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नौकर-नौकरानी पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 903 बार

मेरा पहला सेक्स कल्लू के साथ

ऋचा

01 Nov 2010 को प्रकाशित

मेरा पहला सेक्स कल्लू के साथ
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मैं रिचा हूँ पटियाला से। मैं बी टेक की छात्रा हूँ। मैं आपको अपनी कहानी बताने जा रही हूँ जो मेरे साथ उस समय बीती जब मैं बारहवीं क्लास की परीक्षा देकर फ़्री हुई थी। मेरे पेरेन्ट्स सरकारी नौकरी मे हैं। इस लिये दिन भर मैं घर मैं अकेली रहती थी। हमारा एक नौकर जिसका नाम कल्लु है, भी हमारे साथ ही रहता है। उसकी उमर करीब 30 साल है और वो एक अच्छा सेहतमन्द और ताकतवर आदमी है।

एक दिन मैं अकेली बैठी थी। पेरेन्ट्स अभी अभी ऑफ़िस गये थे। कल्लु मेरे पास आया और कहने लगा- क्या कर रही हो?मैं बोली- कुछ भी तो नहीं।वो बोला- मेम साहब, अगर बुरा ना मानो तो एक बात बोलूं।मैं बोली- कहो।

उसने कहा- मेम साहब आज मुझे अपनी घरवाली की बहुत याद आ रही है।उसकी घरवाली नेपाल के गांव मे रहती है।

मैंने कहा- बोलो, मैं क्या कर सकती हूँ।वो बोला- मेम साहब, मेरे साथ थोड़ी देर बात कर लेना। इससे मेरा जी थोड़ा हलका हो जायेगा।मैंने कहा- नो प्रोब्लम।मैं उसके घर परिवार के बारे मैं पूछने लग गई।

बातों बातों में वो बोला- मेम साहब, हम अपनी घरवाली के साथ बहुत मज़ा लेते हैं।मै बोली- तुम क्या बात कर रहे हो। कौन सा मज़ा लेते हो?वो बोला- मेम साहब सेक्स का बहुत मज़ा लेते हैं।मैं पूछ बैठी- यह सेक्स मैं क्या मज़ा होता है।

उसने कहा- मेम साहब आज आपको पूरी डीटेल में समझाता हूँ।

फिर उसने कहा- पहले मैं उसके सारे कपड़े उतार देता हूँ, फिर उसके सारे शरीर को चूमता हूँ, फिर उसके बदन पर अपना हाथ फ़िराता हूँ, ऐसा करने से वो भी मस्त हो जाती है। मैं फिर उसके मम्मे चूसता हूँ।

मैंने उसको टोक प्रिया- मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रही है।

वो बोला- मेम साहब, फ़िकर नोट, मैं आपको प्रेक्टिकल करके बताता हूँ।

इससे पहले मैं कुछ समझ सकती, वो मुझे चूमने लगा।

मैं उस दिन स्कर्ट टॉप पहने थी। उसने मेरे दोनो हाथो को पकड़ लिया और एक हाथ से पीठ के पीछे अपने एक हाथ से कस दिये। और वो मेरे लिप्स को चूसने लगा। उसकी सांसो से शराब के स्मेल आ रही थी। वो एक ताकतवर आदमी था। वो बोला रिचा मेम साहब, तुमहरे लिप्स बहुत रसदार हैं। इतने रसभरे लिप्स तो मेरी घर वाली के भी नहीं हैं।

मैंने कहा- कल्लु बहुत हो गया। अब मुझे छोड़ दो।

वो बोला- मेम साहब, मैं आज 4 बजे की गाड़ी पकड़ कर निकल जाऊंगा। तुम लोग मुझे ढूंढते ही रह जाओगे। पर जाने से पहले मैं तुम्हारी अच्छी तरह चुदाई करना चाहता हूँ।

वो बोला- मेम साहिब, तुम्हारे हाथ तो सिर्फ़ प्यार करने के लिये हैं। उसने मुझे पीठ के पीछे से पकड़ लिया और मुझे लेकर सोफ़ा पर बैठ गया। मैं उसकी गोद मैं बैठी थी। उसने अपने हाथ मेरे पेट पर चलना शुरु कर प्रिया।

