पोर्न चाची Xxx कहानी में मेरी विधवा चाची ने मुझे पटा कर अपनी चूत को मेरे लंड से चुदवा लिया था. मुझे भी चाची को चोदने में मजा आता था. हम दोनों मौक़ा पाते ही चुदाई कर लेते थे.
फ्रेंड्स, मेरा नाम नीरज है और मैं अपने फौजी चाचा जी की विधवा चाची की चुदाई की सेक्स कहानी में एक बार पुनः आप सभी का स्वागत करता हूँ.कहानी के पहले भागचाची ने मुझे सेक्स के लिए तैयार कियामें अब तक आपने पढ़ लिया था कि चाची मेरे साथ मिशनरी पोज में लगभग पांच मिनट तक चुत चुदवाने के बाद पोज बदलने की कहने लगी थीं और मैं उनके ऊपर से उठ कर सोफ़े पर बैठ गया था.
अब आगे पोर्न चाची Xxx कहानी:
चाची मेरे सामने एकदम नंगी खड़ी थीं और उनकी गांड एकदम मस्त, गोल-मटोल थी.मैंने उन्हें अपनी तरफ खींचा और उनकी गांड को जोर-जोर से दबाना शुरू कर प्रिया.
उनका पेट थोड़ा सा निकला हुआ था, मैंने उस पर मुँह रखकर गुदगुदी की तो चाची ने हंसते हुए मुझे कसकर पकड़ लिया.वे बोलीं- नीरज … तूने तो मुझे मस्त मजा दे प्रिया यार … अब जल्दी से अपना पानी निकाल ना!
चाची की हवस इतनी तेज थी कि वे महज 10 मिनट में ही चरम सुख पर पहुंच गई थीं.
मैं सोफे पर बैठ गया और चाची मेरी तरफ मुँह करके मेरे लंड पर बैठ गईं.दोनों पैर मेरे दोनों तरफ फैलाकर मुझे कसकर लिपट गईं और ऊपर-नीचे ऊपर-नीचे करके उछलने लगीं.
मेरा मुँह उनके दोनों चूचों को चूस रहा था.पूरे रूम में उनकी काजल और चूड़ियों की खनक गूँज रही थी.
चाची चुदाई में बिल्कुल भी नाटक नहीं कर रही थीं.उनकी चूत अब पूरी तरह खुल चुकी थी, दर्द बिल्कुल नहीं हो रहा था, बस मजा ले रही थीं.
उनके मुँह से बस ‘उँह … उँह … उँह … सी … सी … सी … ’ की सिसकारियां निकल रही थीं.उनकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी, जिससे जोर-जोर से ‘पच-पच … पच-पच … ’ की आवाज आ रही थी.
थोड़ी ही देर में चाची का पानी निकल गया.वे मूड से बाहर हो चुकी थीं, पर मेरे लिए अभी भी लंड पर कूद रही थीं.
मेरे होंठों पर उनके होंठ चिपके हुए थे, जैसे नशा उतार रही हों.कुछ मिनट लगातार लौड़े पर कूदने के बाद चाची ने मुझे पूरी तरह थका प्रिया और मैंने अपना सारा माल उनकी चूत के अन्दर उड़ेल प्रिया.
जैसे ही मेरा गाढ़ा माल उनकी चूत में डिस्चार्ज हुआ, चाची के पूरे बदन में बिजली सी दौड़ गई.वे मुझसे कसकर लिपट गईं, लंड चूत में ही रखकर चुपचाप आराम करने लगीं.
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें उठाया, हम दोनों बाथरूम में गए और अच्छे से साफ होकर बाहर आ गए.मैंने सोफे पर गिरा पानी पौंछा, फिर बेड पर लेट गया.
चाची भी आ गईं. हम दोनों ब्लैंकेट ओढ़कर लेट गए.मैंने AC ऑन कर प्रिया.चाची मुझसे चिपक कर लेट गईं.
मैंने उनके जिस्म को सहलाते हुए पूछा- चाची … मजा आया ना?चाची बोलीं- बहुत मजा आया … पर तुझे नहीं लगता कि ये गलत था, जो हमने किया?
