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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 199 बार

Mere Dost Ki Maa Meena – Part 2

mr.playboy

10 Sep 2016 को प्रकाशित

Mere Dost Ki Maa Meena – Part 2
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(हम ऐसे ही जमीन पर लेटे रहे और मैं अपना लण्ड आंटी की चूत में रगड़ रहा हूँ, मेरा माल निकलने वाला है और मेरी रफ़्तार भी तेज़ हो गयी, मेने आंटी को कस कर जकड लिया और अपने होंट उनके होंट पर रख दिए, आंटी समझ गयी कि मैं अब झड़ने वाला हूँ, आंटी को भी मजा आ रहा है क्यों कि मैं अपना लण्ड ठीक उनकी चूत के ऊपर रगड़ रहा हूँ, मैं आंटी के होंट चूसने लगा, आंटी चुपचाप लेटी रही, न तो कोई विरोध था और न ही साथ दे रही है और फिर मेरा माल निकलने वाला होता है)

अब आगे की कहानी..

मैं- अह्ह्हहह अह्ह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ हायेएएएए.. आई लव यू आंटी.. आई लव यू सो मच।।।

आंटी- अह्ह्ह्ह्ह आइ लव यू टू राहुल बेटा।।।

(और मैं आंटी के ऊपर ऐसे ही पड़ा रहता हूँ, मेरे माल की बदबू पुरे कमरे में महकने लगी, हम खड़े हुए, आंटी के बाल बिखरे हैं, लिपस्टिक गाल तक आ गयी है, नाईटी गोरी मखमली झांघ तक चढ़ गयी है, बूब्स का लगभग 70 प्रतिशत भाग बाहर है, आंटी ने अपने आप को ठीक किया, और ऐसे बर्ताव कर रही है जैसे कुछ हुआ ही न हो )

आंटी- देख कैसे कर दी तूने मेरी हालात, अपनी माँ के साथ भला ऐसे कोई करता है, बता।

मैं- आंटी आप बहुत सेक्सी हो, मुझे आप से प्यार हो गया है, मैं आपसे ही शादी करूँगा और किसी से नहीं।

आंटी- तू चुप कर फालतू बकवास मत कर, जा जाकर बाथरूम में फ्रेश हो ले, स्वाति के आने का टाइम भी हो गया।

(स्वाति का नाम सुनकर मेरे लण्ड फिर खड़ा हो गया, मैं बाथरूम गया और अपने कपडे उतारे और नहाने लगा, बाथरूम में मुझे आंटी की ब्रा, पेंटी और कुछ शायद स्वाति के भी अंडर गारमेंट्स दिखे, जिन्हें मेने उठाया तो देखा आंटी की पेंटी में सफेद-सफेद सा द्रव्य पदार्थ है जिसकी खुशबु मेरे माल से मेल खा रही है..

मैं वो सूंघता रहा और मेने उसे चाटा भी, और चाट चाट कर पेंटी साफ करदी, 20 मिनट नहाने के बाद मैं बहार आया और देखा स्वाती दीदी ने कपड़े बदल लिए हैं व वो सोफे में बैठकर टीवी देख रही है, उसके बाल खुले हैं..

उसने नील रंग का नेकर पहना है जिसमे उसकी मखमली सफेद गोरी जांघे अद्भुत आकर्षण का केंद्र बनी हुयी है, ऊपर से नाम मात्र का टॉप पहना हुआ है जिसके अंदर ब्रा नहीं पहनी है इसका प्रमाण टॉप में से उठे हुए 2 निप्पल दे रहे हैं..