फिर धीरे धीरे वो अपना हाथ को उपर मेरी छाती पर लाने लगा, उसका हाथ मेरी छाती पर आ गया। वो मेरी छाती को कस कर दबाने लगा। यह मेरे लिये बहुत दर्दभरा था।

मैं चिल्लाई- ऊऊईई छोड़ दो मुझे, पर उसने मेरे मम्मों को मसलना जारी रखा। फिर दूसरे हाथ से उसने मेरे टॉप का बटन खोल प्रिया। वो अपना हाथ टॉप के अन्दर ले गया। और मेरे मम्मों को दबाने लगा।

मेरे शरीर मे सनसनाहट सी होने लगी। जीवन मैं पहली बार किसी का हाथ मेरे मम्मो पर लगा था। कुछ समय के लिये उसका छूना मुझे अच्छा लगा पर वो बहुत जोर जोर से दबा रहा था। मुझे दर्द भी बहुत हो रहा था। फिर उसने मेरे निप्प्ल को ढूंढ कर उसे मसलना शुरु कर प्रिया। मेरे निपल कुचलने से मेरे बदन में मीठी सी आग भरने लगी। मेरे तन बदन मैं एक मस्ती सी छानी शुरु हो गई थी।

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मेरी चूत गीली होने लगी थी। पर वो इससे अन्जान था। थोड़ी देर के बाद उसने अपने दूसरे हाथ से मेरे टॉप को थोड़ा ऊपर उठाया और फिर दोनो हाथो से एक झटके साथ टॉप को उतर कर फैंक प्रिया। फिर उसने मेरी ब्रा के स्ट्रेप्स नीचे कर दिये और मेरे मम्मे ब्रा से बाहर उछल कर आ गये। उसने दोनो मम्मो को पकड़ लिया और धीरे धीरे दबाने लगा।

कितना मीनूर अहसास होने लगा था। अब मैं कोई विरोध नहीं कर रही थी, और करना भी नहीं चाहती थी। मुझे अब होने वाली मस्त चुदाई मस्ती छाने लगी थी। उसने मुझे खड़ा किया और मेरी स्कर्ट का हुक खोल प्रिया और एक झटके के साथ मेरी स्कर्ट और पेण्टी को उतार प्रिया। इस तरह उसने मुझे पूरी तरह नंगी कर प्रिया। फिर उसने अपनी शर्ट और लुन्ग़ी खोल दी। वो भी पूरी तरह नंगा था।

उसका शरीर बहुत ताकतवर था और उसका लण्ड करीब 9 इन्च लम्बा था और करीब 2 इन्च मोटा था। पहले तो मै उसे देखती ही रह गई। उसका शरीर गठा हुआ था। लण्ड उफ़नता हुआ, बहुत ही तन्ना रहा था। फिर मैं उसे देख कर बहुत डर गई।

उसने मुझे पकड़ कर बेड पर लेटा प्रिया और मेरे उपर सवार हो गया। पहले उसने मेरे सारे शरीर को चूमा फिर उसने मेरे मम्मो को दबाया फिर उन्हे अपने मूह मैं लेकर बारी बारी चूसने लगा।एक मस्ती का एहसास मेरे दिलो दिमाग पर हावी होने लगा। उसके शरीर का लुभावना दबाव मुझ पर परने लगा। मेरी चूत मैं एक मस्ती भरी खुजली होने लगी। खुजली बढती ही गई। मेरे निप्पल तन कर खड़े हो गये थे। उसने अपना लण्ड मेरी चूत पर टिका प्रिया और एक झटका लगा प्रिया। लण्ड थोड़ा सा अन्दर चला गया।

