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बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 1,018 बार

मेरी कुंवारी चूत का भैया और पापा ने किया शिकार

राहुल एंटर

07 Apr 2014 को प्रकाशित

मेरी कुंवारी चूत का भैया और पापा ने किया शिकार
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सेक्स कहानी चूत चुदाई की मेरी मम्मी के मौत के बाद की है. पापा और भैया अकेले हो गए, वो नशे में डूबने लगे। मुझसे यह देखा न गया। एक रात को मैंने उनसे दारू छोड़ने को कहा लेकिन उसकी कीमत मेरी चूत को चुकानी पड़ी।

यह कहानी सुनें.

हाय दोस्तो, कैसे हो सब!आज मैं आपको अपनी एक सेक्स स्टोरी बताने जा रही हूं।आशा करती हूं कि आपको इस कहानी में मजा आएगा।

लेकिन यह एक काल्पनिक सेक्स कहानी चूत चुदाई की है।तो मैं शुरू करती हूं।

मेरा नाम रानी है।मेरे परिवार में मेरे पापा, मम्मी और बड़े भैया-भाभी रहते थे।

एक दिन हमारे साथ एक अनहोनी हो गई।मेरी मम्मी और भाभी एक कार एक्सीडेंट में चल बसे।घर में दुख फैल गया।

पापा बहुत रोते रहते थे।लेकिन मैंने अपने घर की सारी जिम्मेदारी संभाल ली।

मैं उस वक्त 20 साल की थी।मैं पापा और भैया को भरोसा प्रिया कि मैं उन लोगों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दूंगी।

फिर ऐसे ही कुछ दिन बीते।पापा और भैया का अकेलापन जा नहीं रहा था।वो परेशान रहते थे।

धीरे-धीरे पापा और भैया, दोनों ने शराब पीना शुरू कर प्रिया।मैंने उनको समझाया कि अपनी सेहत खराब करना अच्छी बात नहीं है, मैं उनको हर तरह का प्यार दूंगी लेकिन ऐसे गम में शराब पीना ठीक नहीं है।

लेकिन वो नहीं माने।उन्होंने और ज्यादा शराब पीना शुरू कर प्रिया।

एक दिन ऐसे ही मैं उनके साथ बैठी बातें कर रही थी।उस वक्त दोनों ने काफी शराब पी रखी थी।

मैंने कहा- पापा, ऐसे जिंदगी कैसे चलेगी। शराब पीने से मम्मी वापस तो नहीं आ सकती! मैं हूं आप लोगों के लिए। मैं उनकी कमी को पूरा करूंगी।

इस बात पर पापा ने मुझे घूरकर देखा।फिर कुछ देर बाद बोले- रानी, तू तो कमी नहीं होने देगी लेकिन कल को तुझे शादी करके जाना है। उसके बाद भी हम लोग अकेले ही हो जाएँगे। तू तो हमें छोड़कर चली जाएगी।

मैंने कहा- नहीं, मैं आप दोनों को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी। मैं यहीं रहूंगी आपके साथ!भैया- लेकिन बहन हम तेरे से पति का सुख नहीं छीनना चाहते।

मैं बोली- मुझे पति से कोई सुख नहीं चाहिए। मुझे सारा सुख आप दोनों से मिल जाएगा।

ये बात सुनकर पापा और भैया दोनों मुझे कुछ हवस भरी नजर से देखने लगे।मुझे लगा कि मैंने बिना सोचे पता नहीं क्या बोल प्रिया।फिर बाद में लगा कि मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था।

मैंने कहा- आप दोनों वादा करो कि कल से बिल्कुल शराब नहीं पीओगे, जितनी पीनी है, आज ही पी लो।वो बोले- ठीक है, कल से नहीं पीयेंगे।दोनों मेरी तरफ देख कर थोड़ा मुस्करा रहे थे।

फिर मैं अपने रूम में आ गई और सोने लगी।मैं खुश थी कि कल से पापा और भैया शराब नहीं पीयेंगे।

