होम पर वापस जाएं
Pehli Chudai पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 929 बार

सहेली के भैया ने मेरी सील तोड़ी-2(Saheli Ke Bhaiya Ne Meri Seal Todi-2)

mamtasingh

30 Jan 2016 को प्रकाशित

सहेली के भैया ने मेरी सील तोड़ी-2(Saheli Ke Bhaiya Ne Meri Seal Todi-2)
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

पिछला भाग पढ़े:-सहेली के भैया ने मेरी सील तोड़ी-1

एक दिन मैं घर पर मम्मी के साथ उनके काम में हाथ बटा रही थी, कि तभी माया आई।

वो बोली: चलो ना कंचन हम लोग चलते हैं बाग में थोड़ा झूला झूलने।

मम्मी हम दोनों को थोड़ा गुस्से भरी नज़रों से देखी।

फिर मम्मी ने कहा: लगता है जल्द ही तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी।

इस पर माया ने हंसते हुए कहा: हां चाची, अब तो जल्दी से कंचन के लिए कोई दूल्हा ढूंढ ही लो। नहीं तो यह बेचारी झूला ही झूलती रह जाएगी।

फिर हम दोनों सहेलियां झूला झूलने के लिए बाग में आ गए। हम दोनों झूला झूल रहे थे, कि तभी मैं चारों ओर देखी। अजय कहीं नजर नहीं आ रहा था। तब मैंने माया से पूछा-

मैं: माया आज तो तेरा यार कहीं दिख ही नहीं रहा है?

माया: हां यार आज तो झूलने में भी मजा नहीं आ रहा है। पता नहीं आज क्यों नहीं आया?

तभी अजय के एक दोस्त आया माया के पास और बोला कि-

दोस्त: माया, अजय तुम्हें खेतों में बुला रहा है। उधर पश्चिम में जो ईख के खेत लगे हुए हैं वह अजय के ही है। वह उसी में मिलेगा तुम्हें, चली जाओ।

मैं माया को मना करने लगी कि उधर जाना ठीक नहीं होगा, पर माया खुद तो गई ही, मुझे भी साथ लेकर चली आई। थोड़ी देर में हम लोग खेत के पास पहुंचे। तब वहां अजय हमें दिखा। अजय ने माया को अपने पास बुलाया और धीरे-धीरे हम खेतों के बीच में आ गए। खेतों के बीच में बड़ा ही आरामदायक खटिया डाला हुआ था, और उसे पर चादर बिछी हुई थी।

अजय ने मुझसे कहा: तुम थोड़ा बाहर हम दोनों का वेट करोगी क्या? हम दोनों थोड़ा प्यार भरी बातें करेंगे।

मैं माया की तरफ देखी तो उसने मुस्कुरा कर मुझे जाने का आदेश दे दिया। मैं भी मन मार कर वहां से बाहर निकल गई। मैं बाहर बैठ कर ईख को चूसने लगी। अंदर क्या हो रहा था मुझे मतलब नहीं था। मैं बैठ कर ईख चूस रही थी कि तभी अजय के दोस्त आया और मेरे पास बैठ गया?

दोस्त: और बताओ कंचन, तुम यहां बैठ कर ईख चूस रही हो, और उधर तुम्हारी सहेली पूरा जवानी का रस चूस रही है।

मैं थोड़ा झिझकते हुए बोली: तुम्हें शर्म नहीं आती ऐसी बातें करते हो?

दोस्त: अरे इसमें शर्म की कौन सी बात है? यही तो उम्र है मजा लेने की। तुम चाहो तो तुम्हें भी मिल सकती है?

उसने मेरा हाथ को पकड़ लिया और मेरे चेहरे के पास अपने चेहरे को लाया। मैं घबरा गई थी। उसकी गर्म सांसे मेरे चेहरे पर महसूस होने लगी। मैं झट से अपने हाथ को छुड़ाई और वहां से उठ खड़ी हो गई।

मैं: तुम्हें शर्म नहीं आती एक अकेली लड़की को छेड़ते हो?

दोस्त: अरे कंचन तुम तो बचकानी हरकत कर रही हो। क्या तुम्हें मजा नहीं लेना है? देखो तुम्हारी सहेली माया किस तरह उसके नीचे दबी पड़ी है, चलो मैं तुम्हें दिखाता हूं?

