Xxx डर्टी कहानी में मेरे लंड से चुदाने के बाद मेरी बीवी मेरे वीर्य से भरी चूत लेकर फिर से अपने बॉयफ्रेंड के कमरे में चली गयी. उसका यार मेरे रस से भरी उसकी चूत को चाटने लगा.
कहानी के पिछले भागमेरी बीवी के एक्स बॉयफ्रेंड ने थूक लगाकर चोदा
से आगे Xxx डर्टी कहानी:
>संजू भी नंगी उठती हुई बोली, “मैं बाथरूम होकर आती हूँ।”दिनेश पूरा गर्म था, उसने संजू को पीछे से दबोच कर लिया।संजू बोली, “छोड़ो मुझे, मैं गंदी हूँ, मेरे पति का वीर्य मेरे अंदर है! साफ करके आती हूँ।”
परंतु दिनेश संजू की बड़ी बड़ी चुचियों को बेरहमी से मसल रहा था।<
अब संजू भी सब भूलकर उसका साथ देने लगी। अब दिनेश पुनः संजू को बेड पर धकेल प्रिया और उसके दोनों टांगों को उठाकर अपना मुँह उसकी चूत के पास ले गया और अपना मुँह चूत में सटा प्रिया।
संजू की चूत मेरे वीर्य से लबालब था और कुछ वीर्य बाहर भी लगा हुआ था।
वह आँखें बंद किये ही बोली, "अरे! आपको घृणा लगती है या नहीं? छोड़िये उसे!"
परंतु दिनेश अब और ज्यादा कामुक हो गया और मेरे वीर्य से भरी चूत को चूसने लगा! संजू को इस घटना से अलग आनंद आने लगा और उसने दिनेश का सर और कस के अपने चूत में दबा दी।
अब दिनेश पूरा पागलों की तरह संजू की चूत को चुस रहा था और ये क्या— वो तो चूत से निकल रहे मेरे वीर्य को भी अपने मुँह के अंदर चाट-चाट कर अंदर करने लगा!
मुझे बड़ा अजीब लगा कि आदमी वासना में ऐसी भी हरकत कर सकता है क्या! संजू बड़े मजे से चूत चटवा रही थी।
दिनेश ने अपना जीभ संजू की चूत में घुसा-घुसा कर सारा वीर्य को चाट लिया। लगभग 5 मिनट तक दिनेश ने चूत चाटकर सारा चूत को साफ कर प्रिया।
वो अब उठा, तो मैंने देखा कि उसके मुँह के आसपास में मेरा वीर्य का झाग लगा हुआ है।
अब वह वीर्य से सने मुँह से संजू को किस करने लगा। संजू भी अब उसके मुँह में लगा सारा वीर्य को चाटने और चूसने लगी।
बड़ा ही पागलपन और हवस भरा ये दृश्य था! दोनों पूरा हवस के चरम में थे और एक्साइटेड थे।
तभी संजू किस करते हुए दिनेश का लंड अपने हाथों में लेकर आगे-पीछे करने लगी जिससे दिनेश को और एक्साइटमेंट होने लगा।
अब संजू नीचे बैठ गई और दिनेश के लंड पर दो-तीन बार थूकी और उसे हाथ से अच्छे से मिलाई और फिर अपने बड़े-बड़े चुचियों को पकड़ते हुए उसके बीच में दिनेश के लंड को दबा दी और चुची को ऊपर-नीचे करने लगी।
दिनेश का ये पहला अनुभव था। वो आँखें बंद कर सिसकारी भरने लगा।
संजू बड़ी बेरहमी से वासनामय होते हुए दिनेश का लंड अपने चुचीयों के बीच में ऊपर-नीचे घर्षण करा रही थी।
दिनेश को इससे बहुत मजा आ रहा था, वो आँख बंद करते हुए अब स्वयं लंड को आगे-पीछे करने लगा।
एकाएक दिनेश बोला, "जान! अब चोदने का मन कर रहा है।" तो संजू बोली, "क्यों? इसमें मजा नहीं आ रहा है? ये तो मैं आपके लिए ही कर रही हूँ।"
दिनेश बोला, "कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा है, लग रहा है जैसे अब मेरा निकल जायेगा। इसीलिए तो बोल रहा हूँ।" इस पर संजू बोली, "नहीं-नहीं! अभी नहीं निकालियेगा, मैं अभी पूरा चुदवाना चाहती हूँ!"
