सेक्सी हॉट गर्ल फक़ स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैंने अपने दोस्त की चचेरी बहन को उसी के घर में चोदा. उसकी नयी नयी शादी हुई थी पर उसका पति ड्यूटी पर चला गया था.
कहानी के पिछले भागदोस्त की बहन ने मेरा लंड चूसामें आपने पढ़ा कि मैं अपने दोस्त की शादीशुदा बहन के घर में उसके साथ सेक्स का मजा ले रहा था.
मेरे लण्ड को उसकी चूत में समाने के लिए एक आखरी धक्के की जरूरत थी और मैं शायद अपने आपे में नहीं था।काजल की हालत देख कर भी मुझे उस पर कोई तरस नहीं आया … दिमाग में कुछ था तो सिर्फ और सिर्फ अपने लण्ड को उसकी चूत में पूरा पेलने का इरादा।
मैंने अपने होंठ काजल के होंठों पर रखे और आखरी प्रहार कर प्रिया।
काजल की आवाज़ मेरे मुँह में जैसे घुट कर रह गयी।उसने अपने हाथ पैरों से एक नाकाम कोशिश की मेरी गिरफ्त से बाहर आने की पर सब बेकार था।
उसकी टाइट चूत के लिए मेरे लण्ड के प्रहार बहुत ज्यादा थे शायद और अब तो लण्ड भी उसकी चूत में पूरा समा चुका था।मुझे मन ही मन एक असीम ख़ुशी सी मिल रही थी पर अब मैं थोड़ा चिंतित था काजल की हालत को देखते हुए।
तो मैंने काजल के चेहरे को सहलाते हुए धीरे धीरे उसकी चूत में अपने लण्ड को आगे पीछे करना शुरू किया जिससे उसका दर्द थोड़ा कम हो जाए।
मुझे भी लण्ड को आगे पीछे करने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी।काजल की चूत किसी कुंवारी लड़की जैसी टाइट ही थी और मुझे उसे चोदने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी।
कुछ देर बाद अब काजल की आँखें भी थोड़ी खुलने लगी थी।वो कुछ बेहतर लग रही थी मगर उसके चेहरे पर दर्द के भाव अब भी थे।
थोड़े और समय में काजल अपने पूरे होश में थी पर उसकी आँखों में ढेरों सवाल थे जैसे वो मुझसे इस बेदर्दी का कारण पूछ रही थी।
इस सबके बावजूद काजल का बदन मेरी ठापों का पूरा जवाब दे रहा था।मेरे हर धक्के पर उसकी चूत पलट वार कर रही थी और उसके चूचे तो मौज ले रहे थे जैसे सागर की लहरें!सवालों के बीच ही काजल की आँखों में संतुष्टि भी दिख रही थी और काजल किसी भी पल पानी छोड़ने को थी।
मेरा लण्ड भी काजल की चूत की गर्मी से तक़रीबन चरम तक पहुंच चूका था और उसको भी एक बहाना चाहिए था कि वो काजल की चूत को हरा कर सके।
मैं काजल को बेतहाशा चूम रहा था और उसके साथ इन पलों का ऐसे आनंद ले रहा था जिसका यहाँ उल्लेख करना संभव नहीं।मैंने काजल के दोनों हाथ पकड़े और उनको उसके सिर के ऊपर ले जाकर कस कर पकड़ लिया।इससे मुझे ऐसी अनुभूति हो रही थी जैसे मैं उसको जबर दस्ती चोद रहा हूँ।
मेरा खून बहुत तेज़ी से दौड़ रहा था और मैंने अपनी रफ़्तार को गति देनी शुरू की।काजल भी भरपूर आनंद लेते हुए मेरी पूरा साथ दे रही थी और मेरी रफ़्तार के जैसे ही उसकी आवाज़ें भी बढ़ती जा रही थी।उसके मुँह से जाने क्या क्या निकल रहा था- ओह विकास … मेरी जान … आज मेरी सारी प्यास बुझा दे … मैं जाने कब से प्यासी हूँ … रोहित के बिना ये ज़िन्दगी कैसे कट रही है बस मैं जानती हूँ … और उसपर ये बेदर्द जवानी … चोद दे विकास … ज़ोर लगा … और ज़ोर लगा … आज मेरी चूत की सारी गर्मी निकाल दे हरामी … अपने दोस्त की बहन को चोदता है … साले बहनचोद … और ज़ोर लगा कुत्ते!
