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पहली बार चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 869 बार

सोनिया की चूत के साथ गैंग-बैंग-1

रोमा शर्मा

10 Apr 2022 को प्रकाशित

सोनिया की चूत के साथ गैंग-बैंग-1
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नमस्कार दोस्तो, मैं रोमा हूँ, मेरी काफ़ी कहानियाँ आपने पढ़ी।लेकिन आज मैं अपने एक दोस्त की कहानी उसी के शब्दों में लिख कर भेज रही हूँ।

उस वक्त मेरी क्लास में एक लड़की न्यू एडमिशन लेकर आई थी.. उसका नाम सोनिया था, वो दिखने में बहुत खूबसूरत थी, क्लास के सभी लड़के उस पर लाइन मारते थे, मैं भी उसको लाइन मारता था.. पर वो कभी किसी को भाव नहीं देती थी।

हमारी इस नई कक्षा की पढ़ाई शुरू हुए अभी कुछ ही महीने हुए थे कि क्लास के सभी लड़के आपस में सोनिया के बारे में ही बातें करते थे कि काश एक बार सोनिया को चोदने का मौका मिल जाए। क्लास के सभी लड़कों की ये बातें सुन कर मेरा मन भी कुछ ऐसा ही करता था।

फिर मैंने सोच लिया कि चाहे कुछ हो जाए.. मैं सोनिया को पटा कर ही रहूँगा।

एक दिन स्कूल छूटने के बाद मैंने सोनिया को आवाज दी.. तो वो रुक गई।तब मैंने उसके हाथ में फ्रेंडशिप बेंड बांधते हुए उससे कहा- सोनिया क्या तुम मेरी फ्रेंड बनोगी?पर उसने कुछ नहीं कहा और वो चली गई।

दूसरे दिन सोनिया मेरे पास आई और उसने भी मेरे हाथ में फ्रेंडशिप बेंड बांध कर दोस्ती के लिए ‘हाँ’ कर दी मैं बहुत खुश हो गया..

सोनिया पढ़ाई में काफी इंटेलिजेंट थी और वो पढ़ाई में मेरी काफी हेल्प करती थी। कुछ ही दिनों में हमारी दोस्ती और गहरी हो गई। हम काफी टाइम स्कूल में साथ में ही रहते और स्कूल के बाहर भी हम यहाँ-वहाँ घूमते रहते थे।

फिर एक दिन मैंने सोनिया को प्रपोज किया.. तो सोनिया ने भी मेरा प्रपोज़ल एक्सेप्ट कर लिया। मैं तो और भी ज्यादा खुश हो गया। हम दोनों का अब काफी वक्त एक साथ बीतने लगा।मुझे कभी-कभी मौका मिलता.. तो मैं सोनिया को किस भी कर लेता.. पर वो कुछ नहीं बोलती.. बस शर्मा जाती।

फिर ऐसे ही 3 महीने बीत गए.. मैंने इस रिश्ते को थोड़ा आगे बढ़ाने की सोची।एक दिन सोनिया मैथ्स की कुछ प्रॉब्लम सॉल्व करने में मेरी मदद कर रही थी.. पर मेरा ध्यान तो कहीं और ही था।

मैं बिल्कुल सोनिया के बगल में ही बैठा था और मेरी नजरें उसके मम्मों पर थीं, मैं उसके मम्मों को घूरे जा रहा था और सोनिया गणित का सवाल हल करने में लगी थी।जब उसने मेरी तरफ देखा.. तो मेरे नजरें उसके मम्मों पर थीं।

उसने मुझसे पूछा- ऐसे क्या देख रहे हो अमित?मैंने भी उससे कह दिया- तुम्हारे मम्मों को देख रहा हूँ.. ये कितने बड़े और खूबसूरत हैं।

सोनिया शर्माने लगी.. तब मैंने अपने हाथ से उसके मम्मों को दबा दिया।

वो बोली- उन्हह.. ये क्या कर रहे हो.. कोई देख लगा।मैंने बोला- कोई नहीं देखेगा..

मैं उसके मम्मों को दबाता रहा और फिर धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर रख कर उसे चुम्बन भी करने लगा।

पहले तो सोनिया ने भी कुछ नहीं कहा.. शायद उसे भी मज़ा आ रहा था। दो मिनट के बाद वो मुझसे अलग हो गई और कहने लगी- ये सब स्कूल में अच्छा नहीं लगता अमित.. कोई देख लगा तो प्रॉब्लम हो जाएगी।उस पर मैंने उससे कहा- तो सोनिया ये सब कहाँ करना अच्छा लगता है?

वो बस मुस्कुरा कर रह गई।

मैंने उससे पूछा- सोनिया अभी मैंने जो किया.. वो तुमको भी अच्छा लग रहा था न..उसने अपना सर ‘हाँ’ में हिला दिया।

अब मैं समझ चुका था कि सोनिया मुझसे चुदवाने को तैयार है। मैंने भी अब सोनिया को चोदने का पूरा मन बना लिया था.. पर समस्या यह थी कि हमारे पास चुदाई करने के लिए कोई जगह नहीं थी।

कुछ वक्त और बीत गया.. पर जब भी मुझे मौका मिलता.. मैं सोनिया के मम्मों को दबा देता.. और उसको किस करता। मेरा मन सोनिया को चोदने के लिए बेताब होने लगा था।

फिर मैंने अपने एक दोस्त मदन से बात की.. उसके मम्मी-पापा दोनों जॉब करते हैं। वो दोनों सुबह 9 बजे घर से जाते हैं तो शाम को 6 बजे ही घर आते हैं। नौ बजे से 6 बजे तक एक वो ही घर में अकेला रहता है।

मैंने मदन को उसका घर एक-दो घंटे के लिए देने के लिए कहा.. तो उसने मुझसे पूछा- मुझे उसका घर क्यों चाहिए?तो मैंने उसको बता दिया- मुझे सोनिया की चुदाई करनी है।उसने कहा- यार तू तो सोनिया को चोद लेगा.. पर मेरा क्या होगा भाई.. घर मेरा है.. तो मुझे भी तो कुछ मिलना चाहिए न..

मैंने मदन से कहा- हाँ भाई तुझे भी जरूर दिलाऊँगा.. पर अभी तो तू मुझे अकेले ही सोनिया की चुदाई करने दे। मैं तुझ से वादा करता हूँ.. मैं तुझे भी सोनिया की चूत दिलवाऊँगा।

फिर मदन तैयार हो गया।

मेरी तो जैसे दिल की तमन्ना पूरी हो गई हो.. मुझे तो सोनिया को चोदने के लिए कोई जगह चाहिए थी.. अब वो भी मिल गई थी। उसके बाद दो दिन तो सोनिया को चुदाई के लिए मनाने में ही लग गए.. पर वो मान नहीं रही थी।

फिर अगले दिन में स्कूल के लिए निकल गया.. पर मैं स्कूल नहीं गया। स्कूल के रास्ते पर ही मैं सोनिया का इंतजार कर रहा था।

जब सोनिया आई तो मैंने उस से कहा- सोनिया.. प्लीज़ चलो आज कहीं घूमने चलते हैं।

वो मना करने लगी.. पर मैंने भी उसे किसी तरह मना लिया, हम स्कूल से बंक मार कर थोड़ी देर इधर-उधर घूमते रहे।मैं सोनिया को मदन के घर ले गया, मैंने मदन से उसके घर की चाभी पहले ही ले ली थी।

अब तक तो सोनिया भी समझ चुकी थी कि मैं आज उसे चोदने वाला हूँ। लगता था उसका भी मन था चुदने का.. इसलिए वो भी मेरी सारी बातें मान रही थी।

घर में अन्दर जाकर मैंने सोनिया को बैठाया.. हम दोनों ने पानी पिया। फिर मैंने अपनी शर्ट उतार दी.. क्योंकि गर्मी बहुत अधिक थी। फिर हम दोनों बेडरूम में जाकर बैठ गए। मैंने सोनिया के माथे पर प्यार से चुम्बन किया.. उसने अपना सर मेरे सीने में छुपा लिया।

चूंकि मैंने ऊपर सिर्फ बनियान पहनी थी.. इसलिए मुझे उसके होंठ अपने सीने पर महसूस हुए। मैं समझ गया कि सोनिया अब गर्म हो रही है। मैंने सोचा कि अब मैंने अगर अभी कुछ नहीं किया.. तो कभी कुछ नहीं मिलेगा।

अब मैं पागलों की तरह उसके होंठ चूमने लगा, मैंने उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी.. वो मेरी जीभ चूसने लगी। मैं भी उसकी जीभ चूसने लगा।मैं उसके मम्मों को कुर्ते के ऊपर से ही दबाने लगा.. तो उसके मुँह से सिसकारी निकलने लगी।

मैंने उसके कुर्ते में हाथ डाल कर ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचों के ऊपर तन चुके निप्पलों को पकड़ा और मींजने लगा। फिर मैंने उसकी कुर्ती निकाल दी। जिसमें उसने भी मुझे सहयोग किया.. कुर्ती के बाद मुझसे सब्र नहीं हुआ तो मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी।

जैस ही उसकी ब्रा खुली.. उसके दोनों मम्मे एकदम से उछल कर बाहर आ गए.. करीब 32 साइज के होंगे.. मैंने उससे पूछा तो उसने हामी भरते हुए कहा- हाँ अभी तक तो 32 के ही हैं।मैं हँस पड़ा.. मैंने कहा- चिंता मत करो जल्दी ही 38 के बना दूँगा।

सच में क्या गोरे-गोरे दमकते हुए मम्मे थे.. मैं तो दीवाना हो गया, मैंने बायाँ चूचा अपने मुँह में भर लिया और दायें वाले को अपने हाथ से दबाने लगा।उसने मेरे सर को अपनी चूची पर ज़ोर से दबा लिया.. जैसे वो अपने मम्मों को पूरी तरह से मेरे मुँह में घुसेड़ देना चाहती हो।

मैंने उसके मम्मों को चूसते-चूसते ही उसकी सलवार उतार दी। फिर जैसे ही उसकी पैंटी पर हाथ फेरा.. तो पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी भी अपने पैरों से खींच कर उतार दी। सामने उसकी क्लीन शेव गुलाबी.. रसभरी लाजवाब चूत थी। मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया और हम 69 पोजीशन में हो गए।

मैंने पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाला तो सोनिया ने तुरंत ही मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। मैं तो हैरानी से देखता रह गया.. जैसे उसे बरसों से इसी की तलाश थी।

सोनिया मेरे लण्ड के सुपारे को किसी सॉफ्टी आइसक्रीम की तरह चाट रही थी। फिर उसने पूरा लण्ड मुँह में भर लिया और जोर-जोर से मेरा गन्ना चूसने लगी।

मैंने भी उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी और जीभ से उसकी चूत को चोदने लगा। उसने टांगों से मेरे सर को अपने घुटनों के बीच में दबा लिया और अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी चूत को मेरे मुँह से चुदवाने लगी।

वो अपनी चूत को मेरे मुँह से रगड़ने लगी.. तो मेरी साँसें ही रुकने लगीं।फिर मैं उठा और उसकी गाण्ड के नीचे एक मोटा तकिया लगाया और उसके ऊपर चढ़ कर अपने लण्ड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा।

वो लौड़े की छुअन पाकर तड़पने लगी और अपने हाथ से लण्ड पकड़ कर अपनी चिकनी चूत में घुसाने लगी। पर लण्ड घुसा ही नहीं.. क्योंकि उसकी चूत अभी खुली ही नहीं थी.. उसकी सील अभी टूटनी थी।

मैंने उसकी चूत पर अपना लण्ड टिकाया और धीरे से अपना लण्ड को आगे दबा दिया.. चूत के रस और थूक से चिकनी होने की वजह से मेरा लण्ड का टोपा सरक कर अन्दर फंस गया।वो इतने से ही चीखने लगी और मुझे धकेलने लगी.. लेकिन मैं अब हटने को तैयार नहीं था।

मैंने जब देखा कि लण्ड चूत के होंठों में फंस चुका है.. तो मैंने एक जोर का धक्का लगाया और मेरा आधा लण्ड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया।सोनिया ने दर्द के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं.. उसके आंसू निकलने लगे।

मैं ऐसे ही थोड़ी दे रुका रहा.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ.. तो मैंने एक धक्का और मारा.. और अब मेरा पूरा लण्ड सोनिया की चूत में चला गया। वो फिर से चीखने लगी और मुझे धकेलने लगी।

मैं समझ गया कि इसकी सील टूट गई है। फिर मैं ऐसे ही रुका रहा और उसके होंठों को चूसता रहा और उसके मम्मों को दबाता रहा।थोड़ी देर बाद वो अपनी कमर हिलाने लगी.. मैं समझ गया कि अब इसको भी मज़ा आ रहा है।बस फिर क्या था.. मैं भी अपनी कमर हिला कर उसको चोदने लगा।

कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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सोनिया की चूत के साथ गैंग-बैंग

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