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Group Sex Story पठन समय: 27 मिनट पढ़ा गया: 720 बार

तरक्की का सफ़र-8

राज अग्रवाल

05 Apr 2024 को प्रकाशित

तरक्की का सफ़र-8
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“मेरा प्लैन है कि एम-डी महेश की बेटी मीना को उसकी आँखों के सामने चोदें”, प्रीती ने सिगरेट सुलगाते हुए कहा।

“क्या तुम्हें लगता है कि एम-डी अपने खास दोस्त की बेटी को चोदेगा?” मैंने कुछ सोचते हुए पूछा।

“एम-डी इतना हरामी है कि अगर मौका मिले तो वो अपनी बहन और बेटी को भी चोदने से बाज़ नहीं आयेगा, तुम इस बात की परवाह मत करो, सब मुझपर छोड़ दो”, प्रीती ने हँसते हुए कहा।

“तुम मीना को कैसे तैयार करोगी?”

“कुछ महीने पहले की बात है, मैं मीना से उसके ग्रैजुयेशन के बाद मिली थी और पूछा था कि वो आगे क्या करना चाहती है। तब उसने ‘एम-ए करना है’, कहा था। लेकिन अब वो नौकरी ढूँढ रही है। उसने मुझे तुमसे बात करने के लिये भी कहा है। जबसे महेश ने अपना सब कुछ गंवा प्रिया है, वो नौकरी कर के पैसा कमाना चाहती है”, प्रीती ने जवाब प्रिया।

“इस बात को तुम महेश से कैसे छुपाओगी?”

“मुझे छुपाने की कोई जरूरत नहीं है, मीना ही इस बात को छुपाएगी। क्योंकि जब मैंने उस से कहा कि तुम खुद अपने पिताजी से बात क्यों नहीं करती तो उसने मुँह बनाते हुए कहा कि वो नहीं चाहते कि मैं नौकरी करूँ”, प्रीती ने हँसते हुए कहा।“लगता है तुमने काफी सोच कर ये प्लैन बनाया है, लेकिन तुम ऐसा क्या करोगी कि महेश अपनी बेटी को चुदवाते देखता रहे और कुछ ना कर पाये?” मैंने पूछा।

“उसी तरह जिस तरह तुम खड़े-खड़े अपनी बहनों को चुदवाते देखते रहे और कुछ नहीं कर पाये”, प्रीती ने जवाब प्रिया।

“ठीक है! फिर मीना का चुदाई दिवस कौन सा है?”

“पाँच दिन के बाद, इस महीने की १९ तारीख को”, उसने जवाब प्रिया।

“कुछ खास वजह ये दिन तय करने का?”

“हाँ मेरे राजा! वो दिन तुम्हारे एम-डी का जन्मदिन है और मीना की कुँवारी चूत एम-डी को महेश की तरफ से जन्मदिन का तोहफ़ा होगी”, प्रीती जोर से हँसते हुए बोली।

१९ तारीख की सुबह मुझे ऑफिस में प्रीती का फोन आया, “राज! तुम साढ़े तीन बजे तक घर पहुँच जाना। मैंने मीना को यहाँ बुलाया है, वो चाहती है कि हम उसके साथ एम-डी के सूईट में जायें। मैंने एम-डी को बोल प्रिया है कि हम चार बजे पहुँच जायेंगे इंटरव्यू के लिये।”

मैं ठीक साढ़े तीन घर पहुँचा तो प्रीती और मीना को कोक पीते हुए देखा। मीना को मुँह बनाते देख मैंने पूछा, “तुम क्या पी रही हो मीना?”

“मीना जब यहाँ आयी तो कुछ नर्वस लग रही थी, इसलिये मैंने इसे कोक पीने को दे प्रिया जिससे ये कुछ शाँत हो जाये और इंटरव्यू देने में आसानी हो”, प्रीती ने शरारती मुस्कान के साथ कहा।

“तुमने ठीक किया, इससे जरूर आसानी हो जायेगी”, मैंने कहा।

“आपको ऐसा लगता है सर?” मीना ने पूछा।

“अब हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है, मीना तुम अपना कोक फिनिश कर के चलने के लिये तैयार हो जाओ, हमें देर हो रही है?” प्रीती ने बात को बदलते हुए मीना से कहा।

जब हम ठीक चार बजे एम-डी के सूईट में दाखिल हुए तो उसे हमारा इंतज़ार करते पाया, “महेश कहाँ है?”

