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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 541 बार

Samjhota, Shajish Aur Sex – Episode 2

Pratima Kavi ?

07 Dec 2022 को प्रकाशित

Samjhota, Shajish Aur Sex – Episode 2
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आपने मेरी पिछली हिन्दी सेक्सी कहानी में पढ़ा कि एक औलाद के लिए तरसते हम पति पत्नी ने किस तरह समझौता करते हुए एक साजिश रची और पति के दोस्त को फंसा कर मेरे साथ सेक्स करवा लिया। काम निकलने के बाद उसको डरा धमका कर भगा भी दिया।

हमारा काम अभी भी पूरा नहीं हुआ था, और हमें ये साजिश फिर से रचनी थी। आज की कहानी में आपको मैं बताउंगी कि अगला शिकार हमने किसको बनाया और कैसे।

हमारी जो मोडस ऑपरेंडी था उसके हिसाब से हम एक ही मर्द को दो बार नहीं फंसा सकते थे वरना पकड़े जाते। अब हमने सोच लिया था कि एक के बाद एक दो तीन लोगो को फंसाना होगा, जिससे मेरे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाये। साथ ही साथ बाकी की बातों का भी ध्यान रखना था जो मैंने आपको पिछली सेक्स कहानी में बताई थी।

हमें अपना अगला शिकार काफी आसानी से मिल गया। पिछली कहानी में आपको याद होगा मेरे पति अशोक रात को रहने के लिए अपने ऑफिस के सहकर्मी के यहाँ गए थे, जो कि हमारे घर के पास ही रहता था। वो एक दो बार हमारे घर आ चूका था। उसका नाम रौनक था और 22 साल का बैचलर लड़का था। मुझसे 3 साल ही छोटा था।

रौनक बहुत ही शरीफ लड़का था, पति की तरह लंबा था। शायद उसकी शराफत की वजह से उसको फंसाना थोडा मुश्किल होता पर उसको डराना उतना ही आसान होता, तो फिर हमने उसी को चुना।

हमें इतना तो पता था कि सुबह के वक्त किया हुआ सेक्स प्रेग्नेंट होने के लिए ज्यादा फायदेमंद होता हैं। हमने इसी समय के हिसाब से अपना प्लान बनाना शुरू किया। पिछले प्लान की कामयाबी के बाद हमारा हौसले बुलंद थे।

रौनक रोज सुबह जॉगिंग के लिए हमारे घर के पास वाले गार्डन में आता हैं। हमें इसी वक्त उसको पकड़ना था। शनिवार और रविवार को छुट्टी होती हैं तो हमने रविवार की सुबह का प्लान बनाया।

रविवार सुबह जल्दी उठ हमने सारा सेटअप कर लिया था। सुबह सात बजे के करीब दूध वाला थैली दरवाज़े के बाहर टांग कर बेल बजा कर चला जाता हैं। पति ने बाहर जाकर चेक किया दूध आ गया था, उन्होंने दूध वही छोड़ा और अंदर आकर रौनक को फ़ोन घुमाया।

रौनक को फ़ोन पर बताया कि उसकी एक मदद चाहिए। पति ने उसको बताया कि वो शनिवार को ही आउट ऑफ़ स्टेशन के लिए निकल गए थे और आज सुबह आने वाले थे पर अब दोपहर तक ही पहुंचेंगे। सुबह से वाइफ को यानि मुझे फ़ोन कर रहे हैं पर फ़ोन लग नहीं रहा हैं। शायद वाइफ पीहर जाने का प्लान बना रही थी तो शायद सच में चली गयी हैं और ट्रेवल कर रही हैं इसलिए फ़ोन नहीं लग रहा।

उनको रौनक से ये मदद चाहिए कि दूध वाला थैली लगा कर गया हैं तो वो आकर डोरमेट के नीचे छिपा कर रखी चाबी से दरवाज़ा खोले और दूध अंदर फ्रीज में रख दे, ताकि दोपहर पति के आने तक दूध खराब न हो जाये।

रौनक वैसे भी जॉगिंग पे निकलने ही वाला था और हमारे घर की तरफ ही आने वाला था तो उसने हां कर दी। हमने जल्दी से पोजीशन लेनी शुरू कर दी।

