं भाभी, कुछ नहीं छुपा रहा।
भाभी- अच्छा, तुमने बताया नहीं कभी … तुम्हारी गर्लफ्रेंड का क्या नाम है?मैं- गर्लफ्रेंड हो तो नाम बताऊं ना भाभी! गर्लफ्रेंड ही नहीं है तो नाम कहाँ से बताऊं।
भाभी- अच्छा, कैसी गर्लफ्रेंड चाहिए तुम्हें?भाभी की गांड को देख के लन्ड मसलने में मैं इतना खोया हुआ था कि मेरे मुंह से निकल गया- बिल्कुल आपके जैसी भाभी, मस्त भरे पूरे बदन वाली!
तभी भाभी पलटी और लगभग घूरते हुए मेरी तरफ देखने लगी.मैंने भी झट से अपना हाथ पजामे में से बाहर निकाला.
लेकिन शायद भाभी ने देख लिया था।फिर वो मुस्कुराने लगी और दो कप चाय लाके मेरे पास ही बिस्तर पे बैठ गईं.और एक कप मुझे देकर बात करने लगी।
भाभी- अच्छा तो तुम्हें मैं, मस्त भरे पूरे बदन वाली नजर आती हूं?भाभी के इस सवाल पे मैं क्या जवाब दूं … समझ नहीं आ रहा था.मगर भाभी की आंखों में शरारत साफ दिख रही थी.
तो मैंने भी हिम्मत कर के बोल प्रिया- मुझे आप बहुत पसंद हो भाभी, मुझे ऐसी ही औरतें पसंद आती है जो भरे बदन की हों।भाभी- ऐसा क्या दिख गया तुम्हें जो मैं तुम्हें इतनी पसंद आ गई।
मैं समझ गया था कि भाभी भी मजे ले रही हैं.तो सोचा कि क्यों ना चांस लूं.शायद आज ही भाभी की चूत मिल जाए।
मैं भाभी की आंखों में आंखें डाल के देखने लगा और बोला- आप बुरा मान जाओगी भाभी, वरना मैं बता देता।भाभी बोली- नहीं मानूंगी बुरा, तू बता तो … मैं भी तो सुनूं तू ऐसा क्या देखता है मेरे में?
फिर मैं भी चांस लेके बताने लग गया भाभी को- मुझे आपके ये गुब्बारे जैसे फूले हुए बूब्स पसंद है, आपकी ये तरबूज जैसी बड़ी गांड पसंद है, आपकी मुस्कान पसंद है।
भाभी मेरी तरफ हैरानी से देखे जा रही थी.मगर अचानक से वो मुस्कुराने लगी और बोली- कभी किसी लड़की को नंगी देखा है?
मैंने मना किया.तो भाभी ने कहा- जा दरवाजा बंद कर के आ!
मैं भाग के गया और दरवाजा बंद कर के आया।
अब भाभी ठीक मेरे सामने खड़ी हो गई और अपने हाथों से धीरे धीरे ब्लाउज में हुक खोलने लगी और मेरी तरफ देख के शरारती स्माइल दे रही थी.
फिर उन्होंने अपना ब्लाउज और ब्रा दोनों निकाल दी।
हाय … क्या मस्त गोरे गोरे बूब्स थे उनके!दिल किया कि अभी पकड़ के नोच डालूं.
चिंकी भाभी ने अपने पेटोकोट का बस नाड़ा ही खोला था कि उनके मांसल चूतड़ों से फिसलता हुआ पेटीकोट झट से नीचे गिर गया।
अब मेरे सामने चिंकी भाभी बिल्कुल मादरजात नंगी थी.उफ … क्या बयान करूं उनकी खूबसूरती।
उन्होंने बालों को बांध रखा था, आंखों में पायल, माथे पे चमकती छोटी सी लाल बिंदी, होंठों पे लाल लिपस्टिक, गले में मंगलसूत्र, हाथों में लाल चूड़ियां, पैरों में काजल, बिना कपड़ों के उनका नंगा बदन और उनके होंठों पे वो दिल लूट लेने वाली दिलकश मुस्कान।
उफ़, उनके बूब्स उठे हुए और निपल्स हल्के भूरे रंग के बिल्कुल कड़क थे, हल्का सा पेट बाहर को निकला हुआ था, जांघें बिल्कुल केले के मोटे तने जैसी मांसल जांघें थी।
मैं बस भाभी को एकटक देखे ही जा रहा था।
पता नहीं कब भाभी मेरे बिल्कुल करीब आ गई और धीरे से मेरे कान में बोली- बस देखते ही रहोगे या कुछ करोगे भी??