संजू जेनरली इस गंदी तरह से बात नहीं करती थी पर आशिक से इस भाषा में बात कर रही थी।
अब उसने लंड को अपने चुची से आजाद कर प्रिया. दिनेश का लंड पूरा लाल हो गया था घर्षण से।
संजू ने देखा तो बोली, "कितना प्यारा है! मैं एक दिन इसे खा जाऊँगी फिर आप देखना।" ये कहकर वो लंड को अपने मुँह में ले ली और एक हाथ से अपने चूत को रगड़ने लगी। वो पूरा कामुक हो गई थी।
एकाएक दिनेश बोला, "मेरा निकलने वाला है, छोड़ो!" संजू ने जल्दबाजी में मुँह से लंड निकालने लगी, पर ये क्या— दिनेश के ना चाहते हुए भी उसके लंड से पिचकारी निकलने लगा!
लंड की पिचकारी इतनी तेज थी कि संजू की पूरी चुची, मुँह और गर्दन वीर्य से पट गई।
इस समय संजू चुदने के लिए पूरा पागल थी। दिनेश के इस तरह से वीर्य निकल जाने से वो पूरा अफसोस में बोली, "ये कैसे हो गया?"
दिनेश बहुत ज्यादा टेंशन में आ गया। वो संजू को बार-बार सॉरी बोलने लगा, उसे पता था कि संजू को इस समय चुदाई की बहुत ही ज्यादा जरूरत थी।
दिनेश रोनी सी सूरत बना के बोला, "क्या करूँ? इतना ज्यादा मजा और एक्साइटमेंट था कि निकल गया।" संजू दिनेश के इस रोनी सी चेहरे को देखकर कुछ संयमित हुई और बोली, "चलो कोई बात नहीं।"
दिनेश बोला, "पर तुम तो प्यासी रह गई ना।" इस समय दिनेश का लंड सिकुड़ कर छोटा हो गया था।
संजू कुटिल मुस्कान लेते हुए बोली, "वो आप मुझ पर छोड़ दीजिये।" ये कहते हुए संजू उठी और दिनेश को फिर से किस करने लगी।
दिनेश बोला, "अभी नहीं उठेगा ये।" पर संजू ने बात को अनसुनी करते हुए दिनेश के होंठ को चूसने लगी।
अभी भी संजू के चेहरे और चुची पर वीर्य लगा हुआ था।
दिनेश बोला, "इसे तो साफ कर लो जाकर!" संजू बोली, "अच्छा इसे!" और फिर हँसकर इस सारी वीर्य को उंगली से पोछ-पोछकर चाटने लगी जैसे कि कोई फेवरेट चटनी गिर गया हो। उसके चेहरे से साफ झलक रहा था कि वो पूरा उत्तेजित थी।
अब उसने एक तरकीब निकाली। वो बोली, "एक सीन दिखाऊँ? आप सिर्फ देखियेगा।"
दिनेश कौतूहल वश बेड के एक तरफ दीवार से सटक कर बैठते हुए संजू को देखा।
संजू अब उसके सामने नंग-धड़ंग घुटने के बल बैठ गई और अपने दोनों हाथों से अपने दोनों चुचियों को जोर-जोर से मसलने लगी और फिर अपने एक-एक हाथ से अपने चूत को मसलने लगी। उसकी चूत से पूरा पानी रिस रहा था।
फिर वो एक हाथ से अपने चुची को मसलते हुए दूसरे हाथ से अपनी एक उंगली चूत में घुसेड़ दी।
ऐसा करने से उसके मुँह से "इस्सस" की आवाज निकली।
अब वो आँखें बंद कर उंगली को चूत में अंदर-बाहर करने लगी।
एकाएक वो उठी और रूम से बाहर चली गई। दिनेश आश्चर्य से ये सब देख रहा था।
15-20 सेकंड में ही वो फिर आ गई और फिर से उसी मुद्रा में बैठ गई, उसके हाथ में कुछ था।
तभी उसके हाथ में एक खीरा दिखा जो कि मेरे और दिनेश के लंड से काफी ज्यादा लगभग दोगुना मोटा और 7 इंच लंबा था।
मैं समझ गया कि वो क्या करने वाली है, ऐसा उसने कभी नहीं किया था।
वो अब अपने हाथ पर दो-तीन बार थूकी और उसी थूक से अपनी चूत में पूरी तरह से लगाई और उस मोटे खीरे को अपने चूत के द्वार पर लगाकर घुसाने लगी।