मैं सो गई और मुझे पता नहीं चला कि दोनों रात में कब मेरे रूम में आ गए।

भैया ने कुछ ज्यादा ही पी रखी थी।उन्होंने मेरी चादर उतार दी।

मैंने सफेद पजामा और ब्लू टीशर्ट पहना था रात के लिए।

मेरे बूब्स कच्चे अमरूद जैसे छोटे छोटे थे इसलिए बाहर से दिख नहीं रहे थे।

भैया और पापा ने मुझे ऊपर से नीचे तक गौर से देखा।मैं उस वक्त सोई हुई थी और पता नहीं था कि क्या हो रहा है।

कुछ पल बाद पापा और भैया ने अपने सारे कपड़े उतार कर साइड में फेंक दिए।

पापा ने मेरे पजामे को धीरे से खिसका कर मुझसे अलग कर प्रिया।अब भैया अपने लन्ड को मेरे बंद होंठों से छुआने लगे।मैंने लाल रंग की पैंटी पहनी थी चूत पर।

पापा मेरी लाल कलर की पैंटी को नाक से सूंघने लगे।

अब मुझे नींद में ही कुछ अहसास हो रहा था।भैया के लन्ड की अजीब खुशबू मेरे नासापुटों में आने लगी और मेरी आंख खुल गई।

मैं देखकर हैरान हो गई कि भैया का 7 इंच का लन्ड मेरे होंठों पर था।भैया को सामने नंगा देख मैं चौंक गई।

इससे पहले मैं कुछ बोलती, पापा ने मेरी पैंटी को नीचे घुटनों तक खींचकर मुझे पूरी नंगी कर प्रिया।

अपने दोनों हाथों से मैंने चूत को छुपा लिया।मैं बोली- पापा ये क्या कर रहे हो?भैया और पापा कहने लगे कि तुमने प्रोमिस किया था कि तुम हमें सारे सुख दोगी, और तुम सब देती भी हो। लेकिन हमें वास्तव में पत्नी सुख चाहिए, क्या हमें वो दे सकती हो?

मेरी नजर पापा के तन्नाते हुए 8 इंच लंबे लन्ड पर गई।मैंने कहा- पापा, मुझे बहुत डर लग रहा है।भैया- तुम बिल्कुल भी मत डरो। हम तुम्हें अपनी पत्नी से भी ज्यादा खुश रखेंगे।

कहकर भैया ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।उनके मुंह से शराब की महक आ रही थी।

मैं अभी नींद में थी तो मुझे भी बेहोशी छाने लगी।मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और भाई का साथ देने लगी।

उधर पापा ने मेरे दोनों हाथों को मेरी चूत से हटाया और उससे सहलाने लगे।

मुझे अच्छा लग रहा था।लेकिन मेरे साथ जो हो रहा था वो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।मुझे नहीं पता था कि जिंदगी में मुझे अपने भाई और पापा से चुदना भी पड़ेगा।

खैर, अब मैं कुछ नहीं सोच पा रही थी।बस जो रहा था उसमें साथ देने के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं था।

इतने में ही भैया ने मुझे बिस्तर से उठाया और मेरी टीशर्ट को उतारने लगे।

मैंने कहा- भैया अभी मेरे (स्तन) बहुत छोटे से हैं।अगले ही पल भैया ने मेरी समीज को भी निकाल प्रिया और मेरे छोटे-छोटे अमरूद आजाद हो गए।

मुझे हल्का डर भी लग रहा था और शर्म भी आ रही थी।लेकिन साथ ही मुझे मुझे भैया और पापा पर तरस भी आ रहा था कि इनकी जिस्म की भूख एक महीने से पूरी नहीं हुई है।

मुझे डर ये भी था कि ये दोनों इतने दिनों से प्यासे हैं, और मुझ कच्ची कली के साथ पता नहीं क्या करेंगे।इतने में भाई मेरी चूचियों को देख हंसते हुए बोला- तेरे तो सच में ही बिल्कुल अमरूद हैं। लेकिन लग रहे बड़े रसीले हैं।

