सेक्स स्वैप इन फॅमिली में मैं अपने देवर से चुदती थी। देवर की शादी के बाद मैंने इस खेल में देवरानी को भी शामिल कर लिया। हम चारों चुदाई के मजे ले रहे थे।
यह कहानी सुनें.
दोस्तो, मैं वृत्ति चौधरी आज अपनी एक नई और सच्ची सेक्स कहानी आपके लिए लेकर आई हूं।
मेरी पिछली कहानी थी:पुरानी सेटिंग की चचेरी बहन की सीलपैक चूत फाड़ी
मैंने पहली कहानी में बताया था कि यहां ज्यादातर कहानियां काल्पनिक होती हैंइस कारण कई बार मेरी भी इच्छा हुई कि मैं भी अपनी आपबीती कहानी को भेजूं, और आप लोग भी उसका आनन्द उठाएं!
इसलिए आज मैं लंबे समय के बाद इस कहानी के दूसरे हिस्से के साथ के साथ हाजिर हूं।
पाठकों से आग्रह है कि वे इस सेक्स स्वैप इन फॅमिली कहानी पर अपनी राय और सुझाव दें।ताकि मैं उनके लिए और भी मसालेदार आपबीती कहानियां लेकर आ सकूं।
जो पाठक नए हैं, उनके लिए मैं अपना परिचय दे देती हूं।मेरी वर्तमान उम्र 26 साल है।जिस्म की बात करें तो पहली कहानी भेजने के बाद वो काफी भर चुका है।अभी फिगर बताऊं तो बूब्स 34D के हैं, कमर 30 की और पिछवाड़ा 36 का है।
मैं अपने पति के साथ अपने सेक्स जीवन से पूरी तरह संतुष्ट हूं।कोई भी मुझे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मेल न करे।मेरा जिस्म गदराया हुआ है और आज भी मर्दों को आकर्षित करता है।
मैं हर तरह की ड्रेस पहनती हूं।जींस टॉप भी पहनती हूं और पैंट शर्ट भी पहनती हूं। और राजस्थानी ड्रेस तो मेरी सबसे ज्यादा फेवरेट है।उस ड्रेस में देखने वाले मन ही मन मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी ही कर देते हैं।
मेरी पहली सेक्स कहानी के बाद मुझे हजारों मेल और सैकड़ों कमेंट मिले हैं।
मैंने लगभग सभी कमेंट पढ़े हैं और लगभग सब मेल का रिप्लाई दिया है।हजारों लोगों ने कहानी पसंद की है और एक भी नकारात्मक कमेंट नहीं था।
यह लेखक को और ज्यादा हौसला देने वाला पहलू है।वैसे भी सच्ची कहानी में कोई भी कमी नहीं निकालता है।
कहानी को पढ़ने मात्र से पता चल जाता है कि कहानी काल्पनिक है या सत्य घटना पर आधारित है।
आप सब को चुदाई की कहानी पढ़कर बहुत मजा आया तो मुझे भी अच्छा लगा।इस कहानी को मैं विस्तार से बता रही हूं।कुछ लोगों को कहानी काल्पनिक भी लगी थी।
उनके लिए कहना चाहती हूं कि जिस औरत पर सेक्स चढ़ जाए उसे फिर नए लंड से चुदने से कोई नहीं रोक सकता है।
और सच कहूं तो हमारे जीवन में काफी कुछ ऐसा घटित होता है जिस पर हम विश्वास भी नहीं कर सकते हैं।कहावत है कि सत्य कल्पना से भी परे होता है।
वैसे कपल स्वैपिंग आजकल आम बात है।हर कोई चाहता है कपल स्वैपिंग करना पर सबके नसीब में नहीं होता है।न ही स्वैप करना इतना आसान काम है।
जैसा कि माना जाता है, हर मर्द के अपने जीवन में कम से कम दो या दो से अधिक औरतों के साथ शारीरिक संबंध होते हैं।आप खुद ही अपना भी देख सकते हो।
इस लिहाज से यदि सोचें तो यदि 100 मर्द, दूसरी औरतों के साथ चुदाई का आनंद लेने में लगे हुए हैं तो निश्चित रूप से औरतों की संख्या भी 200 या अधिक होगी।
कहने का मतलब यह है कि औरतें मुखर कम होती हैं लेकिन उनकी कामुकता मर्द की कामुकता से किसी भी तरह कम नहीं होती।
कुछ जिज्ञासु पाठकों का यह भी प्रश्न था कि “क्या फिर बाद में कहानी और आगे बढ़ी या नहीं?”तो उस पर मेरा कहना यह है कि यदि औरत के जिस्म पर एक बार यदि कोई गैर मर्द चढ़ गया हो और वह पास में ही रहता हो तो कहानी खत्म नहीं होती, निरंतर चलती है।मन भरने तक वो मर्द उस औरत के जिस्म से जब मौका मिले, तब खेलता रहता है।
जब जब देवर और जेठ हम दोनों के जिस्म से खेले हैं अनोखी घटना को में जरूर कहानी में बताया करूंगी।कुछ पाठकों का यह भी प्रश्न था कि देवरानी की चुदाई अच्छे से हुई या नहीं?आपने गांड मरवाई या नहीं?
