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बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 894 बार

मेरी सहेली ने मुझे अपने पापा से चुदवाया- 2

गरिमा सेक्सी

09 Jun 2023 को प्रकाशित

मेरी सहेली ने मुझे अपने पापा से चुदवाया- 2
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न्यूड फॅमिली Xxx कहानी में मेरी सहेली के घर गयी तो उसकी मम्मी और पापा चुदाई कर रहे थे. मेरी सहेली उनकी चुदाई देखकर मुझे अपने कमरे में ले गयी.

कहानी के पहले भागसहेली ने मेरी चढ़ती जवानी का इलाज बतायामें आपने पढ़ा कि मैं बुआ और पापा की चुदाई देखकर गर्म हुई पड़ी थी. मेरी सहेली मेरे घर आई और मुझे अपने साथ अपने घर ले गयी. रास्ते भर मैं और वो चुदाई की बातें करती गयी.

यह कहानी सुनें.

अब आगे न्यूड फॅमिली Xxx कहानी:

फिर उसने बाहर का दरवाजा बंद किया और फिर हम स्वाति के रूम में जाने के लिए ड्राईंग रूम से लॉबी में आ गए।

लॉबी में आते ही मैंने जो नजारा देखा उसे देखते ही मैं ठिठक कर खड़ी हो गई।मेरे पैर जहां थे, वहीं जम गये।

दरअसल स्वाति के मम्मी-पापा का कमरा खुला हुआ था और वे दोनों पूरी तरह नंगे थे।

आंटी बेड पर मुंह नीचे कर पेट के बल लेती थी और अंकल उनकी गांड के पास अपने पैरों को अगल-बगल कर के बैठे थे।वे अपने दोनों हाथ आंटी के अगल-बगल टेक लेकर अपनी कमर को तेजी से हिला रहे थे।

शायद वे आंटी की गांड मार रहे थे या पीछे से उनकी चूत चोद रहे थे।

अंकल की पीठ हम लोगों की तरफ थी और आंटी उनके नीचे थी इसलिए वे लोग हम दोनों को नहीं देख पाए।

इस चुदाई के चक्कर में उन्हें पता ही नहीं चला कि हम आई हैं।

मैंने हैरानी से स्वाति को देखा तो स्वाति ने मुस्कुराते हुए मुझे चुप रहने का इशारा किया।और धीरे से कान में बोली- यहां खड़े होकर मजे लोगी या अपने कमरे में चलें?

मैं बिना बोले फिर अंकल-आंटी को देखने लगी.मेरी निगाह ही नहीं हट रही थी.

तभी स्वाति ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों दबे पैर उसके रूम में चली आई।

रूम में आने के बाद स्वाति अपने कपड़े बदलने लगी और उसने जींस उतार कर स्कर्ट पहन ली।

मैं उसी तरह हैरान बैठी थी।

स्वाति आंख मारती हुई मुझसे बोली- आज तो तेरी किस्मत ही खुल गई.मैंने कहा- कैसे?वो बोली- पहले तो रास्ते में तुझे लंड के दर्शन हुए अब घर आते ही चुदाई देखने को मिल गई.

मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कहां देख पाई … तू यहां खींच कर लेती आई. चल ना देखते हैं क्या कर रहे हैं वे!स्वाति बोली- अरे थोड़ा धैर्य रखो बाबा … क्यों कवाब में हड्डी बनाने जा रही हो … बेचारे मजे कर रहे हैं, कर लेने दो ना!

मैंने कहा- एक बात बता … तू आज पहली बार अपनी मम्मी पापा को ये करते देख रही है या इसके पहले देख चुकी है?स्वाति मुस्कुराते हुए बोली- कई बार देखा है.

मैंने हैरानी से पूछा- सच में? तब तो तूने अपने पापा का लंड भी देख होगा?स्वाति बोली- और नहीं तो क्या … एकदम मस्त मोटा और लंबा है।

मैं बोली- अरे कितनी बेशर्म है तू यार, कैसे अपने पापा के बारे में बोल रही है।इस पर वह बोली- अरे इसमें बेशर्म की क्या बात है. तूने पूछा तो मैंने जो सच था, वो बता प्रिया।

स्वाति बोली- तुझे देखना है क्या पापा का लंड … देखना हो तो बता?मैंने पूछा- वो कैसे?

