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पड़ोसी पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 643 बार

मेरा गुप्त जीवन-54

यश देव

28 Oct 2025 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन-54
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कालेज से वापस आया तो बैठक में कम्मो के साथ एक औरत बैठी थी, मुझको देखकर कम्मो ने मेरा परिचय करवाया कि मैं सोमू ज़मींदार साहिब का बेटा और आजकल यहाँ कॉलेज में पढ़ रहा हूँ और आप हैं प्रेमा भाभी, हमारे पड़ोस वाले मोहल्ले में रहती हैं और मुझ को रोज़ सब्ज़ी मार्किट में मिलती हैं।

मैंने भी नमस्ते की उनको और वहाँ शिष्टाचार के नाते थोड़ी देर के लिए बैठ गया।मैंने उस महिला को ध्यान से देखा, वो काफी खूबसूरत लगी, रंग एकदम गोरा और शरीर भी गठा हुआ, काफी बड़े मम्मे और काफी मोटे चूतड़ भी, उम्र होगी कोई 24-25 साल की!

मैं उठा और जाते जाते कम्मो को बोल गया- आंटी को ठंडा गर्म पिलाओ न!कम्मो ने हाँ में सर हिला दिया।

मैं अपने कमरे में आ गया और बूट उतार कर बिस्तर पर लेट गया। आज कॉलेज में वो सारी लड़कियाँ मिली जो नैनीताल में मेरे साथ थी। उनके साथ कुछ और लड़कियों के साथ भी परिचय हुआ जो मुझको बड़ी ही गर्म नज़रों से देख रहीं थी, उनकी आँखों में मैंने साफ़ तौर से पूरा निमंत्रण पढ़ा, उनमें से कई ने हिंट दिया कि कभी उनको भी मौका दूँ अपने जौहर दिखाने का!

मैंने किसी को कोई लिफ्ट नहीं दी लेकिन नैनीताल वाले ग्रुप को कैंटीन में ले जा कर हम सबने मिल कर खूब खाया और पिया।इस मिनी पार्टी के पैसे मैंने ही दिए और चारों लड़कियों को खुश कर दिया।

नैनीताल ट्रिप के बाद मैं कॉलेज की सब लड़कियों में बहुत ही पॉपुलर हो गया था जिससे कई सीनियर लड़के जलने लगे।हालात को काबू में रखने के लिए मैंने शानू को अकेले में बुला कर समझाया कि वो सब सहेलियों को बता दे कोई भी डींग या शेखी न बघारने लगे जो इन लड़कों के कान में पड़ जाने से हम सब को बहुत खतरा हो सकता है, ख़ास तौर से लड़कियों को।

थोड़ी देर बाद कम्मो आई और बोली- कैसा रहा कॉलेज आज?मैंने कहा- बहुत अच्छा था! और कई और लड़कियों ने आँखों आँखों में अपने को समपर्ण करने के पेशकश की है। हम दोनों खूब हँसे।फिर कम्मो बोली- देखा प्रेमा आंटी को?मैंने कहा- हाँ देखा, अच्छी खूबसूरत औरत है यार कम्मो।कम्मो बोली- रोज़ मार्किट में मिलती थी तो आज मैंने उसको घर बुला लिया, गलत तो नहीं किया ना?मैं बोला- नहीं कम्मो बेगम, तुम तो घर की मालकिन हो। तुम्हारे सर तो घर चलता है। जब चाहो, जिसको चाहो तुम बुला सकती हो।

कम्मो बोली- यह रोज़ मुझ को अपनी मुसीबत के बारे में बताती रहती थी सो मैंने सोचा आज घर बुला कर इसकी सारी बात तो जानें। तो मैंने आज उससे कहा कि मुझको सब सच सच बता दो बिना किसी शर्म के।और मैं इसको घर ले आई।मैं बोला- अच्छा किया कम्मो तुमने जो कुछ मदद हो सकती है, वो करनी चाहिए न!