मुझे तो जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि भाभी इतनी जल्दी मान जाएंगी.मैं भी जल्दी से अपनी टीशर्ट और पजामा खोल के बस अंडरवियर में उनके सामने खड़ा था।
इतने में चिंकी भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने बूब्स पे रख के खुद ही दबा प्रिया.
उफ़ … कितने कोमल बूब्स थे।मैं तो पागल ही हो गया था.
मैंने जल्दी से भाभी को बिस्तर पे गिराया, उनके ऊपर आकर उनके होंठों को चूमने लग गया और उनके दोनों बूब्स को बेरहमी से मसलने लग गया।भाभी भी बेरहमी से मचलते हुए मेरे होंठों को लगभग खा ही रही थी।
15-20 मिनट हो गए थे हमें, और हम बस एक दूसरे को चूमे, चाटे जा रहे थे।
फिर भाभी होंठों को छोड़ कर बोली- अब नहीं रहा जाता मेरे राजा, बस जल्दी से अपना लौड़ा पेल दे, बहुत प्यासी हूं मैं!
मैंने भी अपनी चड्डी उतारी और भाभी की चूत को सलामी दे रहे लन्ड को उनकी गीली हो रही चूत पे रगड़ने लग गया।भाभी की सिसकियां मुझे और जोश दिला रही थी.
तभी चिंकी भाभी ने मेरे गाल पर थप्पड़ मारा और लगभग गाली देते हुए बोली- तेरी मां की चूत, भड़वे … चूत पे रगड़ता ही रहेगा या अंदर घुसाएगा भी मादरचोद?
मैंने भी गुस्से में भाभी के दोनों पैर अपने कंधे पे रखे और चिंकी भाभी की चूत पे लन्ड रख के एक ही बार में अंदर घुसा प्रिया।
भाभी की चीख निकल गई, वो चिल्लाने लगी.कोई सुन ना ले इसलिए मैंने जल्दी से पास में पड़ी भाभी की पैंटी उठा के उनके मुंह में ठूंस दी और उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ के अपनी धक्का पेल चला दी।
चिंकी भाभी के बूब्स जोर जोर से हिल रहे थे.जब उनका दर्द कम हुआ तो उन्होंने खुद ही अपनी चड्डी मुंह से निकाल ली और सिसकियां लेकर अपनी गांड उठा उठा के चुदाने लगी।
भाभी- हाय मेरे राजा, तूने तो जान ही निकाल दी थी. अब रुक मत! कितने महीनों बाद लन्ड नसीब हुआ है. और जोर लगा पेल दे पूरा! बुझा दे आज इस कमीनी चूत की प्यास, बहुत सताती है।
फिर मैंने उनको घोड़ी बनने को कहा और पीछे से उनकी चूत में लन्ड घुसा के लगा पेलने।
नाइस सेक्स का मजा लेती हुई भाभी बस आह आह की सिसकियां लिए जा रही थी.
वो 3 बार झड़ चुकी थी जो उन्होंने बाद में बताया.और अब उनकी चूत में जलन होने लगी थी।
लगभग 20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है तो मैंने भाभी से कहा।भाभी- अंदर मत निकल, मेरे मुंह में झाड़ दे।
मैंने भी जोर जोर से दो चार करारे धक्के उनकी चूत में मारे और उनके बाल पकड़ के उनके मुंह में लन्ड घुसा प्रिया.
दो चार धक्के मारने के बाद मैं उनके मुंह में ही झड़ गया और भाभी मेरा पूरा माल पी गई और लन्ड को मुंह में लेकर अच्छे से साफ कर प्रिया।
हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे तो वहीं लेट गए.
फिर भाभी मेरे होंठों को चूमने लगी बोली- आज कितने दिनों बाद मेरी चूत को आराम मिला है. अब जब भी मेरा मन करेगा इस चूत की खुजली तुम्हें ही मिटानी पड़ेगी मेरे राजा।
मैं भी खुश था कि इतनी अच्छी चूत चोदने को मिली.फिर मैंने अपने कपड़े पहने और भाभी से विदा लेकर वापस घर पे आ गया।
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