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सलहज ने मुरझाये लंड में नई जान फूंकी-1

शरद सक्सेना

20 Jul 2016 को प्रकाशित

सलहज ने मुरझाये लंड में नई जान फूंकी-1
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दोस्तो, एक बार फिर आप सब के सामने आपका प्यारा शरद एक नई कहानी के साथ हाजिर है।

आपके मस्त मस्त ई-मेल मुझे प्राप्त होते हैं जिन्हें पढ़कर बहुत मजा आता है। आपके इसी मेल की वजह से और मेरे साथ हुई घटना के कारण आपके पास मेरे शब्दों के भण्डार से निकल कर नई कहानी का सृजन होता है।

आपमें बहुत से ऐसे लोग होंगे जो वाइल्ड सेक्स करने का मजा लेते होंगे। बस मजा लीजिए, पर किसी का दिल दुखाकर यौन सुख मत लीजिए। यदि आपका पार्टनर तैयार है तो उसका मजा अलग ही आता है।

आपमें से बहुत लोग अपनी बातें भी मुझसे शेयर करते हैं। मुझे आपकी बातें बहुत अच्छी लगती है और मेरे शब्दों का भण्डार भी बढ़ता जाता है।इसके लिये भी आप सभी को धन्यवाद।

चलिये मैं आपको अब एक ऐसी कहानी बताना चाहता हूँ जो मेरे साथ किस कारण घटी, मुझे पता भी नहीं चला, लेकिन मेरी सलहज (साले की वाईफ) के वजह से हुई।वैसे मेरा कोई अपना साला नहीं है, मेरी वाईफ अपने मां-बाप की इकलौती है। ये सलहज जिसका नाम नीलू है, मेरी वाईफ के ममेरे भाई की पत्नी है और इससे मेरी पहली मुलाकात भी शायद इनके किसी रिश्तेदार की शादी में हुई थी।

इधर शादी की रस्म (ऐठोम के समय) जब सभी मेहमान खाना खा कर जा चुके थे और हम सभी घर वाले बचे थे तो उनमें जितने मर्द थे वे एक किनारे आकर वाईन के साथ सेलीब्रेट करने लगे और औरतें एक तरफ बैठ कर गप्पें हाँक रही थीं कि तभी ये नीलू हम लोगों के पास आई और बोली- अगर आप लोगों का पीने का कार्यक्रम हो गया है तो अब चलिये डांस करें।

उसकी बात सुन कर हम सभी डांस फ्लोर पर आ गये और घर की सभी औरतें और मर्द मिल कर डांस करने लगे।अचानक ही नीलू ने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे साथ डांस करने लगी, उसके इस तरह से अचानक मेरे साथ डांस करने से सभी हतप्रभ रह गये और मैं भी हतप्रभ था क्योंकि मेरा उससे ज्यादा परिचय नहीं था।

फिर भी सभी ताली बजा कर उसका और मेरे डांस का आनन्द लेने लगे। गाना खत्म होने पर ही हमारा डांस रूका और वो मुझसे चिपक गई।मैंने धीरे से उसे अपने से अलग किया और किनारे आकर अपनी बीवी के साथ बैठ गया और फिर सभी मिल कर खाना खाने लगे।

उस शादी के बाद काफी समय बीत गया, नीलू से सम्पर्क नहीं हुआ, बात आई और गई हो गई।

इधर दो महीने से मेरी बीवी की तबियत ज्यादा खराब रहने लगी और अपनी खराब तबियत के कारण वह काफी चिड़चिड़ी हो गई थी और अपने पुट्ठे पर भी हाथ नहीं रखने देती थी।वैसे तो मेरे पास हरियाली की कमी नहीं थी, लेकिन यह इत्तेफाक ही था कि जब से मेरी बीवी बीमार हुई उसका भी अकाल पड़ गया और मेरे लंड महराज धीरे-धीरे मुरझाने लगे कि अचानक एक सुबह नीलू अपने पतिदेव मतलब मेरे साले साहब के साथ धमक पड़ी।