स्वाति बोली- अरे ये सब तू मुझ पर छोड़ … बस तू बता कि देखना चाहती है या नहीं … एकदम मस्त लंड है मोटा सा!मैं आंख मारती हुई बोली- नेकी और पूछ-पूछ, चल दिखा!

स्वाति मेरा गाल खींचते हुए बोली- अरे वाह मेरी रानी … बहुत मन कर रहा है तेरा लंड देखने का? आज तो तुझे लंड का दर्शन करा कर भेजूंगी घर!मैंने फिर हैरानी से पूछा- मगर कैसे यार?स्वाति बोली- ये सब तू मुझे पर छोड़ दे … तू बस चुपचाप बैठी रह!

इतने में स्वाति की मम्मी की आवाज़ लॉबी से आई.शायद वे लोग चुदाई कर चुके थे।

स्वाति बोली- लगता है काम ख़त्म हो गया।मैंने कहा- तू कैसे बताएगी उन्हें कि हम यहां कब आयी?स्वाति मुस्कुराती हुई बोली- अभी बता देती हूं. इसमें कौन सी डरने वाली बात है।’

अभी मैं कुछ कहती, तभी स्वाति ने कमरे के दरवाजे पर जाकर अपनी मम्मी को आवाज दी और उन्हें चिढ़ाते हुए बोली- अरे मम्मी काम हो गया हो तो गरिमा को नाश्ता पानी दे दो … बेचारी कब से प्यासी बैठी है!

जैसे ही आंटी अंकल को पता चला कि हम लोग घर में ही हैं तो अंकल की तो कोई आवाज नहीं आई।मगर आंटी हंसती हुई कमरे के पास आईं और स्वाति के बाल खींचती हुई बोलीं- बदमाश, तुम लोग कब से आकर चोरों की तरह बैठी हो?

आंटी ने आगे से खुला वाला नाइट गाउन पहना हुआ था और कमर के पास कपड़े रिबन से बांधा था. अगर रिबन खोल दो आंटी आगे से पूरी नंगी हो जाती।

स्वाति अपने बाल छुड़ाते हुए हंसकर बोली- बस आप और पापा जब अपना काम ख़त्म करने वाले थे, उसके थोड़े पहले ही हम दोनों आई थी.आंटी तब तक कमरे में आ चुकी थीं।

ववे मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई, बोली- बेटी, तू सीधी-सादी लड़की है इसके (स्वाति) के चक्कर में मत पड़, वरना बिगड़ जाएगी।मैं हंसने लगी।

इस पर स्वाति बोली- मम्मी तुम इसे सीधी कब से समझने लगी, पता है मैं तो यहां आकर बैठी थी और यही छुप कर देख रही थी तुम्हें और पापा को!मैंने स्वाति को चिकोटी काटते हुए बोला- अरे नहीं आंटी, यह झूठ बोल रही है … ऐसा कुछ भी नहीं था!

इस पर आंटी बोलीं- अरे देख भी लिया तो क्या हुआ … तुम लोग बड़ी हो गई हो, ये सब भी जानना चाहिए.स्वाति बोली- मम्मी, इस बेचारी की एक मदद कर दो ना!आंटी बोली- क्या?

स्वाति मेरी तरफ देखकर आंख मारते हुए बोली- इसने कभी लड़कों का ‘वो’ नहीं देखा है … पापा से कह दो ना कि बेचारी को अपना ‘वो’ दिखा दें।

मैं एकदम शरमा गई और स्वाति की पीठ पर थप्पड़ मारते हुए बोली- अरे नहीं आंटी … बदमाश है ये … मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है।लेकिन मैं ये देख कर हैरान थी कि स्वाति अपनी मम्मी से कैसी इस तरह बात कर रही है।

फिर भी मैंने इस पर ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सब बातों में मुझे खुद ही मजा आ रहा था।

आंटी हंसती हुई मुझसे बोली- अरे तो पहले बता प्रिया होता, इसमें शरमाने वाली कौन सी बात है?

फिर स्वाति की तरफ इशारा करते हुए मुझसे बोलीं- इससे पूछ … ये तो कितनी बार देख चुकी है अपने पापा का ‘वो’!

