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माँ की चुदाई पठन समय: 18 मिनट पढ़ा गया: 993 बार

तलाकशुदा माँ की अगन-4

स्वीट सन रोहण

23 Jan 2020 को प्रकाशित

तलाकशुदा माँ की अगन-4
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कहानी का पिछला भाग:तलाकशुदा माँ की अगन-3अगली सुबह जब मैं उठा तब मम्मी घर के काम कर रही थी और मैंने भी अपनी सामान्य दिनचर्या की और एक शॉवर लिया और कपड़े पहनकर लिविंग रूम में आ गया. करण भी वही बैठा हुआ था।तभी मम्मी लिविंग रूम में आई और हम दोनों की तरफ देखा। हम दोनों मम्मी को घूर कर देख रहे थे।मम्मी ने हम दोनों की ओर देखा और कहा- तुम दोनों क्या देख रहे हो?मैंने अपने बड़े भाई की ओर देखा और कहा- मम्मी, क्या आपको पिछली रात पसंद आई थी?

मम्मी थोड़ा हैरान दिख रही थी और उन्हें पता नहीं था कि क्या कहना है. वह जानती थी कि करण अब तक शर्मिंदा महसूस कर रहा है। इसलिए वह हमारे बगल में सोफे पर बैठ गई और बोली- करण, मुझे नहीं लगता कि जो कल जो भी हुआ सही था और मुझे नहीं लगता कि अब शर्मिन्दगी की कोई बात है इसमें।फिर करण ने मम्मी को देखा और कहा- लेकिन माँ, आप मुझे बहुत पसंद हो और मैं आपको किसी के साथ बांटना नहीं चाहता हूं।

इस पर मम्मी मुस्कुराते हुए बोली- करण बेटा, रोहन का भी मुझ पर उतना ही हक है जितना कि तुम्हारा, आखिर तुम दोनों हो तो भाई! और रही बात मुझे बाँटने की … तो तुम दोनों भाई तो मेरे अभिन्न अंग हो।मम्मी की बात सुनकर करण खुश हो गया और मुझसे भी खुलकर बातें करने लगा। हम दोनों बहुत खुश थे।

मम्मी ने पूछा- क्या आज दुकान की छुट्टी कर दी जाए ताकि हम लोग पूरे दिन का आनंद ले सकें?हम दोनों भाइयों ने हामी भर दी।मम्मी भी अंततः सहमत हो गयी और हम दोनों से पूछने लगी- आज क्या पहनूँ जो तुम लोग पसंद करो?

हम दोनों ने कहा- हम सिर्फ आपको नग्न देखना चाहते हैं.तो वह सोफे से उठ खड़ी हुई और अपने सारे कपड़े उतार दिए। जब वह वहाँ खड़ी थी तो हम दोनों भी उनके विशाल स्तनों को देख रहे थे।मम्मी ने कहा- क्या तुम दोनों मेरे स्तनों के साथ खेलना पसंद करोगे?हम दोनों ने सिर हिलाया और फिर मम्मी अपने घुटनों पर बैठ गई और हम दोनों उनके पास आ गए और उनके स्तन से खेलने लगे।

मम्मी की चूत सच में गीली हो रही थी और उन्होंने हमारी तरफ देखा और कहा कि हम दोनों भी नंगे हो जाएँ।हम दोनों को कपड़े उतारने में बिल्कुल देर नहीं लगी। हम दोनों के लंड काफी सख्त हो गए थे इसलिए मम्मी ने अपने दोनों हाथों से हमारे लंड पकड़ लिए। हम उनके स्तनों के साथ खेल रहे थे और धीरे-धीरे उन्हें सहलाने लगे।

मम्मी अपने हाथों से हमारे लण्ड को सहला रही थी और हम लोग भी काफी उत्तेजित हो गए थे और हमने कराहना शुरू कर प्रिया था। हम दोनों ज्यादा देर तक नहीं रुक पाए और मम्मी के हाथों में ही झड़ना शुरू कर प्रिया। मम्मी ने भी हमारे लण्ड को तेजी से तब तक सहलाया जब तक कि हम पूरी तरह से नहीं झड़ गए।