मैंने हंसकर कहा- चाची, आपका हक था मुझ पर … ये गलत नहीं है. बस ये सोचो कि मैं एक मर्द हूँ और आप औरत … वैसे आप ही तो पहले रात में मेरे लंड को हिलाकर अपनी वासना जगा रही थीं!
चाची शर्माती हुई बोलीं- अब से तू मुझे जब चाहे, जब मन करे … चोद लेना!मैंने कहा- आप इतनी हॉट जो हैं चाची … कोई भी चोदे बिना नहीं रह सकता!
चाची ने फिर से आंख मारते हुए कहा- एक बार और करते हैं ना!
मैंने तुरंत उनके बूब्स दबाने शुरू कर दिए और एक हाथ उनकी चूत पर मसलने लगा.चाची की चूत पहले टाइट थी, पर अब लंड डालने के बाद ढीली पड़ चुकी थी.सील तो पहले ही टूट चुकी थी, पर अब मैं उनकी चुत का असली भोसड़ा बनाने वाला था.
मैंने चाची से कहा- अभी तो सिर्फ एक बज रहा है … प्रियंका 4 बजे तक आएगी. अब अपनी चुत का भोसड़ा बनवाने के लिए तैयार हो जाओ चाची! मैं दस मिनट में आता हूँ.
यह बोलकर मैंने कपड़े पहने और दौड़कर मेडिकल स्टोर से सेक्स टैबलेट ले आया.
मैं घर लौटा, टैबलेट खाई और फिर चाची के रूम में घुस गया.
चाची बेड पर लेटकर मोबाइल देख रही थीं … और उनकी आंखों में फिर वही हवस चमक रही थी.
मैंने फटाफट अपने कपड़े उतारे और चाची के ऊपर लेट गया.चाची सिसकारती हुई बोलीं- शुरू कर दो ना … अब और कितना इंतज़ार कराओगे?
मैंने कहा- पहले मुँह में लो चाची!वह पहले तो ‘नहीं … ’ बोलीं, फिर खुद ही मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.
उन्होंने जल्द ही मेरा पूरा लंड चूस चूस कर गीला कर प्रिया.अब मैंने उनकी जांघें चूमनी शुरू कीं, हल्का-हल्का काटने लगा.
चाची के पूरे बदन पर काटने के निशान बना दिए. फिर मैं नीचे आया और उनकी चूत को पीने लगा.
थोड़ी देर तक चुत चूसने के बाद मैंने उनकी ही साड़ी से दोनों हाथ बेड के पोल से बांध दिए.फिर दो उंगलियां उनकी चूत में डालकर 5 मिनट तक लगातार अन्दर-बाहर करता रहा.चाची तड़प-तड़प कर मजा ले रही थीं, कमर उछाल-उछाल कर सिसकारियां ले रही थीं.
मेरी उंगलियों से उनकी चूत पूरी लाल हो चुकी थी.
मैंने ड्रेसिंग टेबल से सरसों का तेल लिया, चाची की चूत पर मला और अपने लंड पर भी अच्छे से लगा लिया.चाची बोलीं- हाथ खोल दे ना अब!मैंने मना कर प्रिया- नहीं चाची, एक बार ऐसे ही करते हैं!
फिर मैंने अपना मोटा लंड उनकी चूत में पेल प्रिया.चाची ज्यादा ओवररिएक्ट नहीं करती थीं – जब दर्द होता तभी चिल्लातीं, वरना शांति से ‘आम्म … आम्म … ओह्ह … ओह्ह … ’ की मीनूर आवाज करतीं.
मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया, पैर चौड़े करके मिशनरी में चोदना शुरू किया.चाची के हाथ अभी भी बंधे थे, मैं उनकी कमर पकड़ कर जोर-जोर से पेल रहा था.
मुझे लंड पर हल्की जलन हो रही थी पर हवस के आगे दर्द कुछ भी नहीं था.मुझे धीरे-धीरे चोदने का शौक था, इसलिए 10 मिनट तक आराम से पेलता रहा.
फिर मैंने चाची के हाथ खोल दिए और उन्हें पेट के बल लिटा प्रिया, उनके पैर फैलाकर फिर से चूत मारने लगा.चाची अब फुल मजे में थीं.