स्वाति दीदी को ऐसे देखकर मेरा लण्ड फिर झटके मारने लगा, अचानक दीदी ने मुझे देखा तो मेने दीदी को नमस्ते किया, दीदी फिर मुझ से बातें करने लगी, कॉलेज लाइफ के बारे में पूछने लगी, हमने काफी गप्पे-शप्पे मारी, आंटी रसोई में खाना बना रही थी)

आंटी- अरे राहुल आ गया तू नहा कर, चलो दोनों भाई बहन डिनर करने आ जाओ।

स्वाति- ओके मम्मी, भाई डिनर करने चलो।

मैं- ओके बहन।

(फिर हम डिनर करने लगे, मेने मयूर का नेकर पहना हुआ है जिसके अंदर मेने कच्छा नहीं पहना है, तो मेरा लण्ड झूल रहा है व इधर उधर हिल डुल रहा है, जिसपर मीना आंटी की नजर तो है ही अपितु दीदी की भी नज़र मेरे नेकर पर पड़ी, और दीदी ने मुझे हलकी सी कुटिल मुस्कान दी जिसे देखकर मैं सकपका गया..

डिनर खत्म हो गया उसके बाद हम सब हॉल में टीवी देखने लगे, हम तीनो एक ही सोफे में बैठे हैं, मैं दीदी और माँ के बीच में बैठा हूँ, रात के 11 बज गए हैं तो टीवी पर एक इंग्लिश फिल्म आ रही है, दीदी को अंग्रेजी फ़िल्म देखना बहुत पसंद है ये बात मयूर मुझे पहले बता चूका था..

अचानक फिल्म में एक अर्धनंग्न सीन आता है जिसे देखकर दीदी भी थोडा सकपका जाती है लेकिन चैनेल नहीं बदलती, मैं माँ के हाथ में अपना हाथ रख देता हूँ, माँ चुपके से मेरी ओर देखती है और आँख मारती है, मैं भी आंटी को आँख मरता हूँ, और उसके बाद आंटी नीचे के होंठ को अपने दांतों से काटती है, ऐसा करते हुए आंटी बहुत ही कामुक, चुद्दकड़ औरत लगती है, मैं भी अपनी जीभ अपने होंठो में फेरकर आंटी का अभिवादन करता हूँ..

कमरे में अँधेरा था केवल टीवी की ही लाइट थी, तो इस अँधेरे का फायदा उठाकर आंटी मेरे खड़े लण्ड को अपने हाथों में नेकर के बाहर से ही पकड़ लेती है, स्वाति दीदी जो कि फ़िल्म देखने में मशगुल थी इस काण्ड से अपरिचित थी, फिर आंटी मेरे नेकर के अंदर हाथ डालती है और लण्ड को सहलाने लगती है, फिर लण्ड को ऊपर निचे करके मुठियाना शुरू करती है, मेरे मुह से सिसकारी निकल जाती है)

मैं- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ।।।।

स्वाति- क्या हुआ भाई ?

मैं – नही नही कुछ नही बहना, वो जरा नींद आ गयी थी।

स्वाति- आपको अगर सोना है तो सो जाओ।

मैं- ठीक है मैं सो रहा हूँ, आंटी कहाँ सोऊं मैं ?

आंटी- मयूर के कमरे में सो जा बेटा, रुक मैं भी चलती हूँ, बिस्तर सही कर दूंगी तेरा।

(फिर स्वाति दीदी को गुड नाईट बोलकर हम मयूर के कमरे में जाते हैं, मयूर के कमरे में घुसते ही मैं आंटी को दिवार में पटक कर जकड लेता हूँ और उसके होंठ पर अपने होठ मिला लेता हूँ और जोरदार चुम्बन करता हूँ, आंटी भी मेरा साथ देती है, आंटी मेरी जीभ से अपनी जीभ मिलाती है..

हम फ्रेंच किस करते हैं, करीब 10 मिनट चुम्बन करने के बाद मैं आंटी को मयूर के बिस्तर पर पटक देता हूँ और आंटी की गुलाबी नाईटी को उसकी कमर तक उठता हूँ, आंटी की चूत गुलाबी रंग की चिकनी है, उस पर बाल नही हैं, आंटी ने चूत ऐसे साफ करी हुयी है कि किसी का भी चाटने का मन हो जाये..

