सन्ता और बन्ता दोनो वकील थे और मिल कर एक फ़र्म बना कर काम करते थे।
एक बार उन्होंने एक युवा खूबसूरत सेक्रेटरी सलमा अपने दफ़्तर में काम पर रखी।
दोनों शादीशुदा थे पर पहले ही दिन से उनमें होड़ गई कि कौन उसे पहले बिस्तर में ले जायेगा।
आखिर सन्ता ने सलमा को पटा लिया और एक दिन किसी होटल में ले जा कर चोद दिया।
अगले दिन बन्ता को इस बात का पता लगा तो उसने सन्ता से बड़ी उत्सुकता से पूछा- क्यों भई कैसा लगा सलमा को चोद कर?
सन्ता ने उदास होकर कहा- यार कुछ खास नहीं ! इससे ज्यादा तो मेरी बीवी प्रीतो मजा देती है।
कुछ दिन बाद बन्ता ने भी सलमा को पटा कर चोद दिया।
अगले दिन सन्ता ने पूछ- तुझे कैसा लगा सलमा को चोद कर?
बन्ता ने जवाब दिया- यार सन्तया, तू ठीक कहता था, तेरी बीवी ज्यादा मजा देती है।
एक ख़ूबसूरत लड़की सलमा जंगल में कार चलाते चलाते रास्ता भूल गई कि अचानक उसे वहाँ जंगल में एक झोंपड़ी नजर आई।
वहाँ पहुँच कर उसने दरवाजा खटकाया तो सन्ता और बन्ता अन्दर से निकल कर आए।
सलमा ने सन्ता बन्ता से शहर की तरफ़ जाने का रास्ता पूछा तो दोनों बोले- थकी हुई हो, कुछ खा पी लो, थोड़ा आराम कर लो फ़िर चली जाना।
सन्ता बन्ता ने सलमा की मदद की और शहर जाने का रास्ता बताया।
सबसे बड़ी टेंशन
सन्ता-बन्ता की सेवा भावना से सलमा खूब प्रभावित हुई और उसने सन्ता-बन्ता को उपहार के रूप में झोंपड़ी में कुछ समय मौज मस्ती में बिताने का प्रस्ताव रखा।
‘देखो जी, हमने कभी ऐसा वैसा तो कुछ किया नहीं है!’ दोनों कुछ घबराए से बोले।
‘इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है, यह लो कंडोम के पैकेट, दोनों अपने अपने लण्ड पर चढ़ा लो!’ सलमा बोली।
‘इनको पहनाने से क्या होगा?’ सन्ता-बन्ता ने उत्सुकता से पूछा।
‘देखो इस तरह से मैं पेट से नहीं होऊँगी।’ सलमा ने स्पष्ट किया।
दोनों ने कंडोम पहन कर सलमा को खूब चोदा, उसके साथ पूरा दिन बिताया।
सलमा संतुष्ट होकर सन्ता-बन्ता द्वारा बताये रास्ते शहर की ओर निकल गई।
काफी दिन बीत गए। एक दिन सन्ता ने बन्ता से पूछा- यार देख, काफी दिन हो गए हैं, मुझे लगता है यार वो पेट से तो नहीं ही हुई होगी?
‘हाँ यार, मुझे भी यही लगता है!’ बन्ते ने जवाब दिया।
‘तो यार, चल आज यह रबर का छिलका उतार ही देते हैं!’ दोनों एक साथ बोल उठे।
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