परंतु खीरा लंड से दोगुना मोटा था सो घुस नहीं पा रहा था।
वो आँखें बंद करते हुए धीरे-धीरे प्रयास कर रही थी, उसकी चूत से पानी टपकने लगा था। एकाएक उस बड़ा सा मोटा खीरा का 2 इंच उसकी चूत में घुस गया।
उसने जोर से दांतों को भींचा और लंबी सीत्कार ली, "ईसस!" उसके चेहरे पर हवस और दर्द का मिला-जुला असर दिख रहा था।
अब वो दर्द को झेलते हुए खीरे को 2 इंच के अंदर ही आगे-पीछे करने लगी और लंबी-लंबी आहें भरने लगी। पूरा चूत से "फच-फच" की आवाजें आ रही थीं।
अब उसने थोड़ा और दांत खींचकर बल लगाया तो इस बार लगभग 4-5 इंच खीरा चूत को चीरते हुए अंदर चला गया।
वो दर्द से तिलमिला उठी पर उस दर्द में भी हवस भरी हुई थी।
ये सब देख के मेरी हालत खराब हो गई. उधर दिनेश को ये सब सपना जैसा लग रहा था।
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संजू का ये रूप देखकर उसका लंड में भी हलचल होने लगा और उसके लंड में कड़ापन आने लगा।
तभी संजू की नजर दिनेश के लंड पर पड़ी तो उसे अपनी जीत पर कुटिल मुस्कान आ गई। आखिर लंड लंड होता है, खीरा में वो अहसास कहाँ जो लंड में होता है।
अब संजू ने अपने चूत से खीरा को एकाएक खींच लिया, जिससे चूत से "फक" की आवाज आई। खीरे में पूरा चूत का पानी लगा हुआ था, जिसे संजू ने बड़े सेक्सी ढंग से एक बाइट काटी और खा गई और दिनेश को देखकर दांतों को खोलकर फिर उसे इस ढंग से बंद की कि जैसे कह रही हो अब वो दिनेश के लंड को खा जायेगी।
वो अब दिनेश को बेड पर गिरा दी और उसके लंड जो कि तनाव में आने लगा था को अपने मुँह में कैद करते हुए चूसने लगी।
2 मिनट चूसने के बाद वो लंड को मुँह से बाहर निकालते हुए दिनेश के ट्टटों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगी। इस बीच वो बार-बार अपने हाथ से अपनी चूत का मर्दन कर रही थी। वो इंतजार कर रही थी कि कैसे लंड पूरी तरह खड़ा हो जाये, क्योंकि वो तो मरे जा रही थी चुदाने के लिए।
संजू की मेहनत और पागलपन काम आई और दिनेश का लंड फुफकार मारने लगा। संजू की आँखों में चमक आ गई।
वो अब लंड के ऊपर बैठने ही वाली थी कि दिनेश बोला, "बस 1 मिनट में आया, बहुत जोर से पेशाब लगा है।" संजू बोली, "नहीं! अभी नहीं करने दूँगी, मैं बहुत तड़प रही हूँ।" दिनेश बोला, "प्लीज! बहुत जोर से लगा हुआ है।"
और जबरदस्ती उठकर दौड़कर बाथरूम चला गया।
संजू को बहुत गुस्सा आ रहा था। दिनेश के बाथरूम में जाने पर उसके मुँह से अनायास ही निकल गया, "मादरचोद! मैं चुदाने के लिए मरे जा रही हूँ और उसे फर्क ही नहीं पड़ रहा है, लगता है मुझे भी जाना पड़ेगा बाथरूम।"
पहली बार मेरी बीवी के मुँह से गंदी गाली निकली थी। वो नंगी ही बाथरूम जाने लगी।
मुझे अफसोस हुआ कि बाथरूम का सीन कैसे देखा जाय।
तभी मैं तुरंत बाहर से ही बाथरूम का वेंटिलेशन शीशा जो कि थोड़ा खुला रहता है उससे देखने के लिए पास पड़ी ईंटों को बिछा प्रिया और शीशे से अंदर झांकने लगा। यहाँ बता दूँ कि मेरा घर पूरा 12 फीट ऊँचा चहारदीवारी से घिरा है जिससे कोई बाहर का आदमी बिना दाखिल हुए नहीं देख सकता है।