तब मेरी गाल पर चुटकी काटते हुए बोलीं- वैसे ये वो क्या होता है? उसका कुछ तो नाम तो होगा ना?स्वाति बोली- लंड नाम होता है … और क्या? बेचारी नहीं कह पा रही है तो मैं कह देती हूँ। इसे पापा का लंड दिखवा दो।

मैंने गुस्साने का नाटक करते हुए स्वाति को चिकोटी काटी और हुए कहा- तू चुप रहती है कि नहीं, अरे आंटी, ऐसा मैंने कुछ नहीं कहा।

इस पर स्वाति की मम्मी हंसने लगी और बोली- कोई बात नहीं … अब कह ही प्रिया है तो अपनी सखी की बात मान लो और एक बार देख लो. इसमें क्या हर्ज़ है। तुम लोग यहीं बैठो मैं इसके पापा को बुला कर लाती हूं!यह कह कर वे कमरे से बाहर निकल गयी.

उनके जाते ही स्वाति बिस्तर पर बैठ गई और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे भी अपना बगल खींच कर बैठा लिया और बोली- आज तो तेरा सपना पूरा होने जा रहा है लंड देखने का!मैंने घबराने का नाटक करते हुए कहा- तू अपनी मम्मी और पापा से ऐसे बात कर लेती है? मैं तो जा रही हूं बाबा … मुझे तो शर्म आ रही है। तुम ही देखो अपने पापा का लंड!

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इस पर स्वाति मुस्कुराती हुई बोली- अरे, हम लोग आपस में दोस्त की तरह रहते हैं, कोई पर्दा नहीं करते हैं।

अभी हम ये बातें कर ही रहे थे कि कि स्वाति की मम्मी और पापा दोनों कमरे में आ गए।

मेरी तो धड़कन बढ़ गयी.

स्वाति के पापा ने सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था और कुछ नहीं पहनना था।उन्हें देखते ही मैं बिस्तर से खड़ी हो गई और नमस्ते की।

वे मुझे देखते हुए मुस्कुरा रहे थे.

इतने में आंटी बोलीं- क्या देखना था गरिमा, खुद ही बोल दो अपने अंकल से!मैं एकदम शांत खड़ी रही.शर्म से मेरा चेहरा लाल हो रहा था, साथ ही मज़ा भी आ रहा था।

स्वाति ने मुझे वापस खींच कर बिस्तर पर बैठा लिया और अपनी मम्मी से बोली- अरे क्यों छेड़ रही हो बेचारी को, देखो कैसे शरमा रही है। चलो मैं ही बोल देती हूं इसकी तरफ से!

फिर स्वाति अपने पापा से बोली- पापा, दरअसल इसने कभी वो नहीं देखा है जहां से आप लोग सू-सू करते हैं!

तब स्वाति के पापा थोड़ा आगे बढ़ कर ठीक मेरे सामने खड़े हो गए और बोले- अरे तो इसमें दिखने जैसी कौन सी बात है, खुद ही देख लो।इस पर आंटी और स्वाति दोनों हंसने लगे।

मैं ऐसी बैठी थी जैसी सुहागरात में नई दुल्हन बैठी हो और बस शरमा रही थी।

स्वाति की मम्मी मुस्कुराती हुई अंकल से बोलीं- अरे वह शरमा रही है तो क्यों मज़ाक कर रहे हो … लाओ मैं ही दिखा देती हूं।

यह कह कर उन्होने अंकल का तौलिया ही खोल प्रिया।खुलते ही तौलिया नीचे गिर पड़ा और अंकल का मोटा और लम्बा सा लंड ठीक मेरी आँखों के सामने था।

जैसा कि मैं पहले स्टोरी में बता चुकी हूं कि मैं पहले भी लंड को देख चुकी थी और अपनी चूत, गांड और मुंह में उसका स्वाद भी ले चुकी थी।जिसमें दो लंड तो लड़कों के थे, एक मेरे भाई सोनू का और दूसरा रोहित का!एक लंड करीब 60 साल के आदमी का था।

मगर पहली बार किसी जवान आदमी का लंड अपनी आंखों के सामने देख रही थी।

हालांकि अभी पिछली रात में अपने पापा का लंड तब देखा था जब वे बुआ की चुदाई कर रहे थे।मगर वो खिड़की में दरवाजे से देखा था।

अंकल अभी कुछ ही देर पहले आंटी को चोद कर आये थे इसलिए उनका लंड अभी थोड़ा ढीला था मगर अब उसमें हल्का-हल्का तनाव आने लगा था।

मेरे दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं।

आंटी मुस्कुराती हुई बोलीं- देख लो आराम से … कोई जल्दबाजी नहीं है।

स्वाति जो मेरे बगल बैठी थी, उसने मेरे कांधे पर हाथ रख कर अंकल से कहा- पापा, थोड़ा और पास आ जाइये. क्यों बेचारी को दूर से दिखा कर तरसा रहे हैं।