कम्मो बोली- यह बेचारी 6 साल से शादीशुदा है लेकिन इसके घर में बच्चा नहीं हो रहा, इसका पति थोड़ा मोटा है और चुदाई का शौक़ीन नहीं है, बस कभी कभी महीने में एक बार चोद देता है इसको, जिससे इसकी तसल्ली तो बिल्कुल नहीं होती और बच्चा भी नहीं हुआ अब तक। और ऊपर से इसकी सास रोज़ धमकी देती है कि अगर बच्चा नहीं हुआ एक साल के अंदर तो वो अपने बेटे की दूसरी शादी कर देगी।

मैं बोला – यह तो सरासर जुल्म है बेचारी पर!कम्मो बोली – वही तो, आज मैंने उसका सारा चेकअप भी किया और यह पाया कि वो पूरी तरह से ठीक है और जो भी खराबी है वो उसके पति में है।मैं बोला- अच्छा फिर क्या सोचा है उसके लिए?कम्मो बोली- आपकी मदद की ज़रूरत है, अगर आप उसको हेल्प करो तो वह सो फीसदी माँ बन सकती है।

मैं घबरा गया और बोला- मैं क्या मदद कर सकता हूँ कम्मो डार्लिंग?कम्मो बोली- वही मदद जो आपने फुलवा, चम्पा और बिंदु को दी।मैं हैरान होकर बोला- तुम्हारा मतलब है प्रेमा आंटी की चुदाई?कम्मो बोली- हाँ! अभी मैंने उससे खुल कर इस विषय में बात नहीं की लेकिन पहले यह ज़रूरी है कि आपकी मर्ज़ी जान ली जाए, तभी आगे बात की जाए।

मैं चुपचाप सोचने लगा कि काम तो भलाई का है लेकिन इस में खतरा भी बहुत है और फिर चुदाई का समय और स्थान भी तो देखना पड़ेगा ना!मैं बोला- पहले तो प्रेमा आंटी इस काम के लिए तैयार नहीं होगी और अगर हो गई तो भी जगह और समय का भी तो बंधन है ना?कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप सिर्फ हाँ कर दो, आगे मैं देख लूंगी, सारे प्रबंध मैं कर लूंगी।मैं बोला- चलो मैं हाँ भी कर देता हूँ तो भी कब और कहाँ का फैसला मुश्किल है, वो कैसे करोगी मेरी जान?

कम्मो बोली- प्रेमा की सास सवेरे 10 से 4 बजे रोज़ अपनी बेटी के घर जाती है यहीं लखनऊ में! तभी प्रेमा सब्ज़ी वगैरह लेने मार्किट आती है और वो यहाँ दो घंटे सहेलियों के साथ गपशप करती है और फिर घर चली जाती है। वो हमारे पास कम से कम दो घंटे रह सकती है और यह समय चुदाई के काम के लिए काफी हैं।

मैं बोला- जगह कहाँ से आयेगी सरकार मेरी?कम्मो बोली- अपनी कोठी और कहाँ?मैं बोला- पारो और बहनों का क्या होगा?कम्मो बोली- पारो तो अपनी है, उसकी फ़िक्र नहीं, और रह गई बहनें तो वो कॉलेज होंगी न उस समय।मैं बोला- और सरकारी सांड कहाँ से आएगा? उसका भी तो कॉलेज होता है ना?कम्मो हँसते हुए बोली- रहने दो छोटे मालिक, सरकारी सांड के आगे गोरी चिट्टी चूत लटका दो वो महीना भर कॉलेज नहीं जाएगा।

मैं बड़े ज़ोर से हंस दिया- चलो ठीक है, जल्दी से बात पक्की करो क्योंकि मेरा लौड़ा तो अभी सोच सोच कर हिलोरें मार रहा है।कम्मो ने झट से मेरा लौड़ा पैंट से निकाला और उसको चूमते हुए कहा- यह सरकारी सांड बड़ा ही सीधा है, जब चाहो जहाँ चाहो किसी भी गाय के लिए तैयार रहता है। मैं अभी आई प्रेमा से फ़ोन पर बात करके!

कम्मो गई और मैं प्रेमा आंटी के ख्वाब देखने लगा, आंटी के संगमरमर जैसे मम्मे और मखमली जांघें उफ़्फ़… क्या चीज़ है यार प्रेमा आंटी।

थोड़ी देर में कम्मो खुश खुश आई और बोली- तय है कल का प्रोग्राम, आप कॉलेज नहीं जाओगे कल। और मैंने उससे पूछ भी लिया है कि मैं चुदाई के दौरान वहीं रहूंगी क्योंकि छोटे मालिक को मेरी ज़रूरत होती है। उसको कोई ऐतराज़ नहीं।मैं बोला- तो फिर आज रात की चुदाई का प्रोग्राम भी कैंसिल कर देना क्योंकि मैं रात को भरपूर नींद सोना चाहता हूँ।

कम्मो बोली- वो तो ठीक है लेकिन सांड के एक बार चढ़ जाने से तो गाय हरी हो या न हो? उसका क्या करें?मैं बोला- तुमको उसकी माहवारी का हिसाब लेना था न!कम्मो बोली- छोटे मालिक आप महान हो। सारा ज्ञान अभी से अर्जित कर लिया है आपने। ठहरो, मैं यह भी पूछ लेती हूँ उससे फ़ोन पर!