मैं काजल के मुँह से ये सब सुनकर हैरान था।मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये वही काजल है.
पर उसकी ऐसी बातें सुनकर मैं और ज्यादा जोश में आ गया.
इस सबका परिणाम ये हुआ कि मैं भी काजल से इसी तरह से बात करने लगा और मैंने भी काजल को पलट जवाब में ढेर सारी गालियां चिपका डाली- साली कुत्ती … तुझे कब से चोदने की सोच रहा था … तू अब जाकर हाथ आयी।काजल- ओह विकास और ज़ोर लगा.
विकास- आज मैंने तुझे इतना चोदना है कि तू जब भी चुदेगी, इस चुदाई को याद करेगी।काजल कांपती हुई- ज्यादा बातें ना चोद … आज तूने सिर्फ मुझे चोदना है और बातों को नहीं! चल अब चोद मादरचोद!
मैं समझ गया था कि काजल किसी भी समय झड़ने वाली है।साथ ही उसकी चूत मेरे लण्ड के लिए अभ्यस्त हो चुकी थी तो मैं जानता था कि अब मेरी ठापों से उसको कोई ख़ास जोश नहीं चढ़ रहा था।
तो मैंने काजल के कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए और काटने लगा।काजल को दर्द हुआ तो उसने अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर मैंने उसके हाथों को कस कर पकड़े रखा।
इस सबसे काजल को जोश तो चढ़ ही रहा था पर दर्द भी हो रहा था।लिहाजा उसने फिर से गालियां देनी शुरू की- साले कुत्ते! इतनी बेदर्दी क्यों दिखा रहा है … हराम … खोर … बहन … चोद … पर कह कुछ भी, मज़ा बहुत दे रहा है तू हरामी … तू लगा रह मेरी जान … ताबड़…तोड़ चोद मुझे!
इस सबके दौरान, काजल का पूरा जिस्म कांपने लगा था और उसकी बोली भी लड़खड़ाने लगी थी।
थोड़ा और जोश चढ़ाने को मैंने काजल के हाथों को मसलते हुए धक्के लगाने जारी रखा और काजल ने एक जोरदार चीख के साथ उसके सब्र का बाँध आख़िरकार तोड़ प्रिया.और काजल की चूत का झरना ऐसे छूटा जैसे वो कभी नहीं रुकेगा.
काजल हाँफती हुई- ओह विकास … ओह … ओह … ओह … तूने तो कमाल ही कर प्रिया आज। मैंने आज तक ऐसा कुछ महसूस नहीं किया।विकास काजल को काटते हुए- मैंने भी ऐसी जंगली जवानी नहीं चखी आज तक!
और इसके साथ ही मेरा भी लण्ड पिघल गया और मैंने गुर्राते हुए अपना सारा रस काजल की रसीली और टाइट चूत में छोड प्रिया.
काजल अपने पैरों को मेरी कमर पे बांधते हुए- विकास … बस ऐसे ही … बस ऐसे ही … थोड़ी देर अंदर ही रह जान!विकास काजल को चूमते हुए- जैसे कहोगी वैसे ही रहेंगे जानेमन … आज का दिन तेरे नाम है.
काजल मुझे अपने अंदर समाते हुए- ओह विकास … आई लव यू जान.विकास काजल के चूचों को सहलाते हुए- आई लव यू काजल जान!
काजल सांसों को इकट्ठा करते हुए- जंगली तो तू हो रहा था यार!विकास- तू चीज़ ही ऐसी है कि मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया.
काजल- पर ऐसे भी कोई चोदता है क्या?विकास- मैं चोदता हूँ ना … पर अब तुझे किसी और की जरूरत नहीं पड़ेगी.
यूँ ही हम दोनों एक दूसरे से बातें बनाते रहे और मैं काजल के ऊपर ही लेटा रहा.
हम दोनों के रस आपस में मिलकर काजल की चूत से बाहर टपक रहे थे और मुझे इसका अहसास हो रहा था।
मेरे बचपन का प्यार
काजल की चूत मेरे लण्ड को जैसे उसकी हर बून्द के लिए निचोड़ रही थी।हम करीब एक घंटे से भी ज्यादा तक काम-क्रीड़ा करते रहे थे।
काजल को इस सबकी आदत बिल्कुल नहीं थी और वो बुरी तरह थक चुकी थी।उसकी सांसें भी बहुत तेज़ चल रही थी और उसमें हिलने तक की भी हिम्मत शेष नहीं थी।
मुझे भी बहुत टाइट चूत मिली थी और मैंने जो बेसब्रों की तरह अपना लण्ड ठोका था, उससे मेरा लण्ड छिल चूका था और मुझे भी हल्का मीठा दर्द हो रहा था।और उस पर थकान अलग!
फिर भी काजल मुझे और मैं सेक्सी हॉट गर्ल काजल के पूरे बदन को सहला रहा था।
इसी सबके चलते ना जाने कब हम दोनों ऐसे ही एक दूजे से चिपटे हुए सो गए।मुझमें इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि मैं अपना लण्ड भी काजल की चूत से बहार निकाल सकता।और काजल ने भी ऐसी कोई कोशिश नहीं की।
मैंने सोने से पहले दीवार पर लगी घड़ी की तरफ देखा था तो समय कोई 1 के आस पास हुआ था।
जब मेरी आँख खुली तो मैंने खुद को काजल के बगल में लेटा पाया पर काजल अभी तक बेसुध पड़ी सो रही थी।सूरज बहुत ज्यादा चढ़ा नहीं था क्यूंकि खिड़कियों से आती रौशनी बहुत तेज़ नहीं थी।
मेरी नज़र काजल के सुन्दर चेहरे पर पड़ी और दूसरी घडी पर जो 5:30 का समय दिखा रही थी।काजल गहरी नींद में सो रही थी।
मैंने इत्मीनान से काजल को जी भर के देखा और फिर उसके होंठों पर हल्के से अपनी उँगलियाँ फेरीं।पर काजल ने कोई हरकत नहीं की।
मैंने अपने हाथ को हल्के से काजल के चूचे पर रखा और उसको सहलाने लगा।
मैं थोड़ी देर ही काजल के चूचे और निप्पल से खेला था कि काजल के चेहरे पे एक मुस्कराहट फूट पड़ी।तब मैंने काजल के निप्पल को चूमा और अपने हाथ को उसकी चूत की तरफ बढ़ाते हुए उसके निप्पल को हल्का सा पिया।
मैंने सिर्फ काजल की चूत को छुआ ही था कि वो जैसे डर कर उठ बैठी हुई।
विकास- कोई नहीं है काजल जान … मैं हूँ, तुम्हारा विकास.काजल- ओह मैं तो डर ही गयी थी। अकेले रहने की आदत सी जो हो गयी है … वैसे तुम्हें इतनी हार्ड कोर …विकास काजल की चूत को सहलाते हुए- हाँ … हाँ … क्या हार्ड कोर??
काजल हल्के दर्द के साथ मुस्कुराती हुई- मेरा मतलब, हार्ड कोर मेहनत के बाद भी नींद नहीं आयी क्या?
विकास काजल की सूजी चूत को एक नज़र देखते हुए- बस तेरी इसी अदा ने तो मुझे दीवाना बना प्रिया है जानेमन.
काजल मेरा हाथ अपनी चूत से झटकते हुए- कोई दीवाने नहीं हुए हो तुम! तुमको सिर्फ मुझे ठोकना था और अब जब तुम वो कर चुके हो तो ये दीवानापन भी बहुत समय तक नहीं रहेगा।विकास उठ कर काजल की चूत का मुआयना करते हुए- मुझ जैसे तुम्हें सारी दुनिया में नहीं मिलेगा काजल जान … यारों का यार हूँ मैं!
काजल शरमाती हुई- वैसे, कितनों के यार हैं आप?
उसकी चूत सूजी पड़ी थी और थोड़ा खून भी चादर पर था जिससे मैं समझ गया कि बहुत समय के बाद हुई चुदाई के कारण काजल की चूत ने एक कुंवारी चूत जैसा आनंद प्रिया है।काजल ने मुझे रोकना चाहा पर मैं कहाँ सुन रहा था।
मैंने काजल की चूत की कोमल पंखुड़ियों को अलग करके उसकी चूत में झाँका तो मैं मतवाला ही हो गया।उसकी चूत अंदर से एकदम गुलाबी थी और अभी भी इतनी टाइट दिख रही थी कि दोबारा लण्ड डालने पर भी काजल की चीखें निकलना पक्का था।
मैंने एक पल नहीं लगाया और काजल की चूत पर एक बार फिर से अपना प्यासा मुँह रख प्रिया जिसको काजल ने हटाने की एक अधूरी और नाकाम कोशिश सी की।
काजल- पागल हो क्या? दिन निकल आया है। हटो और मुझे थोड़ा आराम और करने दो। पूरा बदन दुःख रहा है मेरा तो!विकास- ऐसी भी क्या बात है। एक राउंड तो और बनता है। इतने सालों से तड़प रहा था मैं तेरे लिए!
काजल- मुझे बहुत दर्द हो रहा है जान! अच्छा थोड़ी देर तो रुक सकते हो?विकास- थोड़ी देर तो शुरू होने में भी लगेगी। अब यूँ भी ना करो जैसे तुम्हें मज़ा ही नहीं आया।
काजल- मज़ा तो इतना आया कि मैं क्या बताऊँ! शायद इतना मज़ा मुझे रोहित ने भी कभी नहीं प्रिया।विकास- तो मैं समझूँ कि तुम बिस्तर में ज़िन्दगी भर मेरी गुलाम रहोगी।
काजल- ऐसी ठुकाई करोगे तो कोई भी तुम्हारी गुलाम बनने को तैयार हो जायेगी जानू!विकास- तो एक राउंड मालिक और गुलाम की तरह हो जाए?
काजल चौंकती हुई- वो कैसे होता है?विकास इठलाते हुए- समय के साथ सब पता चल जाएगा बस ये समझो कि तुम्हें खूब गालियां पड़ने वाली हैं और थोड़ी मार भी!काजल आँख मारते हुए- गालियां तो तुमने अब भी कम नहीं दी मुझे! और रही बात मार की, तो आज मेरी चूत को तो ऐसी मार पड़ी है कि मैं इस ज़िन्दगी में तो नहीं भूलने वाली।
मेरे प्यारे दोस्तो और मदमस्त भाभियों, इस भाग में सिर्फ इतना ही।
आशा करता हूँ कि आप सबने इस घटना को पढ़ते हुए अपना पानी जरूर गिरा प्रिया होगा और कुछ ने तो 1 से ज्यादा बार भी गिराया होगा।
अभी आप मुझे अपने प्यार भरे ईमेल से ये बताओ कि आपको यह घटना कैसा लगी।कहानी इसलिए नहीं बोल रहा हूँ कि अधिकतर लोग कहानी पढ़कर इसको हकीकत नहीं मानते और कुछ भी सोचने लगते हैं।
आप सभी को ढेरों चूतों और लंडों की शुभकामनाओं के साथ आज की सेक्सी हॉट गर्ल फक़ स्टोरी को यहीं विराम देते हैं।
सेक्सी हॉट गर्ल फक़ स्टोरी पर आपके कमैंट्स और सुझाव का हमेशा की तरह इंतज़ार रहेगा।support@mohakkisse.com