मैंने अपने दोनों हाथों से चेहरे को छुपा लिया।भैया ने नीचे झुकते हुए मेरी पूरी चूची को मुंह में ले लिया और चूसने लगे।वो दूसरे हाथ से मेरे दूसरे अमरूद के निप्पल को सहलाने लगे।

मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था और अंदर ही अंदर जैसे एक आग लगती जा रही थी।भैया ने जोर से निप्पल मसल प्रिया तो मेरी आह्ह निकल गई।मैं बोली- आह्ह … प्यार से भैया …

इधर पापा ने मेरी टांगें चौड़ी कर दीं।फिर अपनी जीभ को मेरी चूत की लकीर पर लगाकर ऊपर नीचे उसे फेरने लगे।मेरे जिस्म में सुरसुरी सी दौड़ गई पापा की गर्म जीभ का अहसास पाकर।

मेरे हाथ भैया के बालों पर पहुंच गए और उनको प्यार से सहलाने लगे।

मैं बोली- आप दोनों अब बस करो … मैं आपकी हर इच्छा को पूरा करूंगी लेकिन आप लोग शराब मत पीना।

भैया बोले- जब पीने को तेरे रसीले अमरूद हैं, तेरी कमसिन चूत है तो फिर शराब किसे चाहिए?भैया की बात सुनकर मैं खुश हो गई।

इतने में ही भैया ने अपना लंड मेरे मुंह में लगा प्रिया।मैंने कहा- भैया ये गंदा है, मत करो।

वो बोले- हमने शराब न पीने का वादा किया है। इसलिए तुझे हमारा लौड़ा पीना पड़ेगा। अगर तू अपने से नहीं पीयेगी तो हमें जबरदस्ती पिलाना पड़ेगा।

मुझे मुंह खोलना पड़ा और भैया का सुपाड़ा होंठों को खोलता हुआ मेरे मुंह में घुस गया और जुबान को टच करने लगा।भैया ने जबान फेरने के लिए कहा तो मैंने जुबान से भैया के लन्ड को चाटना शुरू कर प्रिया।

उधर पापा की जुबान मेरी अनखिली चूत की कली के हॉट स्पॉट पर चाटने लगी।मैं तो पागल ही हो गई।मुझे नहीं पता था कि इतना सुख मिलता है पत्नियों को अपने पति से।

भैया ने लंड चुसाते हुए कहा- मुंह में ही छोड़ दूं क्या लंड का पानी?मैंने ना में सिर हिलाया।

फिर भैया ने अच्छे भाई की तरह लन्ड को बाहर निकाल कर मेरी चूचियों पर थपकी मारते हुए पिचकारी छोड़ दी।

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फिर अपने हाथों से वे वीर्य से चूचियों की मालिश करने लगे।आह … क्या मजा आ रहा था उस रात।

इधर मुझे अहसास हुआ कि मेरी चूत में से कुछ बह रहा है।

शायद ये मेरा पहला ऑर्गेज्म था जो सीधा पापा के मुंह में जा रहा था।मैंने कहा- पापा हटिए, ये गंदा पानी है … छी!

पापा ने कहा- नहीं बेटी, इस पानी के लिए ही तो मैं प्यासा हूं, बिल्कुल तेरी मां जैसा ही है तेरा चूत जल भी!

पापा ने कहा- बेटी मेरा भी चूस ले अब।मैं बेबस थी, पापा को प्रिया वादा भी तो निभाना था।

पापा का लन्ड बहुत मोटा था।उनका लंड जब मुंह में घुसा तो मुझे घुटन होने लगी।मैंने अपने सिर को पीछे की ओर किया तो पापा ने मेरे सिर को पीछे से पकड़ कर आगे की ओर खींच लिया और अपनी कमर को आगे की ओर धक्के देने लगे।

उस वक्त उन्हें अपनी बेटी पर तरस नहीं आया।मैं ऊं … ऊं … गूं … गूं … करने लगी और पापा गपागप लंड को अंदर-बाहर करने लगे।मैं थक गई लेकिन पापा नहीं थके।

इतने में बेहोशी आ गई और मैं जान नहीं पाई कि मेरे साथ क्या हुआ।जब मुझे होश आया तो पापा के लंड का सारा वीर्य मेरे गले में उतर रहा था।