मैंने झटके से अपना हाथ खींचा, उसे एक थप्पड़ मार दी, और बोली-

मैं: दोबारा कभी ऐसी हरकत भूल कर भी मत करना। मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं।

अजय का दोस्त अपने गाल को मसलते हुए, मुझे गुस्से से देखते हुए वहां से निकल गया। मैं वहीं पर अकेली बैठी रह गई कि तभी मेरे अंदर भी कुछ-कुछ होने लगा। ऐसा लगा जैसे मेरे शांत मन में किसी ने पत्थर मार दिए हो। मेरा मन अशांत हो गया था। बार-बार उसके द्वारा पकड़े गए मेरे हाथ, उसके बदन के मेरे बदन से टकराव, और उसकी गर्म सांसों को मेरे चेहरे पर महसूस होना यह बार-बार मुझे विचलित कर रहा था।

यह भी पढ़ें (Recommended)

Mama Ki Kuwari Beti Aashta Ki Chudai

मैं ना चाहते हुए भी यह सब सोचने लगी। मुझे मन में बार-बार ख्याल आने लगा कि अंदर माया और अजय क्या कर रहे होंगे? क्या सच में अजय माया को दबोच लिया होगा? क्या सच में माया अजय के नीचे दबी पड़ी होगी? मैं बार-बार इस सोच को हटाना चाहती थी, पर ना चाहते हुए भी मेरे मन में और यह सब उठ रही थी?

थोड़ी देर बैठने के बाद मुझसे ना रह गया और मैं चोरी से उसे देखने के लिए अंदर जाने लगी। थोड़ी ही अंदर गई थी कि मुझे माया और अजय दिखाई दिए। उन्हें देख कर तो मेरी धड़कनें पूरी रफ्तार में भागने लगी। मैं अवाक रही। दोनों ही बिल्कुल नंगे थे, और माया अजय के लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी। अजय खड़ा होकर उसके सर को पकड़ के अपनी आंखों को बंद कर उसके मुंह को चोद रहा था।

थोड़ी देर बाद माया खटिया पर लेट गई। फिर अजय उसके बीच में आया और टांगों को फैला कर अपने लंड को उसकी बुर पर रख के धक्का दे मारा। माया तो जैसे उछल पड़ी। दोनों ही तेज रफ्तार में चुदाई करना शुरू कर दिए। अजय उसके कंधे को पकड़ के जोर-जोर से धक्का मार रहा था।

मैं यह तो जानती थी कि माया कई लड़कों के साथ चुदाई कर चुकी थी, और मैं आज माया को चुदाई करते हुए साक्षात पहली बार देख रही थी।

चुदाई माया की हो रही थी और सनसनी मेरे बुर में उठ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पेट के नीचे कोई नल खुल गया हो और उस पानी रिस रहा हो। दोनों की चुदाई अब खत्म होने वाली थी, इसलिए मैं जल्द ही वहां से निकल कर बाहर जाकर चुप-चाप बैठ गई। थोड़ी देर बाद माया अपने बालों को ठीक करते हुए मेरे पास आई और बोली कि, “चलो कंचन घर चलते हैं।”

फिर हम दोनों घर आ गए। शाम को राकेश भैया फिर से हम दोनों को पढ़ाने लगे। उस दिन मेरा मन बिल्कुल भी पढ़ने में नहीं लग रहा था। माया उस दिन भी नींद के आगोश में आ गई, और वहीं बगल में लेट कर सो गई। मेरा मन पढ़ने में ना लगता है देख राकेश भैया बोले।

राकेश: कंचन क्या हुआ है तुम्हें आज? तुम बिल्कुल भी पढ़ाई पर फोकस नहीं कर रही हो?

मैं थोड़ी घबराई लेकिन बोली-

मैं: ऐसी बात नहीं है भैया, मैं फोकस कर रही हूं। पर आज पता नहीं मेरा मन पढ़ने में बिल्कुल भी नहीं लग रहा है।

राकेश भैया मुस्कुराए और बोले: कोई बात नहीं। आज तुम्हें थोड़ा इंटरेस्टिंग टॉपिक पढ़ाता हूं।

फिर राकेश भैया थोड़ा अलग पढ़ाना शुरू किया, जिसमें मुझे आनंद उतना तो नहीं आया, पर बीच-बीच में हंसी मजाक जो कर रहे थे राकेश भैया, उसमें मुझे अच्छा लग रहा था। पढ़ाते-पढ़ाते भैया की आदत थी कि वह मुझे टच करते, कभी मेरे बॉडी को रगड़ देते, कभी मेरे गाल को खींच देते, कभी मेरी जांघों को सहला देते थे।

मैं इन सब बातों पर ध्यान नहीं देती, और केवल हंस देती थी। राकेश भैया पता नहीं क्या सोचते, वह मुझे हंसते हुए बड़े प्यार से देखने लगते थे, और बोलते थे?