खैर, मैं जैसे ही अंदर झांका तो दिनेश खड़े-खड़े पेशाब कर रहा था। लंड खड़ा होने से बहुत कम-कम पेशाब धार के साथ निकल रहा था। उसके बगल में संजू नंगी खड़ी थी और उसे बोल रही थी, "आपको तो मेरा कुछ ख्याल ही नहीं है।"
दिनेश बोला, "मैं क्या करता? क्या वहीं रूम में ही पेशाब कर देता या..." कह कर रुक गया।
संजू बोली, "या... क्या? बोलिए क्या...!" दिनेश दबी जुबान में बोला कि, "या मैं तुम्हारे मुँह में कर देता...!" फिर कंटिन्यू बोला, "मैं तो तुम्हारा पेशाब भी पी गया पर तुम थोड़ी ना मेरा पीती।"
संजू बोली, "तो क्या आपकी इच्छा है कि मैं आपका पेशाब पिऊँ?"
इसी बीच दिनेश सफाई में कुछ बोलने ही वाला था कि संजू को पता नहीं क्या सूझा, उसने दिनेश को जो कि अभी भी पेशाब कर रहा था उसे उसी अवस्था में झकझोरते हुए अपने तरफ घुमाई और नीचे बैठ गई और दिनेश के पेशाब के धार के सामने अपने चुची को रख दी!
अब दिनेश का पेशाब मेरी गोरी पत्नी के चुची को धो रहा था।
दिनेश के पेशाब की धार कम हो गई और पेशाब खत्म होने वाला था।
दिनेश बोला, "थोड़ा तो चख लो!" संजू वासनामय थी परंतु ना में सर हिलाई।
जब दिनेश का पेशाब पूरा बंद हुआ ही कि संजू ने उसके लंड को अपने मुँह में भर लिया।
दिनेश के लंड में अभी भी मूत्र की कुछ बूंदें थी जिसे संजू चाट गई और बेशर्मी से बोली, "आपका भी बड़ा नमकीन है!" इस पर दिनेश बोला, "तुमने चखा ही कहाँ!"
वो अब संजू को खड़ा कर के वहीं बाथरूम के बेसिन के सहारे डॉगी बना प्रिया और पीछे से उसके गांड पर 4-5 थप्पड़ जोर-जोर से मारा। संजू दर्द से चीखी पर मना नहीं की। इसका मतलब वो इस समय दिनेश से वाइल्ड सेक्स चाह रही थी। और दिनेश इसका फायदा उठा रहा था।
दिनेश ने अपना रॉड जैसे हो चुके लंड को पीछे से ही संजू की चूत में धुसेड़ प्रिया। संजू के मुँह से आह निकल गई।
अब दिनेश ने बिना देर किये फुल स्पीड में ही चुदाई शुरू कर दी। दिनेश अधिकांश लंड बाहर निकाल कर दोगुनी रफ्तार से चूत में अंदर घुसा रहा था।
संजू जन्नत में गोता खा रही थी, वह यही तो चाहती थी।
लगभग 5 मिनट के जोरदार चुदाई के बाद दिनेश हाँफने लगा। वो चूत में लंड डालते ही संजू के चुची को अपने दोनों हाथों से किसी कसाई की तरह मसलने और नोचने लगा।
संजू इससे चीखने लगी।
दिनेश रुक गया और बोला, "क्या हुआ? दर्द हो रहा है?" संजू कराहते हुए बोली, "दर्द बहुत हो रहा है पर तुम रुको नहीं! आज मेरा मन पूरा वाइल्ड सेक्स करने का कर रहा है। मैं चीखूँ फिर भी आप नही रुकना। आप मुझे गाली भी दो ना, अच्छा लगेगा।"
दिनेश को सुनहरा मौका मिल गया। वो संजू की चुची को और कस कर भींचने लगा, जिससे उसकी चुची पूरी लाल हो गई। पीछे से वह पूरे वेग से उसे चोद रहा था।
एकाएक संजू बोली, "चोद मादरचोद! और जोर से चोद!" दिनेश को आश्चर्य हुआ पर वो उसे चोदते रहा। वो बोला, "साली कुतिया! ले लंड और जोर से ले!"