तो मैं बताना चाहती हूं कि तब भी मैंने बताया था कि इस कहानी के तीन और पार्ट आने वाले हैं।आज का पार्ट भी उसी का हिस्सा है।
तो अबदेवरानी जेठानी ने पति की अदला बदली कीकहानी को आगे बढ़ाते हैं:
मेरी देवरानी और मैं, दोनों ही कभी मेरे पति के साथ थ्रीसम करती थीं और कभी देवर हम दोनों को खेत में, या घर में घोड़ी बनाता था।कई बार देवर ने हमें भयंकर गर्मी में फसल से भरे खेत में चोदा था।
आगे बढ़ने से पहले कहानी के पात्रों का परिचय करवा देती हूं। मैं वृत्ति चौधरी, जैसा कि आप जानते ही हैं।मेरे पति वीरेंद्र चौधरी की उम्र 27 साल है। उनके लंड का साइज 7.5 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।शरीर का वजन 65 किलो के आसपास है।
मेरे देवर नरेश की उम्र लगभग मेरे बराबर यानि 25-26 साल की है।उनके लंड का साइज 7 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है, वजन लगभग 75 किलो है।
मेरी देवरानी सीमा की उम्र 22 साल है।उसके बदन का साइज है- बूब्स 32″, कमर 28″, और गांड लगभग 30 इंच।
देवर-देवरानी की शादी हुए लगभग 2 साल हो चुके हैं लेकिन पिछली कहानी में मैंने बताया था कि जब हमने स्वैपिंग सेक्स किया था तब उनकी शादी को 5-6 महीने ही हुए थे।
दो-दो मर्दों की मेहनत के बाद देवरानी का बदन भी काफी भर चुका है। उसकी गांड भी काफी बड़ी हो चुकी है।इसका पूरा श्रेय मेरे पति को ही जाता है।अब उसकी कमर में 32 की जींस नहीं आती है।
देवरानी के साथ पहली बार सेक्स नए साल पर हुआ था।उस दिन मेरे पति ने बताया कि उसके साथ रात में बहुत ज्यादा मजा आया था। और अगले दो से तीन दिन तक देवरानी की चुदाई के बाद हालत खराब हो गई थी और उससे चला भी नहीं जा रहा था।
मेरे पति ने उसे जमकर चोदा था क्योंकि रोजाना एक ही चूत की चुदाई करते-करते आदमी बोर हो जाता है और नई चूत मिलने पर वो पागल हो जाता है।वो नई चूत को गधों की तरह चोदने लग जाता है।
उसमें भी जब सीमा जैसी पतली और सेक्सी लड़की की चूत और सील पैक गांड मिल जाए तो मर्द तो क्या बुजुर्ग को भी दोगुना मजा आता है और वो पलंग तोड़ चुदाई करते हैं।यह सब उस रात मेरे पति ने सीमा के साथ किया था।गांड और चूत की हालत खराब कर दी थी।
देवरानी तो दर्द से मर रही थी लेकिन पति का पूरा दिन मजे में गुजरा था।उस दिन वो सर्दियों की स्कूल में छुट्टी होने के कारण घर में ही रहे थे।हमने दिनभर आपस में रात की चुदाई की बातें की थीं।
उनके चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि उन्हें कितना मजा आया था।और मुझे भी बहुत मजा आया था देवरानी की चूत और गांड फड़वाकर!