राकेश: पता है कंचन तुम हंसते हुए बहुत ही प्यारी लगती हो। बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लगने लगती हो।

मैं राकेश भैया के इस तरह से तारीफ करने पर शर्मा गई, और शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगी। तभी राकेश भैया मेरे पास बिल्कुल सट गए और मेरे चेहरे को पकड़ कर अपने चेहरे के सामने किया और बोले।

राकेश: तुम सच में बहुत ज्यादा सुंदर हो कंचन। तुम्हारा चेहरा और तुम्हारे बदन की बनावट मेरे दिल को तार-तार कर देती है ऐसा लगता है कि तुमसी तो कोई परी भी नहीं होगी।

यह सब बोलते हुए राकेश भैया मेरे चेहरे के पास अपने चेहरे को लाकर मेरी आंखों में देख रहे थे। मुझे भी पता नहीं क्या हो गया था मैं उनकी आंखों में देख रही थी और उनकी गर्म सांस को अपने चेहरे पर महसूस कर बहुत ही अच्छा फील कर रही थी। मुझे सुबह की माया की चुदाई देख कर जो गर्मी जगी थी, वह गर्मी अब मेरे अंदर फिर से जाग रही थी। राकेश भैया मेरे चेहरे को अपने हथेलियां में थामे हुए थे और मेरे से बिल्कुल सटे हुए थे? मैं लड़खड़ाती हुए आवाज में बोली-

मैं: राकेश भैया माया यहीं पर सो रही है। यदि वह जाग गई और हमें इस हालत में देख ली तो वह क्या सोचेगी? हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। यह सब पाप है। मैं यह सब नहीं करना चाहती?

राकेश: पाप-वाप कुछ नहीं होता है कंचन। जिंदगी मिली है मजे लेने के लिए, और हमें मजे से जिंदगी को जीना चाहिए ना? कि डर करके? और माया तो सो रही है वह अभी नहीं उठने वाली, जब तक उसे कोई उठाएगा नहीं।

यह सब बोलते हुए राकेश भैया अपने हथेलियां से मेरे चेहरे को थाम कर अपने चेहरे को बिल्कुल मेरे होंठों के पास लेकर चले आए। हम दोनों के बीच बिल्कुल खामोशी हो गई थी। मेरी आंखें अब बंद होने लगे थी, और राकेश भैया का होंठ मेरे होंठ से रगड़ खाने लगे थे।

मैं पूरा कोशिश कर रही थी कि राकेश भैया का साथ ना दूं पर मुझे पता नहीं क्या हो गया था। मैं भी राकेश भैया के चेहरे की गर्म सांस महसूस कर रही थी, और उनके होंठ पर मुलायम होंठ रगड़ रही थी। वह बड़े प्यार से मेरे होंठ को अपने होंठ में दबाए चूसना शुरू कर दिए, और मैं भी उनके साथ देने लगी?

इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में।

अगला भाग पढ़े:-सहेली के भैया ने मेरी सील तोड़ी-3

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Chut faad kar mujhe chhinaal bana diya-1
Pehli Chudai

Chut faad kar mujhe chhinaal bana diya-1

Doston mera naam Jasmin hai. Aap mujhe pyar se randi, gasti, chhinaal, ghodi, haramzadi bhi bula sakte hai. Haa, sahi padha aapne. Ab mujhe in naamo ki aadat lag gayi hai. Aur jab bhi koi mujhe in naamo se bulata hai, to lagta hai pyar se bula rah...

7 मिनट 442
Mama Ki Kuwari Beti Aashta Ki Chudai
Pehli Chudai

Mama Ki Kuwari Beti Aashta Ki Chudai

Mera naam Ashu hai aur main Moradabad UP ka rehne wala hun. Ye meri pehli kahani hai, agar koi mistake ho jaye toh maaf karna.

10 मिनट 1,008
Ek Anadi Sex Jodi – Part 1
Pehli Chudai

Ek Anadi Sex Jodi – Part 1

Hi mai apni sex stories in hindi pehli baar likh raha hu mera naam Kanhiya hai, mai 20 year ka hu, aaj se teen saal pahle ki baat hai jab mai 18 saal ka tha, mere pados me ek ladki thi jiska naam sarita hai, wo bahut sudar hai, uski height 5feet hai.

12 मिनट 1,054

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।