मैं रोने लगी।उनका गाढ़ा वीर्य मेरे मुंह में भर गया था।

इतने में पापा ने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए और चूसने लगे।मैंने सारा वीर्य उनके मुंह में डाल प्रिया।

पापा उस वीर्य को पी गए।मुझे भी अब अच्छा लग रहा था।

पापा ने मेरे अमरूदों को दबाया तो मुझे करंट आने लगा।पापा बोले- बेटी इसे हम थोड़े दिनों में आम बना देंगे बस हमें ये रोज रोज चूसने देना।

पापा मेरी दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूसने लगे।मुझे महसूस हुआ कि मेरी चूचियां फूलने लगी हैं।भैया ने मेरी दोनों टांगों को घुटनों से मोड़ कर मेरी छाती से सेटा प्रिया।

अब भैया के सामने मेरी चिकनी चूत थी।भैया ने अपनी जुबान मेरी चूत में चलाना शुरू की।चूत की नाजुक पंखुड़ियों को फैलाते हुए वो मेरे छोटे से सीलपैक छेद तक पहुंच गए।

मैं मचलने लगी और भैया अपनी जुबान को नुकीला करके अंदर घुसाने की कोशिश करने लगे।मुझे थोड़ा थोड़ा दर्द हुआ पर बहुत मजा आ रहा था इसलिए मैं चुप रही।

पापा ने कहा- चलो आज के लिए इतना काफी है, कल से ये हमारी पत्नी बनकर सेवा करेगी।मैंने भी कुछ नहीं कहा और नंगी ही बिस्तर पर सो गई।

सुबह उठी तो देखा कि पापा और भैया जॉब पर जा चुके हैं।मैं सोच रही थी कि रात भर जो हुआ वो सही था या गलत।

लेकिन मजा तो मुझे भी आया था।

शाम में पापा और भैया दफ्तर से वापस आ गए।मैंने जानबूझकर छोटी सी स्कर्ट पहनी थी ताकि वे दोनों मुझे देख कर तारीफ करें।

मगर जैसे ही उन्होंने मुझे देखा तो भैया ने मुझे गोदी में उठा लिया और रूम में ले जाकर पटक प्रिया।

पापा ने अपने हाथ मेरी स्कर्ट में डाल कर पैंटी खींच दी।भैया ने मेरी स्कर्ट ऊपर कर दी दोनों मेरे बाजू में लेट गए।

भैया आगे से मेरी चूत सहलाने लगे और पापा पीछे से मेरी गांड

मैं कुछ ही पल में पागल सी होने लगी।उन्होंने अपने-अपने लंड बाहर निकाल लिए।लौड़ों से वो मेरी चूत और गांड को रगड़ने लगे।

भैया ने मेरी ड्रेस उतार दी, फिर मेरे अमरूदों को मुंह में लेकर चूसने लगे।पापा मेरी पीठ पर किस करने लगे।

अचानक मुझे अहसास हुआ कि पापा का लन्ड गांड में प्रेशर लगा रहा है।मैं आगे को होने लगी मगर आगे से भैया का लन्ड मेरी बुर पर प्रेशर डाल रहा था।मैं आगे होती तो भैया के लन्ड का शिकार बनती और पीछे होती तो पापा के लन्ड का।

मैंने हिलना बंद कर प्रिया लेकिन पापा और भैया मुझसे लिपट गए और मेरा सैंडविच बना प्रिया।पापा ने अपने हाथों से मेरे गोल-गोल पुठ्ठों को फैला प्रिया।

भईया ने मेरी एक टांग ऊपर करके अपने लन्ड को मेरी बुर के छोटे से छेद पर टिका प्रिया।

अब पापा का लन्ड मेरी गान्ड के छेद को छूने लगा, उनके लन्ड की टोपी से चिपचिपा पानी मेरी गांड में गुदगुदी करने लगा।