मैंने पहले से इस दिन के लिए लिए ख़रीदा हुआ पारदर्शी गाउन पहन लिया जो घुटनो तक ही आता था। गाउन के अंदर कुछ नहीं पहना था तो थोड़ा बहुत अंदर का सामान दिख रहा था।

मैं हॉल में सोफे के पास नीचे कारपेट पर लेट गयी। एक पाँव सोफे के ऊपर और एक जमीन पर था, जिससे मेरे दोनों टांगो के बीच के गैप से सब कुछ दिख रहा था। पति ने मेरी टांगो कि पोजीशन चेक कर ली जिससे जो भी दरवाज़े के अंदर आये उसे सबसे पहले मेरे टांगो के बीच का खुला दरवाज़ा दिखे।

सेंटर टेबल पर शराब की लगभग खाली बोतल, एक गिलास और साथ में चखना रख दिया। ताकि कोई भी आये तो उसे लगे कि मैं शराब के नशे में धुत हूँ। मैं शराब नहीं पीती पर थोड़ी सी अपने होठों पर और थोड़ी अपने कपड़ो पर छिड़क ली ताकि शरीर से शराब की बदबू आये।

पति अब अंदर बेडरूम में गए और हमारे वॉक इन क्लोसेट में छुप गए।

कुछ मिनटों के बाद ही ताला खुलने की आवाज़ आयी। मैंने आँखें इस तरह बंद की कि सामने से लगे वो बंद हैं पर पलकों के नीचे थोड़े गैप से थोड़ा दीखता रहे। ये भी थोड़ी रिहर्सल के बाद पति से टेस्ट करवा के किया हुआ था।

अब दरवाज़ा खुला और रौनक हाथ में दूध की थैली लिए अंदर घुसा और उसकी नज़रे मुझ पर पड़ी। उसकी आँखें मेरी दोनों टांगो के बीच पड़ी थी जो कि उसके खुले मुँह से लग गया था, उसको मेरा हरा भरा माल दिख रहा था। वो तेजी से चलता हुआ मेरे पास आया।

मेरी आँखें बंद देख कर मुझे आवाज़ लगाई। उसने अब टेबल पर पड़ी शराब और चखना देख कर अंदाज़ा लगा लिए था कि क्या माजरा हैं। उसने एक बार पाँव तो एक बार हाथ हिला कर उठाने की कोशिश की।

फिर वो मेरे पैर की तरफ आकरबैठ गया और मेरी टांगो के बीच के माल को घूरने लगा। उसकी आँखों में प्यास थी। थोड़ी देर घूरने के बाद वो वो आगे आया और मेरे पारदर्शी गाउन के अंदर के अंग देख कर मेरे बदन पर जगह जगह हाथ लगा कर मुझे झकझोर कर उठाने की कोशिश करने लाग। उठाने की कोशिश कम पर मेरे बदन को महसूस करने की कोशिश ज्यादा थी।

वैसे तो बहुत शरीफ बनता हैं पर था तो एक मर्द, वो भी एक बैचलर। ऊपर से सामने तिजोरी खुली पड़ी थी तो उसका ईमान डोल गया था। तभी उसका फ़ोन बजा। उसने दूध उठाया और किचन की तरफ जाते हुए फ़ोन पर बात करने लगा।

किचन से लौटते वक्त थोड़ा पानी गिलास में ले आया और थोड़ा मेरी आँखों पर छिड़कने लगा। मैंने आँखें मिचमिचाई और फिर वैसे ही बंद कर दी।

तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। मैं थोड़ा घबराइ कि इस वक्त तो कोई आता नहीं। इस चीज का तो हमने कोई काउंटर प्लान ही नहीं बनाया था। मैं अगर उठ जाती तो प्लान फ़ैल हो सकता था। तब तक रौनक ने दरवाज़ा खोल दिया और एक दूसरे लड़के को अंदर ले लिया। मैंने देखा ये तो उसका रूममेट संदीप हैं।

मैंने लेटे रहने में ही भलाई समझी। अब संदीप मेरी टांगो के बीच घूर रहा था और रौनक को बोल रहा था क्या माल हैं यार। आज तो लॉटरी लग गयी। चल इसको पूरी नंगी कर देते हैं और मजे ले लेते हैं ये तो वैसे भी नशे में हैं कुछ पता नहीं चलेगा।