“महेश रास्ते में हैं और थोड़ी देर में यहाँ पहुँच जायेंगे, तब तक आपको इंटरव्यू स्टार्ट कर देना चाहिये।”

इतने में मीना ने अपना सिर पकड़ते हुए कहा, “प्रीती दीदी मुझे पता नहीं क्यों चक्कर आ रहे हैं।”

प्रीती ने एम-डी को आँख मारते हुए कहा, “सर! आप इसे सोफ़े पर क्यों नहीं लिटा देते।”

एम-डी ने मीना को कंधों से पकड़ कर सोफ़े पर लिटा प्रिया और उसके मम्मों को दबाने लगा। अब वो उसकी चूत कपड़ों के ऊपर से ही सहला रहा था। जब मीना को इस बात का एहसास हुआ तो एम-डी का हाथ झटकते हुए बोली, “सर ये आप क्या कर रहे हैं?”

“तेरी कुँवारी चूत का इंटरव्यू लेने की तैयारी कर रहे हैं!” प्रीती ने हँसते हुए कहा।

“तो क्या एम-डी मुझे चोदेंगे?” मीना ने घबराते हुए पूछा।

“हाँ मीना! पहले ये तेरी कुँवारी चूत चोदेंगे और बाद में तेरी गाँड मारेंगे”, प्रीती बोली।

“क्या ये सब जरूरी है?”

“हाँ मीना, एम-डी का इंटरव्यू लेने का यही तरीका है। अब ये तुम पर निर्भर करता है। अगर तुम्हें नौकरी चाहिये तो एम-डी से चुदवाना होगा, क्या तुम्हें नौकरी नहीं चाहिये?” प्रीती बोली।

“प्रीती दीदी! मुझे नौकरी की सख्त जरूरत है”, मीना अपनी चूत को सहलाते हुए बोली। कोक ने अपना असर दिखाना शुरू कर प्रिया था।

“तो क्या तुम सहयोग देने को तैयार हो?” प्रीती ने पूछा।

“हाँ दीदी! मैं वो सब करूँगी जो मुझसे करने को कहा जायेगा”, मीना खुले आम अपनी चूत खुजलाते हुए बोली।

“सर! आप मीना को बेडरूम में ले जाइये।” प्रीती ने एम-डी से कहा, “और हाँ सर! जरा संभल कर करना, ये मेरी छोटी बहन की तरह है।” एम-डी ने सिर हिलाया और मीना को बेडरूम में ले गया।

उनके जाते ही प्रीती मुझसे बोली, “राज! जल्दी से महेश को फोन करके बोलो कि वो दस मिनट में यहाँ पहुँच जाये नहीं तो बहुत देर हो जायेगी। मैं चाहती हूँ कि वो अपनी आँखों से एम-डी को मीना की कुँवारी चूत चोदते देखे।”

मैंने महेश को फोन लगाया, “सर! राज बोल रहा हूँ!”“कहाँ हो तुम, मैं तुम्हें एक घंटे से ढूँढ रहा हूँ।”

मैंने उसकी बात काटते हुए कहा, “सर! मैं एम-डी के साथ उनके सूईट में हूँ। उनके साथ एक कुँवारी चूत भी है, आपको जल्दी से पहुँचने के लिये कहा है।”

“मुझे पहले क्यों नहीं बताया? एम-डी से कहना मैं दस मिनट में पहुँच जाऊँगा और मेरे आने से पहले वो शुरुआत ना करें”, कहकर महेश ने फोन पटक प्रिया।

“वो यहाँ दस मिनट में पहुँच जायेगा, और वो चाहता है कि एम-डी उसके आने से पहले शुरुआत नहीं करें”, मैंने कहा।“ठीक है, आने दो उसे। आओ राज! हम देखते हैं कि एम-डी क्या कर रहा है”, प्रीती ने टीवी ऑन करते हुए कहा।

हमने टीवी पर देखा कि एम-डी मीना को नंगा कर चुका था और उसे बिस्तर पर लिटा कर उसकी छातियाँ चूस रहा था। “एम-डी ने अब तक उसकी चूत क्यों नहीं फाड़ी?” मैंने पूछा।

“पता नहीं क्यों? वरना तो उसे एक मिनट का भी सब्र नहीं है।”

अब एम-डी मीना की चूत चाट रहा था। उसकी दोनों टाँगें हव में उठी हुई थी, और उसकी चूत का छेद साफ दिखायी दे रहा था। इतने में महेश सूईट में दाखिल हुआ, “एम-डी कहाँ है?”

“लो तुम खुद अपनी आँखों से देख लो?” प्रीती ने टीवी की ओर इशारा करते हुए कहा। टीवी की और देखते हुए महेश ने कहा, “मैं सोच रहा हूँ कि मैं भी बेडरूम में चला जाऊँ।”

“नहीं महेश! तुम अंदर नहीं जा सकते, एम-डी बहुत नाराज़ थे तुम्हारे देर से आने पर, इसलिये खास तौर पर बोले कि जब तक मैं ना बोलूँ, कोई अंदर नहीं आयेगा। आओ यहाँ बैठो और व्हिस्की पियो”, प्रीती ने महेश को व्हिस्की का ग्लास पकड़ाते हुए कहा। हम दोनों तो पहले से ही व्हिस्की पी रहे थे।

“मेरा नसीब! राज तुमने मुझे पहले क्यों नहीं फोन किया?” महेश झल्लाते हुए बोला।

“सर! मुझे जैसे ही कहा गया, मैंने आपको फोन किया।”

“महेश वो देखो! इस लड़की की चूत का छेद कितना छोटा है!” प्रीती ने टीवी की और इशारा करते हुए कहा।

“हाँ काफी छोटा है, पर मैं जानता हूँ ये छेद ज्यादा देर तक छोटा नहीं रहेगा”, महेश ने हँसते हुए ग्लास में से बड़ा घूँट लिया।

एम-डी अब मीना के ऊपर लेटा हुआ था और उसकी कुँवारी चूत को फाड़ने को तैयार था। “तुम्हें थोड़ा दर्द होगा संभाल लोगी ना?” एम-डी की आवाज़ आयी।

“सर! प्लीज़ धीरे-धीरे करना, मेरी चूत अभी भी कुँवारी है”, मीना ने जवाब प्रिया।

“ये… ये आवाज़…… ये आवाज़ किसकी है, मुझे कुछ जानी पहचानी लग रही है”, महेश सोफ़े पर से उछलते हुए बोला। टीवी पर अपनी नज़रें गड़ाते हुए वो जोर से चींखा, “ओह गॉड! ये तो मेरी बेटी मीना है, मुझे अभी और इसी वक्त एम-डी को रोकना होगा”, और एक ही साँस में अपना ग्लास खाली कर प्रिया। उसी वक्त एम-डी ने जोर से अपना लंड मीना की चूत में डाल प्रिया।

“ओहहह माँ… आँ मर गयी, वो जोर से चिल्लायी, बहुत दर्द हो रहा सर।”

“क्या रोकोगे?” प्रीती जोर से हँसते हुए बोली, “एम-डी का लंड मीना की चूत में घुस चुका है। महेश, अब मीना कुँवारी नहीं रही, बेहतर होगा कि चुपचाप बैठ कर देखो और व्हिस्की पियो। अपना सब कुछ तो गंवा चुके हो… अब नौकरी से भी हाथ धो बैठोगे।” प्रिती ने कहते हुए उत्तेजना में अपना व्हिस्की का ग्लास एक साँस में पी लिया।

महेश सोफ़े पर ढेर होते हुए बोला, “हे भगवान! ये क्या हो गया! अब मैं क्या करूँ! ये कैसे हो गया।”

प्रीती मजे लेते हुए महेश को और जलाने लगी, “देखो महेश! कैसे एम-डी जोर-जोर से मीना की चूत में अपना लंड डाल रहा है। तुमने देखा राज! कैसे एम-डी ने मीना की कुँवारी चूत फाड़ दी? राज! महेश को एक ग्लास व्हिस्की का और बना के दो, लगता है इसे इसकी जरूरत है”, प्रीती ने हँसते हुए कहा।

मैंने महेश को ग्लास बनाकर प्रिया। ग्लास लेते हुए महेश गुस्से में बोला, “साली कुत्तिया! मुझे मत सिखा कुँवारी चूत कैसे चोदी जाती है, मुझे मालूम है, पहले ये बता मीना यहाँ कैसे पहुँची।”

“अच्छा वो! मैं उसे नौकरी के लिये इंटरव्यू दिलवाने यहाँ लायी थी।”

“मगर एम-डी ने तो मीना को पहचान लिया होगा और उसके बावजूद एम-डी ने ये सब किया”, महेश थोड़ा शाँत होते हुए बोला।

“तो क्या हुआ? तुम्हें तो मालूम है कि हमारी कंपनी में नौकरी देने का रूल क्या है। मीना तुम्हारी बेटी है तो क्या एम-डी कंपनी के रुल बदल देते? माना एम-डी ने मीना को पहचान लिया था लेकिन कुँवारी चूत चोदने के खयाल ने ही उन्हें इतना बेचैन कर प्रिया कि वो तुम्हारे बिना ही शुरू हो गये”, प्रीती खिल खिलाते हुए बोली। वो शराब के नशे और खुशी से सातवें आसमान पर थी।

“ओह गॉड! मैं क्या करूँ? उसकी माँ को मैं क्या जवाब दूँगा?” महेश ने अपना सिर दोनों हाथों से पकड़ लिया।

“अब तुम्हें सब याद आ रहा है! जब तुम्हारा कोई अपना तुम्हारे इस गंदे खेल में फँस गया।”“इसका मतलब तुमने ये सब जानबूझ कर किया?” महेश ने पूछा।“हाँ! तुम क्या समझते हो?” प्रीती ने जवाब प्रिया।“पर क्यों? प्रीती! मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो तुमने मुझे ऐसी सज़ा दी?” महेश की आँखों से आँसू बह रह थे।

“कितने हरामी आदमी हो तुम। कितनी जल्दी सब भूल जाते हो। क्या तुम्हें याद नहीं कि किस तरह तुमने मेरे पति को ब्लैकमेल किया, रिशवत का लालच प्रिया, जिससे तुम मुझे चोद सको? हाँ महेश! ये मेरा बदला था तुम्हारे साथ। तुम्हारी वजह से मैं एक पतिव्रता औरत से एक  ऐय्याश, सिगरेट-शराब पीने वाली वेश्या बन गयी”, प्रीती ने जवाब प्रिया।

“हे भगवान! मैंने अपने आप को किस मुसीबत में फँसा लिया है।”

“महेश देखो! मीना के चूतड़ कैसे उछल-उछल कर साथ दे रहे हैं, लगता है उसे अपनी पहली चुदाई में कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा है”, प्रीती ने टीवी की तरफ इशारा करते हुए कहा। बदले में महेश ने व्हिस्की की बॉटल उठा ली और नीट पे नीट पीने लगा।

“ओहहह सर! अच्छा लग रहा है”, मीना सिसकरी भर रही थी, “हाँ सर! ऐसे ही करते जाइये, और तेजी से ओहहह आआआहहह हाँ!!! और तेजी से सर! मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है।”

“चूत में खुजली हो रही है? तुमने इस लड़की के साथ क्या किया?” महेश जोर से चिल्लाया।

“वही जो तुमने मेरे साथ किया था”, प्रीती ने जवाब प्रिया, “मैंने तुम्हारा वो स्पेशल दवाई मिला हुआ कोक इसे इतना पिला प्रिया है कि ये सारी रात दस-दस मर्दों से भी चुदवा लेगी तो इसकी चूत की खुजली नहीं मिटेगी।”

इससे पहले कि महेश कुछ कहता मीना जोर से चिल्लायी, “ओह सर!!!! जोर से, हाँ और जोर से हाँआंआंआंआं इसी तरह करते रहो… ऊऊऊऊईई माँआंआंआं! हाँआंआं सर!! लगता है मेरा छूट रहा है।”

महेश ने दोनों हाथों से अपने कान बंद कर लिये। प्रीती जोरों से हँस रही थी। इतने में ही एम-डी भी चिल्लाया “हाआआआ ये ले… और ले…” और अपना पानी मीना की कुँवारी चूत में छोड़ प्रिया। अब दोनों अपनी साँसें संभालने में लगे थे।

कमरे में एक दम खामोशी छायी हुई थी। महेश ड्रिंक पर ड्रिंक ले रहा था। प्रीती भी ड्रिंक पीते हुए ना जाने किस सोच में डूबी हुई थी कि इतने में एम-डी की आवाज़ सुनाई दी, “मीना! अब तुम घोड़ी बन जाओ! मैं तुम्हारी गाँड में अपना लंड डालुँगा।” मीना एम-डी की बात मानते हुए घोड़ी बन गयी।

महेश ने चौंक कर टीवी स्क्रीन की ओर देखा और जोर से चिल्लाया, “नहीं!!! अब ये उसकी गाँड भी मारेगा?”