तभी संजू चीखते हुए झड़ने लगी और वो थोड़ा दिनेश को रुकने बोली. पर दिनेश नहीं रुका।
संजू का लगातार स्खलन हो रहा था। वो निढाल हो गई थी।
इसी बीच दिनेश ने भी 10-12 धक्कों के बाद अपना पूरा वीर्य संजू की चूत के अन्दर गिरा प्रिया। दोनों हाँफ रहे थे।
थोड़े देर ऐसे ही रहने के बाद दोनों खड़े हुए और एक दूसरे को देखकर मुस्कुराये।
दिनेश ने मेरी बीवी को गले से लगा लिया और उसके बालों को सहलाने लगा। उसने बोला कि सेक्स का असली सुख क्या होता है, ये मैंने आज जाना।
संजू बोली, "लेकिन ये हमेशा नहीं ना हो सकता है। मैं किसी की पत्नी हूँ। आप कहाँ और मैं कहाँ।" दिनेश बोला, "हाँ ये बात तो सही है।"
संजू अब हँस कर बोली, "अब जाओ, मुझे सुसु करनी है।" दिनेश बोला, "तो करो ना।"
संजू बोली, "नहीं! मुझे शर्म आती है, और कहीं आप फिर से पीने का डिमांड कर दिये तो!" दिनेश हँसा और बोला, "अरे! इतना होने के बाद भी शर्म?"
संजू बोली, "नहीं आप जाओ!" पर दिनेश नहीं गया, वो बोला, "मुझे देखना है।"
हार कर संजू वहीं बैठकर सुसु करने लगी और दिनेश उसकी चूत को सुसु निकलते हुए देखने लगा। कुछ देर बाद वो दोनों अपने-अपने बेडरूम में चले गये।
मैं करीब 10 बजे रात को घर आया तो देखा दिनेश सो रहा था।
संजू खाना बनाने लग गई थी।
मैंने जाकर उसे बाहों में भर लिया और बोला, "क्या कुछ हुआ दिनेश के साथ?" वो झूठा गुस्सा में बोली, "आप क्या समझते हैं मुझे? माना कि वो मेरा पुराना प्यार था मगर अब मैं आपकी बीवी हूँ।"
मुझे लगा वो मुझे नहीं बतायेगी।
मैंने कहा, "तो एक बार करवा लो ना, बेचारे की प्यास बुझ जायेगी।" वो मुझे बोली, "भक! कितने गंदे आदमी हो आप!"
मैं अब सीरियस होकर बोला, "देखो मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। तुम अगर उससे सेक्स करना चाहती हो तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्लीज! मेरे पीठ पीछे कुछ ऐसा-वैसा नहीं करना, नहीं तो मुझे पता चलने पर मैं कुछ भी कर सकता हूँ।"
वो इस बात पर थोड़ा अकचकाई और डरी पर संभलकर बोली, "आप विश्वास करिये मुझ पर।" मैं आगे कुछ नहीं बोला।
11 बजे हम सब ने खाना खाया और अपने-अपने बेड पर आ गया।
हम दोनों में कुछ नहीं हुआ और हम सो गये। अगली सुबह 07 बजे दिनेश चला गया।
तो यह थी मेरा रियल Xxx डर्टी कहानी! और हाँ, मुझे पता है कि एक बार दिनेश को मेरी बीवी की चुत का स्वाद मिल गया है तो वो दोबारा इसे चखने का प्रयास अवश्य करेगा। अगर ऐसा कुछ हुआ तो मैं इसकी भी वास्तविक कहानी साइट पर जरूर डालूँगा!
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