हालांकि उस दिन के बाद देवरानी ने तीन दिन तक किसी को भी चूत और गांड नहीं दी।उस रात की चुदाई में उसकी चूत-गांड पूरी तरह से सूज चुकी थीं।उसे चलने-फिरने और शौच जाने में भी दिक्कत होने लगी थी।
फिर मैंने उसकी चूत-गांड की गर्म पानी से सिकाई की थी।तब जाकर उसका दर्द कम हुआ और वो धीरे-धीरे सामान्य होने लगी।
उसके 2-3 दिन बाद देवरानी भी खुलने लगी।इससे पहले स्वैपिंग सेक्स होने के बाद वो नजर भी नहीं मिला पाती थी मेरे पति के साथ।अकेले में ही पास नहीं रहती थी लेकिन उस रात के बाद तो बिल्कुल ही अकेली रहने लगी थी।
बेटे की साली की चुदाई की
अब पुनः चुदाई शुरू होने लगी।अब मेरे पति भी आराम से चुदाई करने लगे थे और गांड भी तेल लगाकर धीरे-धीरे मारते थे।लेकिन दोनों ही भाई आपस में पास-पास चुदाई करते हुए बहुत ज्यादा संकोच करते थे और अपने आप में सहज महसूस नहीं करते थे।
मगर मेरे लिए तो ऐसा कुछ नहीं था।जब चाहती थी तब किसी के सामने भी नंगी हो जाती थी क्योंकि मुझे शादी के बाद पति और देवर दोनों ने ही मजे दिए थे।मेरी चूत के पानी से दोनों के ही लंड स्नान कर चुके थे।
इस कारण दोनों में से कोई भी मेरी चूत और गांड देखे मुझे कुछ भी अटपटा महसूस नहीं होता था।लेकिन मेरे पति जब भी चुदाई करते थे तो थोड़ी बहुत इस तरह की झिझक जरूर रहती थी।वैसे यह हर किसी मर्द में होती है।
उधर देवरानी भी बहुत ज्यादा झिझक रही थी क्योंकि दो मर्दों के सामने उसको नंगी होने में बहुत ही शर्म आती थी।वह बेड पर वो उल्टी लेट जाती थी।मैं बड़ी मुश्किल से उसे तैयार करती थी।
हम दोनों को घोड़ियां बनाकर जब दोनों भाई पेलते थे तब उसका चेहरा शर्म से लाल हो जाता था।वैसे यह होना स्वाभाविक है।इस कारण हम दोनों पास-पास में कभी-कभी घोड़ियां बनकर नहीं चुदवाती थीं।
न ही वो चुदाई करवाते हुए किसी से नजरें मिलाती थी।वो कई बार मिशनरी पोजीशन में भी अपना चेहरा ढक लेती थी लेकिन चुदवाने में वो भी एक्सपर्ट थी।हां, संकोच थोड़ा सा ज्यादा करती थी।
फिर लन्ड पर बैठकर जब कभी उछलना होता था तो वो एकदम नंगी होने पर भी अपने बूब्स दोनों हाथों से छुपा लेती थी।
पता नहीं किस तरह की शर्म आती थी उसे!हालांकि शुरू-शुरू में यह होना ही था।लेकिन एक दिक्कत थी, जब तक वो चुदाई के लिए तैयार नहीं होती तो उसकी चूत पानी नहीं छोड़ती।जिससे चुदाई के बाद चूत की बहुत रगड़ाई हो जाती थी।
इस कारण देवरानी को मेरे पति हमारे कमरे में ले जाकर ही ज्यादातर चुदाई करते थे।
वैसे अगर देखा जाए तो मैं भरे हुए जिस्म की मालकिन हूं।इस कारण मुझे हर किसी का चोदने का मन करता है क्योंकि दूध से लबालब भरे हुए मेरे बूब्स, उभरे हुए गाल, बड़ी और चौड़ी छाती, मटकती गांड, बड़ी सी कमर और ऊपर से दूध जैसा गोरा रंग।
मेरा जिस्म किसी को भी घायल कर सकता है।इस तरह के शरीर को बनाने में भी बहुत मेहनत करनी पड़ती है मर्दों को।मेरे देवर को मेरी चुदाई में मजा आता था।
दूसरी तरफ मेरे पति को देवरानी की टाइट चूत और गांड चोदने में बहुत मजा आता था।एक कारण यह भी कि जिसकी बीवी के स्तन बड़े हैं उसे छोटे अच्छे लगते हैं, जैसे मेरे पति को देवरानी के छोटे स्तन अच्छे लगते हैं।जिसकी बीवी के स्तन छोटे होते हैं उसे बड़े स्तन अच्छे लगते हैं।
देवर को मैं अच्छी लगती थी सिर्फ स्तन और गांड के कारण ही।लेकिन इस मामले में औरतें अपवाद हैं।
किसी भी औरत को छोटा, पतला और कमजोर लंड नहीं चाहिए, सबको लंबा, मोटा और दमदार लंड ही चाहिए।
देवरानी के संकोच के कारण दोनों ही अपने-अपने कमरे में ले जाकर मजे से चुदाई करते थे।कभी-कभी तो मैं सुबह उनके रूम में जाती थी तब भी सुबह का उनका राउंड चलता रहता था।
पति ज्यादातर उसको घोड़ी बनाकर पेलना पसंद करते थे।इस स्टाइल में उनका लन्ड अंदर तक जाता था।कई बार तो मैं उठकर उनको चाय पिलाने जाती थी और वो चुदाई करते थे।