रौनक ने उसको मना किया और बोला कि अंदर बैडरूम में सुला देते हैं और उठाने की कोशिश करते हैं। रौनक ने मेरे कंधो के नीचे हाथ डाला उठाने के लिए और संदीप ने सोफे पर पड़ी मेरी टांग नीचे की और टाँगे उठा ली। इससे मेरा गाउन कमर की तरफ खिसक गया और मेरे नीचे के अंग बाहर दिखने लगे। दोनों हसने लगे और ऐसे ही मुझे उठा कर बैडरूम में ले आये।

मेरी पति पहले ही अंदर छुपे थे और अब तक दो लोगो की आवाज़े सुन चुके थे। बाहर आ नहीं सकते क्यों कि खुद झूठे साबित हो जाते इसलिए क्लोसेट के अंदर से ही चुपचाप सब देखना था।

मुझे बिस्तर पर लेटाने के बाद संदीप ने मेरा गाउन थोड़ा और ऊपर कर दिया और मेरे नीचे के नाजुक अंग पर हाथ फेरने लगा। फिर अपनी ऊँगली बाहर की सतह पर रगड़ने लगा। मुझे कुछ कुछ होने लगा।

संदीप को देख कर रौनक के भी हौसले बढ़ गए। वो हलके पारदर्शी गाउन के ऊपर से ही मेरे वक्षो को देख पा रहा था तो उनको दबाने लगा और संदीप को बोला कि बड़े जबरदस्त हैं ये तो। संदीप को भी एक्साइटमेन्ट हुआ और अपने दूसरे फ्री हाथ से मेरा एक वक्ष दबाने लगा।

संदीप बदमाश निकला, उसने रौनक को बोला कि ये गाउन निकालने के बाद दबाने का ज्यादा मजा आएगा। रौनक ने अब मेरा गाउन ऊपर की तरफ खींच कर सर से बाहर निकाल लिया। अब मेरे शरीर पर एक कपडा नहीं। संदीप तब तक लगातार अपनी ऊँगली मेरे नीचे रगड़ रहा था।

अब उसने अपनी ऊँगली मेरे छेद में घुसाना शुरू किया। मेरा पानी बनने लगा था तो उसकी ऊँगली फिसलते हुए अंदर चली गयी। वो तो उसको और भी अंदर डालना चाहता था पर ऊँगली छोटी थी तो ऐसे ही अंदर ऊँगली फिरा कर मजे लेने लगा।

रौनक इस बीच मेरे दोनों वक्षो को अपने हाथों में ले कर मसल रहा था और मेरे निप्पलों से खेल रहा था। मेरा तो अब मूड बन चूका था। एक का सोचा था पर यहाँ तो दो दो को चुपचाप हैंडल करना था।

रौनक ने अब मेरे दोनों वक्षो को छोड़ा और अपने नीचे के कपडे उतार दिए। अब वह मेरे सीने पर बैठ गया। उसका पिछवाड़ा मेरे वक्षो की गद्दी पर बैठा था। अपना लंड मेरे मुँह के पास लाया और अपने हाथ से मेरा मुँह थोड़ा खोल कर अपना कड़क लंड अंदर डालने लगा।

उसने एक झटका मारा और लंड मेरे मुँह में घुसा दिया। उसकी मोटाई बहुत ज्यादा थी जिससे मेरा पूरा मुँह भर गया कि हवा पानी निकलने की भी जगह नहीं थी। फिर उसने लंड थोड़ा बाहर निकाल कर और भी जोर के झटके से मेरे गले तक उतार दिया। थोड़ा और अंदर डालता तो मेरी सांस ही बंद हो जाती।

एक तरफ वो मेरे मुँह में झटके मारे जा रहा था तो दूसरी तरफ नीचे के छेद में संदीप ऊँगली कर रहा था। मेरा मुँह अब खारा होने लगा था जैसे नमकीन गुनगुनी शिकंजी पी ली हो। मैंने मन ही मन सोचा ये क्यों वीर्य बर्बाद कर रहा हैं, जहा जरुरत हैं वहा डाले।