मेरी बीवी बिस्तर पर थी, और मैं घर के कामों में लगा हुआ था और बिना घर के काम को खत्म किये मैं ऑफिस भी नहीं जा सकता था, ऊपर से असमय मेहमानों का इस तरह आना मुझे थोड़ा अखरने सा लगा था। पर मैं क्या करता, मन मसोस कर मैंने उनका स्वागत किया।

जब दोनों मेरी बीमार बीवी से मिले और उसका हाल चाल लिया और जब ये पता चला कि वो पिछले दो महीने से बीमार है तो शिकायती लहजे में बोले- क्या जीजाजी, आपने हमें खबर दे दी होती।

मैंने भी मुस्कुराकर जवाब प्रिया- मुझे नहीं मालूम था कि बीमारी इतनी लम्बी खींच जायेगी।

खैर दोनों को नहाने धोने के लिये कहकर मैंने उनके लिये नाश्ता का इंतजाम किया और फिर सभी को नाश्ता करा कर मैं ऑफिस चला गया।वे दोनों घर पर थे।

शाम को लौटने के बाद देखा तो नीलू मेरी बीवी के पास बैठी हुई उसके सर को दबा रही थी और बातें भी कर रही थी।मेरी बीवी के चेहरे पर काफी समय बाद मुस्कान दिखाई दी।

साले साहब बाहर से घूम कर आये और फिर नीलू घर के बाकी कामों में लग गई और मैं और मेरे साले साहब बीवी वाले कमरे में बैठ कर गप्पें लगाने लगे।

रात का खाना खाने के बाद मैंने उन दोनों की व्यवस्था पास के दूसरे बेड रूम में कर दी।

रात को करीब दो बजे मेरी नींद पेशाब लगने की वजह से टूटी, मैं पेशाब करने उठा और पेशाब करके फिर सोने लगा तो नींद नहीं आई। मैं टहलने के लिये बाहर आ गया।

मैं टहल ही रहा था कि मुझे दबी सी आवाज आई- मत करो, अभी इच्छा नहीं है।और दूसरी आवाज जो मेरी साले साहब की थी- अरे यार, आधी रात है, सब सो रहे हैं। देखो तो मेरा लंड तना हुआ है इसको शांत तो कर दो।

नीलू की आवाज आई, तुम्हारा तो जब देखो तब लंड तना रहता है, तुम बहुत परेशान करते हो।‘तुम हो ही इतनी सेक्सी… जब तेरे जिस्म से मेरा जिस्म टच करता है तो मेरा लंड अपने आप तेरी चुत की गुफा ढूंढने लगता है।’

‘मैं कपड़े नहीं उतारूंगी, बस पेंटी उतार कर तेरे लंड को अपनी चुत के अन्दर ले लेती हूँ।’‘नहीं यार, देख सब सो रहे हैं, आज खुल कर मजा लेंगे। घर पर सबके रहने की वजह से वहाँ पर भी तू केवल पेंटी उतार लेती है और मेरे लंड को शांत कर देती है। आज वाईल्ड सेक्स करते हैं।’‘वाईल्ड सेक्स मतलब?’ नीलू बोली।

‘जैसे ब्लू फिल्म में!’ साले साहब की आवाज आई।उनकी बात सुनकर मैं दरवाजे के की होल से झाँकने लगा कि तभी लाइट जल उठी, मैं डर के मारे थोड़ा अलग हो गया, मुझे लगा कि कोई बाहर आने वाला है।

लेकिन एक बार फिर नीलू की आवाज आई- लाईट तो बन्द कर लो।‘नहीं, आज मैं अपनी नीलू को रोशनी में पूरी नंगी देखना चाहता हूँ।’

मैंने हिम्मत करके एक बार की होल से फिर झांका देखा तो साले साहब बोल रहे थे- और तुम्हारी चुत को चूमकर उसकी महक को सूंघना चाहता हूँ। मैं तुम्हारी चुत चाटूं और तुम मेरे लंड को चूसो।

नीलू बिस्तर पर ही खड़ी थी। चूंकि दरवाजे के ठीक सामने ही बेड लगा था तो अन्दर का पूरा सीन साफ साफ दिखाई दे रहा था, नीलू ने अपने साड़ी और ब्लाउज उतार प्रिया था और पेटीकोट उतार रही थी।पेटीकोट उतारने के बाद वो केवल काली पेंटी पहने हुये थी।

साले साहब जिनका नाम मुकेश था वो बिस्तर पर इस तरह बैठे हुए थे कि उनका मुंह नीलू के कमर के नीचे यानि कि उसकी चुत के बिल्कुल पास था।मुकेश बोल उठे- नीलू तुम केवल पेंटी में कितनी सेक्सी लग रही हो। मुझे तुम्हारी चुत सूंघने दो।इतना कहने के बाद मुकेश के दोनों हाथ नीलू के कूल्हों पर जम गये थे।

थोड़ी देर बाद नीलू की पेंटी मुकेश की उंगलियों में फंस कर नीचे जा रही थी और नीलू के उभरे हुए कूल्हे मेरी नजर के सामने थे। मुकेश शायद नीलू की चुत पर अपनी जीभ लगा चुके थे, तभी तो नीलू सिसियाने लगी और बोले जा रही थी- उम्म्ह… अहह… हय… याह…मुकेश, बहुत अच्छा लग रहा है अपनी जीभ ऐसे ही चलाते रहो।

‘हाँ नीलू, तुम्हारी चुत चाटने का मजा तो मुझे भी आ रहा है, पर ये क्या, तुम अपने चुत को साफ नहीं रखती?’‘क्या करूँ मुकेश, मौका नहीं मिलता।’‘चल ठीक है, यहाँ तो मौका मिलेगा न, तुम चाहो तो आज बना लेना।’‘तुम अभी मेरी चुत ऐसे ही चाटो, अगर मुझे मौका मिलेगा तो मैं बना लूंगी।’

मुकेश के हाथ नीलू के कूल्हे में काफी धंसे हुए थे और उसने अपनी पूरी ताकत के साथ कूल्हे को फैला प्रिया जिससे नीलू की काली गांड के बीचोंबीच हल्के गुलाबी रंग का छेद साफ दिखाई पड़ने लगा।

नीलू मस्ती में आ चुकी थी, अपनी उन्मादी आवाज से वो मुकेश का उत्साह बढ़ाते हुए बोली- मुकेश बहुत सही, इसी तरह मेरी बुर को अपने दांत से काटो, बड़ा मीठा मीठा दर्द है, मजा आ रहा है।मुकेश की एक उंगली नीलू के गांड के अन्दर भी चल रही थी।

5-7 मिनट बीते होंगे कि नीलू सिसयाते हुए बोली- मुकेश, अब अपना मुंह हटा लो, मेरा निकलने वाला है।पर मुकेश नीलू के चुतड़ को और दबाये हुये था और नीलू कह जा रही थी- मुकेश बस करो, अब नहीं अपना मुंह हटाओ, मेरा निकलने वाला है।

पर जैसे मुकेश के कानों तक नीलू की बात नहीं जा रही थी।कुछ ही देर में नीलू ढीली पड़ गई और मुकेश के सर से उसका हाथ हट गया।इधर मुकेश का भी हाथ नीलू के चुतड़ से हट चुका था।

नीलू मुकेश के ऊपर बैठ गई और बोली- मुकेश, ये तुमने क्या किया, मुझे यह अच्छा नहीं लगता।‘आज सब चलेगा, इतनी बात मानी है, तो आज खुल कर सेक्स करते हैं। घर में कहाँ मौका मिलता है। तुम अपने कपड़े उठा लेती हो और मैं तुम्हारे अन्दर डालकर जल्दी से तुम्हें चोद देता हूँ। आज अलग कमरा मिला है, हमें कोई देखने वाला और सुनने वाला नहीं है, इसलिये मुझे तुम्हारी चुत का पानी पीना था, सो मैंने पी लिया। अब तुम बिना किसी झिझक के और शर्म के तुम भी मेरा साथ दो। अब तुम्हारी बारी!

उनकी बात को सुनकर और क्रियाकलापों को देखकर मेरा शेर भी जागने लगा था और मेरा हाथ अपने आप मेरे नाग को दबोच चुका था। मैं कसम खा कर कह रहा हूँ कि मैं कतई भी यह नहीं चाह रहा था कि मैं उनके एकान्त में हो रहे खेल का हिस्सा बनूँ, पर मेरी नजर वहाँ से हट ही नहीं रही थी।

तभी नीलू थोड़ा सा और झुकी और शायद अपने होंठ मुकेश की छाती से लगा दिए।‘वाह नीलू, मजा आ गया, आज तुम मेरा दूध निकालने की कोशिश करो। मेरे निप्पल को ऐसे ही चूसो, मजा आ रहा है, अरे इतना तेज नहीं काटो हाँ बहुत ही मजा आ रहा है। बस ऐसे ही!’

थोड़ी देर तक नीलू ने मुकेश के निप्पल को चूसा फिर मुकेश ने उसे घुमा कर अपने से चिपका लिया, इस पोजिशन पर नीलू की गोल चूची मेरी नजर के सामने आ चुकी थी।क्या मस्त चूचे थे। मुझे लगता है कि नीलू की छाती 32 या 34 की होगी और निप्पल थोड़ा तने हुए थे।

फिर नीलू को लेटा कर उसके ऊपर अपनी टांग चढ़ाकर उसके निप्पल को अपने मुंह में भर लिया और दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच फंसा कर उसे मल रहा था।‘बहुत मजा आ रहा है!’ मुकेश बोला।

नीलू ने जवाब प्रिया- मुझे भी बहुत मजा आ रहा है, पर अब अपने लंड को मेरी चुत के अन्दर डाल दो।‘डाल दूंगा मेरी नीलू, बस एक काम मेरा भी कर दो।’‘बोलो क्या?’‘पहले वादा करो कि तुम मना नहीं करोगी?’

दो चार बार मुकेश के कहने पर नीलू ने आखिर में कह ही प्रिया- बाबा मैं तुम्हारी बात मानूंगी, अब बोलो?मुकेश उसकी इस बात को सुनकर उसके कान में कुछ कहने लगा।‘न बाबा ना… मुझे यह अच्छा नहीं लगता, मैं यह नहीं करूंगी।’‘देखो तुमने वादा किया था, आज तुम मेरी बात मानोगी।’‘वो तो ठीक है, लेकिन मुझे अच्छा नहीं लगता!’

‘तो ठीक है, मैं मुठ मार कर सो जाता हूँ!’‘फिर मजे करने का क्या फायदा? ठीक है, चलो लेट जाओ।’

मुकेश पेट के बल लेट गया और नीलू उसके ऊपर लेट गई और धीरे धीरे उसकी पीठ को चूमते हुए उसके चुतड़ के पास आ गई और कूल्हे को चूमने लगी।

तभी मुकेश बोला- कूल्हे को मत चूम, गांड की छेद में अपना जीभ चलाओ। थोड़ा झिझकते हुए उसने अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी।

‘शाबाश नीलू, मजा आ रहा है, इसी तरह चाटो, मैं भी तुम्हारी गांड चाटूंगा।’

थोड़ी देर चाटने के बाद नीलू एक बार फिर मुकेश के ऊपर चढ़ गई, मुकेश थोड़ा सा टेढ़ा हुआ तो नीलू उसके बगल में लेट गई। मुकेश ने अपना हाथ लगाते हुए नीलू को पेट के बल लेटा प्रिया और उसके कूल्हे को चूची समझ कर दबाने लगा। फिर कूल्हे को फैलाते हुए उसने अपनी जीभ गांड की छेद पर लगा दी।

मुकेश के जीभ लगाते ही एक बार फिर नीलू बोल उठी- मुकेश, मुझे यह अच्छा नहीं लग रहा है, मत चाटो मेरी गांड!‘दो मिनट और मेरी रानी, फिर मजा आने लगेगा।’

वास्तव में दो मिनट बाद नीलू बोल उठी- हाँ हाँ, ऐसे ही, मेरी गांड में गुदगुदी हो रही है।

फिर मुकेश ने नीलू को सीधा किया और उसकी टांग़ों के बीच बैठकर उसकी चुत में अपना लंड पेल प्रिया और चोदना शुरू कर प्रिया। थोड़ी देर चोदने के बाद मुकेश 69 की पोजिशन बनाते हुए अपने लंड को नीलू के मुंह के पास ले गया और खुद अपनी जीभ लगा कर उसकी चुत चाटने लगा।नीलू भी बड़े चाव से उसके लंड को चूस रही थी।

थोड़ी देर चूसाचासी के बाद एक बार फिर मुकेश नीलू के टांगों के बीच आकर उसकी चुत को चोदने लगा, वो धक्के पे धक्के मारा जा रहा था और नीलू और जोर से और जोर से कहकर मुकेश का उत्साह बढ़ाये जा रही थी।

करीब 5-7 मिनट तक वो नीलू को रफ्तार के साथ चोदता रहा। चोदते-चोदते मुकेश बड़बड़ाने लगा- नीलू, मैं झड़ने वाला हूँ!‘हाँ मैं भी झड़ने वाली हूँ।’

बस बामुश्किल 10-12 धक्के मुकेश ने और लगाये होंगे कि वो निढाल होकर नीलू के ऊपर लेट गया और नीलू बड़े हल्के हाथों से मुकेश की पीठ थपथपाने लगी।फिर दोनों एक दूसरे से चिपक गये और मुकेश ने अपनी टांग नीलू के ऊपर रखते हुए बोला- नीलू आज तुमने मेरा साथ प्रिया… बहुत मजा आया!‘हाँ मुकेश, मुझे भी बहुत मजा आया लेकिन तुम मेरे मना करने के बाद मेरा पानी पिये जा रहे थे।’

अरे यार छोड़ो, वैसे भी मुझे मेरे बीवी के जिस्म से निकलता हुआ एक-एक रस का स्वाद लेना है।’‘तो ठीक है, मुझे भी तुम्हारे लंड का पानी पीना है।’‘ठीक है बाबा, अब आधे घंटे से पहले मेरा खड़ा होना नहीं है, जब फिर इसमें जान आने लगेगी तो पी लेना!’

मेरा काम खत्म हो चुका था और मैं चलने लगा कि एक बार फिर मुकेश की आती हुई आवाज ने मुझे की-होल से झांकने पर मजबूर कर प्रिया।मुकेश बोलने लगा- नीलू मोबाईल पर एक ब्लू फिल्म है, आओ देखते हैं।

कह कर दोनों उठे और बेड पर टेक लगा कर बैठ गये, मुकेश ने अपने मोबाईल पर कही हुई ब्लू फिल्म लगा दी होगी।नीलू का सिर मुकेश की छाती पर था और दोनों ही मोबाईल देखने में मग्न हो गये।

मैं भी अपने लंड को दबाये हुये अपने बिस्तर पर आकर सोने की तैयारी करने लगा, क्योंकि एक तो दिन भर की थकान से मुझे नींद भी आ रही थी और दूसरी बात मेरा लंड भी तन चुका था और फिर मुझे चुत चाहिये थी, चुत मिलनी नहीं थी और सड़का मैं मारना नहीं चाहता था।

इसके अलावा मुझे सुबह जल्दी उठना भी था, क्योंकि घर का काम निपटाने के बाद ही मुझे ऑफिस जाना था। हाँ इन दो मेहमानों की सेवा भी करनी थी, जिन्होंने मुझे अभी अभी नेत्र सुख प्रिया। तो मैंने सोने में ही अपनी भलाई समझी।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

सलहज ने मुरझाये लंड में नई जान फूंकी

कुल भाग: 7
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

राज राठौर

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

अभी शर्मा

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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