ऐसा करते दिन बीतते गए और हम चारों ही एक दूसरे से खुलने लगे थे।
अब देवरानी को एक ही पलंग पर चुदवाते हुए किसी भी प्रकार की शर्म नहीं आती थी।न ही अब वो अपना चेहरा या फिर बूब्स छुपाती थी।
रात को चुदाई करते समय वो मेरी चुदाई करने वाले की गांड पर थप्पड़ भी मार देती थी- सही से चुदाई करो … ऐसे क्या कर रहे हो?अपने पति या अपने जेठ की गांड पर भी थप्पड़ मारना उसके लिए आम बात हो गई थी।
कभी कभी मैं जब लन्ड पर उछलती थी तब वो मेरी गांड पर भी थप्पड़ मार देती थी- सही से कूद!कभी-कभी वो मुझे भी घोड़ी बनाकर पीछे से धक्का लगा देती थी यानी अब पूरी तरह से वो भी चुदाई में रण्डी बन गई थी।
इस तरह सेक्स स्वैप इन फॅमिली करते-करते काफी समय बीत गया था।सीमा भी बहुत ज्यादा खुश थी।उसे भी इस तरह चुदाई में मजा आता था।
वैसे अकेले कमरे में चुपचाप चुदाई करने में जितना मजा नहीं आता है उतना मजा खुलकर चुदाई करवाने में आता है।पूरी तरह से सहज ही महसूस होता है।हम चारों को सेक्स से मजे लेते काफी समय बीत गया था।
दिन में भी वो अपने पति, यानि मेरे देवर से चुदाई करवा लेती थी बिना किसी डर के।मेरे पति स्कूल जाते थे तो मैं भी देवर से चुदाई करवा लेती थी।
हालांकि मैं तो काफी समय से यह खेल खेलती थी।देवर जी का जब मन होता था वो चुदाई कर देते थे।वैसे दिन में हम दोनों ही खेतों में काम करने जाती थीं।इस कारण टाइम कम ही मिल पाता था।
मेरे पति स्कूल जाते थे और देवर अपना काम करते थे।घर होते थे तब जरूर हमारे साथ चलते थे लेकिन ज्यादातर हम दोनों ही खेतों में अकेली रहती थीं।
हमारे साथ ससुर जी और सासू जी भी कई बार जाते थे।कुछ समय बाद देवर को वापस जाना पड़ा गुजरात में लकड़ी के काम के लिए।वैसे भी घर पर रहते हुए उनको काफी समय बीत गया था।
सीमा को वो साथ नहीं ले गये क्योंकि नई शादी थी और सीमा को पहली होली घर पर ही रहना था।उसका प्लान होली के बाद देवर के साथ जाने का था।
मुझे तो ये भी लगता था कि शायद देवरजी के वहां पर किसी के साथ अवैध संबंध हों।इसलिए भी हो सकता है कि वो सीमा को साथ नहीं ले गए।खैर, जो भी हो घर में तो यही रिवाज था कि शादी होते ही लड़का-लड़की बाहर कहीं अकेले नहीं रहते हैं।
अब घर में सिर्फ देवरानी, मैं और मेरे पति ही रह गए थे।सीमा को पीहर जाना था क्योंकि देवरजी तो थे नहीं अब, लेकिन परिवार में एक शादी होने के कारण वो रुकी रही।
अब हमारे पास लंड तो एक ही रह गया था लेकिन चूत तो दो-दो ही थीं।इसलिए एक लंड हमें कम पड़ने वाला था।इसलिए देवरानी को पीहर भेजना भी जरूरी था।
देवर ने जाते हुए भी हम दोनों को चोदा था और मुझे बोला था कि ख्याल रखना।मैंने कहा- इसकी चिंता मत करना।
वैसे हर कोई पति इस तरह अपनी पत्नी को किसी से चुदने के लिए नहीं छोड़कर जाता है क्योंकि उसे पता था कि मेरे जाने के बाद क्या होने वाला है।
साथ ही देवर को पता था कि सीमा शादी में जाएगी और बाद में अपने पीहर चली जाएगी।वैसे भी देवर ने मेरी चुदाई बहुत बार की थी।उसके मन में ऐसा बिल्कुल भी ख्याल नहीं था कि सीमा के साथ कुछ गलत हो सकता है।
देवर के जाने के बाद हम दोनों अकेली हो गई थीं और आज देवरानी काफी उदास थी।मैंने कहा- कोई बात नहीं, रात को आ जाना हमारे कमरे में, मिलकर मस्ती करेंगे।
वो मान गई।
फिर उस दिन हम शादी में सज धजकर गई थीं और शाम को वापस आ गई थीं।इसके बाद हमने क्या किया, पति के साथ चुदाई के कैसे मजे लिए आपको अगली कहानी में बताऊंगी।
आपको यह सेक्स स्वैप इन फॅमिली कहानी कैसी लग रही है मुझे जरूर बताना। कमेंट्स में अपनी राय दें या फिर मुझे मेल करें।support@mohakkisse.com
सेक्स स्वैप इन फॅमिली कहानी का अगला भाग: