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चुदाई की कहानी पठन समय: 5 मिनट पढ़ा गया: 1,022 बार

पानी भरने के बहाने

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05 Nov 2015 को प्रकाशित

पानी भरने के बहाने
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प्रेषक – अमित

तब मैं कुछ काम से उनके घर में चला गया, मैंने देखा कि वह उनकी बच्ची को दूध पिला रही थी। मैं देखता ही रह गया और उन्होंने भी मुझे देखा था पर अनदेखा कर प्रिया। मैं समझ गया औरर वहाँ से निकल गया, पर मैं फिर से वापिस आया तो वह लेट कर बच्ची को सुला रही थी। तब मैं उनके पास जाकर बैठा और कहा, “टीवी ऑन करो।” क्योंकि रिमोट उनके पास था। मैंने रिमोट के बहाने उनकी चूचियों पर दबाव प्रिया और उन्होंने कुछ नहीं कहा, तो मैं समझ गया कि आग दोनों तरफ है। मैं बैठ गया और धीरे-धीरे उनको बहाने से छूने लगा, वह कुछ नहीं कह रही थी। धीरे-धीरे मैंने उनकी चूचियाँ दबाईं जो ३४ की थीं। वाऊ, क्या मज़ा था आज भी सोचता हूँ तो लंड कड़क हो जाता है। वह भी मज़े ले रही थी। तब मैंने कहा, “करने दो ना!” उसने मना किया, “नहीं अभी नहीं, बाद में।”

पर मैं तो चढ़ गया उनके ऊपर और चूचियाँ दबाने लगा। वह भी सिसकारी भरने लगीं आआआआहहहहहह… ऊऊउउणअम्म्म्म्म्म्म्मम… हम्म्म्म…

मज़ा आ रहा था और मेरे दोस्त ने मुझे आवाज़ लगा कर मुझे बुलाया। उस दिन मैंने उसे प्यासा छोड़ प्रिया। अब मुझे दूसरे दिन का इन्तज़ार था क्योंकि मेरे मम्मी-पापा गाँव जाने वाले थे। अगले दिन सुबह वो ५:३० बजे गाँव गए। तब मैं तैयार हो गया, और मीना के ख्यालों में खोकर घर में ब्लू फिल्म देखने लगा साथ ही मुठ भी मार ली।

६ बजे उसका पति काम पर चला गया तब मैं फिर से तैयार हो गया। तभी नल में पानी आया तो मुझे एक विचार सूझा…

मैं उसके घर के पास गया और उससे कहा, “मीना आँटी, मुझे भी मटके में पानी भर दो ना।” उसने कहा, “जा, मैं थोड़ी देर में आती हूँ।”

“मैं तो कब से तैयार हूँ” मैंने मन में सोचा। मैं अपने घर आ गया, और आगे का दरवाज़ा बन्द कर लिया। वह थोड़ी देर में पिछले दरवाज़े से आ गई। उन्होंने पानी भर प्रिया, और जैसे ही जाने को हुई तो मैंने तुरन्त उनको पीछे से पकड़ लिया आर वह छूटने का नाटक कर रही थी। मैं तो चिपक ही गया और उनकी चूचियाँ दबाने लगा। वह आआआआआहहह… उउउऊऊऊहहहहह… जैसी आवाज़ें निकालने लगी। मैंने धीरे-धीरे उन्हें ब्लाऊज़ के बटन खोल दिए। गुलाबी ब्रा में से सफेद चूचियाँ दिख रहीं थीं और मैं उन्हें दबाने लगा। वह भी उत्तेजित हो गई थी, और उसने विरोध करना बन्द कर प्रिया था।

मैंने उनकी ब्रा उतार दी… वाऊउउउ… मैं तो चकित ही रह गया। उनकी निप्पलों को नज़र ना लगे। मैं १०-१५ मिनटों तक चूचियों को खूब दबाया और मेरा लंड एकदम से खड़ा और कड़क हो गया था और पाजामे का तम्बू बना रहा था। मैंने उससे लंड चूसने को कहा, पहले तो उसने मना किया पर बाद में मान गई। उसने मेरा लंड निकाला और थोड़ा सहलाया और मुँह में डाला। वाऊऊउउ… क्या मज़ा था। १५ मिनटों तक वह उसे चूसती रही। मैं आनन्द के सागर में गोते लगा रहा था… आआआहहहहह…. और चूसो…. ऊऊऊउउउउउम्म्म्ममममम…

और मैंने पानी उसके मुँह में छोड़ प्रिया। वह उठी और बाथरूम से साफ होकर आ गई। अब तो वह बहुत ही उत्तेजित हो चुकी थी। पर मेरा लंड सिकुड़ चुका था। उसने फिर से उसे मुँह में लिया और ५ मिनटों की चुसाई के बाद उसे दुबारा खड़ा कर प्रिया। मैं फिर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा और फिर उसके ऊपर चढ़ उसका घाघरा ऊपर करके उसकी पैन्टी खींच ली और थोड़ी देर उसे देखने लगा।</p.

वह चुदवाने को बेक़रार थी, उसने मुझसे कहा, “जो भी करना है, जल्दी करो।” पर मैं उसकी चूचियों को चूसने में ही लगा हुआ था। तभी उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर फिराने लगी। मैं समझ गया कि अब तड़पाना अच्छा नहीं है। मैं भी खड़ा हो गया और मेरे बेडरूम में जाकर उसे पटक कर उसके ऊपर चढ़ गया। मैं धीरे-धीरे अपना लंड डालने लगा। मेरा लंड ७ इंच का है। मैंने धीरे से धक्का लगाया और पूरा लंड डाल प्रिया। उसका मुँह खुल गया और आँख से पानी आ गया। मैंने धीरे-धीरे लगाने शुरु किए… आआआहहहहह… ऊऊउउउम्म्म्म्ममम म्म्मम…

जल्दी… फास्ट… फास्ट… – वह चिल्लाती जा रही थी। मैंने भी अपनी गति बढ़ा दी और ज़ोरों के धक्के मारने लगा।

वह और भी अधिक उत्तेजित होने लगी। उसकी सिसकारी आ रही थी…. प्लीज़… आआआहहह…. .ओओआआमम्म्म्म्ममम…

अब वह झड़ने वाली थी, पर मुझे देर थी। उसने कहा बस अब रुक जाओ। पर मैं मेरे स्टेशन से पहले कैसे रूकूँ। मैं चोदता ही गया, फिर थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया। मैंने समय देखा तो मैंने ३५ मिनटों तक चुदाई की थी। अब मैं खड़ा हो गया और वह उसके कपड़े ठीक करके जाते-जाते बोली, “मेरी ज़िन्दगी में पहली बारी मैंने ऐसी मस्त चुदाई का मज़ा लिया है।”

अब जब भी मुझे मौक़ा मिलता है, मैं उसे चोद लेता हूँ।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

राजा गौतम

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

दिनेश रोहट बिहार

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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