अंकल मुस्कुराते हुए खिसक कर एकदम मेरे सामने आ गए।चूंकि मैं बेड पर बैठी थी इसलिए उनका लंड ठीक मेरी चूची के सामने था।

तभी अचानक स्वाति ने मेरा एक हाथ पकड़ कर अंकल के लंड पर रख प्रिया और बोली- अरे, इसे सिर्फ आंख से ही नहीं, हाथ से छूकर भी देख कितना मोटा और लम्बा है ये!अंकल के लंड को छूटे ही मेरे बदन में एकदम सुरसुरी सी दौड़ गई।

पहले तो मैंने सोचा कि हाथ हटा लूं मगर हटाने का मन नहीं हुआ।अंकल का लंड एक दम गर्म था.मेरे पकड़ते ही उनके लंड में तनाव आने लगा।

मैं लंड को मुट्ठी में पकडे एकटक देख रही थी।

स्वाति ने फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर लंड की चामड़ी को पीछे खींच प्रिया जिसके लंड का गुलाबी-गुलाबी सुपारा पूरा खुल कर चमक उठा।

वह बोली- ऐसे देखते हैं लंड को … समझी? कितना मस्त लग रहा है ना!

अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा देखते ही मेरी चूत और मुँह दोनों में पानी आ गया।मन कर रहा था कि तुरंत लंड को मुंह में लेकर चूस लूं.मगर मैंने किसी तरह खुद को काबू में रखा, बस चुपचाप लंड पकड़े बैठी रही।

तभी आंटी ने जैसे मेरे मन की बात सुन ली हो, उन्होंने स्वाति से मुस्कुराते हुए कहा- अरे स्वाति, अपने दोस्त को ये तो बताओ कि ये टेस्टी भी होता है एक बार चख कर तो देख। अभी थोड़ी शरमा रही होगी बेचारी। ऐसा कर कि एक बार तुम बता दो कि इसका टेस्ट कैसे लेते हैं।

इस पर स्वाति हंसने लगी और मेरे गाल पर चिकोटी काट कर बोली- अरे सब कुछ मुझे ही सिखाना पड़ेगा क्या?फ़िर उसने अंकल से कहा- पापा, थोड़ा इधर आइये।

मैंने अंकल की ओर देखा तो वे चुपचाप खड़े मुस्कुरा रहे थे।

तब मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया जिसके बाद वो थोड़ा खिसक कर स्वाति के सामने खड़े हो गए।

स्वाति ने अपने पापा का लंड हाथ से पकड़ा और लंड की स्किन को पीछे खींच प्रिया और झुक कर सुपारे को मुँह में भर कर चूसने लगी।

मुझे ये न्यूड फॅमिली Xxx सपने जैसा लग रहा था।विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये सब सच है।मेरी लैगिंग चूत के पास एकदम गीली हो चुकी थी।

उधर स्वाति मजे से अपने पापा के लंड को चूस रही थी।

एक-दो मिनट चूसने के बाद स्वाति ने लंड पर से अपना मुंह हटा लिया और मुझसे बोली- अब देख लिया ना, ले अब तू भी टेस्ट कर!अंकल थोड़ा खिसक कर मेरे पास आ गए।

लंड को देख कर वैसे ही मेरी लार टपक रही थी कि कब मुंह में लेकर चूसना शुरू करूं।लेकिन थोड़ा शरमाने का नाटक भी जरूरी था।

मैंने एक हाथ से अंकल के लण्ड को पकड़ा और स्किन को पीछे खींच कर सुपारे को पूरा खोल प्रिया।स्वाति के थूक सेअंकल के लंडका गुलाबी सुपारा एक दम चमक रहा था।

मैं थोड़ा झुकी और सुपारे को मुंह में लेकर चूसने लगी।

उधर अंकल ने अपना एक हाथ को मेरे सर को पकड़ कर हल्का-हल्का अपने कमर को हिला कर मेरे मुँह में लंड को आगे पीछे करने लगे।

न्यूड फॅमिली Xxx कहानी में आपको मजा तो जरूर आ रहा होगा.मुझे भी कमेंट्स में बताएं.

न्यूड फॅमिली Xxx कहानी का अगला भाग:मेरी सहेली ने मुझे अपने पापा से चुदवाया- 3

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मेरी सहेली ने मुझे अपने पापा से चुदवाया

कुल भाग: 4
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