तभी मैंने स्पीड बढ़ा दी.चाची दर्द से चिल्लाने लगीं- धीरे … धीरे करो ना …पर मैंने एक नहीं सुनी.
वे मुझे हटाने की कोशिश कर रही थीं, पर उनके ऊपर 65 किलो का सांड चढ़ा था, जो उनकी चूत का भोसड़ा बनाने पर तुला था.थोड़ी देर बाद चाची को फिर मजा आने लगा, पर दर्द इतना था कि उनकी आंखों से आंसू बहने लगे.हर जोरदार झटका लगते ही वे तड़प कर बिस्तर की चादर मुट्ठी में भींच लेतीं और आंसुओं के साथ सिसकारियां लेतीं.
करीब 20 मिनट लगातार चोदने के बाद चाची का पानी निकला, चूत और भी चिकनी हो गई.अब लंड और आसानी से अन्दर-बाहर होने लगा.
पानी निकलते ही चाची रुकने को बोलीं, पर मैंने तो गोली खा रखी थी.उसका असर शुरू हो चुका था.
मैंने और जोर-जोर से पेलना शुरू कर प्रिया.चाची का दर्द बढ़ गया, वे चिल्लाने लगीं- नीरज … छोड़ दे बेटा … हो गया … बहुत दर्द हो रहा है … छोड़ दे ना!
बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां भी……-1
पर मैं कहां रुकने वाला था. मैं उनके ऊपर चढ़ा हुआ था, तो वे हिल भी नहीं पा रही थीं.थोड़े और जोरदार झटकों के बाद चाची की आवाज बदल गई.
पहले जो वे मजा ले रही थीं, अब दर्द से तड़पकर ‘आह्ह … ऊह्ह … नहीं … ना … हो गया … ’ चिल्ला रही थीं.
थोड़ी देर बाद चाची फिर मूड में आने लगीं, पर दर्द में ही चुद रही थीं.
फिर मैंने उन्हें बेड के किनारे घोड़ी बना प्रिया और खुद बेड से नीचे खड़ा होकर उनकी चूत में उंगलियां करने लगा.
मुझे लगा कि अब चूत पूरी तरह खुल चुकी है. जैसे ही लंड डाला, एकदम आसानी से अन्दर चला गया.
मैंने चाची की चोटी पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा. कभी मैं धक्का मारता, कभी चाची खुद कमर उठाकर लंड अन्दर लेतीं.
मेरे हाथों में उनके भारी-भारी बूब्स लहरा रहे थे और उनकी चूत में मेरा मोटा लंड मजदूरी कर रहा था.थोड़ी देर बाद मैं झड़ने वाला था.मैंने सारा माल उनकी चूत में छोड़ प्रिया और फिर तेज-तेज धक्के लगाने लगा.
तभी चाची भी झड़ गईं.उनकी चूत से पानी के साथ मेरा गाढ़ा वीर्य भी बाहर बहने लगा.
मैं बाथरूम में जाकर साफ हुआ, चाची भी साफ हुईं.फिर मैंने बेड ठीक किया, बिखरे कपड़े समेटे और सोफे पर लेट गया.
तभी चाची आईं और मेरे लंड पर थप्पड़ मारती हुई बोलीं- इतनी देर तक लगातार कैसे चोदा रे तूने?मैंने हंसकर कहा- गोली खाकर चाची!चाची मुस्कुराती हुई बोलीं- चूत का हाल-बेहाल कर प्रिया रे तूने!
वे मेरे ऊपर लेट गईं.हम दोनों थककर चुपचाप एक-दूसरे से लिपट कर लेट गए.मेरे जीवन का ये हसीन लम्हा मुझे हमेशा याद रहेगा.
फिर हम दोनों ने किस करके कपड़े पहने और अपने-अपने काम में जुट गए.
थोड़ी देर बाद प्रियंका आ गई.शाम को उसके साथ गार्डन गया.
वहां दियांशी और उसकी बहन आराध्या आईं.आराध्या ने प्रियंका को बर्थडे कार्ड प्रिया.
दियांशी मुझसे बातें करने लगी और हम दोनों बहुत क्लोज हो गए.उसने मुझे अगले दिन आराध्या के 18वें बर्थडे पर बुलाया.