संदीप ने अब अपनी ऊँगली बाहर निकाल दी। उसने अपने कपडे उतार दिए थे। थोड़ी ही देर में मेरी दोनों टाँगे ऊपर की और उठा कर अपने कंधो पर रख दी थी। एक मांस का लोथड़ा मैंने अपने नीचे के छेद के पास टकराता महसूस किया। ये संदीप का लंड था। जिसके लिए ये सारी मेहनत की थी उसकी घडी आ गयी थी।

कुछ सेकंड तक संदीप अपने लंड से डंडे की तरह मेरे नीचे के नाज़ुक अंग पर मारता रहा जिससे चटाक चटाक आवाज़े आने लगी।

अब वो मेरी चूत के बाहर की अंदरूनी दीवारों पर लंड रगड़ने लगा। मेरी सिसकिया नहीं निकल पा रही थी क्यों की मुँह में रौनक का लंड था। संदीप ने थोड़ी देर ऐसे ही तड़पाया फिर अपना लंड मेरे छेद के मुहाने पर लगा दिया।

अब संदीप अपने लंड को एक इंच अंदर डाल कर बाहर निकाल रहा था। थोड़ी देर ऐसे ही करने से मेरी तड़प और बढ़ने लगी। तब तक रौनक ने अब झटके मारना बंद कर दिया था और ऐसे ही मेरे मुँह में लंड डाल कर बैठा रहा।

संदीप अब एक इंच की बजाय 2 इंच तक लंड अंदर बाहर करने लगा। मैं अब तड़पने लगी। ऐसे ही खेलते रहने के बाद उसने अब धीरे धीरे ओर भी अंदर उतरना शुरू कर दिया।

अब वो पूरा मेरे अंदर था क्यों कि उसकी बॉडी मेरे नीचे टकरा गयी थी। मुझे अंदाज़ा हो गया कि उसका लंड मेरे पति के मुकाबले थोड़ा पतला और छोटा ही था, जिससे मुझे ज्यादा कुछ महसूस नहीं हो रहा था। वो अंदर अठखेलिया कर रहा था और मझे जैसे गुदगुदी हो रही थी।

मेरी कोई प्रतिक्रिया नहीं देख कर संदीप को शायद गुसा आ गया और वो जोर जोर से अंदर झटके मारते वक़्त अपना शरीर मेरे शरीर से टकरा रहा था।

वो इतनी ताकत से मार रहा था कि मुझे चोट लग रही थी। दर्द के मारे मेरी बॉडी नीचे से छटपटाने लगी। पर उसको कोई रहम नहीं आया और एक जानवर की तरह झटके मारता रहा।

मेरा दर्द असहनीय सा हो रहा था पर मैं उठ नहीं सकती थी क्यों कि काम पूरा होने से पहले ही खेल ख़त्म हो जाता। मैंने जैसे तैसे सहन करना जारी रखा। पता ही नहीं चला कब धीरे धीरे दर्द कम होता गया या फिर मुझे अंदर जो मज़ा आने लगा था जिससे दर्द का अह्सास कम लग रहा था।

अब रौनक ने लंड मेरे मुँह से बाहर निकाला और पास में बैठ कर मेरे वक्षो को मलता हुआ संदीप को देखने लगा जो कि लगा पड़ा था। अब हम दोनों का पानी छूटने लगा था। चटाक चटाक की आवाज़े अब धीरे धीरे फचाक फचाक में बदलने लगी थी। मेरे मुँह से अब आह निकलने लगी, थोड़ी बहुत दर्द के मारे और थोड़ी मजे की वजह से।

संदीप का जोश और बढ़ गया। थोड़ी ही देर में मेरा सारा पानी छूट गया और उसके 2 मिनट बाद संदीप ने भी आ… ऊ… करते हुए अपना सारा पानी मेरे अंदर खाली कर दिया।

इसके बाद वो रुक गया और लंड अंदर ही रखे थोड़ी देर बैठा रहा। मुझे दर्द से थोड़ी राहत मिली। अब उसने अपना अंग मेरे अंदर से बाहर निकाल दिया। मेरी टाँगे अपने कंधो से उतार कर नीचे सुला दी।

यह हिन्दी सेक्सी कहानी आगे जारी रहेगी और तब तक आप अपनी प्रतिक्रिया जरुर दीजिए!

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Samjhota, Shajish Aur Sex

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