मैं चीख पड़ी- आआयईईए आआहहह ऊऊओह्हह हैईई माआआअर्रर्र गाआआययईई नाआअहह्हीइन

फिर उसने एक जोरदार झटका मार प्रिया और लण्ड करीब आधा अन्दर चला गया। मेरी सील भी टूट गई। मेरी चूत से खून बहने लगा। मैं चीखना चाहती थी पर उसने मेरे लिप्स को अपने लिप्स मैं लेकर दबा रखा था, वो बोला- मेम साहब तुम बहुत मस्त हो। आज तुम्हारी सील तोड़ने मैं मज़ा आ गया।

उसने एक और जोरदार झटका लगाया और उसका लण्ड पूरी तरह मेरी चूत मैं घुस चुका था। मैं चीखना चाहती थी पर चीख नहीं सकती थी। मैरी आंखो से आंसु टपक रहे थे।

वो बोला- थोड़ी देर रुक जाता हूँ। फिर उसने मेरे मम्मो को चूसना शुरु कर प्रिया। इससे मुझे बहुत आराम मिला और मेरा दर्द भी कम हो गया। फिर उसने धीरे धीरे लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरु कर प्रिया। फिर दर्द की एक धीमी लहर उठी, पर अब साथ मैं मज़ा भी आ रहा था। कुछ देर बाद दर्द पूरी तरह से खतम हो गया। अब तो बस मज़ा ही मज़ा था। उसने पूरी मस्ति के साथ

मेरी चुदाई की। उसका मोटा मस्त लण्ड मेरी चूत की खुजली मिटाने में लगा था। मैंने भी अपनी गाण्ड को उठा कर उसका साथ प्रिया। खूब उछल उछल कर उससे चुदवाया। थोड़ी देर के बाद मैं झड़ गई।

पर वो अभी तक पूरी जोर से चुदाई कर रहा था।

उसने मेरी टांगे ऊपर उठा दी। फिर उनको लेफ़्ट घुमा प्रिया और मेरी गाण्ड से पकड़ कर मुझे घोड़ी बना प्रिया। इस पोजीशन मैं मुझे बहुत मज़ा आया और मैं एक बार फिर से चरमरीमा तक पहुंच गई। पूरे एक घण्टे की चुदाई के बाद वो ठण्डा हुअ। 15 मिनट के बाद उसने फिर से मुझे पकड़ लिया और मेरी चूत को चाटने लगा। उसने अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर घुसा दी। मैं फिर से

आनन्द के सागर मैं गोते लगाने लगी। मुझे अथाह सुख मिलने लगा था। अब की बार उसने मुझे लेटा प्रिया और अपना लण्ड मेरे मुख मैं डाल प्रिया। लण्ड बहुत ही मोटा था। फिर भी मस्ती में मैंने उसे खूब दबा दबा कर चूसा। उसके सुपाड़े को को दांतो से खूब कुचल कुचल कर उसको मस्त कर प्रिया। वो तो मस्त जीभ से मेरी चूत को चाटने लगा। इस तरह मैं एक बार फिर गर्म हो गई।

अब कि बार उसने मुझे बेड के सहारे खड़ा कर प्रिया और मेरी चिकनी गाण्ड मैं अपना लण्ड घुसेड़ प्रिया। उससे मुझे बहुत ज्यादा दर्द हुया। करीब आधा घण्टा तक मेरी गाण्ड चोदने के बाद वो ठण्डा हो गया। मेरा एक एक अंग दुख रहा था। उसके बाद उसने साढे तीन बजे तक मेरी पांच बार चुदाई की और फिर जल्दी से अपने कपड़े लेकर भाग गया। जाते जाते उसने कहा, मेम साहब मैं आपको हमेशा याद रखूंगा। तुम मेरी सेक्स की देवी हो। जो मज़ा तुमने मुझे प्रिया है वो आज तक किसी भी औरत मैं नहीं है।

उस दिन के बाद यह बात मैंने किसी को भी नहीं बताई, पर मुझे ये अपनी पहली चुदाई को हमेशा याद याद आती रहती है। सच मैं, मैंने भी इसमे काफ़ी मज़ा लिया था।

अगर कोई इसके बारे में कुछ भी पूछना चाहे तो मेल कर सकते है मेरी आई डी ये हैsupport@mohakkisse.com0103

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

रंजन चौधरी

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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