“मीना तुम्हें पता है? महेश हमेशा मुझसे कहता था कि सर आपको कुँवारी गाँड मारना नहीं आता, आज मैं उसकी बेटी की कुँवारी गाँड मार कर सिखाऊँगा, क्या कहती हो?” कहकर एम-डी ने अपना खड़ा लंड उसकी गाँड के छेद पर रख प्रिया।

“आप जैसा कहें सर! मेरा जिस्म आपके हवाले है”, मीना ना जवाब प्रिया।

“नहीं सर प्लीज़ नहीं! मेरी बेटी के साथ ऐसा ना करें… ओह राज! तुम कुछ करो ना प्लीज़!!” महेश मुझसे गिड़गिड़ाते हुए बोला।

“क्यों अब क्या हो गया? याद है, तुमने मुझे बताया था कि गाँड कैसे मारी जाती है। क्या तुम मेरी बहन मंजू को भूल गये… जब उसने धीरे से डालने को कहा था! तब तुमने एक ही धक्के में अपना लंड उसकी गाँड में डाल कर उसकी गाँड फाड़ दी थी। अब तुम्हारी बेटी की बारी आयी तो चिल्ला रहे हो।”

“राज तुम भी मेरे खिलाफ़ हो रहे हो?” महेश रोते हुए बोला।

उसी समय एम-डी ने जोर से अपना लंड मीना की गाँड में घुसा प्रिया और मीना के मुँह जोर से दर्द भरी चींख निकल गयी, “ऊऊऊईईई माँ मर गयीईईईई, निकालो अपना लौड़ा मेरी गाँड में से.. निकालो! मेरी गाँड फट रही है… बहुत दर्द हो रहा है।”

उसकी चींखों की परवाह ना करते हुए एम-डी अब और तेजी से अपने लंड को उसकी गाँड के अंदर बाहर कर रहा था और मीना रो रही थी। “ओह गॉड! मेरी ”, महेश अब और तेजी से ड्रिंक कर रहा था।

मैं और प्रीती महेश को तड़पता हुआ देख रहे थे। उसी समय एम-डी नंगा ही कमरे में आ गया। प्रीती ने जल्दी से टीवी ऑफ कर प्रिया।

“गुड प्रीती, मज़ा आ गया!” उसने कहा और जब महेश को देखा तो बोला, “महेश! मेरे दोस्त! तुम शानदार दोस्त हो। मीना कमाल की लड़की है। उसकी चूत इतनी टाइट है कि मैं क्या कहूँ! ठीक उस कॉलेज की लड़की की चूत की तरह जिसे हमने कल चोदा था। मुझे नहीं मालूम था कि तुम मेरा इतना खयाल रखते हो।”

“म…म… म…मैं”, महेश ने हकलाते हुए कहा।

“तुम्हें कुछ कहने की जरूरत नहीं है! मुझे प्रीती ने सब बता प्रिया है”, एम-डी ने कहा।

“क्या प्रीती ने सब बता प्रिया?” महेश ने चौंकते हुए स्वर में कहा।

“हाँ मेरे दोस्त! उसने मुझे बताया कि किस तरह तुम कई दिनों से किसी कोरी चूत की तलाश में थे जिसे तुम मेरे जन्मदिन पर तोहफ़ा दे सको और जब तुम्हें कोई नहीं मिला तो अपनी ही बेटी को ये कहकर भेज प्रिया कि उसका इंटरव्यू है। तुम बहुत समझदार हो महेश”, एम-डी ने कहा, “महेश! उठो, मीना तुम्हारा इंतज़ार कर रही है, जाओ और मजे लो।”

“प्लीज़ सर! महेश को ऐसा करने को कह कर शर्मिंदा ना करें, आखिर में वो इसकी बेटी है”, मैंने धीरे से एम-डी से कहा।

“तुम नहीं जानते राज! महेश के लिये चूत, चूत है! वो चाहे जिसकी हो। हाँ, एक आम आदमी मेरी और तुम्हारी तरह शायद शर्म से मर जाये, पर महेश नहीं! इसने मुझे एक बार बताया था कि किस तरह इसने अपनी दो बहनों को चोदा था और तब तक चोदता रहा जब तक उनकी शादी नहीं हो गयी।” एम-डी ने हँसते हुए कहा और महेश से बोला, “उठो महेश! क्या सोच रहो हो? एक बहुत ही कसी और शानदार चूत तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।”

“अभी नहीं! शायद बाद में”, महेश बड़बड़ाया।

“राज! जाके देखो तो मीना क्या कर रही है?”

मैं मीना को देखने बेडरूम में गया और थोड़ी देर बाद उसे साथ ले कर कमरे में आया। अपने पिताजी को देख कर मीना अपना नंगा बदन ढाँपने लगी और मेरे पीछे छुप कर अपनी चूत छुपानी चाही।

“मीना! तुम्हें अपनी चूत अपने डैडी से छुपाने की जरूरत नहीं है। अगर ये तुम्हें चोदना नहीं चाहता तो कम से कम इसे तुम्हारी चूत तो देखने दो”, एम-डी ने उसे अपने पास खींचते हुए कहा, “क्या अब भी तुम्हारी चूत में खुजली हो रही है?”

“हाँ सर! बहुत जोरों से हो रही है”, मीना ने कहा।

“शायद ये दूर कर दे”, कहकर एम-डी ने सोफ़े पर बैठ कर मीना का अपनी गोद में बिठा लिया और अपना लंड नीचे से उसकी चूत में घुसा प्रिया।

“अब तुम ऊपर नीचे हो और चोदो”, एम-डी ने मीना से कहा।

मीना उछल-उछल कर एम-डी के लंड पर धक्के मारने लगी।

“राज! तुम वहाँ अपना खड़ा लंड लिये क्या कर रहे हो? यहाँ आओ और अपना लंड इसे चूसने को दे दो।” मैंने अपने कपड़े उतार कर अपना लंड मीना के मुँह में दे प्रिया। महेश चुपचाप सब देखता रहा और, और ज्यादा व्हिस्की पीने लगा। प्रीती भी काफी उतीजित हो गयी थी और दूसरे सोफ़े पर बैठी, अपनी साड़ी ऊपर उठा कर अपनी चूत रगड़ रही थी और सिसकारियाँ भर रही थी।

कमरे में हम चारों कि सिसकरियाँ सुनाई दे रही थी। मीना को भी खूब मज़ा आ रहा था और वो और तेजी से उछल रही थी। “और जोर से उछलो”, एम-डी ने कहा, “हाँ ऐसे ही अच्छा लग रहा, शायद मेरा छूटने वाला है, तुम्हारा क्या हाल है राज?”

“बहुत अच्छा सर! मैं भी ज्यादा दूर नहीं हूँ”, कहकर मैंने मीना का सिर पकड़ कर अपने लंड को और उसके गले तक डाल प्रिया।

“मीना राज का पानी पीना मत भूलना! तुझे अच्छा लगेगा”, एम-डी ने कहा।

“ओहहहह मीना!! और तेजी से… मेरा छूटने वाला है”, कहकर एम-डी ने अपना सारा वीर्य मीना की चूत में उढ़ेल प्रिया।

मैं भी कस कर उसके मुँह को चोदने लगा। मीना तेजी से मेरे लंड को चूसे जा रही थी। “हाँआँआँ चूस… और जोर से चूस!” और मेरे लंड ने मीना के मुँह में पिचकारी छोड़ दी। मीना भी एक-एक बूँद पी गयी और अपने होंठों पे ज़ुबान फिरा कर मेरे लंड को चाटने लगी।

“मीना! कपड़े पहनो और चलो यहाँ से?” महेश ने नशीली आवाज़ में कहा।

“महेश सुनो! यहाँ रुको और मज़े लो, अगर मज़ा नहीं लेना है तो घर जाओ! मीना कहीं नहीं जायेगी, अभी मेरा दिल इसे चोदने से भरा नहीं है”, एम-डी ने कहा।

“हाँ पापा! आप घर जाइये! मैं यहीं रुकना चाहती हूँ, मेरी चूत में अभी भी खुजली हो रही है”, मीना ने एम-डी के मुर्झाये लंड को चूमते हुए कहा।

“राज! महेश अकेले जाने की स्तिथी में नहीं है। तुम इसे मेरी गाड़ी में बिठा कर आओ और ड्राईवर से कहना कि इसे घर छोड़ कर आये”, एम-डी ने कहा।

मैं महेश को सहारा देकर गाड़ी में बिठाने चला गया। जब वापस आया तो देखा कि एम-डी कस-कस कर मीना को चोद रहा था। प्रीती भी अब बिल्कुल नंगी थी और मीना के चेहरे पर अपनी चूत दबा कर बैठी थी और उससे अपनी चूत चटवा रही थी। उस रात हम दोनोंने कई बार मीना को चोदा और उसकी गाँड मारी। प्रीती ने भी एम-डी से एक-बार चुदवाया। रात को दो बजे मैं, मीना को उसके घर छोड़ते हुए नशे में चूर प्रीती को लेकर घर पहुँचा।

“राज उठो!” सुबह-सुबह प्रीती मुझे जोरों से हिलाते हुए बोली।“प्लीज़ सोने दो! अभी बहुत सुबह है”, कहकर मैं करवट बदल कर सो गया।“राज सुनो! मीना का फोन आया था, महेश रात से घर नहीं पहुँचा है, वो बहुत घबरायी हुई थी।” प्रीती मुझे फिर उठाते हुए बोली।

मैं भी घबराकर उठा, “ये कैसे हो सकता है, मैंने खुद उसे गाड़ी में बिठाया था।”

एक घंटे के बाद हमें खबर मिली कि महेश की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी है।

दूसरे दिन ऑफिस में हम सभी ने मिलकर महेश की मौत का शोक मनाया। सभी को इस बात का दुख था।

एम-डी ने मुझे अपने केबिन में बुलाकर कहा, “राज! तुम जानते हो कि महेश अब नहीं है, सो मैं चाहता हूँ कि आज से उसकी जगह तुम ले लो।”

“थैंक यू सर”, मैंने कहा।

“और हाँ राज! मैंने मीना को भी नौकरी दे दी है। कल से वो तुम्हें रिपोर्ट करेगी। राज! मैं चाहता हूँ कि तुम उसका खयाल रखो और उसे बड़े कामों के लिये तैयार करो। आखिर वो हमारे पुराने दोस्त की बेटी है। पर इसका मतलब ये नहीं है कि हम उसकी टाइट चूत का मज़ा नहीं लेंगे”, एम-डी ने हँसते हुए कहा।

“हाँ सर! पर आप उसकी कसी-कसी गाँड मत भूलियेगा”, मैंने भी हँसते हुए जवाब प्रिया।

रात को घर पहुँच कर मैंने प्रीती को सब बताया। मेरी तरक्की की बात सुन वो बहुत खुश हो गयी और हमने स्कॉच की नयी बोतल खोल कर सेलीब्रेट किया। फिर प्रीती मुझे बाँहों में पकड़ कर चूमने लगी। मैं भी उसे चूमने लगा और अपनी जीभ उसके मुँह में दे दी। मेरे दोनों हाथ उसके शरीर को सहला रहे थे।

मैंने धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिये। उसके मम्मों को देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया और मैं उसके निप्पल को मुँह में ले कर चूसने लगा।

प्रीती ने भी मेरे कपड़े उतार दिये और अपने हाथों से मेरे लंड को सहलाने लगी। मैंने उसे गोद में उठाया और बिस्तर पे लिटा कर अपना लंड उसकी चूत में घुसा प्रिया।

“ऊऊहहह राज!!!” उसने मुझे बाँहों में भींचते हुए कहा, “तुम्हें क्या पता तुम्हारे मोटे और लंबे लंड के बिना मैंने आज पूरा दिन कैसे गुज़ारा है।” कहकर वो भी कमर उछालने लग गयी। थोड़ी ही देर में हम दोनों झड़ गये।

दूसरे दिन मैं ऑफिस पहुँचा तो मीना को मेरा इंतज़ार करते हुए पाया, “आओ मीना! मैं तुम्हें तुम्हारा काम समझा दूँ”, मीना मेरे पीछे मेरे केबिन में आ गयी।

“मीना! तुम्हारा पहला और इंपोर्टेंट काम समझा दूँ! अपने कपड़े उतार कर सोफ़े पेर लेट जाओ।”“पर सर! उस दिन तो आपने और एम-डी ने मेरा इंटरव्यू अच्छी तरह से लिया था”, मीना ने शर्माते हुए कहा।“मेरी जान! वो तो शुरुआत थी! इस कंपनी में ये इंटरव्यू रोज़ लिया जाता है, चलो जल्दी करो, मेरे पास समय नहीं है”, मैंने कहा।

मीना शर्माते हुए अपने कपड़े उतारने लगी। मीना वाकय में बहुत सुंदर थी, उसके नंगे बदन दो देख कर मैंने कहा, “मीना! कल ऑफिस आओ तो तुम्हारी चूत पर एक भी बल नहीं होना चाहिये, एम-डी को भी बिना झाँटों की चूत अच्छी लगती है।” फिर मैंने उसके गोरे पैरों में ढाई-तीन इंच उँची हील के सैंडल देख कर कहा, “हाँ! और इस ऑफिस में काम करने वाली हर औरत को कम से कम चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहनना जरूरी है और चुदाई के समय इन्हें कभी मत उतारना।” फिर अगले एक घंटे तक मैं उसके हर छेद का मज़ा लेता रहा।

उस दिन से एम-डी मीना को सुबह चोदता था और मैं शाम को मीना की चूत अपने पानी से भर देता था। मेरी तीनों एसिस्टेंट्स को ये अच्छा नहीं लगा और वो मीना को सताने लगी।

एक दिन मैंने उन तीनों को अपने केबिन में बुलाया और पूछा, “तुम लोग मीना को क्यों सताते हो?”

“जबसे वो आयी है, तुम हमें नज़र अंदाज़ कर रहे हो”, शबनम ने कहा।

“आज कल तुम ज्यादा समय उसके साथ गुजारते हो”, समीना ने शिकायत की।

“या तो उसे नौकरी से निकाल दो, या उसे किसी और डिपार्टमेंट में ट्राँसफर कर दो”, गीता ने कहा।

“तुम तीनों सुनो! ना तो मैं उसे ट्राँसफर करूँगा ना मैं उसे नौकरी से निकालूँगा, आया समझ में?”

मेरी बात सुन तीनों सोच में पड़ गयीं। “तो फिर हमारा क्या होगा, हम तुम्हारे लंड के बिना कैसे रहें?” शबनम ने कहा।

“इसका एक उपाय है मेरे पास”, मैंने मीना को अपने केबिन में बुलाया।

“तुम तीनों इसके कपड़े उतारो! आज मैं तुम चारों को साथ में चोदूँगा, जिससे किसी को शिकायत ना हो।”

तीनों ने मिलकर मीना को नंगा कर प्रिया। मीना के नंगे बदन को देख शबनम बोली, “राज! मीना बेहद खूबसूरत है।”

“हाँ! इसके भरे भरे मम्मे तो देखो… और इसकी चिकनी चूत को! इसलिये राज इसकी चूत को ज्यादा चोदता है… हमें नहीं”, समीना बोली।

“तो क्या तुम इन तीनों को भी चोदते हो?” मीना ने सवाल किया।

“हाँ! सिर्फ तीनों को ही नहीं मेर जान! बल्कि इस कंपनी की हर लड़की या औरत को चोदता है”, कहकर गीता उसके बदन को सहलाने लगी।

चलो तुम सब अपने कपड़े उतारो और मीना का हमारे बीच स्वगत करो, मैंने चारों को साइड-बाय-साइड सोफ़े पर लिटा प्रिया और खुद भी कपड़े उतार कर नंगा हो गया। मैं अपने लंड से बारी-बारी चारों को चोदने लगा। तीन चार धक्के लगा कर दूसरी चूत में लंड डाल देता और फिर दूसरी चूत में। वो भी एक-दूसरे की चूचियाँ सहलाती और एक दूसरे के होंठ चूमती। इसी तरह मेरा लंड तीन बार झड़ा।

प्रीती बहुत खुश थी और वो अब एम-डी से बदला लेने का प्लैन बना रही थी।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

राज सेक्सी बॉय

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

रॉकी

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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