अचानक एक धक्का भाई की ओर से आया और मेरी बुर के छेद का ढक्कन खुल गया।

मैं चिल्लाई तो इतने में पापा का धक्का भी आ लगा।मगर गांड का छेद नहीं खुल पाया।मैंने दर्द के मारे गुस्से में आकर दोनों को अपने से दूर हटा प्रिया।

वो बोले- तुम हमें खुश नहीं करोगी तो हम फिर से शराब पीने लगेंगे।

मैं फिर से बेबस हो गई।मैं आज की शाम उनका शिकार होने ही वाली थी।

उनका खड़ा लौड़ा देख मैं घबरा रही थी।पापा ने कहा- घबराओ नहीं, आराम से इस पर बैठो।मैं घबराते हुए पापा के पैरों के बीच में बैठने लगी।

मेरे नाजुक हाथ पापा की बालों भरी छाती पर थे।मेरी गांड और बुर दोनों ही पापा के लंड से टकरा रही थीं।

मैं जैसे ही जोर डालकर थोड़ा सा बैठी तो उचक जाती।पापा ने आखिर मेरी कमर को पकड़ लिया और नीचे से कमर उछाल कर अपना लोहे जैसा लंड मेरी बुर में घुसा डाला।

मैं उछली लेकिन पापा ने कस कर मुझे पकड़ लिया।नीचे से पापा ने धक्के लगाना जारी रखा। मेरी चीख निकल गई- आआई ईईईई मर गई ईई … निकालो पापा … आह्ह।

मैं नाजुक कली थी और मेरी सील पापा ने तोड़ दी थी।मेरी बुर से खून बहने लगा।लेकिन पापा ने चोदना जारी रखा।

अब पापा का लंड अंदर जाकर मेरे जी-स्पॉट को छूने लगा।मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैं उछल उछलकर ऊपर-नीचे होने लगी।

पीछे से भैया ने एक धक्का प्रिया और मैं पापा के ऊपर आ गई।मेरे घुटने मुड़े हुए थे, मेरे अमरूद पापा की छाती से दब गए।

अब होंठ पापा के होंठों से लग गए थे।पापा का लंड लगातार मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।

मैंने मुड़कर देखा तो भैया मेरी गांड के छेद को घूर रहे थे।

पापा ने मुझे कसकर पकड़ लिया और भैया ने अपना लन्ड गांड में ठीक निशाने पर लगा कर झटका मारा।

भैया ने जैसे ही मेरी गांड की सील तोड़ी तो मेरी चीखें आसमान तक गूंजने लगीं।

ऐसा लगा मानो किसी ने सोडे की बॉटल का ढक्कन खोला हो।

अब क्या था … पापा और भैया सांड और कुत्ते के जैसे मुझ अबला का पूरा फायदा उठाते हुए अपनी हवस की पूर्ति में लगे रहे।

मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन सुकून भी मिल रहा था।कुछ देर में भैया ऊपर से मेरे अमरूद दबाते हुए आह-आह करते झड़ गए और पापा मेरी बुर में झड़ गए।

उस दिन के बाद अब मैं रोज ही पापा और भैया से चुदने लगी।मैं पापा और भैया को रोज पत्नी सुख देती हूं।

मैं अलग-अलग तरीकों से उनकी सेक्स इच्छा पूरी करती हूं।

दोस्तो, ये थी मेरी कहानी!आपको मेरी सेक्स कहानी चूत चुदाई की कैसी लगी मुझे जरूर बताना।आप लोगों के कमेंट्स का मैं इंतजार करूंगी।

आप मुझे ईमेल पर मैसेज भी कर सकते हैं।मेरा ईमेल आईडी है- support@mohakkisse.com

लेखक की पिछली कहानी थी:प्यासी मुँहबोली बेटी संग पति पत्नी का सेक्स

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Hey guys, aapke sapno ki rakhel aapke liye ek aur baap beti ki chudai ki kahani laayi hai, to jaise ki aapne meri pichli baap beti ki chudai ki kahani me padha ke nisha ko maine chut me ungli karna sikhaya aur usko bhi sex ka chaska laga diya.

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14 मिनट 760

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अरुणा अरुणा

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

दीपक कुर्मी

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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