झड़ने के बाद हम दोनों निश्चिंत हो गए और फिर मम्मी ने अपनी उंगलियों को चाटना शुरू कर प्रिया और वह इस बात से इत्तफाक नहीं रख सकी कि उन्हें हमारे वीर्य रस से बहुत प्यार है।

हम दोनों वापस सोफे पर बैठ गए। मम्मी भी हमारा लण्ड सहलाते सहलाते झड़ चुकी थी क्योंकि उनकी चूत से बहता हुआ रस उनकी जांघों पर बह रहा था। हम तीन लोगों के परिवार के लिए यह बहुत अच्छी शुरुआत थी।

मम्मी उठी और खुद को साफ करते हुए कहा- अभी तुम दोनों के लिए लंच तैयार करती हूं, बाकी काम बाद में करेंगे.और फिर वो अपने रूम में जाकर कपड़े पहनने लगी।हम दोनों भाई अभी तक सोफे पर नंगे पड़े हुए थे।

जब मम्मी खाना बना कर वापस आयी तो वे बस एक काली कसी हुई ब्रा और पैंटी में थी। उनकी ब्रा में से उनके बड़े स्तन की दरार दिखाई दे रही थी। हम दोनों ने जब यह देखा तो हमारे लन्ड फिर से कड़क होने लगे।मम्मी भी ये देखा और कहा- तुम दोनों लड़के फिर से तैयार हो गए?मैंने मम्मी से कहा- मुझे बहुत अच्छा लगता है जब आप इस तरह की सेक्सी चीजें पहनती हैं।

मम्मी ने कहा- तुम दोनों मेरे साथ अब क्या करना चाहेंगे?हम दोनों उन्हें देखकर बोले- हमारे लण्ड की चुसाई कीजिये न मम्मी!इतना सुनकर मम्मी फिर अपने घुटनों पर बैठ गई और हम दोनों को खड़े होने के लिए कहा।

वे एक एक करके हमारे लन्ड को चूसे जा रही थी। फिर उन्होंने हम से कहा- तुम दोनों एक दूसरे के करीब आ जाओ और दोनों लंड एक साथ मेरे मुँह में डालो और जोर जोर से झटके मारो जब तक मेरे मुँह में झड़ नहीं जाते।हम दोनों ने ऐसा ही किया। मम्मी की आँखों से आंसू आ रहे थे फिर भी हम नहीं रुके और कुछ देर की चुसाई के बाद हम दोनों मम्मी के मुँह के अंदर ही झड़ने लगे।मम्मी हमारा सारा माल निगल गयी।

उसके बाद हम दोनों बैठ गए। मम्मी भी ठीक हमारे बीच में बैठ गई और अपनी चूत से खेलने लगी। उन्होंने अपने पैरों को फैलाया और अपनी चूत को जोर-जोर से सहलाने लगी। उसके बाद हम तीनों ने वैसे ही नंगे होकर खाना खाया।

खाना खाकर हम वापस लिविंग रूम में आ गए। मम्मी अभी भी ब्रा पैंटी मैं थी।करण ने कहा- मम्मी, आप अपनी ब्रा उतार लो, मैं अपना लंड आपके स्तनों पर रगड़ना चाहता हूँ।मम्मी ने कहा- ठीक है बेबी … तुम मेरे स्तनों की चुदाई कर सकते हो।और मम्मी ने अपनी ब्रा उतार दी और उनके दोनों स्तन बाहर आये और अलग-अलग उछले।

मम्मी फिर से अपने घुटनों पर बैठ गयी और करण अपने लंड को उनके स्तनों के बीच रगड़ने लगा।मम्मी ने मेरी तरफ देखते हुए मुझसे पूछा- रोहन तुम क्या करना चाहते हो?मैंने कह- मैं अपना लंड तुम्हारी गांड में डालना चाहता हूँ मम्मी!

मम्मी ने मुझे बुलाया और नीचे लेटने के लिए कहा। मैंने वैसा ही किया। मेरे लेटने के बाद मम्मी मेरे ऊपर आकर बैठ गयी और मैंने लन्ड पर थूक लगाकर उनकी गांड के छेद पर सेट कर प्रिया और अपना सुपारा अंदर घुसेड़ प्रिया। मम्मी फिर धीरे धीरे मेरे लण्ड को अपनी गांड के अंदर ले गयी और उछल उछाल कर चुदवाने लगी। मम्मी थोड़ा उम्म्ह… अहह… हय… याह… कराहते हुए उछल कर मेरे लंड पर नीचे झुक रही थी जबकि करण उनके स्तन चोद रहा था।

करण ने मम्मी की तरफ देखा और कहा- आई एम कमिंग कम मम्मी!मम्मी ने कहा- मेरे बच्चे हाँ … मेरे स्तन पर गिरा दे अपना वीर्य।करण ने अपने वीर्य से मम्मी के स्तनों को ढक प्रिया और मैं भी उनकी गांड को जोर से मार रहा था।

करण के हो जाने के बाद मैंने अपनी माँ को बताया कि मैं भी झड़ने के लिए तैयार हूँ तो मम्मी और जोर जोर से उछलने लगी और मैं उनकी कसी हुई गांड के अंदर झड़ने लगा।मम्मी भी करण के वीर्य को अपने स्तनों पर मल रही थी। मम्मी काफी गर्म हो चुकी थी और काफी समय से उनकी चूत के अंदर लण्ड भी नहीं गया था।मैंने मम्मी को उठाया और सोफे पर बैठा प्रिया। मम्मी भी अपनी टांगोब को फैलाकर अपनी चूत को मसल रही थी।

मेरा वीर्य मम्मी की गांड से रिस कर बाहर आ रहा था और मम्मी की चूत भी पानी छोड़ रही थी। मुझसे मम्मी की ये हालात देखी नहीं गयी और मैंने अपनी जीभ उनकी चूत पर लगा दी। मैं मम्मी की चूत को चाट रहा था जो कि काफी गर्म और गीली थी। मम्मी ने अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबा प्रिया और वो झड़ने लगी। मैं मम्मी की चूत से निकल रहे रस को अपनी उंगलियों में समेटने लगा और उसे चाटने लगा। मम्मी अपनी आँखें बंद किये हुए बस इस सबका आनन्द ले रही थी।

झड़ने के बाद मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं। उनके मुँह से जोर-जोर से सांसें निकल रही थी और आनन्द में कराह रही थी। उनका शरीर भी पसीने से तर हो रहा था जो कि बेहद ही सेक्सी था।मम्मी ने कहा- ओह रोहन! तुम कितने लाजवाब हो।

मैं जानता था कि एक महिला को ठीक तरह से कैसे खुश किया जाता है। मम्मी को उनकी चूत के लिए अब एक लण्ड की जरूरत थी जिसे उनका लाल चेहरा साफ बयान कर रहा था।मम्मी ने कहा- करण, आओ अब तुम्हारी बारी!

करण तो ना जाने कबसे तैयार बैठा था। मम्मी को मुझसे फ्री देखकर वो मम्मी के पास गया और उनके होंठों को चूमते हुए मम्मी को अपनी कमर पर बैठा कर खड़ा हो गया। मम्मी भी अपनी दोनों टांगों को करण की कमर पर लपेटकर अपने स्तनों से उसकी छाती को सहला रही थी।

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मम्मी ने कहा- करण, तुम्हारी माँ को तुम्हारे सख्त लंड की ज़रूरत है अभी!“ओह … मम्मी … अभी!” करण ने उसके शरीर से चिपकी हुई नंगी माँ से कहा। करण ने अपना लंड अपने हाथ में लिया और उसे मम्मी की चूत पर लगाया। करण ने अपने लन्ड का सुपारा उनकी योनि के प्रवेश द्वार पर रखा।“माँ, मैं अंदर जा रहा हूँ!” करण ने कहा और उसने अपने कूल्हों को बड़ी ताकत से मम्मी की तरफ दबाया। मेरी शानदार चूत चुसाई के बाद मम्मी की चूत इतनी गीली थी की उसका कठोर लंड आसानी से अंदर सरक गया।

“हे भगवान, हाँ … आह्ह!” मम्मी ज़ोर से कराहते हुए बोली जब करण का लण्ड उनकी चूत में घुसा।मम्मी ने कहा कि उन्हें करण का लंड कभी भी उनकी चूत के अंदर इतना सख्त और गर्म महसूस नहीं हुआ था, यह बिल्कुल नया अनुभव था।

मम्मी ने धीरे से करण के सिर के चारों ओर अपनी बांहें लपेट दीं और उसे अपने स्तनों में दबाने लगी। करण ने भी अपनी बांहों को पीछे से कस कर पकड़ लिया और अपनी पूरी ताकत से उनकी चूत मैं अपना लण्ड डाल रहा था। मम्मी की आँखें बंद थीं और उनकी सांस लेने की दर बहुत बढ़ गई थी। यह काफी कठोर था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

हमारी माँ हमारे जीवन की सबसे अनमोल महिला थीं और वह आखिरकार हमें यह समझाना चाहती थीं कि वह उनसे कितना प्यार करती हैं।“हया … उउऊहह … आआआह … मम्म्मम … मममम … आआआ … मम्म!” मम्मी ने चुपचाप करण के माथे पर एक चुंबन देते हुए धक्का प्रिया।मम्मी करण से बोली- तुम मेरे अंदर ही झड़ सकते हो!और उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई।

मम्मी की बातें और उनकी चुदाई देखकर मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया था। तभी अचानक मम्मी को अपने गुदा पर कुछ कठोर प्रहार महसूस हुआ। जो कुछ हो रहा था, उसे देखने के लिए मम्मी ने अपना सिर पीछे की तरफ घुमाया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मैंने जोरदार धक्के में अपना लण्ड फिर से उनकी गांड में घुसा प्रिया था। मेरा लण्ड करण की तुलना में बड़ा था। मेरा लण्ड घुसते ही मम्मी ऊफ्फ… आआहह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह… ओऊह…. आहहह… ओहहह… माआ.. करने लगी। उनकी गांड अभी भी मेरे वीर्य से भरी थी जिस वजह से मेरा लंड आसानी से उसकी गांड में अंदर-बाहर सरक रहा था।मैंने कहा- आआहह…मम्मी..अच्छा लग रहा है!”

मैं उनकी पीठ से चिपका हुआ था। मैंने उनके कूल्हों को नीचे से पकड़कर थोड़ा ऊपर उठा लिया जिससे उन्हें चोदना और भी आसान हो गया। हम दोनों मम्मी को बड़े ही मजे और आराम से चोद रहे थे.तभी करण ने मम्मी से कहा- मम्मी, आप अपनी बांहों को अपने सिर के पीछे रख लीजिए … मुझे आपकी कांख देखनी है।मैंने भी करण की बात को मानते हुए कहा- हाँ, मम्मी प्लीज! मैं भी देखना चाहता हूँ!

मम्मी ने अपने दोनों हाथों को अपने सिर के पीछे रख प्रिया और हम दोनों बच्चो को अपनी सेक्सी बगलें दिखाते हुए कहा- आह, ठीक है … तुम दोनों मेरी कांख को देखना चाहते हो … बहुत ही शरारती हो तुम दोनों … यह लो!

मम्मी की कांखें बिल्कुल साफ थी और बहुत कामुक लग रही थी। हम दोनों ने उन्हें तुरंत सूँघना शुरू कर प्रिया। करण तो इतना कामुक था कि मम्मी की कांख को बेसब्री से चाटने लगा। मम्मी ने कभी सोचा नहीं होगा कि यह इतना अविश्वसनीय रूप से सेक्सी और मोहक हो सकता है।“आह… हह …” मम्मी सिसकारने लगी जब उनको लगा कि हमारे लंड ज्यादा तेजी और ज्यादा ताकत के साथ जोर लगा रहा है।

हम दोनों ने अपनी गति बढ़ाई और मम्मी के बगल को सूँघना जारी रखा। मम्मी नहीं जानती कि क्या करना है हम दोनों लड़कों ने उनके दोनों छेदों का बुखार उतार प्रिया था।तभी मम्मी फिर बोली- ओह! सब ठीक तो है? तुम दोनों बहुत तेजी से कर रहे हो।लेकिन हम दोनों ने कोई जवाब नहीं प्रिया।

मम्मी हमारे कसे हुए लन्डों को अपनी गांड की गहराई और चूत के अंदर गहरे तक महसूस कर सकती थी जो उसके गर्भाशय पर चोट मार रहे थे। हम दोनों के लंड उनकी योनि और गांड की संवेदनशील दीवारों को छू रहे थे। मम्मी ने अपने जीवन में इस आनंद को कभी महसूस नहीं किया था।

तभी करण ने कहा- आआहह … मम्मी… मुझे लगता है कि मैं जा रहा हूं … आह्ह!अपने आखिरी पड़ाव में मम्मी की चूत ने कारण के लंड को जकड़ कर निचोड़ लिया। मम्मी की चूत करण के शुक्राणु के लिए भीख सी मांग रही थी और करण ने मम्मी की चूत में वीर्य बरसाना शुरू कर प्रिया।

उन दोनों की ऐसी हालत देखकर मैंने भी अपने लण्ड को जोरदार धक्कों से मम्मी की गांड के अंदर करना शुरू कर प्रिया और फिर “मम्मी … मैं भी झड़ रहा हूँ!” और जोर जोर से अपना लण्ड हिलाना शुरू कर प्रिया।मम्मी हमारे वीर्य की गर्माहट को अपनी गांड और चूत में महसूस करते हुए लम्बी आहें भर रही थी।

मम्मी ने कहा- तुम दोनों भाइयों ने आखिरकार मेरे छेदों के अंदर अपनी रसधारा भर ही दी.और फिर उन्होंने करण को अपनी बांहों में भर लिया और मैंने पीछे से उन्हें बांहों में जकड़ लिया।

हम दोनों ने अभी तक अपने लण्ड बाहर नहीं निकाले थे। कुछ मिनट के आनन्दित विश्राम के बाद जब हमारी सांस धीरे-धीरे वापस सामान्य हुई हो हमने अपने लंड मम्मी के छेद से बाहर निकाल लिए और बेड पर जाकर लेट गए।मम्मी की चूत और गांड से वीर्य बहते हुए बाहर आकर बैडशीट पर बहने लगा, खासकर उसकी गांड से।मम्मी काफी थक गई थी तो गिरते ही वह बिस्तर पर सो गयी।

मैं और करण जग रहे थे तो मैंने कहा- करण मजा आ गया।करण ने भी कहा- हाँ, यह अद्भुत था। मुझे पहले कभी भी माँ के साथ इतना अच्छा नहीं लगा।हमने फिर एक दूसरे को देखा और मुस्कुरा दिए।

करण उठकर जाते हुए बोला- मैं नहा कर आता हूं अभी।और फिर इधर उधर देखने लगा फिर उसने सोफे के पास जाकर मम्मी की पैंटी को उठा लिया। करण ने उसे अपने हाथ में पकड़ा और मेरी तरफ देखते हुए कहा- मम्मी की पैंटी को सूंघने का अलग ही मजा है … नहाते समय मजा ही आ जाएगा।मैंने कहा- मुझे भी सूंघना है.इतना बोलते ही करण ने पैंटी मेरी तरफ बिस्तर पर फेंक दी।

मैंने उठकर पैंटी उठाई और कारण के पास जाकर अपनी सोती हुई मम्मी को देखा। मम्मी बिल्कुल नंगी बिस्तर पर सो रही थी और खिड़की से आ रही धूप की रोशनी में वे काफी सुंदर लग रही थी। हम दोनों के लण्ड मम्मी की ऐसी हालत देखकर ओर उनकी पैंटी सूंघकर फिर खड़े होने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे को ही देख रहे थे.

करण ने कहा- चलो आज मम्मी की पैंटी सूंघते हुए साथ मैं ही नहाते हैं.मैं भी तैयार हो गया और फिर हम मम्मी को लिविंगरूम में छोड़कर बाथरूम में आ गए।

हम दोनों बिल्कुल नंगे खड़े होकर शॉवर के नीचे नहा रहे थे और मम्मी की पैंटी को सूंघ और अपने लण्ड पर रगड़ रहे थे।

मेरी कहानी आप लोगों को पसंद आई या नहीं … मुझे जरूर बतायें, उसी के बाद आगे की कहानी को जारी करूँगा। मुझे मेल करने के लिए और इंस्टाग्राम पर जोड़ने के लिए बिल्कुल भी संकोच ना करें।support@mohakkisse.com/weekendlust_tales

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