थोड़ी देर बाद कम्मो ने कहा- कल ही उसका 10वाँ दिन होगा माहवारी के बाद… तो उत्तम समय है। और उसके दो दिन बाद भी अच्छा मुहूर्त है।

अगले दिन ठीक 10 बजे प्रेमा आंटी आ गई और कम्मो ने उसको बैठक में बिठाया। ठंडा पीने के बाद वो हम दोनों को मेरे बेडरूम में ले आई।प्रेमा आंटी को बैठाया और फिर मुझसे बोली- क्यों छोटे मालिक, तैयार हैं आप?मैं बोला- प्रेमा आंटी से पूछो?प्रेमा बोली- मुझको आंटी न कहो सोमू, तुम मुझको प्रेमा बुला सकते हो।मैं बोला- ठीक है प्रेमा जी, आपके मन में मेरे बारे में कोई संशय तो नहीं?प्रेमा बोली- नहीं सोमू, तुम बड़े हैंडसम हो और अच्छा कद बुत है तुम्हारा। दिखने में ज़रा छोटे ज़रूर लगते हूँ लेकिन मुझको उम्मीद है जो कम्मो कह रही है तुम उसमें पूरा उतरोगे।

फिर कम्मो ने मेरे लंड के साथ खेलना शुरू कर दिया और मैं भी उसके मम्मों को ब्लाउज के बाहर से चूमने लगा।कम्मो मेरे लंड के साथ खेल रही थी और वो मुझको धीरे से प्रेमा के पास ले गई और प्रेमा का हाथ उसने मेरे लौड़े पर रख दिया।

प्रेमा पहले तो शरमाई और फिर उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया और उसकी सख्ती से काफी खुश लगी।तभी कम्मो ने प्रेमा का ब्लाउज उतारना शुरू कर दिया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए।प्रेम के उन्नत उरोज उछाल कर मेरे हाथ में आ गए और मैं उन सफ़ेद सफ़ेद संगेमरमर से बने मम्मों को चूसने लगा।

कम्मो प्रेमा की साड़ी उतारने में लगी हुई थी और फिर उसने उसका पेटीकोट भी उतार दिया। उसकी चूत पर बड़े घने काले बाल छाए हुए थे।मेरा एक हाथ अब प्रेमा के चूतड़ों को हल्के हल्के मसल रहा था और उन रेशमी गोल गोल गुब्बारों को बड़े ही प्रेम से सहला रहा था।प्रेमा भी अपनी शर्म के ऊपर उठ चुकी थी और मेरे सख्त लंड के साथ खेल रही थी।

मैंने भी अब उसके रस भरे होटों पर अपने होटों को रख दिया और उसके होटों को चूसने लगा और अपनी जीभ को भी उसके मुंह में डाल कर गोल गोल घुमाने लगा।

कम्मो ने भी अपनी साड़ी उतार दी और पूरी नंगी होकर हमको मदद कर रही थी।मैंने अब प्रेमा की चूत में हाथ डाला तो वो बेहद गीली हो चुकी थी।

कम्मो प्रेमा को धीरे से बेड पर ले गई और मुझको भी इशारा किया और मैं भी झट वहाँ पहुँच गया और उसकी संगमरमर जैसी जांघों के बीच में बैठ गया और अपने लौड़े को उसकी चूत के मुंह पर रख दिया।फिर मैंने झुक कर उसके लबों पर एक गरम चुम्मी की और फिर लंड को हल्का धक्का दिया और लंड काफी सारा अंदर चला गया।एक और धक्का और लंड पूरा का पूरा अंदर था।

कम्मो प्रेमा के मम्मों के साथ पूरा इन्साफ कर रही थी और उनको खूब चूस रही थी, प्रेमा की आँखें बंद थी और वो चुदाई का पूरा आनन्द ले रही थी।हल्के धक्कों के बाद मैंने अब तेज़ी दिखानी शुरू कर दी और थोड़े ही तेज़ धक्कों के बाद प्रेमा छूटने लगी और वो ज़ोर ज़ोर से हाय हाय करने लगी और उसने मुझको कस कर अपनी बाहों में बाँध लिया।ऐसा लगा कि वो बहुत दिनों से काम क्रीड़ा की इच्छुक थी और चूत की प्यास को मिटाने की पूरी कोशिश करने लगी।

जब वो कुछ संयत हुई तो मैंने अपने लंड के हमले जारी रखे, कभी तेज़ और कभी आहिस्ता, कभी लंड को पूरा निकाल कर फिर पूरा डालना यही मेरी ट्रम्प चाल होती थी।कुछ मिनटों में प्रेमा फिर झड़ने की कगार पर पहुँच चुकी थी और इस बार उसका बहुत ही ज़ोर का छूटा और चूत में से बहुत सा रस भी बहा।

कम्मो ने इशारा किया और मैं उसकी चूत के ऊपर से उतर गया, मेरा लंड से प्रेमा का रस टपक रहा था।

मैं प्रेमा के साथ लेट गया और उसके सिल्की मम्मों के साथ खेलने लगा, उसका भी एक हाथ मेरे खड़े लौड़े के साथ खेल रहा था।मेरे दूसरी तरफ तो कम्मो लेटी थी और वो मेरे अंडकोष के साथ खेल रही थी।तभी प्रेमा उठी और मेरे ऊपर आकर बैठ गई और मेरे लंड को अपनी चूत में खुद ही डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगी।मैं उसके मम्मों के चूचुकों को अपने मुंह में डाल कर चूसने लगा।थोड़ी देर में ही प्रेमा फिर छूट गई।

अब कम्मो ने उसको घोड़ी बना दिया और मुझको इशारे से उस गोरी घोड़ी को चोदने के लिए उकसाने लगी।

मैं अब कम्मो के प्लान के मुताबिक़ अपना छुटाने वाली चुदाई की स्टेज में था और मैंने अब अपनी चुदाई का स्टाइल और स्पीड सिर्फ अपना छुटाने के लिए शुरू की, उस घोड़ी बनी हुई संगमरमर की मूर्त को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।अब मुझको प्रेमा के छुटाने की फ़िक्र नहीं थी बस अपना वीर्य उस की चूत की आखिरी गहराई तक पहुँचाने की कोशिश थी।

कोई 10 मिन्ट तेज़ धक्के मारने के बाद मुझको लगा कि मेरा वीर्य के छूटने के कगार पर पहुँच रहा है तो मैंने प्रेमा के मोटे चूतड़ों को अपने हाथों में उठा लिया और फिर ज़ोर ज़ोर से 4-5 धक्के मारे और अपने फव्वारे को छोड़ दिया।ऐसा करते वक्त मेरा लौड़ा चूत की आखिरी गहराई में मैंने गाड़ दिया और प्रेमा की फुदकती गांड को कस कर अपने हाथ में पकड़ कर रखा जब तक मेरा पूरा वीर्य नहीं छूट गया।

कम्मो के इशारे से मैंने प्रेमा की गांड को ऊपर ही उठाये रखा जब तक कम्मो ने इशारा नहीं किया और मेरा लंड भी उसकी चूत में पड़ा रहने दिया।जब कम्मो ने इशारा किया तब मैंने प्रेमा को नीचे लिटा दिया, तब वो चूतड़ ऊपर उठा कर ही लेटी रही।

मैं उठा और अपने खड़े लंड को कम्मो के पीछे से चूत में डाल दिया और धीरे धीरे धक्के मारने लगा, वो प्रेमा की सेवा भी करती रही, चुदती भी रही, यही कमाल है कम्मो का!क्योंकि उसने गर्म चुदाई देखी थी, इसलिए उसको छुटाना भी ज़रूरी था और इसको मैं अपनी ड्यूटी समझता था।थोड़ी देर में जब वो छूट गई तो मैं उठा और प्रेमा की उसके लबों पर चूमा और फिर मैं कॉलेज जाने के लिए तैयार होने लगा।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 189
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भाग 32
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भाग 42
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भाग 44
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भाग 46
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भाग 48
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भाग 80
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भाग 81
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भाग 82
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भाग 83
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भाग 84
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भाग 85
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भाग 86
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भाग 87
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भाग 88
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भाग 90
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भाग 91
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भाग 92
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भाग 93
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भाग 94
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भाग 96
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भाग 97
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भाग 98
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भाग 99
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भाग 100
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भाग 101
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भाग 102
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अमन कश्यप

2 weeks ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

राजेश हैकर

3 weeks ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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