घर लौटकर प्रियंका पढ़ने बैठी और मैं चाची के साथ किचन में था.
बीच-बीच में हम किस करते, कभी मैं उनकी कमर पकड़ कर अपना खड़ा लंड उन पर चिपका देता, कभी साड़ी ऊपर करके जांघों पर हाथ फेर देता.
चाची मना करने लगीं, पर मैंने कहा- ब्लोजॉब दे दो ना चाची!वे बोलीं- प्रियंका को पता चल गया तो? मैंने मना किया और जबरदस्ती ब्लोजॉब के लिए उन्हें मना लिया.
वे घुटनों के बल बैठीं, मेरा लोअर नीचे किया और लौड़े को मुँह में ले लिया.जैसे ही मुँह में लिया, मैंने उनके बाल पकड़कर लंड गले तक घुसा प्रिया.
दस मिनट में मेरा काम तमाम हो गया.सारा माल चाची ने नीचे गिरा प्रिया.
रात में मैं जल्दी सो गया.
अगले दिन सुबह प्रियंका को ट्यूशन छोड़ने गया.लौटा तो देखा चाची पौंछा लगा रही थीं.
मैंने दरवाजा बंद किया और हॉल में ही दीवार से टिकाकर चाची को चोदने लगा.
चुदाई होने के बाद मैं नहाने चला गया, तब तक चाची ने भी काम खत्म कर लिया.जब वे नहाने गईं, मैं उनके रूम में घुस गया.
चाची नहाकर आईं तो मुझे देखकर बोलीं- यहां क्या कर रहे हो?मैंने झट से उनकी ब्रा उतारी, बेड पर लिटाया, पेटीकोट ऊपर किया, पैंटी निकाली और चाची के मना करने पर भी जबरदस्ती चोदने लगा.
मैं उनके पूरे जिस्म को अपनी बांहों में लेकर जोर-जोर से पेल रहा था.थोड़ी देर बाद मेरा हो गया, पर इस बार वीर्य बहुत कम निकला.
अब चाची के साथ सेक्स की पूरी आदत हो चुकी थी.वे इतनी सेक्सी माल हैं और अपनी इस 36 की उम्र में भी टीन गर्ल्स की तरह चुदती हैं.
उस रात हम लोग आराध्या के बर्थडे में गए.पार्टी में मैं दियांशी का इंतज़ार कर रहा था.
जब वह आई तो मैं बस देखता रह गया.मैं उस रात दियांशी से काफी अंतरंग बातें करके घर लौटा.
रात में चाची के साथ एक बार और चुदाई करके सो गया.
ऐसे ही एक महीने में पोर्न चाची के साथ मैंने 55-60 बार Xxx किया.
एक बार हम दोनों को चुदाई करते हुए प्रियंका ने दरवाजे की आड़ से देख लिया.मुझे पता चल गया था कि वह देख रही है पर मैंने कोई रिएक्शन नहीं प्रिया.चाची को पता नहीं चला.
बाद में मैंने प्रियंका को यह कह कर राजी कर लिया कि तुम्हारी मम्मी को मर्द की जरूरत है, बाहर किसी के साथ जाने से बेहतर मैं ही उन्हें चोद देता हूँ.
प्रियंका तो बहुत तेज थी.उसने खुद बताया- मम्मी पहले अकेले में उंगली करती थीं.मैं मुस्कुराने लगा.
फिर वह बोली- जितना मर्जी चोदो भैया, उनकी आग बुझा दो!मुझे लगा ये तो अपनी मां को खुलकर चुदवाने पर तुली है.
अब मुझे किसी का डर नहीं था.पापा लौटकर भी फैक्ट्री के काम में बिजी रहते थे, उनका रूम नीचे था, इसलिए कोई प्रॉब्लम नहीं थी.
ये थी मेरी चाची रंजीता के साथ चुदाई की सेक्स कहानी.दियांशी को कैसे पेला, वह सेक्स कहानी अगली बार लिखूँगा.
पोर्न चाची Xxx कहानी पर अपनी राय मुझे मेल और कमेंट्स में बताएंsupport@mohakkisse.com