आंटी की क्लीन शेव चूत को देखकर मेरे मुह में पानी भर आया, मैंने आंटी की चूत पर अपना मुह लगा दिया, जिससे आंटी का पूरा बदन कांपने लगा और वो सिसकारियाँ व आहें भरने लगी, वो अपने हाथ से मेरे बाल को पकड़ कर चूत में मेरे सर को दबा रही है)

आंटी- अह्ह्ह्ह्ह शस्सस्सस्सस.. उम्म्म्म्म ऊम्मम्मम्म.. ऐसे ही चाटो बेटा, साफ कर दो मेरी पुस्सी, खा जाओ मेरी फुद्दी राहुल, तुम लाजवाब हो बेटाअह्ह्ह्ह, चाट और चाट, अह्ह्ह्ह्ह, ओह गॉड, ओह गॉड, उम्म्म्म्म, राहुल यू आर अमेजिंग मेरे बेटे।।।

(मैं आंटी की चूत को तेजी से चाटे जा रहा था, अचानक आंटी की सिसकारियाँ तेज हो गयी, उनके बदन की कम्पन बढ़ गयी, मुझे पता चल गया कि आंटी अब झड़ने वाली है)

आंटी- अह्ह्ह्ह्ह.. राहुलललललल.. उईईईईई.. मैं झड़ने वाली हूँ बेटा.. ह्ह्ह्हह्ह.. आह्ह्ह्ह,, गईईईईईईई मैं तो आज, ओह गॉड, आईईईई मैं आई राहुल.. ओहोऊऊऊ।।।

(और आंटी ने ढेर सारा पानी मेरे मुह में छोड़ दिया और आंटी का बदन कांपने लगा, मैं फिर आंटी के ऊपर चढ़ा और उन्हें फिर चूमने लगा, पहले उनके माथे को चूमा, फिर गाल, फिर गले को चूमने लगा, चाटने लगा, मेरे थूक से आंटी का चेहरा और गला गीला हो गया)

आंटी- राहुल मेरी जान जल्दी डाल अब अपना डंडा मेरी चूत में, अब सहन नही होता बेटा, जल्दी कर स्वाति न आ जाए कमरे में कहीं, आज मेरी आग को बुझा दे राजा, मयूर के पापा तो साल में एक बार आते हैं, मैं तड़प गयी हूँ स्यां, आज मेरी तड़प मिटा दे, मुझे चोदकर आजाद करदे राहुल बेटा।

मैं- ओके मेरी रानी, तू चूत की रानी, मैं हूँ लौड़ों का राजा, थोडा ऊपर थोडा निचे जरा हाथ तो बंटा, देखने दे लाल फुद्दी जरा झाँट तो हटा, मुह खोल अपना मेरा नाम तू चिल्ला, राहुल राहुल कहकर गांड तू हिला।।।

आंटी- आजा मेरी चूत में डाल दे अपना लौड़ा,रगड़ रगड़ कर करदे मेरी तू, गांड को चौड़ा।।।

मैं- वाह आंटी क्या शायरी करती हो आप भी।

(मैंने अपना लण्ड आंटी की चूत में सेट किया और जोरदार धक्का लगाया जिससे मेरा लण्ड पूरा आंटी की चूत में समा गया, और फिर चुदाई शुरू हुयी, आंटी के और मेरे मुह से सिसकारियाँ निकल रही है जिससे पूरा कमरा गूंज रहा है, मैं आंटी की चूत मैं लण्ड अंदर बाहर कर रहा हूँ, झटकों से आंटी की लाल चूड़ियाँ खनक रही है और पैरों की पजेब की भी आवाजें आ रही हैं जिससे पूरा कमरा खनखना रहा है और इस चूड़ियों की खनखनाहट से मेरा जोश और बढ़ गया)

आंटी- अह्ह्ह्ह्ह चोद चोद, राहुल, बना दे मुझे अपने बच्चे की माँ, डाल दे अपना बीज मेरी कोख में, दे दे मयूर को एक और भाई, चोद मुझे राहुल, चोद, अह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म शस्स्स्स्स.. सशह्हह.. ओहो होहोहो।।

मैं- अह्ह्ह्ह्ह,,, आज से तू मेरी बीवी है मीना अह्ह्ह और मयूर मेरा बेटा अह्ह्हह और स्वाति मेरी बेटी है.. आज से मैं तेरा परमेश्वर मेरी जान आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह।।।

(20 मिनट चुदाई करने के बाद मैं आंटी की चूत में ही झड़ गया और हम थके थके से ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर नंगे लेटे रहे, हमे कुछ भी होश नहीं थी, हम एक दूसरे को चूमे जा रहे थे, अचानक दरवाजे में आवाज हुयी तो देखा स्वाति दीदी और मयूर ये सब कुछ देख रहे थे, आंटी और मैं झट से अलग हो गए, मयूर की आँखें गुस्से से लाल थी और उसके हाथ में बेसबॉल का बल्ला था, जिसे लेकर वो मेरे पीछे मुझे मारने को भागा, मैं नंगा ही कमरे से बाहर भागा)

मयूर- रुक मादरचोद, आज तुझे जान से मार दूंगा, क्या बोल रहा था कि आज से मैं तेरा बेटा हूँ, तेरे टुकड़े करके आज कुत्तों को खिला दूंगा, रुक भेनचोद।।।

स्वाति- भाई मार इस हरामी को, इसने हमारी माँ की इज़्ज़त लूट दी, छोड़ना मत इस कुत्ते को।।।

मैं- मयूर बात तो सुन भोसडीके अपनी माँ से तो पूछ ले.. एक बार..

आंटी(रोते हुए)- मयूर बेटा मार इसे, इसने मेरे साथ जबरन ये सब कुछ किया, मेने बहुत विरोध किया लेकिन इसकी ताकत के आगे में हार गयी, इसने मेरा बलात्कार कर दिया बेटा, तेरी बूढी माँ का बलात्कार कर दिया.. हे भगवान..

मैं- साली रंडी, झूठ बोलती है, मयूर भाई तेरी माँ एक नंबर की रंडी है, साफ साफ झूठ बोल रही है ये रांड.. मेरी बात सुन मेरे दोस्त, मेरे भाई, इसने मुझे उकसाया तेरी माँ की कसम।।।

मयूर- स्वाति दीदी इसे उधर से घेरो, पकड़ो इस मादरचोद को, आज खाल निकाल दूंगा इस भें के लौड़े की।।।

(किसी तरह मौका देखकर मैं ऐसा नंगा ही दरवाजे से बाहर भाग जाता हूँ और मयूर मेरे पीछे मुझे मारने को दौड़ता है, किसी तरह उसकी नजरों से ओझल होकर मैं झाड़ियों में छिप जाता हूँ और वहीँ सो जाता हूँ, सुबह सुबह पत्तों के कपडे बनाकर अपने घर चला जाता हूँ..

मेरा मयूर के साथ ये विवाद 1 हफ्ते तक रहा लेकिन बाद में मयूर की माँ होटल में 4 आदमियों के साथ पकड़ी गयी तो मयूर को मीना के बारे में सच्चाई का पता चला और बाद में उसने मुझ से माफी मांगी और अपने घर ले गया, कुछ समय बाद मेने स्वाति दीदी को पटा कर खूब चोदा और और मयूर को एक भांजा दिया, लेकिन मयूर चूतिये को आज तक नही पता कि वो किसका भांजा है)

दोस्तों अगर मेरी कहानी पसंद आये तो कमेन्ट पक्का करना, अगर अच्छा रिस्पांस मिला तो मैं और कहानियां लिखूंगा।।।

ये सेक्स स्टोरी पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।

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Mere Dost Ki Maa Meena

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